Thursday, 14 March 2019

5 all-time IPL records that are unlikely to be broken (IPL के 5 रिकॉर्ड जो कभी नहीं टूटेंगे )

5 all-time IPL records that are unlikely to be broken (IPL के 5 रिकॉर्ड जो कभी नहीं टूटेंगे )

आईपीएल भारत का एक बहुत ही हरमन प्यारा खेल है।  इसे क्रिकेट का एक महाकुम्भ भी कहा जाता है।  जब यह टूर्नामेंट भारत में आजोजन किया जाता है तो पूरे वर्ल्ड से क्रिकेट के बड़े बड़े नाम इस टूर्नमेंट में शामिल होते हैं।  इस टूर्नामेंट में हर साल कई नए नए रिकॉर्ड बनते हैं।  आज हम इस लेख में उन्ही पांच रिकॉर्ड के बारे में बात करेंगे जो क्रिकेट की दुनिया में पहली वार बने है और आने वाले समय में उन का टूट पाना बहुत ही मुश्किल है।  
5 all-time IPL records that are unlikely to be broken (IPL के 5 रिकॉर्ड जो कभी नहीं टूटेंगे )
5 all-time IPL records that are unlikely to be broken (IPL के 5 रिकॉर्ड जो कभी नहीं टूटेंगे )

1 . Chris Gayle’s 175 : 

दोस्तों अगर हम एक दिवसीय क्रिकेट की बात करें तो बहुत ही काम खिलाडी उस मैच में 175 रन का आंकड़ा पार कर पाते है।  लेकिन वेस्टइंडीज के खिलाडी क्रिस गेल ने यह काम t 20  क्रिकेट में बहुत ही आसानी के साथ कर दिया।  Chinnaswamy stadium Banglore में रॉयल चैलेंजर बंगलोर की तरफ से खेलते हुए पुणे वोर्रीयर की टीम के खिलाफ क्रिस गेल ने सिर्फ 66 गेंदों में 175 रन जड़ दिए।  जो आज तक क्रिकेट के इतहास में कोई भी खिलाडी नहीं कर पाया।  आने वाले समय में इस रिकॉर्ड का टूटना लगभग न मुन्कन है। 
5 all-time IPL records that are unlikely to be broken (IPL के 5 रिकॉर्ड जो कभी नहीं टूटेंगे )
5 all-time IPL records that are unlikely to be broken (IPL के 5 रिकॉर्ड जो कभी नहीं टूटेंगे )

2 . Sohail Tanvir’s six-wicket haul

राजस्थान रॉयल की तरफ से खेलते हर सोहिल तनवीर ने कमाल का बोलिंग स्पेल डाला।  उनोह ने चेन्नई सुपरकिंग्स के साथ एक मैच में सिर्फ 14 रन देकर 6 विकेट झटके।  यह स्पेल अपने आप में एक रिकॉर्ड है।  जयपुर में हुए इस मैच में सब से ज्यादा विकेट लेकर सोहैल तनवीर ने पर्पल कैप भी अपने नाम की।  आज तक यह रिकॉर्ड कोई नहीं तोड़ पाया है। 

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3 .Suresh Raina’s consecutive matches


सुरेश रैना जो के भारतीय टीम के एक बहुत बड़े खिलाडी है उनोह ने अपने नाम 3873 रन बनाने का रिकॉर्ड किया है।  यह रन उनोह ने 133 मैचों में 34 की एवरेज के साथ बनाए है।  इस के इलावा वह दुनिया के पहले ऐसे खिलाडी है जिनोह लगातार 133 मैच खेले है।  इन सभी मैचों में बिना किसी इंजरी और किसी कारण के सुरेश रैना ने लगातार इतने मैच खेले हैं और अपना बहुत अच्छा प्रदर्शन किया है।  

4 . Royal Challengers Bangalore’s highest ever team total



23 अप्रैल 2013 को बंगलौर के चिन्नास्वामी स्टेडियम में पुणे के खिलाफ खेलते हुए रॉयल चैलेंजर बंगलौर ने एक बहुत बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम किया।  रॉयल चैलेंजर बंगलोर ने अपने 20 ओवरों में कुल 263 रन बनाए।  आज तक आईपीएल के इतहास में इतना बड़ा टोटल कोई टीम नहीं बना पाई है।  इसी मैच में क्रिस गेल ने 66 गेंदों में 175 रन बना कर सब से ज्यादा रन बनाने वाले खिलाडी का रिकॉर्ड अपने नाम किया। आईपीएल में दूसरे नंबर पर 248 रन का टोटल है जो के रॉयल चैलेंजर बंगलौर ने ही बनाया है। 

5 . 37 runs in one over


क्रिस गेल ने ही रॉयल चैलेंजर बंगलौर की तरफ से खेलते हुए कोच्ची टस्कर्स केरला की टीम के खिलाफ Prasanth Parameshwaran के एक ओवर में 37 रन जड़ दिए।  परसंथ के इस ओवर में कुल 36 रन आए जिस में से एक बॉल नो बॉल थी।  जिस के चलते  एक ओवर में 37 रन बने।  आजतक आईपीएल में किसी भी  खिलाडी ने यह कारनामा नहीं किया है।  आने वाले समय में इस रिकॉर्ड का टूट पाना भी लगभग न मुंकिन सा है। 

Sunday, 17 February 2019

Kashmir Crisis / Issue in Hindi - कश्मीर की समस्या क्या है ।

Kashmir Crisis / Issue in Hindi - कश्मीर की समस्या क्या है । 


दोस्तों जैसे कि हाल ही में कश्मीर में हालत काफी खराब हो चुकी है । वहां पर आए दिन आतंकवादियों और भारतीय सेना के बीच झड़प होती रहती है जिसने आज तक काफी सैनिकों की जान चली गई है आज हम आपको पूरे मसले के बारे में बताएंगे के आखर कश्मीर में ऐसे हालात क्यों बने इसके पीछे की हिस्ट्री क्या है और अब तक इस मसले को सुलझाने के लिए कितने बार कोशिशें हो चुकी हैं ।
Kashmir Crisis / Issue in Hindi - कश्मीर की समस्या क्या है ।

History Of Kashmir


सबसे पहले कश्मीर मौर्य सल्तनत का हिस्सा हुआ करता था उसके बाद 5 से लेकर 14वीं सदी तक जहां पर अलग-अलग हिंदू राजाओं का राज रहा 14वी सदी से लेकर 16 वीं सदी तक इस्लाम कश्मीर में आया कश्मीर की काफी पापुलेशन ने इस्लाम को अपना लिया जहां तक के उस वक्त 77 प्रतिशत कश्मीरी लोगों ने इस्लाम को अपना लिया जिसके बाद वहां के राजा ने इस्लाम कबूल लिया ।


