Story of Pokhran in hindi ( India's first Nuclear test ) smiling budha

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नमस्कार दोस्तों आज इस आर्टिकल में मैं आपको बताऊंगा के कैसे भारत एक परमाणु शक्ति देश बना आज इस दुनिया में कुछ चुनिंदा देश हैं जिनके पास परमाणु शक्ति है और भारत उन देशों में से एक है । जो पहला परमाणु परीक्षण किया गया बो राजस्थान के जैसलमेर से 100 किलोमीटर दूर पोखरण नाम की जगह पर किया गया और इस मिशन के पीछे बहुत ही रोचक कहानी है ।
श्री जवाहरलाल नेहरू से लेकर श्री अटल बिहारी वाजपेई जी तक भारत के कई प्रधानमंत्री रहे सभी ने परमाणु शक्ति पर बहुत जोर दिया मगर जिस समय भारत को जी मिशन पूरा करना था उस समय अमेरिका समेत P5 देशों ने पूरी दुनिया में परमाणु हथियार बनाने पर रोक लगाई हुई थी तो चलिए दोस्तों पोकरण की इस स्टोरी को हम शुरू से जानते है।
Nuclear Weapons Age : दोस्तों 21वीं सदी में लगभग सभी देशो के पास अपने अपने परमाणु हथियार हैं अगर किसी भी समय युद्ध शुरू हो जाता है और उसमें किसी एक देश ने परमाणु हथियार का इस्तेमाल कर दिया तो पूरी दुनिया को खत्म होने में ज्यादा वक्त नहीं लगेगा । आज से कुछ समय पहले जब हम कहते थे कि जो चीज एक झटके में हजारों लोगों को मार सकती है तो वह सिर्फ कहने की बातें थी लेकिन 1940 के बाद यह सच साबित हो गया जब पहली बार अमेरिका ने 1945 में जापान के हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराए और एक ही झटके में पूरे के पूरे शहर तबाह कर दिए गए और उसके बाद वहां पर फैले रेडियेशन की वजह से आने वाले कई सालों तक लोग ऐसे ही मरते रहे।

परमाणु की खोज : परमाणु की खोज सबसे पहले दूसरे विश्वयुद्ध में अमेरिका ने की अमेरिका ने 1945 में परमाणु बम की खोज की जिस मिशन का नाम था प्रोजेक्टर महानतम इसके बाद रूस ने और उसके कुछ समय बाद फ्रांस में परमाणु बम बना लिए थे । 1964 में चाइना ने भी परमाणु हथियार बना लिए जिसके चलते चीन दुनिया का चौथा परमाणु शक्ति देश बन गया चाइना के बाद भारत को भी परमाणु शक्ति पर अपना ध्यान केंद्रित करना था । इससे पहले 1962 में भारत ने चाइना से युद्ध हारा था जिसके चलते भारत को यह लगने लगा कि आप उसे भी परमाणु शक्ति देश बनना होगा।

Homi Jahangir Bhaba : होमी जहांगीर बाबा भारत के एक बहुत ही बड़े वैज्ञानिक रह चुके हैं होमी जहांगीर बाबा ने भारत सरकार को 1940 में ही अपना ध्यान परमाणु शक्ति की ओर बढ़ाने के लिए जोड़ दिया उनका कहना था कि हम परमाणु हथियार तो नहीं मगर परमाणु से बिजली का उत्पादन कर सकते हैं इसलिए हमें जरूरी नहीं है कि परमाणु से हथियार ही बनाने हैं हम इसका इस्तेमाल बिजली के लिए कर सकते हैं जिस लिए उन्होंने टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च और बाबा एटॉमिक रिसर्च सेंटर की नींव रखी आज भी भारत के यह दो बहुत बड़े रिसर्च सेंटर है । जहां पर आज भी परमाणु के ऊपर रिसर्च हो रही है और इन्हीं दो इंस्टिट्यूट से भारत के लिए बहुत बड़े बड़े वैज्ञानिक निकले हैं।

Pokhran 1 : भारत ने अपना पहला परमाणु परीक्षण 18 मई 1974 को किया जिसका नाम था स्माइलिंग बुद्धा क्योंकि उस दिन बुद्धा पूर्णिमा थी । मिशन पूरा होते ही भारत दुनिया में शटा ऐसा देश बन गया जिसके पास परमाणु बनाने की टेक्नोलॉजी आ चुकी थी । इस मिशन  में भारत के 3 बड़े वैज्ञानिक होमी सेठना ,राजा रमन्ना और बसंती नाग चौधरी थे। इस मिशन के सक्सेसफुल होने के बाद उस समय के प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने  दुनिया को यह विश्वास दिलाया कि हम परमाणु का इस्तेमाल शांति के कामों के लिए करेंगे जैसे की बिजली बनाना हम परमाणु से कोई परमाणु हथियार नहीं बनाएंगे । हालांकि कि हम ऐसा कर सकते हैं हमारे पास परमाणु बनाने की टेक्नोलॉजी है मगर हम ऐसा नहीं करेंगे इसके बाद पूरी दुनिया में भारत के लिए बहुत नाराजगी पाई की पश्चिमी देश इससे बहुत नाराज थे

