History of Internet, Domain and Website in Hindi

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History of Internet, Domain and Website in Hindi  आज के इस व्यापक और आधुनिक मायाजाल सामान Internet का मूल Cold War है । 1960 - 70 के दशक में Cold War अपने लेवल पर था और रशिया और अमेरिका दोनों देशों के सर पर परमाणु हमले की तलवार लटक रही थी । अगर परमाणु बम का हमला होता है तो इन हालत में निकलने वाले विकिरण के कारण संदेश का आदान-प्रदान ही खत्म हो जाएगा  और आप अपने ही देश के किसी सेना के डिवीजन को या नेता को कोई भी सीक्रेट संदेश नहीं भेज सकते ।

 इन सब खतरों को अमेरिका ने भी भांप लिया था इसलिए अमेरिका ने एक ऐसी कार्यप्रणाली बनाने की सोची जो अंडरग्राउंड केबल के द्वारा एक दूसरे से जोड़ती हो और कोई सन्देश आसानी से एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाया जा सके । और अमेरिका के राष्ट्रपति देश के किसी भी कोने के किसी भी बंकर में हो फिर भी उनको कांटेक्ट करके उनके डिसीजन को लागू किया जा सके ।
History of Internet, Domain and Website in Hindi
History of Internet, Domain and Website in Hindi 

History of Internet, Domain and Website in Hindi  


अमेरिका की सरकार की यह भी दरखास्त थी कि इसका कोई केंद्र ना हो । इसलिए एक ऐसी संचालित कार्यप्रणाली बनानी थी जिसे पावर ऑन करते ही देश के सारे कंप्यूटर एक दूसरे से जुड़ जाए और किसी एक कंप्यूटर के खराब होने पर पूरे नेटवर्क पर कोई असर न पड़े ।


History of Internet :
इंटरनेट का इतिहास 


आखिरकार ऐसे नेटवर्क को बनाने के लिए पेंटागन के ARPA यानी एडवांस रिसर्च प्रोजेक्ट एजेंसी को नियुक्त किया गया । ARPA और अमेरिकन सरकार ने मिलजुल कर एक ऐसे ही नेटवर्क का सर्जन किया जिसे शुरुआत में ARPNET कहा गया और अमेरिका के सभी खास कंप्यूटर्स को ARPANET से जोड़ दिया गया । साल 1990 आते-आते कोल्ड वर खत्म होने की कगार पर आ गया और उस वक्त परमाणु युद्ध होने के बाद भी हट चुके थे । इसलिए डिफेंस के लिए खोजी गई इस टेक्नोलॉजी को National Science Foundation को सौंप दिया गया और यह आधुनिक आविष्कार अब सार्वजनिक बन चुका था ।

History of Domain 
डोमेन का इतिहास 


जो 1990 आते-आते ARPNET की जगह INTERNET के नाम से जाना जाने लगा । अब तक INTERNET में कोई Website या Domain जैसी चीज नहीं थी क्योंकि 1990 तक एक कंप्यूटर को दूसरे कंप्यूटर से केबल के द्वारा जोड़ा जाता था । हमें कोई डाटा चाहिए तो डाटा किस कंप्यूटर में है उसका हमें पता होना चाहिए अगर हमें पता नहीं है के कौन सा डाटा किस कंप्यूटर में है तो हम उसे नहीं पा सकते इस तरीके से और ARPNET काम करता था ।


1984 में डॉक्टर जॉन पोस्टल Domain Registration बनाया जिसे आज हम .Com, .org, .in के नाम से जानते हैं । इसके जरिए से वेबसाइट बनाई जा सकती थी और इसके बाद वेबसाइट बनने लगी लेकिन वेबसाइट सिर्फ शहरों तक ही सीमित थी ।

History of World Wide Web (WWW)
डब्ल्यू डब्ल्यू डब्ल्यू का इतिहास 


लेकिन 1991 में Tim Berners-Lee नाम के वैज्ञानिक ने इस समस्या को हमेशा के लिए सुलझा दिया । जब उन्होंने w.w.w. यानी वर्ल्ड वाइड वेब की खोज की कुछ ही समय में डब्ल्यू डब्ल्यू डब्ल्यू इंटरनेशनल नेट बन गया और सारे डोमिन इसी नाम से रजिस्टर्ड होने लगे।
History of Internet, Domain and Website in Hindi
Tim Berners-Lee