सन 1586 मैं कश्मीर पर मुगलों ने हमला कर दिया और इसे अपने सल्तनत का हिस्सा बना लिया ।

1751 को अहमदशाह अब्दाली ने कश्मीर पर हमला कर दिया और इसी अपने नेतृत्व कर लिया जिसके बाद 1751 से लेकर 1819 तक कश्मीर में अफगानों का राज रहा ।

1819 में महाराजा रंजीत सिंह ने कश्मीर पर हमला कर इसे जीत लिया ।

1846 में पहले एंग्लो युद्ध में अंग्रेजो ने सिखों को हरा दिया और कश्मीर पर अपना कब्ज़ा कर लिया । उस वक़्त महाराजा गुलाब सिंह डोगरा कश्मीर का राजा बना । जिस के लिए उस ने अंग्रेजो को 70 लाख रुपए भी दिए ।

Starting of Kashmir Conflict


जब 1947 में भारत आज़ाद हुआ अंग्रेजो ने भारत को छोड़ा तब कश्मीर में महाराजा हरि सिंह का राज था । महाराजा हरि सिंह ने उस वक़्त अकेले रहने का फैसला किया । वह कश्मीर को भारत का स्विज़तरलैंड देखना चाहते थे । उनोह ने ना तो भारत और ना ही पाकिस्तान के साथ जाने का फैसला किया ।


Sheikh Abdulla


इसी बीच सन 1931 से National Confarenece Party सत्ता में आई । जिसके लीडर शेख अब्दुल्लाह थे । यह पार्टी कश्मीर में लोकतंत्र चाहती थी । इन का मानना था के कश्मीर में राजा को हटा कर चुनाव कराए जाए । इसी तरह भारत में भी कांग्रेस लोकतंत्र चाहती थी जिस के लिए कांग्रेस इन्हें पूरी मदद देती थी ।

Events Of 1997
1947 की घटनाएं


जब उनसे 47 में भारत और पाकिस्तान का विभाजन हुआ तो भारत में जितने भी मुस्लिम कम्युनिटी थी उन्हें पाकिस्तान भेज दिया गया इसी तरह से कश्मीर में 77% मुस्लिम कम्युनिटी थी जिसके कारण मोहम्मद अली जिन्ना कश्मीर को पाकिस्तान का हिस्सा मानता था लेकिन वहां का राजा अपना अलग देश बनाना चाहता था राजा हरि सिंह का कहना था कि वह भारत और पाकिस्तान व्यापार जारी रखेंगे सभी रोड खुले रहेंगे ।  इस के लिए उस ने पाकिस्तान के साथ एक कॉन्ट्रैक्ट किया । इसी तरह का कॉन्ट्रैक्ट वह भारत के साथ भी करने वाले थे लेकिन उसी वक़्त भारत में दंगे हो गए ।
Kashmir Crisis / Issue in Hindi - कश्मीर की समस्या क्या है ।


कश्मीर में पुंज के इलाके में महाराजा हरि सिंह की आर्मी में कुछ अंग्रेजी सैनिकों को मार डाला जो उस वक्त ब्रिटिश आर्मी के लिए काम करते थे । इस छोटी सी लड़ाई को हिंदू मुस्लिम दंगे कहकर पहला दिया गया और पाकिस्तान ने अपनी मुस्लिम की कम्यूनिटी की सहायता के लिए अपने लड़ाके कश्मीर में भेज दिए । उन लड़ाकों ने महाराजा हरि सिंह की फ़ौज पर हमला कर दिया । जिस के बाद महाराजा हरि सिंह ने भारत से मदद मांगी ।

भारत सरकार ने महाराजा हरि सिंह के साथ 26 ओकटुबेर 1947 को एक कांट्रैक्ट किया जिसमें महाराजा हरि सिंह ने यह कहा कि अगर भारत उनकी मदद करता है तो वह भारत के साथ मिलने को तैयार हैं । इस के बाद भारत सरकार ने अपनी फौज को कश्मीर की घाटी में उतारा और भारती आर्मी ने पाकिस्तान आर्मी को पीछे धकेल देते हुए कश्मीर को पाकिस्तान के कब्जे से छुड़ा लिया ।
Kashmir Crisis / Issue in Hindi - कश्मीर की समस्या क्या है ।

दूसरी तरफ पाकिस्तानी इस कॉन्ट्रैक्ट को पूरी तरह से गलत घोषित कर दिया उनका कहना था कि जो फैसला दबाव के चलते लिया गया है और यह फैसला एक ऐसे राजा के द्वारा लिया गया है जिस को कश्मीर के लोग भी नही मानते ।

Interfare Of United Nation


1948 में भारत और पाकिस्तान यूनाइटेड नेशन के पास कश्मीर मसले को लेकर गए इसके लिए यूनाइटेड नेशन ने एक मिशन बहाया जिसका नाम कमीशन ऑफ इंडिया एंड पाकिस्तान रखा । इस कमीशन ने भारत और पाकिस्तान का दौरा किया इसके अलावा उन्होंने कश्मीर में अलग-अलग जगह पर जाकर लोगों की राय भी ली जिस के बाद इनोह ने इस मसले के हल के लिए 3 रूल बनाए । यह रूल दोनो देशो की मर्ज़ी से लागू हो सकते थे ।


1 . पाकिस्तान को आपने लड़ाके कश्मीर से हटाने होंगे ।
2. भारत को अपनी फ़ौज कश्मीर से वापस बुलानी होगी । सिर्फ उतनी हो फ़ोर्स कश्मीर में रखी जाए जो law and order को मेंटेन रखे ।
3.  कश्मीर में लोगो से वोटिंग कराई जाए । जिस में वोह अगर पाकिस्तान में जाना चाहे जा भारत में रहने चाहे और अगर वो चाहे तो अपना अलग देश भी बना सकते हैं ।
  लेकिन इस के बाद पाकिस्तान ने अपनी फ़ौज कश्मीर से नही हटाई और ना ही भारत ने अपनी फ़ौज को वहां से हटाया है । पाकिस्तान कहता है कि अगर हमने फौज हटाई तो भारत कश्मीर पर कब्जा कर लेगा और इसी तरह भारत कहता है कि अगर हमने पॉज कम की तो पाकिस्तान कश्मीर पर अटैक कर उस पर कब्जा कर लेगा तब से लेकर अब तक दोनों देशों के बीच कश्मीर को लेकर इसी तरह से खींचातानी चल रही है ।

