History of Qila Mubarak Fort Bathinda - किला मुबारक का इतिहास

Share:
History of Qila Mubarak Fort Bathinda - किला मुबारक का इतिहास:   बठिंडा का किला मुबारक भारत का सब से पुराना किला है। इस मे समय समय पर कई राजा महाराजा आए। सिखों के दसवें गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह भी इस किले में आए थे।
 
यह किला भारत पर होने वाले बड़े आक्रमणों का गवाह भी रहा है।
दिल्ली भारत की राजधानी होने के कारण उत्तर पश्चिम से हमलावर बठिंडा के रास्ते भारत पर हमला करते थे ।जिस से बचने के लिए उस समय के राजाओं ने इसका निर्माण करवाया।
History of Qila Mubarak Fort Bathinda - किला मुबारक का इतिहास


इसके लिए को रजिया सुल्तान किले के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि महारानी रजिया सुल्तान को इस किले में बंदी बनाकर रखा गया था।

आजकल पुरातत्व विभाग के सहयोग से इस किले का दोबारा निर्माण का काम चल रहा है। जिसके कारण इसके कई  हिस्सो को सैलानियो के लिए बंद कर दिया गया है।
किला मुबारक को लेकर इतिहासकारों के अलग-अलग मतभेद है

History Of Qilla Mubarak :



कहा जाता है कि किला मुबारक का निर्माण 90 ईस्वी से लेकर 110 ईस्वी के बीच कुषाण वंश के समय किया गया था।
राजा दाब ने उस समय के उत्तर पश्चिम के राजा कनिष्क के साथ मिलकर इस किले का निर्माण करवाया।

1000 ईस्वी में बाल आनंद के पुत्र भाटी राव ने इस किले पर हमला कर इसको जीत लिया। भाटी राव को ही बठिंडा का संस्थापक भी माना जाता है।


1189 मैं महमूद गजनबी ने इस किले पर हमला किया लेकिन इसके 13 महीने बाद ही पृथ्वीराज चौहान ने महमूद गजनबी से इसे जीत लिया 1 साल तक पृथ्वीराज चौहान का इस किले पर कब जा रहा।

1706 मैं सिख धर्म के संस्थापक श्री गुरु गोविंद सिंह जी इस किले में आए ।

1754 में पटियाला के लोकप्रिय राजा अल्लाह सिंह ने इस किले पर हमला कर इसे जीत लिया।

1835 महाराजा कर्मा सिंह में इस किले में गुरदुवारा का निर्माण कराया।

कहा जाता है कि उत्तर पश्चिम से होने वाले हम लोगों से बचने के लिए बठिंडा सुनाम और कैथल में किलो का निर्माण कराया गया था।
एक बार बाबर इस किले में आया जो अपने साथ कुछ तोपें भी लेकर आया था। जिस में से 4 तोपें आज भी यहां मजूद हैं। यह तोपें सोने, चांदी , लोहा और पीतल की बनी हैं।

History of Razia Sultan :


किले का सबसे दिलचस्प इतिहास रजिया सुल्ताना के साथ जुड़ा है। कुतुबुद्दीन ऐबक की जगह पर रजिया सुल्तान 1230 में दिल्ली की गद्दी पर बैठी थी। भारत के इतिहास में रजिया सुल्तान पहली ऐसी महिला है जिसने दिल्ली सल्तनत पर राज किया है।


बठिंडा के राजा अल्तुबनी ने रजिया सुल्तान के खिलाफ विद्रोह कर दिया इस विद्रोह को दबाने के लिए रजिया ने बठिंडा पर हमला किया। जिसमें उसे बंदी बना लिया क्या और उसका गुलाम प्रेमी याकूब मारा गया और रजिया को किले में बंदी बना दिया गया।

14 अक्टूबर 1240 को रजिया की मौत हो गई। रजिया की मौत को लेकर इतिहासकारों में मतभेद है कुछ इतिहासकारों का कहना है कि रजिया ने किले की दीवार से कूदकर जान दे दी थी।


कुछ इतिहासकारों का कहना है कि बठिंडा का राजा रजिया का बचपन का दोस्त था। रजिया के अपने गुलाम के साथ प्रेम संबंध को देखकर ही उसने विद्रोह किया था लेकिन रजिया के गुलाम प्रेमी की मौत के बाद रजिया ने बठिंडा के राजा के साथ विवाह कर लिया और उन दोनों को कैथल के पास लुटेरो के गिरोह ने मार दिया था।

1253 में बठिंडा का किला रजिया के भाई सुल्तान मसीरुदीन मुहमद शेरखान ने अपने कब्ज़े में ले लिया था। उस ने किले की पुनर निर्माण का काम भी चलाया।

दोस्तो हमे उम्मीद है के हमारे द्वारा दी गई जानकारी आपको अच्छी लगी होगी जय जानकारी हमने इंटरनेट से हासिल की है । अगर आप को Qila Mubarak के बारे में और जानकारी है जिसको हमने आर्टिकल में नहीं शेयर किया तो कृपया हमें कमेंट करके जरूर बताएं और आप ने अभी तक किला मुबारक विजिट किया है या नहीं हमें कमेंट में यह भी बताएं अपना कीमती समय देने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद।

No comments