Second Nuclear Test : दोस्तों जहां पर सवाल यह पैदा होता है कि जब हमने पहली परमाणु परीक्षण कर लिया था तो हमें दोबारा इसका परीक्षण करने की क्या जरूरत थी हम आपको बता दें कि जो पहला परीक्षण था उसमें भारत ने सिर्फ परमाणु टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया था अब हमारा मिशन परमाणु हथियार बनाना था के परमाणु से मिसाइल कैसे बनाई जाए और उससे बम को कैसे बनाया जाए यह हमारा मिशन था
मगर उस समय इमरजेंसी के चलते यह पूरा न हो सका उस कर कर प्रधान मंत्री इस मे ज्यादा दिलचस्पी नही लेते थे जिस के चलते 1995 में पी वी नरसिम्हा राव के समय इस मिशन को दोबारा शुरू किया गया 


परीक्षण का पकड़े जाना : जब भारत दोबारा इस मिशन पर काम करना शुरू किया तो हमारे यह टेस्ट दो बार पकड़े गए क्योंकि उस समय पूरी दुनिया में परमाणु हथियार बनाने पर रोक लगाई गई थी जिसके चलते अमेरिका को भी शक था कि भारत परमाणु टेक्नोलॉजी के बाद परमाणु हथियार भी बनाएगा जिसके चलते अमेरिका की खुफिया एजेंसी सीआईए ने अपनी सिपाई सेटेलाइट से पूरी नजर बनाई हुई थी जब भी भारत जय टेस्ट करने जाता तो अमेरिका की तरफ से फोन आ जाता कि अगर आप ऐसा करोगे तो इसका अंजाम अच्छा नहीं होगा। जिस के लिए भारत को दो बार यह टेस्ट बीच मे रोकने पढे। 



Pokhran 2 : आखिर में भारत ने 11 मई 1998 को 3 और 13 मई 1998 को 2 परमाणु डिवाइसेस का परीक्षण किया गया। उस समय भारत के प्रधान मंतरी अटल बिहारी वाजेपयी थे। जिस में  Dr. APJ Abdul kalam , Rajgopal chidambram और Anil Kakodkar मेन विज्ञानक थे इस के इलावा और भी बहुत विज्ञानक थे। इस मे खास बात यह थी यह मिशन बहुत ही चोरी से किया गया। ज्यादा काम रात को होता था ,  जब वहां पर आंधी चलती थी तो इस काम को किया जाता था त जो सेटलाइट की नज़र में न आया जाए। जो मुखय विज्ञानक थे वो आर्मी की वर्दी पहन कर जाते थे। एक एक कार विज्ञानक टेस्ट वाली जगह पर जाता था। इस मे खास बात के टेस्ट वाली जगह से कुछ दूर एक स्पेशल क्रिकेट ग्राउंड बनाया गया जिस में आर्मी के हज़ारो जवान खेलते रहते थे। जिस से सेटलाइट से देखने पर यह लगता था के यहां पर कोई खेल टूर्नामेन्ट चल रहा है। 

दुनिया में नाराजगी: 11 मई 1998 कि शाम को भारत के प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेई जी ने TV पर मुझे अनाउंस कर दिया कि भारत ने परमाणु हथियार बना लिए हैं उसके बाद 13 मई को अमेरिका ने भारत के व्यापार पर रोक लगा दी इसके अलावा अमेरिका की तरफ से जो भी इम्युनिटी ऐड आती थी वह बंद हो गई इसके अलावा भारत जो भी दक्षिणी देशों के साथ व्यापार करता था वह बंद कर दिया गया मगर कुछ ही समय बाद कारगिल का युद्ध शुरू हो गया जिसमें पूरी दुनिया को जय लगा कि भारत इस युद्ध में परमाणु हथियार का इस्तेमाल जरूर करेगा लेकिन भारत ने ऐसा नहीं किया जिसके चलते भारत ने दुनिया को यह विश्वास दिला दिया के भारत कभी भी पहले परमाणु हथियार का इस्तेमाल नहीं करेगा अगर पूरी दुनिया परमाणु हथियार नष्ट करती है तो उनके साथ भारत भी अपने परमाणु हथियार नष्ट कर देगा जिसके 2 सालों बाद ही भारत पर लगाई गई सभी रोक हटा दी गई और आज भारत एनएसजी को छोड़कर सभी परमाणु ग्रुप का मेंबर है अगर आपने इस कहानी को बॉलीवुड स्टाइल में देखना है तो इस पर जॉन अब्राहम की फिल्म परमाणु भी बन चुकी है

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