Militancy in 1990


1987 मैं कश्मीर की सरकार को लेकर वहां पर चुनाव कराए गए जिसमें शेख अब्दुल्लाह की पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस मुख्य तौर पर भूमिका निभा रही थी और वही नेशनल कांग्रेस पार्टी को भारतीय कांग्रेस का भी समर्थन था जिसके चलते चुनाव में बहुत बड़े स्तर पर धांधली की गई और नेशनल कॉन्फ्रेंस पार्टी बहुत बड़े फर्क के साथ जीत गई जिसके बाद कश्मीर में कहीं जगह पर हड़ताल रोष धरने भी हुए लेकिन थोड़े ही समय के बाद यह हड़ताल और धरने दंगों का रूप ले गए और बहुत सारी जगह पर जानी और माली नुकसान हुआ । पाकिस्तान ने इस बात का पूरा फायदा उठाया और उन्होंने आपने Jammu Kashmir Leberation Front उर Hizb Ul Mujahbdeen जैसे आंतकवादी संगठनों को कश्मीर में भेज दिया और इस मसले को कश्मीर की आजादी के साथ जोड़ दिया । उनका कहना था कि भारत सरकार हमारे साथ भेदभाव कर रही है और हमें आजाद कश्मीर लेना है जिसक तहत वोह जवान लड़कों को loc कि इस पार भेज कर ट्रेनिंग देते ।
Kashmir Crisis / Issue in Hindi - कश्मीर की समस्या क्या है ।

Some Other Fact About Kashmir Issue
कश्मीर समस्या से जुड़े कुछ और तथ्य



  • सन 1948 में दोनों देशों के बीच समझौता हुआ जिसके तहत जब तक कश्मीर का कोई पक्का हल नहीं हो जाता तब तक दोनों देश गोलीबारी बंद करते हैं और 1948 में ही LOC को दोनों देशों का बॉर्डर मान लिया गया । हालांकि जय इंटरनेशनल बॉर्डर नहीं कहलाती लेकिन जब तक कश्मीर मसले को लेकर कोई समझौता नहीं हो जाता तब तक एलओसी लाइन बॉर्डर का काम करेगी ।



  • 1962 में जब भारत कि चीन के साथ लड़ाई लगी उसके बाद चीन ने भारत के बहुत बड़े एरिया पर कब्जा कर लिया इसी तरह 1965 में पाकिस्तानी कश्मीर का एक बहुत बड़ा हिस्सा जिसका नाम शक्सगम वैली था चीन को गिफ्ट कर दिया इसी तरह से अगर आज कोई कश्मीर को लेकर समझौता होता है तो उस में चीन भी शामिल होगा क्योंकि कश्मीर पर चीन का भी कब्जा हो चुका है ।




  • सन 1984 में भारत में पाकिस्तान और चीन पर निगरानी रखने के लिए सियाचिन ग्लेशियर पर भारतीय रोज को भेजा आज से पहले इस ग्लेशियर पर कोई नहीं पहुंच पाया था और अब यह स्थान दुनिया का सबसे ऊंचाई वाला बैटलफील्ड है ।



  • 1990 में कश्मीर घाटी में जो पंडित रहते थे उन्हें वहां से भगा दिया गया । यह कश्मीरी पंडित वहां पर सभी अच्छी नौकरी पर तैनात थे लेकिन जब 1987 की चुनाव के बाद शेख अब्दुल्लाह की सरकार बनी तब से वहां पर बहुत बड़ी मात्रा में दंगे होने शुरू हो गए जिसके चलते शेख अब्दुल्ला की सरकार को रिजाइन देना पड़ा जिसके बाद कश्मीरी पंडितों को वहां के आतंकवादी संगठनों ने निशाना बनाया कई कश्मीरी पंडितों को मार डाला गया और दूसरों को वहां से बाहर जाने के लिए कहां गया इसी तरह 19 और 20 जनवरी को लगभग 2.5 से 3 लाख कश्मीरी पंडितों ने कश्मीर वैली को छोड़ दिया और आज कश्मीरी पंडित कैंपों में रहते हैं वहां पर इनकी हालत बहुत खस्ता है कई बार कश्मीरी पंडितों को वापस कश्मीर में शिफ्ट करने की बात बोली गई है लेकिन अभी तक नहीं हो पाया है ।

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  • 1990 में कश्मीर में बहुत ज्यादा बैलेंस होने के कारण भारतीय सरकार ने सेना को AFSPA ( Armed Force Special Act ) का अधिकार दे दिया गया जिसके तहत भारतीय सेना के जवान कश्मीर में किसी वी घर में जाकर तलाशी कर सकते हैं और शक होने पर किसी पर भी गोली चला सकते हैं ।



  • 1990 से 2004 तक भारतीय फ़ौज ने कश्मीर में के ऑपरेशन चलाए जिस में काफी संख्या में अन्तकवादियो को मारा गया । जिस के बाद 2004 से कश्मीर में थोड़ी शांति हुई है ।


दोस्तो यह थी पूरी कश्मीर की कहानी हमे उम्मीद है आप को हमारा आर्टिकल अच्छा लगा होगा । आगे से हमारे आर्टिकल की जानकारी के लिए हमे फेसबुक पर फॉलो करें ।






Monday, 28 January 2019

Harjeet Brar Bajakhana Kabbadi | Biography | Age | Family | Death

Harjeet Brar Bajakhana Kabbadi | Biography | Age | Family | Death

दोस्तों आज हम आपके लिए उस महान खिलाड़ी की बायोग्राफी लेकर आए हैं जिनको इस दुनिया से गए हुए तो काफी समय हो गया लेकिन कबड्डी खेल प्रेमियों के दिलों में वह खिलाड़ी आज भी जिंदा है पूरे भारत में कहीं पर भी अगर कोई कबड्डी मैच होता है तो उस खिलाड़ी का जिक्र जरूर होता है
Harjeet Brar Bajakhana Kabbadi | Biography | Age | Family | Death
Harjeet Brar Bajakhana Kabbadi | Biography | Age | Family | Death

 भारत ही नहीं बल्कि इंग्लैंड अमेरिका कनाडा जैसे देशों में भी उस खिलाड़ी ने अपनी काबिलियत के झंडे गाड़े हुए हैं । मैं बात करने जा रहा हूं सर्कल कबड्डी के मशहूर खिलाड़ी हरजीत बराड़ बजाखाना की । दोस्तों आज हम जानेंगे ऐसे खिलाड़ी की निजी जिंदगी कबड्डी कैरियर और मौत के कारण के बारे में ।

Harjeet Brar Bajakhana Kabbadi | Biography | Age | Family | Death

हरजीत बराड़ का जन्म 5 सितंबर 1973 को गांव बाजाखाना ज़िला फरीदकोट पंजाब में हुआ । बचपन से ही हरजीत की सेहत बहुत ज्यादा अच्छी थी जिसकी वजह से उनके पिता सरदार बख्शीश सिंह ने हरजीत बराड़ को कबड्डी खेलने के लिए प्रेरित किया । हरजीत बराड़ बचपन से ही बहुत अच्छी कबड्डी खेलता था

