साका नीला तारा का इतेहास (History of Opration Blue Star)

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साका नीला तारा का इतेहास (History of Opration Blue Star)
दोस्तों आप ने साका नीला तारा के बारे में सुना होगा लेकिन आप में से बहुत कम लोगो को इस के बारे में पता होगा के आखिर ऐसा क्या हुआ जो पंजाब में इतना काला दौर चला जिस को याद कर के पंजाब के लोग आज वी कांप जाते है , आज हम आप को उस के बारे में सब जानकारी detail में बताएगे , उस से पहले मैं आप को बता देना चाहता हु के मेरा मकसद किसी को भड़काना जा किसी को गलत साबत करना नहीं है मैं सिर्फ जानकारी के लिए आप से इस टॉपिक पर चर्चा करुगा ,


दोस्तों सब से पहले हम पंजाब के इतेहास में जाते हैं जैसे आप को पता है सिक्खों के पहले गुरु श्री गुरु नानक देव जी हुए है , उस के बाद 1605 गुरु अर्जन देव जी ने हरमंदर साहिब की नीव रखी , गुरु रामदास जी ने पवित्र सरोवर की खुदाई कराई और अमिर्त्सर शहर को बसाया , 

महाराजा रंन्जीत सिंह ने हरमंदर साहिब पर सोने की परत चढाई , महराजा का राज पंजाब में 1799-1849 तक रहा उस के बाद पहले और दुसरे अनग्लो युद्ध में सिख हार गे और पंजाब अंग्रेजी राज का हिस्सा बन गया , 1947 को जब भारत और पाकिस्तान दो हिस्सों में बांटे गए तो पंजाब को इस का बहुत नुकसान हुआ , पंजाब की दरया और जमीन सब पाकिस्तान में चले गए .

जब भारत का विभाज़न हुआ

 दोस्तों जब 1956 को भारत के अलग अलग राज बनाए गे उस टाइम पंजाब की जो नदिया थी उस को वी वांट दया गया जिस पर पंजाब अपना हक समजता था , उस वक़्त के नेताओं ने पंजाब की बोली को हिंदी घोषत करने का फैसला किआ क्यों की उस समय हरयाणा और हिमाचल के कुछ इलाके पंजाब में आते थे जिन की बोली हिंदी थी , इस तरेह से पंजाब के लोगो की भारत सर्कार से इस बात को लेकर थोड़ी अनबन हो गई बाद में 1966 में पंजाब को अल्लग राज बना दिया और उस में से हरयाणा को अलग क्र दया और चंडीगढ़ दोनों राजो की राजधानी कर दिया .सरकार के इस फैसले से कुछ लोग खुश थे लेकिन कुछ लोग अपना अलग से देश चाहते थे जिसे उनो ने खालिस्तान का नाम दिया ,

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अन्दपुर साहिब में मीटिंग : जैसे मेने आप को बताया के इस फैसले से कुछ लोग खुश नहीं थे तो भारत सर्कार ने उन लोगो के साथ अन्दपुर में एक मीटिंग राखी 1973 को यह मीटिंग हुई इस में पंजाब के नेताओ ने कुछ मांगे राखी
१ चड़ीगढ़ पंजाब को देना था
2 हरयाणा का कुछ इलाका यहाँ पंजाबी बोली जाती थी वोह पंजाब को देना था
3 जो पंजाब में गरीब तबका है उस की मदद के लिए सरकार पैकेज दे
4 पुरे भारत में गुरदुवारे की देखरेख के लिय एक नेशनल कमेटी बने
5 भारती फोज में सीखो का कोटा बढाया जाए
उस समय केंदर में भाजपा की सरकार थी उनो ने यह फैसले मान लिए लिकिन कुछ समय बाद इलेक्शन हुए और केंदर में कांग्रेस की सर्कार आ गई और इंद्रा गाँधी ने इन फैसलों को सिरे से खारज क्र दिया ,

अकाली दल : वैसे तो अकाली दल 1920 था लेकिन 1973 बाद में यह पॉवर में आ गया और पंजाब में अकाली दल की सर्कार बनी , इंद्रा गाँधी ने पंजाब में अलग पार्टी उभरते देख सीखो की वोट को दो हिस्सों में बांटने का फैसला किआ , उस समय इंद्रा गाँधी और गिआनी जेल सिंह ने भिंडरावाले को मदद दे कर राजनीती में उतरा , भिंडरावाला निरंकारियो से बहुत नफरत करता थ क्यों की वोह दसम गुरु गरंथ को गुरु नहीं मानते थे 1980 को गुरबचन सिंह की हत्या हो  गई हो गई जो निरंकारी  नेता था

 जिस का इलज़ाम भिंडरावाले पर लगा , 1982 में पंजाब में जन्न्गान्ना हुई जिस के अधर पर पंजाब की भाषा को चुनना था के जो लोग जिस भाषा को ज्यादा स्पॉट करेगे वोह पंजाब की भाषा मणि जाएगी , उसी समय लाला जग्गत नरेन ने हिन्दियो को हिंदी भाषा की सपोट करने को कहा जिस का बी बाद में कतल हो गया उस का इलज़ाम वी जरनैल सिंह भिंडरावाले पर लगा , इस के बाद पुरे पंजाब में हिन्दियो और सीखो के वीच काफी तनाव हो गया जिस के तेहत पंजाब में इमरजेंसी लगा दी गई ,

एशियन गेम्स :   1980  को दिली में एसियन गेम्स होनी थी जिस पे पूरी दुनिया की नज़र थी पंजाब के लोगो ने अप्निया मांगे मनवाने के लिया वहां पर्धर्ष्ण करना चाह मगर पंजाब से दिलि जाने वाले हर सिख की तलाशी ली जाती थी कई बड़े अफसर को वि बेइजत किआ गया जो अपने काम को लेकर दिली जा रहे थे मेजर सुभेग सिंह वी उस में से एक था जो बाद में जरनैल सिंह भिंडरावाला से मिल गया थ , इस तरह से पंजाब में स्थिति और विगद गई ,

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हरमंदर साहिब पर हमला: इन सभी घटनाओ के बीच लोग हरमंदर साहिब में इकठे होने लगे सरकार को छक हो गया के वहां कुछ गलत चल रहा है पंजाब में नौजवान जरनैल सिंह के साथ मिल गे , उन लोगो ने अकाल तखत पर काफी गोला बारूद वी इकठा क्र लिया , जिस को ख़तम करने के लिया सर्कार ने आर्मी को अकाल तखत को घरेने की इजाजत दी १ जून 1984 को पंजाब में कर्फु लगा दिया गया और 3 जून को आर्मी ने हरमंदर साहिब पर हमला क्र दिया , जिस से पुरे पंजाब में माहोल बहुत खराब हो गया यह opration 3 से 6 तक चला जिस में सर्कार के मुताबक 250 आर्मी के और ३००० सिख मारे गे ,बाद में 31 oct 1984 को इंद्रा गाँधी की हत्या क्र दी गई , 1,2,3 नोव्म्बेर को दिली में दंगे हुए जिस में हजारो सिख मारे गए

ब्लैक थंडर : उस के बाद केंदर सर्कार ने पंजाब में KPS Gill को लगा दिया जिस ने पंजाब के गांवो और शहरो में से जरनैल सिंह भिंडरावाला के समर्थको को मारा और गिरफ्तार किआ opration black thunder पंजाब में दो बार चला 1986 और 1988 , जिस में काफी human rights को अनदेखा किआ गया , और काफी लोगो के इलज़ाम kps gill पर लगे 


                      

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