History of Veerapan life Biography of Veerapan ( डाकू वीरप्पन का इतहास )

Share:

History of Veerapan life Biography of Veerapan ( डाकू वीरप्पन का इतहास )

veerapan biography history hindi

दोस्तों आज हम बात करने जा रहे हैं आतंक के दूसरे नाम के बारे में जिसका नाम था वीरप्पन। वीरप्पन भारत का बहुत बड़ा डाकू स्मगलर और चंदन तस्कर था। जिस को पकड़ने के लिए तमिलनाडु की सरकार को 20 साल लग गए बड़ी-बड़ी मूछें वाले वीरप्पन ने सरकार के पसीने छोटा दिए थे । जिसके लिए सरकार ने वीरप्पन पर 5 करोड़ का इनाम भी रखा था विरप्पन ने हाथी दांत ,चंदन की लकड़ी, शेर की खाल और इसके अलावा किडनैपिंग जैसी बहुत सी वारदातों को अंजाम दिया।
वीरप्पन को पकड़ने के लिए भारत सरकार को कई साल लग गए जिसमें बहुत से जवानों की जान चली गई और करोड़ों की संपत्ति का नुकसान भी हुआ तो चलिए दोस्तों चंदन तस्कर वीरप्पन की कहानी को हम शुरू से जानते हैं।


वीरप्पन का जन्म 18 जनवरी 1952 को कर्नाटक जिले के गोपीनाथन गांव में हुआ था वीरप्पन को तस्करी का काम विरासत मैं मिला था।  उससे पहले वीरप्पन के पिता एक जाने-माने डाकू और चंदन तस्कर थे वीरप्पन के पिता का जंगल के आसपास की गांव में बहुत खौफ था जिसके चलते वीरप्पन को यह काम अपने पिता और कुछ रिश्तेदारों से विरासत में मिला।

वीरप्पन ने 10 साल की उम्र में क्राइम की दुनिया में कदम रखा जब उसने अपने एक साथी की मदद से दूसरे तस्कर को मार दिया जब इस बात की भनक वन अधिकारियों को लगी तो वीरप्पन ने तीन वन अधिकारियों को भी मार डाला
1970 में वीरप्पन एक चंदन तस्कर गिरोह में शामिल हो गया जिसके बाद उसने हाथी दांत की तस्करी करना शुरू कर दिया।
1983 में वो एक बार पुलिस के हत्थे चढ़ा पुलिस ने उसे एक कमरे में कैद किया लेकिन वह वहां से रहस्यमई तरीके से भाग गया।
1987 में वीरप्पन ने वन अधिकारी चिदंबरम को पहले अगवा किया फिर उसे मौत के घाट उतार दिया जिसके बाद वीरप्पन सुर्खियों में आ गया।
9 अप्रैल 1990 को उसने तीन पुलिस अफसर को मार दिया
जिसके बाद कर्नाटक सरकार और तमिलनाडु सरकार ने वीरप्पन को पकड़ने के लिए एक  स्पेशल टास्क फोर्स का गठन किया ।

History of Veerapan life Biography of Veerapan ( डाकू वीरप्पन का इतहास )

लेकिन 1991 में वीरप्पन ने एक सीनियर पुलिस ऑफिसर का कत्ल कर दिया और उसके सर को  कलम कर दिया  जिसके 3 साल बाद  उस ऑफिसर का सर  जंगल में से मिला था क्योंकि वह उसके काम में दखल दे रहा था।

वीरप्पन  ने हाथी दांत के लिए 2000 हाथियों को मार दिया था।
1992 में वीरप्पन ने रामपुरा थाने में हमला बोल दिया जहां पर उसने पांच पुलिस अफसर को मार डाला और वहां से सारा असला लूट कर भाग गया।
1993 में BSF ने एक मिशन में वीरप्पन को पकड़ने के लिए एक स्पेशल टीम बनाई लेकिन उनके मिशन में सबसे बड़ी बाधा भाषा आ रही थी क्योंकि वह एक दूसरे की भाषा को नहीं समझ पाते थे ।जिसके चलते यह मिशन असफल हो गया और इसमें कई बीएसएफ जवानों की जान चली गई।

veerapan biography history hindi


एक बार वीरप्पन ने बम से एक बस को उड़ा दिया जिसमें 22 लोगों की जान चली गई इसके अलावा उसने 5 एसटीएफ के जवानों को मार दिया। जिसके बाद BSF और एसटीएफ के एक मिशन में वीरप्पन के 9 लोग पकड़े गए।
जिसके बाद 1996 में वीरप्पन ने गुस्से में आकर 19 पुलिस अफसर को मार डाला।

सन 2000 में उसने अपनी जिंदगी का सबसे बड़ा क्राइम किया जिसमें उसने कन्नड़ के मशहूर अभिनेता राजकुमार का अपहरण कर लिया। जिसके बाद पूरा मीडिया इस अपहरण की कवरेज में लग गया और वीरप्पन का आतंक पूरे भारत में फैल गया। 108 दिन के बाद वीरप्पन ने 50 करोड़ की फ्रोती लेकर उसे छोड़ दिया।

2002 में वीरप्पन ने कर्नाटक की एक मंत्री को पहले अपहरण करके फिर मौत के घाट उतार दिया जिसके बाद सरकार ने वीरप्पन को पकड़ने वाले को 5 करोड़ के इनाम की घोषणा की क्योंकि वैसे भी सरकार का वीरप्पन को पकड़ने के लिए 500 करोड़ खर्च हो चुका था।
18 ओकटुबेर 2000 को वीरप्पन और उस के दो साथियो को STF की टीम ने मौत के घाट उतार दिया इस मिशन की अगवाई विजय कुमार कर रहे थे।

तो दोस्तों यह थी वीरप्पन के आतंक की कहानी आपको हमारा आर्टिकल कैसा लगा हमें कमेंट करके जरूर बताएं अपना कीमती समय देने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।

No comments