Biography of Rupinder Gandhi in hindi ( Real story of gangster Rupinder Gandhi)

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उसका जन् दो अक्टूबर को हुआ था, इसलिए पिता ने नाम गांधी रखने का फैसला किया, रुपिंदर गांधी। 22 वर्ष की आयु तक वह गांव का सरपंच बन गया, राष्ट्रीय स्तर का फुटबॉल खिलाड़ी और चंडीगढ़ की पंजाब यूनिवर्सिटी का छात्र और स्थानीय यूथ आइकन था। गांव के लोगों के लिए वह आदर्श और प्यारा लड़का बाहर हिंसा का पर्याय बन गया, जिसके नाम से भी लोग कांपते थे।
गांधी की जिंदगी में जल्‍द ही चीजें बदल गईं। गांव के प्रसिद्ध लड़के की छोटी लड़ाइयां, गैंग वॉर्स में बदल गईं। सड़कों पर हथियार लहराए जाने लगे और रुपिंदर के लिए जो आदर था, वह भय में बदल गया। लुधियाना जिले के रसूलरा गांव का रहने वाला गांधी अपनेन नाम के उलट हिंसा का पर्याय बन गया।

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गाँधी की मौत: रुपिंदर गाँधी ने बहुत से ऐसे काम किए जिस से उस की दुश्मनी बढ़ती चली गई। गाँधी को लोग अपना मसीहा मानते थे मगर कई लोग ऐसे वि थे जो गाँधी को खत्म करना चाहते थे। क्यों की गाँधी बहुत सी गैंगवार में शामल था जिस के कारण उस पर हत्त्या , मार पीट जैसे कई केस चल रहे थे। जिस के कारण उस की कई पोलिटिकल नेताओ और कुछ गैंगस्टर से दुश्मनी हो गई थी। जिस के कारण वोह लोग गाँधी को खत्म करना चाहते थे। आज से करीब 12 साल पहले उसकी निर्मम हत्‍या कर दी गई। गाँधी को 5 सितम्बर 2003 को अगवा किया गया । उस को एक गांव सलोड़ी में रखा गया । वहां गाँधी को 2 गोलिया मारी गई और उस का मिर्त्तु सरीर भाखड़ा नहर में फेंक दिया गया। , जब गाँधी की डेडबॉडी पुलिस को मिली तो पुलिस ने चोरी छिपे उस का अंतिम संस्कार किया। इस का कारण हम आप को बताते है। असल में गांधी के फैन फोल्वेर बहुत ज्यादा थे पुलिस को यह दर था कि कही अमन शांति न भांग हो जाए इस लिए पुलिस ने रुपिंदर गाँधी का अंतिम संस्कार खुद ही किया। जैसे के हम ने आप को बताया है कि गांधी के अंतिम संस्कार को ले कर वी काफी मतभेद है , रुपिंदर गाँधी के भाई का कहना है कि गांधी की डेडबॉडी पुलिस को नहीं मिली थी यह सब फॉर्मेल्टी के लिए किया गया था। ऐसे ही गाँधी के कई दोस्तों का वी यही कहना है कि पुलिस को डर था कि गांधी के पीछे नौजवान बहुत ज्यादा है जिस के कारण पुलिस ने इस मसले को रफा दफा करने और राज में दंगे भड़कने के डर से सब चोरी छिपे किया। किसी को यह पुख्ता नहीं कराया गया कि वह बॉडी रुपिंदर गाँधी की ही थी। यह कहना है रुपिंदर गाँधी के कई फैन्स और दोस्तों का।10 दिन बाद उस का अंतिम संस्कार किआ गया। वही गाँधी के भाई मनिदर मिंडी का कहना है कि यह अफवाह है उन का कहना है कि गांधी का सरीर नहीं मिला। पंजाबी मूवी 'रूपिंदर गांधी- द गैंगस्‍टर?' बन गई है और यह अगले हफ्ते 11 सितंबर को स्‍क्रीन्‍स पर आ जाएगी। फिल्‍म के नाम पर लगा क्‍वेशन मार्क निश्‍िचततौर पर रसूलरा गांव के उस उधेड़बुन का प्रतिनिधित्‍व करता है कि रुपिंदर प्रसिद्ध था या कुख्‍यात।

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गांव के लोग उसे ऐसे शख्‍स के रूप में याद करते हैं, जो राष्‍ट्रीय स्‍तर का खिलाड़ी था। लड़कियों की शादी में लोगों की मदद करता था और गरीब बच्‍चों के लिए दवाएं लाता था। मगर, गांव के बाहर उसके खिलाफ मारपीट, अवैध हथियार रखने और हत्‍या तक के केस दर्ज थे। हमारे लिए तो यह बड़ी बात है कि हमारे सरपंच रहे गांधी पर फिल्‍म बन रही है।


गांव के छात्र कहते हैं कि वह हमारे हीरो हैं। हम उनकी यूनियन के सदस्‍य बनना चाहते हैं और उनकी याद में काम करना चाहते हैं। गांव में गांधी के फैन्‍स बताते हैं हमें नहीं पता कि वह बाहर क्‍या थे और किन मामलों में वे शामिल थे। हम तो बस इतना जानते हैं कि वह हमेशा बड़ों की इज्‍जत करते थे और गरीबों की मदद करते थे।
रुपिंदर गांधी के भाई की फायरिंग में मौत:
रुपिंदर गांधी के भाई पर कुछ अज्ञात लोगों ने फायरिंग की थी, जिसके बाद उसकी मौत हो गई। दो अज्ञात लोगों ने मनविंदर मिंदी के घर पर  फायरिंग की थी, जिसके बाद मिंदी गंभीर रुप से घायल हो गया था।उसे इलाज के लिए लुधियाना के अपोलो अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

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