Friday, 27 October 2017

(SYL link canal dispute in Hindi) SYL सतलुज यमना लिंक विवाद

           
दोस्तों आप ने SYL link canal dispute के बारे में सुना होगा , पंजाब में चुनाव से पहले यह मुद्दा बहुत उठा था जिस को लेकर काफी राजनीति वी हुई । आज हम SYL link canal dispute के बारे में जाने गे के यह विवाद कहा से शुरू हुआ , इस को लेकर आजतक किया कुछ हुआ है और इस का seloution क्या है ।
दोस्तों बात शुरू होती है 1955 जब देश में अलग अलग राजो का निर्माण किया गिया जिस को ले कर केंदर सरकार ने एक मीटिंग रखी जिस में रावी और बिआस के पानी को calculate किया गिया जो के 15.85 मिलियन एकर फीट था जिस को राजस्थान , पंजाब और जम्मू कश्मीर में बांटना था उस समय पंजाब और हरयाणा एक ही थे ।
इस पानी में से 8 मिलियन एकर फीट दिया गिया राजस्थान को , 7.2 दिया गिया पंजाब को और 0.65 दिया गिया जम्मू और कश्मीर को ,
उस के बाद 1966 में पंजाब और हरयाना को अलग अलग कर दिया गिया जिस में जमीन के साथ साथ पानी को वी दो हिस्सों में बाटना था 1981 में जब कांग्रेस की सरकार थी तब एक water sharing agreement सैन किया गिया जिस में से 3.6 मिलियन एकर फीट पंजाब और 3.6 हरयाणा को देना था , जिस के लिए एक नहर का निर्माण करना था जो दोनों सतलुज और यमना में से निकाली जानी थी जो के कुल 214 किल्लोमीटर लम्बी बननी थी जिस में से 122 किल्लोमीटर पंजाब और 92 किलोमीटर हरयाणा में आती थी इस agreement में यह कहा गिया जो हिस्सा पंजाब में है उस का निर्माण पंजाब करेगा और हरयाणा में है वोह हिस्से का निर्माण हरयाणा करेगा जिस में से हरयाणा ने अपना निर्माण पूरा कर लिया और पंजाब में इस पे विवाद होने लगा।

अब आते हैं के पंजाब ने इस का विरोध क्यों किआ पंजाब ने इस तर्क पर विरोध किया क्यों की जब इस पानी को बांटा गिया था उस वक़्त पंजाब में खेतीबाड़ी इतनी अछे नहीं थी क्यों की उस समय अछे बीज और खाद वगेरा नहीं थी जिस के कारण पंजाब की काफी जमीन बंजर पड़ी थी मगर अब हरी क्रांति आने के कारण पंजाब ने खेती योग जमीन बढ़ गई है जिस के कारण अब पंजाब में पानी की ज्यादा जरूरत है जिस के कारण पंजाब यह पानी किसी को नहीं दे सकता ।

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जिस के चलते पंजाब ने जो सतलुज यमना लिंक पंजाब में बन रही थी उस को रोक दिया ,  जिस को लेकर हरयाणा 2002 में सुप्रीमकोर्ट चला गिया , जिस के बाद सुप्रीमकोर्ट ने पंजाब को कामी ज़ारी रखने को कहा और एक साल में काम पूरा करके देने को कहा ।
इस के बाद 2004 में पंजाब सरकार ने एक एक्ट पास किया जिस को Punjab Termination agreement act 2004 का नाम दिया गिया जिस के अन्तरगत अब SYL link canal अब नहीं बनेगी , इस एक्ट के बाद केंदर सरकार ने सुप्रीमकोर्ट के पास अर्जी लिखी जिस में यह पुछा गिया के राज सरकार दुवारा पास किया गिया यह एक्ट वैलेड है जा नहीं जिस को ले कर सुप्र्म्कोर्ट ने पंजाब को कंस्ट्रक्शन्स का काम जारी रखने को कहा और पंजाब सरकार दुवारा पास किए गए एक्ट 2004 को invaled करार दे दिया , उस के कई साल बाद यह मुद्दा दबा रहा मगर 2016 में जब पंजाब में चुनाव होने थे तो यह मुद्दा फिर उठा जिस को लेकर अकाली सरकार ने एक और बिल पास किआ जिस का नाम Rehabilitaion and Re vesting of proprietary Rights bill 2016 था , जिस में यह कहा गिया के जो जमीन नहर के निर्माण के लिए ली गई थी अब उस को वापस उन लोगो को दी जाएगी

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जिस के बाद अभी कुछ समय पहले सुप्रीमकोर्ट का यह फैसला आया है के यह बिल जो पंजाब की असेंबली ने पास किया है यह सविधान के Artical 246(1) को वेल्ड करता है जिस में यह कहा गिया है के अगर दो राजो के बीच कोई विवाद है तो उस के parliment कानून बनाएगी इस में राज की असेंबली को कानून बनाने का अधिकार नहीं है और दूसरा कारण सुप्रीमकोर्ट ने यह बताया के जो बिल 2016  पंजाब सर्कार ने बनाया है वोह Punjab Reorganisation Act 1966 के उल्ट है जिस में पंजाब और हरयाणा का विभाजन हुआ था इस के साथ ही यह Inter-State water act 1956 के वी खिलाफ जाता है जिस के कारण  Rehabilitaion and Re vesting of proprietary Rights bill 2016 को unvailed करार दिया गिया और सुप्रीमकोर्ट ने यह फैसला किया के अगर पंजाब इस नहर का निर्माण नहीं करता तो कोर्ट सविधानिक शक्ति के साथ इस का निर्माण पूरा करा सकता है ।

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दोस्तों इस विवाद का seloution है के दोनों राज अपने अपने agro climatic zone के हिसाब से फसल उगानी होगी मतलब के जो फसल आपके जमीन पर कम पानी के साथ हो सकती है और दूसरा के केंदर सरकार इस मामले में दोनों  को एक साथ बेठा कर मामले को शांत करे जिस को ज्यादा जरूरत है उस को थोडा ज्यादा और जिस को कम जरूरत है उस को थोडा कम करके विवाद हो सुलझा देने चहिए।


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