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Sunday, 17 February 2019

Kashmir Crisis / Issue in Hindi - कश्मीर की समस्या क्या है ।

Kashmir Crisis / Issue in Hindi - कश्मीर की समस्या क्या है । 


दोस्तों जैसे कि हाल ही में कश्मीर में हालत काफी खराब हो चुकी है । वहां पर आए दिन आतंकवादियों और भारतीय सेना के बीच झड़प होती रहती है जिसने आज तक काफी सैनिकों की जान चली गई है आज हम आपको पूरे मसले के बारे में बताएंगे के आखर कश्मीर में ऐसे हालात क्यों बने इसके पीछे की हिस्ट्री क्या है और अब तक इस मसले को सुलझाने के लिए कितने बार कोशिशें हो चुकी हैं ।
Kashmir Crisis / Issue in Hindi - कश्मीर की समस्या क्या है ।

History Of Kashmir


सबसे पहले कश्मीर मौर्य सल्तनत का हिस्सा हुआ करता था उसके बाद 5 से लेकर 14वीं सदी तक जहां पर अलग-अलग हिंदू राजाओं का राज रहा 14वी सदी से लेकर 16 वीं सदी तक इस्लाम कश्मीर में आया कश्मीर की काफी पापुलेशन ने इस्लाम को अपना लिया जहां तक के उस वक्त 77 प्रतिशत कश्मीरी लोगों ने इस्लाम को अपना लिया जिसके बाद वहां के राजा ने इस्लाम कबूल लिया ।


सन 1586 मैं कश्मीर पर मुगलों ने हमला कर दिया और इसे अपने सल्तनत का हिस्सा बना लिया ।

1751 को अहमदशाह अब्दाली ने कश्मीर पर हमला कर दिया और इसी अपने नेतृत्व कर लिया जिसके बाद 1751 से लेकर 1819 तक कश्मीर में अफगानों का राज रहा ।

1819 में महाराजा रंजीत सिंह ने कश्मीर पर हमला कर इसे जीत लिया ।

1846 में पहले एंग्लो युद्ध में अंग्रेजो ने सिखों को हरा दिया और कश्मीर पर अपना कब्ज़ा कर लिया । उस वक़्त महाराजा गुलाब सिंह डोगरा कश्मीर का राजा बना । जिस के लिए उस ने अंग्रेजो को 70 लाख रुपए भी दिए ।

Starting of Kashmir Conflict


जब 1947 में भारत आज़ाद हुआ अंग्रेजो ने भारत को छोड़ा तब कश्मीर में महाराजा हरि सिंह का राज था । महाराजा हरि सिंह ने उस वक़्त अकेले रहने का फैसला किया । वह कश्मीर को भारत का स्विज़तरलैंड देखना चाहते थे । उनोह ने ना तो भारत और ना ही पाकिस्तान के साथ जाने का फैसला किया ।


Sheikh Abdulla


इसी बीच सन 1931 से National Confarenece Party सत्ता में आई । जिसके लीडर शेख अब्दुल्लाह थे । यह पार्टी कश्मीर में लोकतंत्र चाहती थी । इन का मानना था के कश्मीर में राजा को हटा कर चुनाव कराए जाए । इसी तरह भारत में भी कांग्रेस लोकतंत्र चाहती थी जिस के लिए कांग्रेस इन्हें पूरी मदद देती थी ।

Events Of 1997
1947 की घटनाएं


जब उनसे 47 में भारत और पाकिस्तान का विभाजन हुआ तो भारत में जितने भी मुस्लिम कम्युनिटी थी उन्हें पाकिस्तान भेज दिया गया इसी तरह से कश्मीर में 77% मुस्लिम कम्युनिटी थी जिसके कारण मोहम्मद अली जिन्ना कश्मीर को पाकिस्तान का हिस्सा मानता था लेकिन वहां का राजा अपना अलग देश बनाना चाहता था राजा हरि सिंह का कहना था कि वह भारत और पाकिस्तान व्यापार जारी रखेंगे सभी रोड खुले रहेंगे ।  इस के लिए उस ने पाकिस्तान के साथ एक कॉन्ट्रैक्ट किया । इसी तरह का कॉन्ट्रैक्ट वह भारत के साथ भी करने वाले थे लेकिन उसी वक़्त भारत में दंगे हो गए ।
Kashmir Crisis / Issue in Hindi - कश्मीर की समस्या क्या है ।


कश्मीर में पुंज के इलाके में महाराजा हरि सिंह की आर्मी में कुछ अंग्रेजी सैनिकों को मार डाला जो उस वक्त ब्रिटिश आर्मी के लिए काम करते थे । इस छोटी सी लड़ाई को हिंदू मुस्लिम दंगे कहकर पहला दिया गया और पाकिस्तान ने अपनी मुस्लिम की कम्यूनिटी की सहायता के लिए अपने लड़ाके कश्मीर में भेज दिए । उन लड़ाकों ने महाराजा हरि सिंह की फ़ौज पर हमला कर दिया । जिस के बाद महाराजा हरि सिंह ने भारत से मदद मांगी ।

भारत सरकार ने महाराजा हरि सिंह के साथ 26 ओकटुबेर 1947 को एक कांट्रैक्ट किया जिसमें महाराजा हरि सिंह ने यह कहा कि अगर भारत उनकी मदद करता है तो वह भारत के साथ मिलने को तैयार हैं । इस के बाद भारत सरकार ने अपनी फौज को कश्मीर की घाटी में उतारा और भारती आर्मी ने पाकिस्तान आर्मी को पीछे धकेल देते हुए कश्मीर को पाकिस्तान के कब्जे से छुड़ा लिया ।
Kashmir Crisis / Issue in Hindi - कश्मीर की समस्या क्या है ।