History of Wi Fi 
वाई फाई का इतिहास 


1991 के बाद इंटरनेट पर कोई भी चीज छुपी नहीं रही । इंटरनेट की कामयाबी की तरफ 1995 में इंटरनेट स्पीड 28.8 kbps थी और उस समय इंटरनेट यूज करने वालों की तादात लगभग एक करोड़ साठ लाख थी । एक अनुमान के मुताबिक उस समय दुनिया के 0.2% लोग इंटरनेट इस्तेमाल कर रहे थे लेकिन 22 साल बाद आज 2017 में इंटरनेट के एवरेज स्पीड 5.6 mbps है और दुनिया में तकरीबन 307 करोड लोग इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं ।

एक अनुमान के मुताबिक दुनिया के 40% लोग इंटरनेट से आपस में जुड़े हुए हैं और इन्हीं 22 सालों में इंटरनेट की स्पीड में 195% बढ़ोतरी हुई है ।

History of Internet, Domain and Website in Hindi 

1999 में Dr. John O'Sullivan ने 18 साल की उम्र में ही वायलेंस फर्टिलिटी नेटवर्क बनाया जिसे आज हम WiFi से जानते हैं । वॉइस ऑफलाइन नेटवर्क कनेक्शन में मोबाइल और कांटेक्ट में बदलकर इंटरनेट को बिना वॉइस शेयर करना संभव कर दिया । यह तो बस एक नेटवर्क की शुरुआत थी इंटरनेट की वजह से दुनिया में कहीं अविष्कारों ने जन्म लिया और कई खोजें की गई ।


Who is Owner of Internet 
इंटरनेट का असली मालिक कौन है


सच बात कहूं तो इसका कोई मालिक नहीं है इसे उपयोग करने वाले सब उसके मालिक है क्योंकि इंटरनेट का आविष्कार अमेरिका के पब्लिक सेक्टर में हुआ है । जिसमें अमेरिकन डिफेंस और रिसर्च यूनिवर्सिटी के पैसे लगे थे । अगर इसका आविष्कार कैसे प्राइवेट सेक्टर में किया होता तो कंपनियां अपने नाम की पेटर्न बनवाकर नफाखोरी शुरु कर देती । लेकिन पूंजीवादी देश की सरकार या सरकार के दुवारा चलने वाली यूनिवर्सिटी को बिजनेस में कोई दिलचस्पी नहीं होती । आगे भी FM Radio और TV की खोज सरकार के पैसों द्वारा की गई मगर बाद में इन खोजों को प्राइवेट व्रतों के लिए ट्रांसफर कर दिया गया ।

History of ISP ( Internet Service Provider )


परिणाम स्वरूप विश्व में कई सारे छोटे-छोटे इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर यानी आईएसपी शुरू हो गए जिन्होंने अपने लोकल नेटवर्क को वैश्विक इंटरनेट के साथ जोड़ दिया और इस तरह इंटरनेट की जाल पूरी दुनिया में फैल गई यह वही प्राइवेट सर्विस प्रोवाइडर है जो हमसे डाटा के लिए कुछ पैसे लेते हैं ।

Interesting Fact About Internet
इंटरनेट से जुड़े रोचक तथ 


पूरे विश्व के इंटरनेट का मायाजाल कितना बड़ा है इसका जवाब यह है कि हम कल्पना भी ना कर सके उतना बड़ा फिर भी अगर इसे आंकड़ों के द्वारा समझ ना हो तो आप यह जान लो के समुंदर के तल में कुल 8 लाख किलोमीटर लंबे fiver Optical Cable विशे हुए हैं और जमीन में लाखों किलोमीटर विशे केवल अलग ।

जिनमें से हर क्षण डाटा का वाहन होता है जिससे दुनिया के लोग अपने पर्सनल कंप्यूटर से या पर्सनल मोबाइल से इंटरनेट के साथ जुड़े हुए रहते हैं । गूगल के अनुसार उसके डेटाबेस में एक हजार अरब से भी ज्यादा वेबपेज है और हर रोज उनकी संख्या बढ़ रही है। विश्व में आज प्रति मिनिट 500000 से भी ज्यादा वेबपेज बन रहे हैं ।
आज दुनिया के बड़े-बड़े बिज़नस और फाइनेंशियल सिस्टम इंटरनेट पर निर्भर हैं एक अनुमान के मुताबिक अगर दुनिया में इंटरनेट से 1 घंटे के लिए बंद हो जाए तो दुनिया की आर्थिक व्यवस्था को 1 Tarbillion का नुकसान होगा और दुनिया तकरीबन 6 दिन पीछे हो जाएगी ।

दोस्तों आप को हमारा लेख History of Internet, Domain and Website in Hindi  कैसा लगा हमे कमेंट करके जरूर बताएं। 

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