Conman Natwarlaal Biography | History | Real Story in Hindi - ठग नटवरलाल की जीवनी

Share:
Conman Natwarlaal Biography | History | Real Story in Hindi - ठग नटवरलाल की जीवनी :  मिथिलेश कुमार श्रीवास्तव एक ऐसा नाम है जिस नाम को सुनकर आपको शायद कोई चेहरा याद नहीं आ रहा होगा लेकिन वहीं अगर नटवरलाल नाम लिया जाए तो आप लगभग मुहावरा बन चुके इस नाम को कभी भूल ही नहीं पाए होंगे । 
Conman Natwarlaal Biography | History | Real Story in Hindi - ठग नटवरलाल की जीवनी

अपनी संगीन और चालाकी भरी ठगी से एक समय काफी मशहूर नटवरलाल को ढूंढने के लिए भारत की पुलिस ने एड़ी से चोटी तक की ताकत लगा दी थी । लेकिन यह ठग जितनी रहस्यमई तरीके से हिरासत में लिया जाता था उतने ही नाटकीय तरीके से फरार भी हो जाया करता और जो सबसे ज्यादा हैरान कर देने वाली बात तो यह है कि यह भारत का एकमात्र ऐसा ठग था जिस ने ठगी के लिए न तो कभी किसी हथ्यार का इस्तेमाल किया और ना ही किसी से पैसे छीने ।



नटवरलाल सिर्फ और सिर्फ अपनी बातों के तीर चलाता और सामने वाला इंसान खुद फंस जाता । तो चलिए दोस्तो आज हम जानते हैं नटवरलाल की कहानी ।

History of Natwarlaal 


तो इस कहानी की शुरुआत होती है 1912 में जब बिहार के एक छोटे से गांव मंगरा में नटवरलाल का जन्म हुआ । बताया जाता है कि नटवरलाल का बचपन से ही पढ़ाई में ज्यादा मन नहीं लगता था लेकिन खेल में वह सब से आगे थे । अपने स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद उस ने  वकालत में डिग्री हासिल की और वकील बन गया ।

 वकालत की पढ़ाई का इस्तेमाल उस ने ठगी के काम के लिए किया और वह अपनी चालसाजी और ठगी को अंजाम देने के लिए नोबेल की कहानियों से आइडिय लिया करता था ।  हर बार नटवरलाल अपने अनोखे अंदाज और अलग-अलग नाम और पहचान के साथ ठगी करता और यही वजह थी के लोग उसे पकड़ने में नाकाम रहते ।

बताया जाता है कि उसके शिकार में ज्यादातर तो मिडल क्लास के सरकारी कर्मचारी होते थे । जा छोटे शहर के पैसे वाले व्यापारी जिनसे नटवरलाल ताजमहल वेचने तक का सौदा कर लेता था और यह तो छोटे शहर के व्यापारियों से तीन बार ताजमहल बेचने में भी सफल हो गया था ।


Conman Natwarlaal Biography | History | Real Story in Hindi - ठग नटवरलाल की जीवनी


 इसके अलावा उसने राष्ट्रपति भवन और संसद भवन को भी नीलाम कर दिया था । कहतें हैं कि नटवरलाल ने अपने जीवन काल में  52 से ज्यादा नामों का इस्तेमाल करके अरबों खरबों रुपए की ठगी को अंजाम दिया । 

यहां तक कि अपनी गजब की कमेंसिंग पावर और खुद पर अटूट विश्वास की वजह उस ने सरकार को यह दावा किया था कि अगर सरकार उसे आगिआ दे तो वो भारत का सारा विदेशी कर्ज़ उतार सकता है ।

आपको यह जानकर हैरानी होगी कि नटवरलाल ने खुद का एक स्कूल सिर्फ इसलिए खोला था ताकि वह बच्चों के घर का फाइनेंसियल कंडीशन जान सके और फिर आमिर घरों से लाखों रुपए ठग कर फरार हो गया था ।

इसके अलावा नटवरलाल शॉर्ट सिगनेचर करने में भी बहुत ही माहिर था वह अपने टैलेंट की वजह से देश के नामी व्यापारियों को अपना निशाना बनाते जिस में  टाटा, बिरला, धीरूभाई अंबानी को भी अपना निशाना बना चुका था और उसने बहुत सारे लोगो को जाली चेक और ड्राफ्ट दे कर लाखों की ठग्गी कर गया था ।
Conman Natwarlaal Biography | History | Real Story in Hindi - ठग नटवरलाल की जीवनी
नटवरलाल दुवारा दिया गया एक चेक 


नटवरलाल100 से भी ज्यादा मामलों में दोषी पाया गया था । जिसकी वजह से 8 राज्यों की पुलिस उसे पूरी शिद्दत के साथ ढूंढ रही थी । नटवरलाल को उसके ठगी के लिए 113 साल की सजा सुनाई गई लेकिन उस ने सिर्फ 20 साल ही जेल की हवा खाई ।

Conman Natwarlaal Biography | History | Real Story in Hindi - ठग नटवरलाल की जीवनी

वह 9 बार गिरफ्तार किया गया था लेकिन कैसे भी करके हर बार नए नए तरीके से वह फरार हो जाता और उसके फरार हो जाने की वजह से कई सारे सिपाही और थानेदार भी निलंबित किए गए थे । आखिरी वार वह 1996 में ग्रिफ्तार किया गया था । उस वक़्त उस की उम्र 84 साल थी लेकिन इस उम्र में भी वोह पुलिस की गरिफ्त से भागने में सफल रहा ।

नटवरलाल ने अपने किसी भी काम को लेकर कभी शर्मिंदगी महसूस नही की । वह कहता था कि वो लोगो से कभी हथ्यार दखा कर पैसे नही लेता । उस का कहना था कि " मैं लूट कर गरीबों को देता हूं और मैंने कभी भी किसी हथियार का इस्तेमाल भी नहीं किया है ।

Conman Natwarlaal Biography | History | Real Story in Hindi - ठग नटवरलाल की जीवनी


 लोगों से बहाने बनाकर पैसे मांगे और लोग हाथ जोड़कर पैसे देते गए" और ऐसे अपराधों को अंजाम देने के बावजूद नटवरलाल के फैन्स की कमी नहीं थी ।
Conman Natwarlaal Biography | History | Real Story in Hindi - ठग नटवरलाल की जीवनी
नटवरलाल हिरासत के वक़्त 


यहां तक कि बिहार में उसके गांव के लोगों की मांग थी के नटवरलाल नाम का एक समार्ग बनना चाहिए ।  लोगों का मानना था कि भला आदमी था वह गरीबो की मदद करता था । नटवरलाल की मृत्यु को लेकर अभी भी असमंजस है।
  नटवरलाल के भाई गंगा प्रसाद श्रीवास्तव का कहना है कि 1996 में उन्होंने नटवरलाल का अंतिम संस्कार कर दिया था लेकिन उनके वकील बताते हैं कि 25 जुलाई 2009 को उनकी मृत्यु हुई और इसीलिए उन्होंने 2009 में ही कोर्ट में अनुरोध किया कि नटवरलाल के खिलाफ लगे  सभी अपराधों को खत्म कर देना चाहिए ।

दोस्तो अगर आप को हमारा लेख अच्छा लगा तो इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर करें और हमारे फ़ेसबुक पेज को जरूर लाइक करें ।

No comments