 जब Harjeet Brar Bajakhana स्कूल में पढ़ता था तो उसने अपने स्कूल को बहुत से टूर्नामेंट भी जिताए । उनकी गेम को देखते हुए उनके गांव वालों ने और उन के अध्यापकों ने हरजीत बराड़ की खेल और ज्यादा निखारा जगजीत आठवीं क्लास में था तो उस वक्त गुवाहाटी में मिनी गेम्स का आयोजन हुआ था जिसमें हरजीत बराड़ ने भी हिस्सा लिया और इन गेम्स में बहुत अच्छा प्रदर्शन किया । 
आगे जाकर हरजीत बराड़ ने स्पोर्ट्स स्कूल जालंधर में दाखिला ले लिया और पूरा ध्यान अपनी गेम पर देने लगे अपनी मेहनत और लगन के बल पर हरजीत बराड़ बड़ी बड़ी कबड्डी टीम और अकैडमी में खेलने लगा । 


  • हरजीत को पहली बारी लोगों ने तब पहचान में शुरू किया जब जैतो खेल मेले में हरजीत गया । वहां पर कुश्ती के मुकाबले हो रहे थे और वहां पर उन के दोस्तो ने जबरदस्ती उसे एक कुश्ती पहलवान के साथ कुश्ती के लिए मैदान में उतार दिया। उस मेले में हरजीत ने बहुत अच्छी कुश्ती खेली और Harjeet Brar Bajakhana  का नाम बनना शुरू हो गया । 


  • साल 1982 - 83 में कोठा गुरु के गांव में एक बहुत बड़ा कबड्डी टूर्नामेंट हुआ इस टूर्नामेंट में हरजीत बराड़ दे कनेडा से आई टीम के लिए दो रेडे डाली हरजीत की चुस्ती और चालाकी को देख कर वहां खड़े सभी लोग दंग रह गए और पूरे मैदान में बाजाखाना बाजाखाना होने लगी ।  


  • साल 1994 में हरजीत बराड़ ने पहली बार कनेडा देश का दौरा किया वहां पर उनकी कबड्डी को देख कर कबड्डी प्रेमियों हरजीत बराड़ को अपनी पलकों पर बैठा लिया जिसके बाद हरजीत ने अगले कुछ सालों तक इंग्लैंड पाकिस्तान अमेरिका जैसे और भी कई देशों में जाकर अपनी खेल के जौहर दिखाए । 

Harjeet Brar Bajakhana Kabbadi | Biography | Age | Family | Death



  • 1996 में जब कनेडा में कबड्डी वर्ल्ड कप हुआ उस वर्ल्ड कप में हरजीत बराड़ पाकिस्तान के खिलाफ खेल रहा था तो उनकी हर रेड पर ₹100000 का इनाम रखा जा रहा था और हरजीत बराड़ 2 से 3 सेकंड में ही रेड लेकर वापस आ जाता था । उनकी इस गेम को देखते हुए वहां पर खड़े एक गोरे ने माइक में जाकर बोला के भारत में एक ऐसी मशीन बनाई है जो 1 सेकंड में ₹100000 कमाती है । 
Harjeet Brar Bajakhana Kabbadi
Harjeet brar with his wife and daughter


  • आगे चलकर हरजीत बराड़ ने अपना विवाह नरेंद्र कौर के साथ करवाया और नरेंद्र कौर से उन्ह एक लड़की भी हुई । अपनी लड़की का नाम हरजीत बराड़ ने गगन हरजीत कौर रखा । 
Harjeet Brar Bajakhana Kabbadi | Biography | Age | Family | Death

साल 1997 - 98 हरजीत बराड़ की चर्चा पूरी दुनिया में हो रही थी वहीं जब हरजीत बराड़ द्वारा कनाडा में कबड्डी खेलने गए तो उनकी 1 रेड पर $35000 डॉलर लगे जिनकी अगर हम रुपयों में आज बात करें तो लगभग 1830000 रुपए सी । 

Harjeet Brar Death 


दोस्तो जैसे के कुदरत का नियम है कि जो इस धरती पर आया है उसे वापस भी जाना पड़ेगा । ऐसा ही एक मंदभागा दिन आया जब 16 अप्रैल 1998 को अपने साथी खिलाड़ी तलवार कौंके , केवल लोपोके , केवल सीखा और सुखचैन सिंह के साथ अपनी जिप्सी PB 10 U 0097 में दिल्ली की ओर जा रहे थे
Harjeet Brar Bajakhana Kabbadi

 तो अचानक ही रास्ते में मोरिंडा के पास उन का एक ट्रक के साथ हादसा हो गया । इस बात से मैं हरजीत बराड़ की मौके पर ही मौत हो गई इसके अलावा , तलवार,  केवल सीखा और केवल लोपोके की भी हरजीत के साथ ही मौत हो गई इस के इलावा इन का एक साथी सुखचैन सिंह को गम्भीर चोटें आई । 

Thursday, 10 January 2019

Manoj Bajpayee Biography in Hindi (कैसे गरीब किसान का बेटा बना करोड़पति)

"मंजिले उन्ही को मिलती है जिनके सपनों में जान होती है पंखों से कुछ नहीं होता हौसलों से उड़ान होती है "।  इस कहावत को किसी ने सही साबित किया है तो वह है फिल्म जगत में अपनी रियल एक्टिंग से सभी को प्रभावित करने वाले एक्टर मनोज बाजपाई ।

Manoj Bajpayee Biography in Hindi (कैसे गरीब किसान का बेटा बना करोड़पति)
Manoj Bajpayee Biography in Hindi
Manoj Bajpayee Biography in Hindi

जिनोह ने अपनी मेहनत और संघर्ष के दम पर यह दिखा दिया इस दुनिया में कुछ भी नामुमकिन नही है । एक गरीब किसान के वहां पैदा होने के बाद पूरा बचपन और जवानी परेशानियों में गुजारने वाले मनोज बाजपेई ने किस तरह से फिल्म जगत में अपनी एक अलग पहचान बनाई । बिना आप का समय लिए हुम् आप को Manoj Bajpayee की इस प्रेरणादायक कहानी को शुरू से बताते हैं ।
 

Manoj Bajpayee Biography in Hindi (कैसे गरीब किसान का बेटा बना करोड़पति)





कहानी की शुरुआत होती है 23 अप्रैल 1969 से जब बिहार के बेलवा नाम के गांव में मनोज बाजपाई का जन्म हुआ । उनके पिता का नाम राधाकांत बाजपेई है जो कि अपने परिवार के पालन-पोषण के लिए पूरी तरह से खेती पर निर्भर थे ।  दोस्त मनोज बाजपेई का नाम के सिनेमा के लेजेंड मनोज कुमार के नाम पर रखा गया था ।  जो के उन के पिता के पसन्दीदा एक्टर थे ।


