Hanging punishment rules-फांसी देने के नियम

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हमारे देश मे फांसी देने की सज़ा अभी बरकरार है। बहुत सारे देशो में इस पर रोक लगा दी गई है। जब कोई अपराधी बहुत ज्यादा घिनोना अपराध करता है तो हमारे कानून के हिसाब से उस को फांसी की सज़ा सुनाई जा सकती है। 

Hanging punishment rules-फांसी देने के नियम
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इस कि उदहारण हाल ही में हुआ निर्भया कांड है। 16 दिसम्बर 2012 की रात को बस में लड़की के साथ बलात्कार होता है। 29 दिसम्बर को उस लड़की की मौत हो जाती है। डॉक्टरों की रिपोर्ट में आता है के उस मासूम के साथ बलात्कार के साथ अनमनुखी विवहार वी किया गया । जिस के बाद उस की मौत हुई।
उस के बाद अदालत ने 4 दोषियो को फांसी की सज़ा सुना दी  जिस में मुख्य दोषी राम सिंह ने जेल में ही आत्म हत्या कर ली।
फांसी की सज़ा बहुत की कम केसों में दी जाती है। ज्यादातर केसों में फांसी की सज़ा को उम्रकैद में  बदल दिया जाता है।
फांसी की सज़ा देते समय जेल प्रशासन के कुछ नियम होते हैं तो चलिए हम जानते हैं के वोह नियम क्या है।

फांसी देने के नियम

  •  अपराधी को फांसी सूरज उदेह होने से पहले क्यों दी जाती है ?

जिस अपराधी को फांसी की सज़ा होती है वोह आत्मिक रूप से उस दिन ही मर जाता है जिस दिन फांसी की सज़ा का ऐलान होता है। 

     हमारे कानून के हिसाब से अपराधी को ज्यादा इंतज़ार कराना ठीक नही समझा जाता । इस लिए उस तरीक की सुबह ही फांसी दी जाती है।

दूसरा कारण है के फांसी के बाद उस अपराधी के परिवार वालों को शव का अतन्म संस्कार करने का समय मिल जाता है।

तीसरा कारण यह है के फांसी देने की सज़ा को सुबह इस लिए निपटा दिया जाता है त जो जेल प्रशासन के दूसरे कामों में कोई बदलाव न हो।

  •  जज पेन की निब क्यों तोड़ता है?

फांसी की सज़ा सुनाना जज के लिए भी बहुत कठिन होता है । आगे से ऐसा जुर्म न हो जज इस लिए पेन की निब को तोड़ देता है।

दूसरा बड़ा कारण यह है के भारत के कानून के मुताबिक अगर एक वार जज ने फांसी की सज़ा सुना दी ,
 तो उस के बाद जज के पास भी यह अधिकार नही है कि वो सज़ा को बदल सके जा उस पर दुबारा सुनवाई कर सके। इस लिए जज Death लिखने के बाद पेन की निब तोड़ देता है।

  • फांसी देने से पहले जल्लाद अपराधी के कान में क्या कहता है?

किसी भी जल्लाद के लिए किसी की जीवन लीला समाप्त करना आसान नही होता । जल्लाद फांसी देने से पहले अपराधी से अपने इस काम के लिए माफी मांगता है।
 " हिन्दू को नमस्ते मुस्लिम को सलाम , हमे माफ करना भाई हम तो हैं हुक्म के गुलाम " यह शब्द कह कर जल्लाद अपराधी को फांसी दे देता है।

  • अपराधी को कितना समय फांसी के फंदे पर लटकाया जाता है?

जब अपराधी को फांसी दी जाती है तो एक डॉक्टरों की टीम से वक़्त वहाँ मजूद रहती है।
 अमूमन अपराधी को 10 मिंट तक फंदे पर लटकाया जाता है।
 उस के बाद उत्तर लिए जाता है , मगर उस से पहले डॉक्टरों की टीम Check करती है। जब डॉक्टर अपराधी को मरा घोषित कर देते हैं तो अपराधी को फंदे से उतार लिया जाता है।

  • फांसी से पहले अपराधी आखरी इच्छा में क्या मांग सकता है ?

हमारे कानून के हिसाब से अपराधी को फांसी देने से पहले उस की आखरी इच्छा पूछी जाती है। 
अक्सर दोषी अपनी आखरी इच्छा में परिवार वालो से मिलने की इच्छा प्रगट करते हैं।
 मगर फिर भी अगर कोई अपराधी कोई और इच्छा रखता है तो उसकी इच्छा पूरी करने से पहले जेल प्रशासन अपने मेनू में देखता है। जेल प्रशासन वही इच्छा पूरी कर सकता है जो उस के मेनू में है।

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