Thursday, 16 November 2017

Bhopal gas tragedy(History) in hindi( भोपाल गेस कांड )

                                                                                   
  Bhopal gas history : 2 दिसम्बर 1984 को मध्य प्रदेश के ' भोपाल ' शहर में एक बहुत ही मंदभागी घटना हुई। जिस को ' भोपाल गैस त्रासदी ' के नाम से वी जाना जाता है। यह घटना पूरे भारत में अबतक की सब से बड़ी घटना है जहाँ एक साथ इतने लोगो की जान गई। भोपाल गैस कांड पर सरकारी दस्तवेज और अलग अलग टीवी और अखबारों के अलग अलग मत हैं , सरकारी दस्तावेजो के अनुसार इस त्रासदी में मरने वालो की गिनती सब से पहले 2200 बताई गई , मगर बाद में मध्य प्रदेश की सरकार की एक रिपोर्ट में यह गिनती 3700 बताई गई। मगर इस के इलावा कई और विभिन स्रोतों में बताया गया है के 8000 के करीब मौते तो पहले 2 सप्ताह में ही हो गई थी । उस के बाद कई बीमारियो के चलते 8000 मौते बाद में हुई। मध्य प्रदेश की सरकार ने इस बात को माना है के इस गैस कांड में कुल 5 लाख लोग प्रभावित हुए हैं । भोपाल गैस कांड अबतक की सब से बड़ी उदजोगिक घटना है । 

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Bhopal Gass Tregedy accident: 1969 में भोपाल में एक कारखाना लगाया गया जिस का नाम Union Carbide Plant Bhopal था। जहाँ पर मिथाइल आइसोसाइनाइट ( Methyl Icosyanate ) नाम का पदार्थ बनता था । जो के कीटनाशक बनाने के लिए बनाया जाता ता। 


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सुरक्षा में कमी : नवम्बर 1984 को कारखाने में सुरक्षा के इंतजाम काफी कम थे , वहां पर लगे सभी मैनुअल अंग्रेजी में थे मगर वहां पर काम करने वाले कर्मचारियो को अंग्रेजी का इतना ज्ञान नहीं था। वहां पर लगे हवा के वेंट जिस से पाइपो की सफाई की जाती थी वह पूरी तरह से काम नहीं करते थे। टैंक नम्बर 610 में काफी मात्रा में गैस इकठी हो गई थी , इस मिथाइल आइसोसाइनाइट गैस को कम तापमान पर रखा जाता है , मगर पावर का खर्च कम करने के लिए गैस को ठंडा करने वाले फ्रीजिंग प्लांट वी बन्द पढ़े थे जिस के कारण टैंक का तापमान बढ़ गया । 2 और 3 दिसम्बर की रात मिथाइल आइसोसाइनाइट नाम का विषैला पदार्थ एक पानी के रूप में बहार आने लगा जिस के कारण 50 मिनट में ही लगभग 30 मेट्रिक टन गैस बाहर वातावरण में प्रवेश कर गई।


मानुषी शरीर पर भार्वब (bhopal gas tragedy effects)  : MIC नाम की गैस के लीक होने के बाद वहां एक बादल बन गया जो के हवा के बहाव के कारण शहर की ओर चल  पढ़ा। जिस से इस का सब से पहले पर्भाव 14 साल के कम उम्र के बच्चों और गर्ववती महलाओं के ऊपर देखने को मिला। जिस के कारण आँखों में जलन, उलटी, सांस लेने में दिक्कत आने लगी , थोड़ी ही देर में इस गैस ने 2200 लोगो को चपेट में ले लिया। 
जिस के बाद भोपाल में कई साल तक इस गैस का प्रभाव देखने को मिला जिस के चलते अपंग बच्चे पैदा हुए , 1988 में सरकार ने भोपाल मेमोरियल हस्पताल एवं रिसर्च सेंटर खोला, जहाँ पर सभी को निशुल्क इलाज किया जाता था। 

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इस कांड के 2 दिन बाद ही सरकार ने राहत कार्य शुरू कर दिया , मध्य प्रदेश की सरकार ने इस त्रासदी से निपटने के लिए 1 लाख 40 हज़ार डॉलर की राशि पीड़तों के इलाज और पुनर्वास के लिए खर्च की ।
इस त्रासदी के 4 दिन बाद यूनियन कार्बाइड के अधयक्ष औए सी इ ओ वारेन एंडरसन के खिलाफ मामला दर्ज कर गिरफ्तार किया गया। मगर 3 घंटे बाद ही उनेह 2200 डॉलर जुरमाना दे कर मुकत कर दिया गया।

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