(मनोज बाजपाई का बचपन - Childhood of Manoj Bajpayee )


Manoj Bajpayee का बचपन बहुत ही ज्यादा गरीबी में बीता यहां तक कि उनके पिता के पास में पढ़ाने के लिए पर्याप्त पैसे भी नहीं थे । इसके लिए उन्होंने अपने शुरुआती पढ़ाई गांव के एक सरकारी स्कूल से की । 

मनोज वाजपेई के पिता जानते थे के अगर उन के बेटे ने खेतीबाड़ी से हट कर कोई और काम करना है तो यह पढ़ाई बहुत ही ज्यादा जरूरी है और इसीलिए उन्होंने पैसे कर्ज लेकर मनोज के पढ़ाई को जारी रखा और फिर मनोज बाजपेई ने अपनी 12वीं की पढ़ाई महारानी जानती कॉलेज की  ।

उस वक़्त Manoj Bajpayee की उम्र 17 साल थी । तभी उन्होंने दिल्ली जाकर अपने कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने का डिसीजन लिया और फिर यहां पहुंच कर उन्होंने रामजस कॉलेज से अपनी पढ़ाई शुरू कर दी ।  कॉलेज के पढ़ाई के दौरान उनोह ने थिएटर में काम करना शुरू किया और वही से उन्हें पहचान मिलनी शुरू हुई ।

(कैसे आपने आप को खत्म करने का सोचा)


लेकिन उसको जैसे जैसे उनका एक्सपीरियंस बड़ा यह पता लग गया कि अगर भारतीय फिल्म जगत में काम पाना है तो उसके लिए उन्हें बहुत ही कड़ी मेहनत करनी होगी और जिस के लिए उनोह ने दिल्ही के ही National School of Drama में एडमिशन ले लिया ।



हालांकि यहां पर एडमिशन के लिए उन्होंने तीन बार अप्लाई किया लेकिन इसके बावजूद हर बार उन्हें रिजेक्ट कर दिया जाता था । मनोज बताते हैं के इस वजह से उन के होंसले टूटने लगे थे ।

 इस समय तो उन्होंने सुसाइड करने तक भी का सोचा था । लेकिन उनके एक दोस्त रघुबीर यादव ने उन्हें सलाह दी अगर उन्हें NSD में नहीं लिया जा रहा है तो Berryjohn के एक्टिंग वर्कशॉप के लिए उन्हें एक बार जरूर ट्राय करनी चाहिए ।

Manoj Bajpayee Biography in Hindi (कैसे गरीब किसान का बेटा बना करोड़पति)

फिर जब वाजपेई बैरी जॉन से मिले तब बैरी जॉन उसे इतना ज्यादा प्रभावित हुए उन्होंने मनोज बाजपाई को एक विद्यार्थी के तौर पर नहीं बल्कि दूसरे लोगों को एक्टिंग सिखाने में उनकी मदद के लिए रख लिया। 

फिर कुछ समय यहां पर काम करने के बाद मनोज बाजपेई ने एक बार फिर से नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में अप्लाई किया लेकिन उसको एप्लीकेशन और कैंडिडेट नहीं एक अधिआपक के तौर पर था । इस वर NSD ने उन्हें अपनी टीम में लेने में देरी नही की ।

Film Career



ऐसे ही करके बहुत ही जल्दी मनोज दिल्ली के थिएटर जगत के जाने माने चेहरे बन चुके थे । उस समय के काफी डायरेक्टर तिग्मांशु धूलिया ने शेखर कपूर की एक फ़िल्म Bandit Queen के लिए बुलाया और इस फ़िल्म में मनोज ने मान सिंह नाम के एक डाकू का रोल खूब अछि तरह से निभाया ।
Manoj Bajpayee Biography in Hindi


Manoj Bajpayee Biography in Hindi (कैसे गरीब किसान का बेटा बना करोड़पति)


फिर एक बार फिल्म जगत में काम मिलने के बाद 1994 में Manoj बाजपाई मुम्बई शिफ्ट हो गए और जहां पर उनोह ने छोटे छोटे TV सीरियल में काम करना शुरू किया । 

लेकिन यह किरदार उनके प्रतिभा के साथ न्याय नहीं कर रहे थे और इस तरह से फिल्म इंडस्ट्री में आने के बाद उन्हें यहां भी बहुत ही स्ट्रगल भरे दिन देखने पड़े लेकिन जल्दी अब मनोज बाजपाई के दिन बदलने वाले थे क्योंकि राम गोपाल वर्मा ने 1998 अपनी फ़िल्म Satya के लिए मनोज को साइन किया ।

( Manoj Bajpayee Films and Awards )


इस फ़िल्म ने मनोज की किस्मत को बदल दिया । यह फ़िल्म बहुत बड़ी हिट साबित हुई । अब मनोज बॉलीवुड के बड़े बड़े फ़िल्मकर्स की नज़रो में आ चुके थे । इस फील।के लिए मनोज को Best Supporting Actor के अवार्ड से भी नवाजा गया ।

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 इस तरह से यही फिल्म मनोज के जीवन का टर्निंग पॉइंट साबित हुई इस के बाद मनोज ने AKS, LOC KARGIL, RAJNEETI, AARAKASHN, GANGS OF WASSYPUR, SPECIAL 26, ALIGARH, SATAMEVA JAYATE, जैसी ही कई फिल्मो में काम किया । समय के साथ साथ Manoj Bajpayee ने अपनी एक्टिंग को और सुधारा ।

( Persnal Life Of Manoj Bajpayee )


मुझे मनोज बाजपेई के पर्सनल लाइफ के बारे में बात करें उनोह ने 2006 में सबाना रजा नाम की एक्ट्रेस से शादी की जिसे हुम् नेहा के नाम से जानते हैं । जिस के बाद मनोज के घर एक बेटी जन्म लिया  ।



Manoj Bajpayee Biography in Hindi


अंत  में बस मैं यही कहना चाहूंगा जो भी मुकाम आज मनोज ने अपनी ज़िन्दगी में पाया है वो अपनी मेहनत और आपने परिवार के सपोर्ट की वजह से है ।

