Mintu gurusaria biography in hindi( डाकुआँ दा मुंडा ) मिन्टू गुरुसरिया की जीवनी

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 Mintu gurusaria biography in hindi( डाकुआँ दा मुंडा )

दोस्तों आज हम जिस हीरो की बात करने जा रहे हैं। उसने अपनी जिंदगी में वह करके दिखाया है,
 जो हर किसी के बस में नहीं होता कहने को तो वह एक साधारण से घर का लड़का था लेकिन आज वह दूसरे लोगों के लिए एक प्रेरणा दायक इंसान बन चुका है ।
जी हां दोस्तों मैं बात करने जा रहा हूं पंजाबी जर्नलिस्ट मिंटू गुरु सरिया के बारे में
जिन्होंने अपनी जिंदगी में बहुत से बुरे काम बुरे समय और बुरे लोगों के साथ बताने के बावजूद आज दूसरे लोगों के लिए प्रेरणादायक बन चुके हैं।
mintu gurusaria


आपने बहुत से सेलिब्रिटी की जिंदगी पर बनी कई फिल्में देखी होगी लेकिन मिंटू गुरु सरिया ना तो बहुत बडा फिल्मी सितारों या बड़ा खिलाड़ी या वैज्ञानिक नहीं है
लेकिन फिर भी उसकी जिंदगी पर एक पंजाबी मूवी बनकर तैयार हो चुकी है दोस्तों कोई भी फिल्म उस शख्स की जिंदगी पर ही बनाई जाती है ।
जिसने अपनी जिंदगी में कुछ बड़ा किया हो उसी तरह मिंटू गुरु सरिया ने भी जैसे अपनी जिंदगी में उतार चढ़ाव देखें और आखिर में Khalnayak से एक नायक बनकर उभरे आज हम उस हीरो की जिंदगी को शुरू से जाने गे।

जन्म और बचपन : मिंटू गुरु सरिया का पूरा नाम बृजेंद्र सिंह मिंटू है उसका परिवार पाकिस्तान से आकर पंजाब में बसा था
 पाकिस्तान में उनका गांव राजा जंग था मिंटू गुरु सरिया का जन्म 26 जुलाई 1979 को पंजाब के फाजिल्का के गुरुसर गांव में हुआ ।
जो कि राजस्थान के बॉर्डर पर लगता है बॉर्डर पर बसने के कारण ही यहां पर नशा ज्यादा मात्रा में मिलता है ।
मिंटू के पिता का नाम बलदेव सिंह और माता का नाम जसवीर कौर है। मिन्टू के दादा और पििता नशा तस्करी का काम करते थे। जिन के लिए उन को डाकू कह कर बुलाया जााता ।

बचपन में मिंटू पढ़ाई में बहुत होशियार था जिसके चलते उसने अपनी पढ़ाई गांव के स्कूल में ही पूरी की और उसके बाद आगे की पढ़ाई के लिए अबोहर दाखिला लिया।
अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई के लिए मिंटू ने मलोट दाखिला ले लिया
लेकिन यहां पर बुरे लोगों की संगत के चलते उसे नशेे की लत लग गई मिंटू ने अपनी एक इंटरव्यू में बताया कि एक समय ऐसा था जब वह 1 दिन नशे कि 100 गोली खा लेेेता था।

उस वक़्त मिन्टू ने अपनी ज़िंदगी से भड़क कर गलत रास्ते पर चल पड़े थे । नशे के लिए किसी को मारना लूट पाट करना ऐसे काम उन के लिए आसान थे।

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कोई भी उन को नशे का लालच दे कर ले जाता था और अपना काम करा लेता था।
इसी दोष में उन के पिता को भी एक वार जेल हो गई और उन की जेल में ही मौत हो गई।

लेकिन इसी के साथ साथ मिन्टू के दिल मे अच्छा इंसान बनने की चाहत भी बरकरार थी।

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अपनी जिंदगी के कई साल ऐसे ही बर्बाद करने के बाद एक वार उन का एक्सीडेंट हो गया
और डॉक्टर ने उसे कई महीने आराम करने के लिए कहा । मिन्टू अपना समय गुजरने के लिए कुछ किताबें पड़ता रहता जिन का उस की ज़िंदगी पर बहुत गहरा असर पड़ा। 
बड़े बड़े शूरवीरो की कहानिया पड़ कर उन के मन मे यह ख्याल आया के में ऐसे नही मरना मुझे कुछ करना है।
जिस के चलते उस ने पत्रकारी क्षेत्र में आने का फैसला किया। और आज मिन्टू पंजाब के जाने माने पत्रकार हैं । 

Mintu gurusaria faimly :


 मिन्टू ने अपनी दोस्त मनदीप कौर के साथ शादी कर ली और उन का एक बेटा भी है।
मिन्टू ने अपनी ऑटोबायोग्राफी में बताया के उन को अपनी ज़िंदगी मे अच्छा बनाने के लिए उन की पत्नी का बहुत सहजोग मिला है।

Books : 

मिन्टू की सब से ज्यादा मशहूर किताब उन की अपनी ज़िंदगी पर आधारित "डाकुआँ द मुंडा " है।
जिन में उनोह ने अपनी ज़िन्दगी की कहानी लिखी है। इन के इलावा एक और किताब ज़िन्दगी के आशिक़ भी लिखी है। 

दोस्तो यह थी एक आम लड़के की कहानी के कैसे उस ने अपने जज्बे से उस नरक भारी ज़िन्दगी से निकल कर दूसरे लोगो के सहमने एक मिसाल पेश की है। आज मिन्टू पंजाब में नशे के खिलाफ एक मुहिम चला रहे हैं। इस के इलावा उन की जीवनी को पढ़ कर बहुत से लोग प्रेरित हुए हैं। हम इस महान इंसान को सलाम करते हैं।

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