Sunday, 21 January 2018

Biography of Arunachalam Muruganantham in Hindi ( Story of Real Padman)

Biography of Arunachalam Muruganantham : आरुणाचलम मुरुर्गनंथम भारत के एक जाने माने समाज सेवक हैं , जिनों ने एक ऐसे विषे पर काम किया है जिस के बारे में लोग बात करने से वी कतराते हैं।

मुरुगनंथम्म ने कम कीमत में सैनेट्री पैड बनाने वाली मशीन बना कर भारत ही नहीं  बल्कि पूरे विशव में नाम कमाया। उन की मशीन दुवारा बनाए गए पैड दुसरे बाजार में मिलने वाले पैड के मुकाबले 3 गुना सस्ते होते हैं। उन की यह मशीने पूरे भारत में अबतक 28 राजो में लग चुकी हैं। किसी वी अछे कॉलेज की डिग्री ना होने के बावजूद जो काम अरुणाचलम मुरुगनाथम ने कर दिखाया वह बाकि ही काबिलेतारीफ है। मुरुगनाथम ने महलाओं को पीरियड्स में होने वाली प्रॉब्लम के लिए कम दाम पर पैड उपलब्ध कराए । जिस के लिए उनेह 2016 में भारत सरकार की तरफ से उनेह पदम् श्री पुरस्कार से वी निवाजा जा चूका है।
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     दोस्तों मुरुगनाथम ने एक ऐसी मुश्किल का हल ढूंढ़ निकाला जो काफी समय से भारत में चल रही थी, जिस के कारण महलाओं को काफी बीमारियो का सामना करना पढता था। तो चलिए दोस्तों अरुणाचलम मुरुगनाथम की इस कहानी को हम शुरू से जानते हैं ।

Real Story of Padman :  मुरुगनाथम का जनम 1966 में तमिलनाडु में हुआ था। छोटी ही उम्र में मुरुगनाथम के पिता का एक सड़क हादसे में दिहान्त हो गया। जिस के कारण घर की हालात बहुत खराब हो गए और उन का बचपन बहुत ही गरीबी में बीता। 14 साल की उम्र में घर की गरीबी के कारण मुरुगनाथम को पढाई छोड़नी पड़ी और वह खेतो में मजदूरी और वेल्डिंग का काम करने लगे , जिस के कारण अब घर के हालात काफी ठीक हो चुके थे। 

पैड बनाने का आईडिया : 1998 में उन की शादी शांति नाम की लड़की से हुई , एक दिन मुरुगनाथम ने अपनी पत्नी को एक बहुत ही गन्दा कपडा हाथ में लेजाते देखा , जिस को उस की पत्नी periouds में इस्तमाल करती थी , मुरुगनाथम ने एक इंटरव्यू में बताया के वह कपडा इतना गन्दा था के उस से वह अपनी बाइक वी साफ़ न करें ।
मुरुगनाथम ने अपनी पत्नी को कहा के वह Periouds में पैड का इस्तेमाल क्यों नहीं करती तो उन की पत्नी ने कहा के जा तो वोह घर के लिए दूध खरीद सकती है जा फिर इतने पैसो में Sanetery Pad । क्यों की उस समय इन पैड की कीमत बहुत ज्यादा थी। 

real padman documentary
  
फिर एक दिन मुरुगनाथम अपनी पत्नी को खुश करने के लिए बाजार से पैड खरीदने गए तो उनोह ने देखा के पैड की कीमत बहुत ज्यादा थी । जब उनोह ने पैड को हाथ में पकड़ के देखा तो उनोह ने अंदाज़ा लगाया के इन पैड को सिर्फ 10 पैसो में तैयार किया जा सकता है मगर उन की कीमत उस से 40 गुना ज्यादा थी।
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  जो मुश्किल Periouds में उन की पत्नी को होती है वही मुश्किल न जाने कितनी महलाओं को होती होगी ।
वही से मुरुगनाथम ने कम कीमत में अच्छे पैड बनाने का बीड़ा उठाया । पहले वह उन पैड की जाँच अपनी पत्नी से कराते थे। मगर कुछ समय बाद उन की पत्नी ने उन के इस काम के लिए इनकार कर दिया। उस के बाद वह पैड की जांच मेडिकल कॉलेज की लड़कियो से कराने लगे। मगर उस समय कोई वी लड़की इस विषय पर खुल के बात नहीं करना चाहती थी । जिस के कारण उन लड़कियो ने वी मुरुगनाथम को ज्यादा मदद न की। मुरुगनाथम उस समय एक ऐसी क्रन्तिकारी विचारधारा पे काम कर रहे थे जब भारत में सेक्स और Periouds का नाम लेना वी अच्छा नहीं समझा जाता था। 

उस के बाद मुरुगनाथम ने खुद पर ही इस्तमाल करके पैड की जाँच करने का फैसला किया। जिस के लिए उनोह ने एक ब्लेडर में जानवर का खून लिए और एक पाइप से वह खून पैड के ऊपर गिरता । जब वह साइकिल चलाते तो झटके से वह खून ज्यादा गिरने लगता , जिस से पैड अपना असली रूप खोह देता और जगह से हट जाता।
2 साल की मेहनत के बाद मुरुगनाथम को पता चला के जो पैड बाजार में उपलब्ध हैं उन में फाइवर का इस्तेमाल होता है, जिस के बाद मुरुगनाथम ने एक ऐसा पैड बना लिया को बहुत ही टिकाऊ था।
  मुरुगनाथम का यह रिसर्च तो पूरा हो चूका था मगर उस के साहमने बड़ी मुश्किल तब आई जब उनेह पता चला के पद बनाने के लिए जो मशीन इस्तमाल होती हैं उन की कीमत 3.5 करोड़ है । जो के मुरुगनाथम के लिए बहुत बड़ी रकम थी। मगर उस ने होंसला नहीं छोड़ा और थोड़े ही समय में एक ऐसी मशीन बना डाली जो इन पैड को बना सकती थी और उस की कीमत सिर्फ 65000 थी और इस मशीन को कोई वी चला सकता था। 


   दोस्तों मुरुगनाथम की इस मेहनत से ही आज लड़कियों के Periouds में वरते जाने वाले पैड इतने सस्ते में मिलने लगे और जिस के चलते दूसरी वडी कंपनीयो को वी Sanetery Pad की कीमत कम करनी पड़ी।
मशीन के कामज़ाब होने के बाद बहुत सारे लोगो ने मुरुगनाथम को मशीन को कमर्सलाइजे करके वेचने का वी सुझाब दिया । मगर मुरहनाथम्म ने ऐसा नहीं किया और सभी ऑफर की ठुकरा दिया। 

आज अरुणाचलम मुरुगनाथम की ज़िन्दगी पर अक्षय कुमार की एक मूवी वी बन चुकी है। उन की इस मेहनत ना सिर्फ महलाओं की ज़िंदगी में बड़ा बदलाव लाया उस के साथ ही महलाओं को पैसे कमाने का जरिया वी मिल गया। हम सब को गर्व है हमारे देश के इस Real Padman of India पर। 

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