Monday, 7 January 2019

अब ऊंची जाति वाले जनरल कैटेगिरी में आर्थिक तौर पर गरीब लोगों को मिलेगा 10 % कोटा

7 जनवरी 2019 को भारत सरकार ने एक बहुत बड़ा फैसला लेते हुए ऐलान किया है कि ऊंची जाति वाले जर्नल केटेगरी में आने वाली आर्थिक तौर पर कमजोर लोगों को भी एक अलग से आरक्षण दिया जाएगा यह आरक्षण सभी सरकारी जगह पर लागू होगा फिर चाहे वह नौकरी या पढ़ाई या कोई भी सरकारी सहूलियत हो ।
Union Cabnit Approvs 10% Reservation for ecnomically weaker class
Union Cabnit Approvs 10% Reservation for ecnomically weaker class
उससे पहले हमारे देश में आरक्षण सिर्फ SC, ST, OBC को मिलता था । लेकिन भारत सरकार ने 7 जनवरी को इतिहासिक फैसला लेते हुए इस मे थोड़ा बदलाव किया है । हुम् आप को बता दे के अब भारत मे जनरल कोटा 50 % है लेकिन इस बिल के आने के बाद यह कोटा बढ़ कर 60% हो जाएगा जिस में से 10% उन लोगो के होगा जो आते तो जनरल कैटागिरी में हैं लेकिन आर्थिक तौर पर कमज़ोर हैं ।
आज से पहले बहुत सी सरकारों ने इस फैसले पर विचार किया था लेकिन बात आगे बढ़ नही पाई । 7 जनवरी को मोदी सरकार ने इसे लागू करने का सुझाव दिया है ।
हुम् आप को जहां पर बता दे के यह बिल अभी से लागू नही होगा । क्यों कि हमारे संविधान के 15, 16 आर्टिकल के तहत सरकार इसे सीधा बदल नही सकती । इस ल लिए सरकार को यह बिल पहले लोक सभा फिर राज सभा और उस के बाद राष्ट्रपति से पास कराना होगा ।



कौन होंगे वो 10% में आने वाले लोग


  • अभी तक जो बात सहमने आई उस के अनुसार इस कैटेगिरी में आने वाले लोगो के पास साल की कमाई 8 लाख से कम होनी चाहिए ।
  • उन के पास अपनी जमीन होनी चाहिए लेकिन वो ज़मीन 5 एकड़ से ज्यादा नही होनी चाहिए ।
  • उन के पास जो घर हो वो 1000 सेक्यूर फ़ीट से कम हो ।



यह कुछ शर्तें होगी इस आरक्षण के लिए । यह अभी तक कि शर्ते हैं सांसद में जाने के बाद जब इस पर बहस होगी तो यह कुछ बदल भी सकती है ।

आज से पहले कितनी वार इस आरक्षण को लाने की कोशिश हुई


  1. साल 2007 में मध्यप्रदेश की BSP सरकार ने यह आवाज़ उठाई थी । वहां की कांग्रेस सरकार ने भी इस फैसले का साथ दिया था ।
  2. 2014 में समाजवादी पार्टी ने एक केबनिट बिठाया था जिस ने यह सभ जांच की थी कि ऊंची जाति वाले लोगो को भी आरक्षण मिलना चाहिए जा नही ।
  3. 2016 में चंद्र बाबू नायडू ने भी ऊंची जाति वाले लोगो के लिए आरक्षण की मांग की थी ।

Wednesday, 12 December 2018

Phoolan Devi Biography in Hindi - फूलन देवी का जीवन परिचय


Phoolan Devi Biography in Hindi - फूलन देवी का जीवन परिचय

फूलन देवी एक ऐसी लड़की जिसका छोटी जाति में लड़की के तौर पर जन्म पाना मानो उस के लिए एक अभिशाप बन गया था । लेकिन फिर भी उनकी आंखों में डर ना हो कर साहस की तपन दिखती थी ।

Phoolan Devi Biography in Hindi - फूलन देवी का जीवन परिचय
Phoolan Devi Biography in Hindi - फूलन देवी का जीवन परिचय
फूलन देवी एक ऐसी लड़की जिसका छोटी जाति में लड़की के तौर पर जन्म पाना मानो उस के लिए एक अभिशाप बन गया था । लेकिन फिर भी उनकी आंखों में डर ना हो कर साहस की तपन दिखती थी ।


Phoolan Devi Biography in Hindi - फूलन देवी का जीवन परिचय:

बचपन से ही जीवन संघर्षों के बीच घिर चुका था । एक के बाद एक बहुत सारे जुल्म हो रहे थे ऊंची जाति के लोग भेदभाव और यौन उत्पीड़न करते रहे और ऐसे में दूसरा कोई होता तो अपने जीवन को पूरी तरह से खत्म करने की सोचता लेकिन फूलन देवी जैसे निडर महिला ने अपने ऊपर हुए जुल्मो का ऐसा बदला लिया के लोग उसे इज्जत की नज़रों से देखने लगे । आज हम फूलन देवी की इस कहानी को शुरू से जाने गे । कैसे एक साधारण लड़की डाकू बनी और डाकू से राजनेता ।

Phoolan Devi Biography in Hindi - फूलन देवी का जीवन परिचय

(जनम और बचपन) 

कहानी की शुरुआत होती है 10 अगस्त 1963 से जब उत्तर प्रदेश के जालौन जिले के एक छोटे से गांव में मल्लाह के अंतर्गत फूलन देवी का जन्म हुआ।

 मल्लाह बेसिकली नाव चलाने वालों और मछुआरों के समुदाय को कहा जाता था और इस समुदाय में जन्म लेने की वजह से शुरू से ही फूलन देवी ने गरीबी का सामना किया उनके बड़े से ज्वाइन फैमिली के पास 1 एकड़ जमीन थी ।  जिस में पुराना नीम का पेड़ लगा हुआ था ।

 जब फूलन 11 वर्ष की थी तो उनके दादा दादी की मौत हो गई । फिर घर के मुखिया फूलन देवी के पिता के बड़े भाई बने और फिर घर के मुखिया पद को संभालने के बाद से उनका कहना था कि खेत में मौजूद पुराने नीम के पेड़ को काट देना चाहिए ताकि पेड़ वाले एरिया में भी उपजाऊ खेती किया जा सके ।

Phoolan Devi Biography in Hindi - फूलन देवी का जीवन परिचय

 इस बात से फूलन देवी के पिता भी काफी हद तक सहमति थी लेकिन 11 साल की फूलन देवी को यह बिल्कुल भी समझ नहीं आई और पेड़ काटने गए अपने चचेरे भाई को गालियां देते हुए खदेड़ दिया ।

फिर दोनों के बीच जमकर गाली ग्लोच हुआ । फूलन देवी की जुबान से निकले शब्दों को समाज स्वीकार नहीं कर पा रहा था क्योंकि गांव में कभी भी किसी महिला ने पुरुष के खिलाफ इस तरह की आवाज नहीं उठाई थी

