चे ग्वेरा एक क्रन्तिकारी ( History of Che Guevara in hindi )

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             चे ग्वेरा एक क्रन्तिकारी ( History of  Che Guevara )

“जब मैंने अपनी पढाई पूरी की तो मेरा वी सुपना लोगो की सेवा करना था मैं वी एक मशहूर खोजकर्ता बनना चाहता था , यह विचार मेरे मन में तब थे जब मैं इन्कलाबी नहीं बना था मगर कुछ समय बाद मैंने दुनिया का एक दूसरा रूप देखा के किसी बाप के पास अपने बचे के इलाज़ की लिए पैसे नहीं है मैंने देखा के गरीबी और भूख ने विआक्तिगत जीवन को इतना गिरा दिया के एक बाप अपने बेटे की मौत को ऐसे परवान कर लेता है जैसे कुछ हुआ ही न हो तो फिर मैंने सोचा के ऐसे लोगो दी सेवा करना किसी खोजकर्ता के कही बेहतर है “
                                                                                                       Che Guevara



   चे ग्वेरा का जनम का १४ जून १९२८ को अर्जन्टीना के शहर रोसारिओ में हुआ । वोह पेशे से एक डाक्टर था  चे ग्वेरा को बचपन से ही दमे की बीमारी थी जो मौत तक उस के साथ रही। इसी बीमारी के चलते गुवेरा स्कूल में जायदा पढ़ नहीं पाया , वोह घर में बैठ के पढता था , उस को मार्कस , और लेनिन जैसे साहित्कारो की किताबो में बहुत interest था , जिन्नों ने उसे बड़ा हो कर एक क्रन्तिकारी बनाया।  

चे ग्वेरा ने बहुत से देशो की यात्रा की जिस में उस का दोस्त अल्बर्टो वी उस के साथ था , इस यात्रा में उस ने गरीब किस्सनो , खानों में काम करने वाले मजदूरो , जिन की लूट खानों के मालिक करते थे यह सब उस ने बहुत करीब से देखा जिस ने  उस में मार्क्सवादी विचारधारा पैदा की , चिक्स्ता शिक्षा के समय वोह पुरे अमेरिका महादीप में घुमा , कुछ गरीबी के द्रिशो ने उसे हिल्ला के रख दिया उस ने इस होने वाली लूट को ख़तम करने का एक ही तरीका निकला वोह था विक्षिक्रंती।

फिर गुवेरा ने अपने संघर्ष की शुरुआत की  उस ने वोल्विया से निकल कर Guatemala की Arbenz सर्कार से मिल गया । Arbenz सर्कार ने अमेरिकी कंपनियो की 556 हज़ार एकड़ जमीन आम लोगो में वांट दी और मजदूरी को दुगना कर दिया ,बाद में अमेरिका ने Arbenz सर्कार का तख्ता पलट दिया और वहा के president ने अस्तिफा दे दिया बाद में चे गुवेरा लोगो को अर्बेंज़ सर्कार के लिए लामबंद करता रहा ।

उस के बाद चे ग्वेरा मक्सिको आ गया यहाँ उस अख़बार वांटने का काम किया जिस से उस को कुछ समय बाद निकला गया , उस के वाद उस की मुलाकात फेदल कास्त्रो से हुई दोनों ने मिल के साम्राज्वाद , और पूंजीवाद के खिलाफ जंग छेड़ दी , 1956 को अमेरिका फ़ौज ने किउबा के समुंदर के किनारे पर इने घेर लिया यहाँ अमेरिकन आर्मी की इन से इन की जंग हुई , जिस के लिया फेदल कास्त्रो और चे ग्वेरा पहले ही पैसा इकठा कर चुके थे , जहा से ही इनो ने गुर्रिला युद्ध नीति का इस्त्माल पहली वार  किया  जिस में इन के कई साथी मारे गए और २० को बंदी बना लिया , चे गुवेरा ने बाद में किसानो के साथ मिल कर इस जंग को जरी रखा , इस को किउबा की क्रांति वी कहा जाता है।

History of  Che Guevara in hindi 

इस क्रांति में सफल होने के बाद चे गुवेरा ने गरीब लोगो के लिए बहुत काम किए , उस के उनो ने यह क्रांति और वी कई देशो में चलाई , जिस के बारे में इनो ने अपनी किताब “गुरिल्ला युद्ध के नियम” और अमेरिका की यात्रा उपर आधारत “mottercycle dairya “ है ।



चे गुवेरा को Bolvian आर्मी  ने oct 1967 को मार दिया और ग्वेरा के दोनों हाथ काट लिए थे और उस के शव के कुछ अंग बाद में मिले जो वापस किउबा भेज दी गए थे ।

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