और फिर इसका नतीजा यह हुआ कि फूलन देवी का जबरन उसे 3 गुना ज्यादा उम्र के व्यक्ति के साथ बाल विवाह करवा दिया गया और उनके पति का नाम था पुत्तीलाल भल्ला । शादी के बाद से पुत्ती लाल फूलन देवी के ऊपर बहुत सारा अत्त्याचार करता रहा।
Phoolan Devi Biography in Hindi - फूलन देवी का जीवन परिचय
Phoolan Devi Biography in Hindi - फूलन देवी का जीवन परिचय
इन्हीं सभी बातों से तंग आकर फूलन देवी ने अपने ससुराल से भागने का फैसला कर डाला और फिर वहां से भाग कर अपने मायके आ गई लेकिन यहां पर भी उन्हें बहुत सारे अपमान झेलने पड़े ।

एक वार फिर से फूलन देवी का सामना हुआ उनके चचेरे भाई मयदीन के साथ । क्योंकि अभी भी उनसे पेड़ वाले झगड़े के लिए बदला लेना चाहता था और फिर बदले की भावना से मयदीन ने नजदीकी पुलिस स्टेशन में जाकर फूलन देवी के खिलाफ चोरी का इल्जाम लगा दिया और फिर फूलन देवी को 3 दिन जेल में बिताने पड़े लेकिन शर्मशार कर देने वाली बात यह थी कि पुलिस थाने में पुलिस वालों ने फूलन के साथ कई वार बलात्कार किया ।

Phoolan Devi Biography in Hindi - फूलन देवी का जीवन परिचय

फिर डरा धमका कर  फूलन को छोड़ दिया और फिर वापस घर आने के बाद फूलन देवी को फिर से ससुराल भेजने की तैयारी की जाने लगी ।

उन्होंने पहले तो फूलन देवी को अपनाने से मना किया लेकिन कुछ पैसे देने के बाद से वह भी राजी हो गए हैं और अपनी ऑटो बायोग्राफी फूलन देवी ने बताया कि उनका पति वापस आने के बाद उन्हें बहुत मारता और जबर्दस्ती उन के साथ संबध बनाता ।

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इन सभी बातों से तंग आकर 16 साल की उम्र में फूलन देवी एक बार फिर से अपने ससुराल से भाग निकली लेकिन इस बार वह अपने मायके नहीं गई बल्कि उस ने 2 वक़्त की रोटी के लिए डाकुओं के गैंग को जॉइन कर लिया ।

 इस गैंग में शामिल होने वाली वह पहली लड़की थी और फिर धीरे-धीरे समय बीतने के साथ उनके साथी डाकुओं में भी उनका कद बड़ा होने लगा था और कुछ महीनों के बाद फूलन देवी ने एक-एक करके अपने सभी जुल्मो का बदला लेना शुरू किया ।

Phoolan Devi Biography in Hindi - फूलन देवी का जीवन परिचय
Phoolan Devi Biography in Hindi - फूलन देवी का जीवन परिचय
फूलन ने एक ही गांव के 22 राजपूतों को एक लाइन में खड़ा कर गोलियों से भून डाला । इसके अलावा फूलन ने कई पुलिस वालों को मौत के घाट उतार दिया जिन्होंने उनके साथ बलात्कार किया था । इन सभी घटनाओं के बाद बहुत सारे लोग फूलन को देवी के रूप में पूजने लगे ।

क्यों कि उस ने अपने सम्मान के लिए राजपूतों का नरसंहार का डाला । एक साथ 22 कत्ल करने के बाद फूलन देवी सभी अखबारों और टीवी चैनलों की सुर्खियों में आ गई जिसके बाद सरकार ने फूलन के ऊपर ध्यान देना शुरू किया स्पेशल आर्मी फोर्स और पुलिस ने मिलकर फूलन देवी को ढूंढ निकाला और उनके बाकी साथियों को पुलिस इनकाउंटर में मार दिया गया ।

Phoolan Devi Biography in Hindi - फूलन देवी का जीवन परिचय


 यहां से 2 साल के बाद फूलन देवी को गिरफ्त में ले लिया गया और फिर उनके साथ के बाकी कुछ बचे हुए डाकूओ ने भी 1983 में पुलिस के सामने आत्म सम्परपन कर दिया ।

फूलन देवी के ऊपर 48 अपराधों का आरोप था जिस में कत्ल , लूट, जैसे मामले दर्ज थे । फूलन को उम्र भर जेल में रखने का आदेश दिया कि 11 साल जेल में गुजारने के बाद 1994 में जब मुलायम सिंह जादव की सरकार उत्तर प्रदेश में बनी तो फूलन पर लगे सभी आरोप से उन्ह बरी कर दिया गया ।

समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर फूलन देवी ने दो बार लोकसभा के मेंबर ऑफ पार्लियामेंट का चुनाव मिर्जापुर से अपने नाम किया ।
Phoolan Devi Biography in Hindi - फूलन देवी का जीवन परिचय


25 जुलाई 2001 को दिल्ली बंगले के बाहर 3 लोगो ने उसे भून डाला ।
पर इस तरह से फूलन देवी ने दुनिया को अलविदा कह दिया और 200 फूलन देवी को मारे जाने के पीछे शेर सिंह राणा का हाथ बताया जाता है इस पर 22 राजपूतों को एक लाइन में खड़ा करके मारने का बदला लिया ।

दोस्तों से थी बैंडिट क्वीन  फूलन देवी की कहानी हमने फूलन देवी की ऑटो बायोग्राफी का लिंक भी  अपने लेख में दिया है अगर आप खरीदना चाहते हैं तो उसे लिंक पर क्लिक करें और आपको हमारा लेख कैसा लगा हमें कमेंट करके जरूर बताएं अपना कीमती समय देने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद ।

Wednesday, 21 November 2018

Paan Singh Tomar Biography | History | Real Story hindi ( पान सिंह तोमर की जीवनी )

Paan Singh Tomar Biography | History | Real Story hindi( पान सिंह तोमर की जीवनी ) पानसिंह, फूलन देवी, माधव सिंह और मुस्तकीम यह सभी ऐसे खतरनाक डाकुओं के नाम है जिसके बगावत की कहानी चंबल की पहाड़ियों में सुनने को मिल जाएंगी । खूंखार डाकुओं ने चंबल की घुमावदार और टेढ़ी-मेढ़ी पहाड़ियों में पनाह ले रखी थी साथ ही साथ यहाँ पर ही अपने आतंक के पहियों को भी आगे बड़ा रहे थे लेकिन इन में से एक कहानी ऐसी भी सामने आती है जो कि उसे बिल्कुल ही विपरीत थी और यह कहानी है डकैत Paan Singh Tomar की । 

Paan Singh Tomar Biography | History | Real Story ( पान सिंह तोमर की जीवनी )
Paan Singh ने अपनी जीवन के शुरुआती दौर में लोगों का प्यार और सम्मान जीता लेकिन वही उम्र के दूसरे दौर में उन्हें लोगों की नफरत झेलनी पड़ी और एक बागी की तरह अपना जीवन बिताना पड़ा । 




Paan Singh Tomar Biography | History | Real Story hindi ( पान सिंह तोमर की जीवनी )


कहानी की शुरुआत होती है 1932 से मध्यप्रदेश के मुरैना जिले के एक छोटे से गांव की दशा में पान सिंह तोमर का जन्म हुआ । वोह बचपन से ही देश की सेवा करना चाहते थे और इसे आगे चलकर उन्होंने भारतीय सैनिक के तौर पर अपना कैरियर बनाया और फिर पहली बार उनकी जॉइनिंग उत्तराखंड के रुड़की नाम के शहर में सूबेदार के पद पर हुई और दोस्तों सेना में जाने के बाद ही उन्हें पता चला कि एक सिपाही होने के साथ साथ वह एक अच्छे ऐथलीट भी हैं ।

Paan Singh Tomar Biography | History | Real Story ( पान सिंह तोमर की जीवनी )
उन में बिना थक्के बहुत दूर तक भागने का हुनर था । जिस को देखते हुए उन्हें खेलों के लिए तैयार किया गया और फिर सेना में रह कर ना सिर्फ एक सिपाही होने का फर्ज निभाया बल्कि एक होनहार नेशनल खिलाड़ी के रूप में देश का नाम भी रोशन किया । 

Paan Singh ने टोकियो में 1958 में हुई एशियाई गेम्स में भारत को तरफ  से खेले थे और 7 सालों तक Steeplechase के चैंपियन भी रहे । वहीँ 9 मिनट 2 सेकंड 3000 मीटर की दौड़ का बेहतरीन रिकॉर्ड बनाया था जिस को कि अगले 10 सालों तक कोई नहीं तोड़ सका था । खेल में उनके प्रदर्शन को देखते हुए सरकार ने उन्हें1962 और 65 में हुए युद्ध मे लड़ने की अनुमति नही दी । 
शायद देश इस जांबाज खिलाड़ी को कभी नहीं खोना चाहता था और इस तरह से आगे चल कर 1972 में पान सिंह रिटायर हो गए । रिटायरमेंट के बाद से वह बची हुई जिंदगी को चैन से बिताने के लिए अपने गांव वापस आ गए लेकिन गांव वापस आने के बाद से वहां के एक दबंग बाबू सिंह के साथ उनका जमीनी विवाद हो गया । बाबू सिंह पूरे गांव पर अपना धाक जमा कर रखता था और उसके पास लोगों को डराने के लिए 7 लाइसेंसी बंदूक भी थी । 

Paan Singh Tomar Biography | History | Real Story hindi ( पान सिंह तोमर की जीवनी )




पान सिंह तोमर और बाबू सिंह के बीच विवाद इस बात पर हुआ कि बहुत समय पहले पान सिंह पूर्वजों ने बाबू सिंह के पास अपनी जमीन गिरवी रखी हुई थी । 

Paan Singh जब वापस अपनी जमीन लेने गए तब बाबू सिंह ने उनकी जमीन को वापस करने के लिए साफ साफ मना कर दिया और फिर लड़ाई झगड़े से दूरी बनाए रखने वाले पान सिंह तोमर इस विवाद को सुलझाने के लिए अपने जिले के कलेक्टर के पास जा पहुंचे जहां पर भी अपने जीवन की उपलब्धियां और मेडल को लेकर गए । 

लेकिन कलेक्टर ने पान सिंह की किसी भी बात को नही सुना और उल्टा उनके मेडल्स और डॉक्यूमेंट को फेंक कर उन्हें बेइज्जत करके वहां से बाहर निकाल दिया ।

फिर यहीं से पान सिंह को अपने अभी तक के अचीवमेंट्स बेकार लगने लगे थे कि अभी भी हार ना मानते हुए पान सिंह ने गांव के पंचायत से इस मुद्दे के लिए इंसाफ की गुहार लगाई । पंचायत ने फैसला सुनाया की जमीन को छुड़वाने के लिए पान सिंह तोमर को ₹3000 देने होंगे ।

 लेकिन यह फैसला पान सिंह तोमर को बिल्कुल भी समझ नहीं आया और उन्होंने जमीन को पाने के लिए यह रकम चुकाने से साफ साफ मना कर दिया लेकिन बदले की भावना से कुछ दिनों के बाद से ही बाबू सिंह ने अपनी दबंगई दिखाने शुरू कर दी । 

जब एक दिन पान सिंह घर पर नही थे तो उनोह ने पान सिंह की बूढ़ी मा को खूब मारा । घर पहुंचने पर अपनी मां को घायल देख पान सिंह तोमर पूरी तरह से आग बबूला हो गए और फिर उन्होंने गलत रास्ते पर ही सही लेकिन अपना बदला लेने का फैसला किया और यहीं से शुरू हो जाती है पान सिंह तोमर की बागी बनने की कहानी ।

Paan Singh Tomar Biography | History | Real Story ( पान सिंह तोमर की जीवनी )

1 दिन पान सिंह तोमर अपने भतीजे बलवंत के साथ मिलकर बाबू सिंह को घेरने की कोशिश करने लगे और लगभग 1 किलोमीटर तक बाबू सिंह को दौड़ाने के बाद तोमर की बंदूक की गोलियां बाबू सिंह को भून डालती हैं। इस तरह से पान सिंह अपनी शवि एक खिलाड़ी से बदलकर चंबल के खतरनाक डाकू के चेहरे में तब्दील हो जाती है ।

आगे चलकर पान सिंह तोमर नाम खतरनाक डकैती और हत्या करने के लिए जाना जाने लगा और वह इतना खतरनाक हो चुका था कि पुलिस भी उस के नाम से कांपती थी और उस समय पान सिंह को पकड़ने के लिए ₹10000 का इनाम रखा गया । 



आखिरकार 1 अक्टूबर 1981 को इंस्पेक्टर महेंद्र प्रताप सिंह और उनके 500 जवानों की स्पेशल टीम ने तोमर की घेराबंदी करके उसे मार गिराया । इस  ऑपरेशन में तोमर के गैंग के 14 और भी साथ में मारे गए थे आपको बता दें कि यह लड़ाई 12 घंटे चली थी । 
Paan Singh Tomar Biography | History | Real Story ( पान सिंह तोमर की जीवनी )


आपको बता दें कि पान सिंह की बायोपिक साथ 2012 में रिलीज हुई मूवी पान सिंह तोमर के जरिए भी देख सकते हैं इस मूवी को नेशनल फिल्म अवार्ड फॉर बेस्ट फीचर फिल्म से भी नवाजा जा चुका है।  हुम् उम्मीद करते हैं कि आपको पान सिंह तोमर की यह कहानी पसंद आई होगी ।