दूसरी तरफ पाकिस्तानी इस कॉन्ट्रैक्ट को पूरी तरह से गलत घोषित कर दिया उनका कहना था कि जो फैसला दबाव के चलते लिया गया है और यह फैसला एक ऐसे राजा के द्वारा लिया गया है जिस को कश्मीर के लोग भी नही मानते ।

Interfare Of United Nation


1948 में भारत और पाकिस्तान यूनाइटेड नेशन के पास कश्मीर मसले को लेकर गए इसके लिए यूनाइटेड नेशन ने एक मिशन बहाया जिसका नाम कमीशन ऑफ इंडिया एंड पाकिस्तान रखा । इस कमीशन ने भारत और पाकिस्तान का दौरा किया इसके अलावा उन्होंने कश्मीर में अलग-अलग जगह पर जाकर लोगों की राय भी ली जिस के बाद इनोह ने इस मसले के हल के लिए 3 रूल बनाए । यह रूल दोनो देशो की मर्ज़ी से लागू हो सकते थे ।


1 . पाकिस्तान को आपने लड़ाके कश्मीर से हटाने होंगे ।
2. भारत को अपनी फ़ौज कश्मीर से वापस बुलानी होगी । सिर्फ उतनी हो फ़ोर्स कश्मीर में रखी जाए जो law and order को मेंटेन रखे ।
3.  कश्मीर में लोगो से वोटिंग कराई जाए । जिस में वोह अगर पाकिस्तान में जाना चाहे जा भारत में रहने चाहे और अगर वो चाहे तो अपना अलग देश भी बना सकते हैं ।
  लेकिन इस के बाद पाकिस्तान ने अपनी फ़ौज कश्मीर से नही हटाई और ना ही भारत ने अपनी फ़ौज को वहां से हटाया है । पाकिस्तान कहता है कि अगर हमने फौज हटाई तो भारत कश्मीर पर कब्जा कर लेगा और इसी तरह भारत कहता है कि अगर हमने पॉज कम की तो पाकिस्तान कश्मीर पर अटैक कर उस पर कब्जा कर लेगा तब से लेकर अब तक दोनों देशों के बीच कश्मीर को लेकर इसी तरह से खींचातानी चल रही है ।

Militancy in 1990


1987 मैं कश्मीर की सरकार को लेकर वहां पर चुनाव कराए गए जिसमें शेख अब्दुल्लाह की पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस मुख्य तौर पर भूमिका निभा रही थी और वही नेशनल कांग्रेस पार्टी को भारतीय कांग्रेस का भी समर्थन था जिसके चलते चुनाव में बहुत बड़े स्तर पर धांधली की गई और नेशनल कॉन्फ्रेंस पार्टी बहुत बड़े फर्क के साथ जीत गई जिसके बाद कश्मीर में कहीं जगह पर हड़ताल रोष धरने भी हुए लेकिन थोड़े ही समय के बाद यह हड़ताल और धरने दंगों का रूप ले गए और बहुत सारी जगह पर जानी और माली नुकसान हुआ । पाकिस्तान ने इस बात का पूरा फायदा उठाया और उन्होंने आपने Jammu Kashmir Leberation Front उर Hizb Ul Mujahbdeen जैसे आंतकवादी संगठनों को कश्मीर में भेज दिया और इस मसले को कश्मीर की आजादी के साथ जोड़ दिया । उनका कहना था कि भारत सरकार हमारे साथ भेदभाव कर रही है और हमें आजाद कश्मीर लेना है जिसक तहत वोह जवान लड़कों को loc कि इस पार भेज कर ट्रेनिंग देते ।
Kashmir Crisis / Issue in Hindi - कश्मीर की समस्या क्या है ।

Some Other Fact About Kashmir Issue
कश्मीर समस्या से जुड़े कुछ और तथ्य



  • सन 1948 में दोनों देशों के बीच समझौता हुआ जिसके तहत जब तक कश्मीर का कोई पक्का हल नहीं हो जाता तब तक दोनों देश गोलीबारी बंद करते हैं और 1948 में ही LOC को दोनों देशों का बॉर्डर मान लिया गया । हालांकि जय इंटरनेशनल बॉर्डर नहीं कहलाती लेकिन जब तक कश्मीर मसले को लेकर कोई समझौता नहीं हो जाता तब तक एलओसी लाइन बॉर्डर का काम करेगी ।



  • 1962 में जब भारत कि चीन के साथ लड़ाई लगी उसके बाद चीन ने भारत के बहुत बड़े एरिया पर कब्जा कर लिया इसी तरह 1965 में पाकिस्तानी कश्मीर का एक बहुत बड़ा हिस्सा जिसका नाम शक्सगम वैली था चीन को गिफ्ट कर दिया इसी तरह से अगर आज कोई कश्मीर को लेकर समझौता होता है तो उस में चीन भी शामिल होगा क्योंकि कश्मीर पर चीन का भी कब्जा हो चुका है ।




  • सन 1984 में भारत में पाकिस्तान और चीन पर निगरानी रखने के लिए सियाचिन ग्लेशियर पर भारतीय रोज को भेजा आज से पहले इस ग्लेशियर पर कोई नहीं पहुंच पाया था और अब यह स्थान दुनिया का सबसे ऊंचाई वाला बैटलफील्ड है ।



  • 1990 में कश्मीर घाटी में जो पंडित रहते थे उन्हें वहां से भगा दिया गया । यह कश्मीरी पंडित वहां पर सभी अच्छी नौकरी पर तैनात थे लेकिन जब 1987 की चुनाव के बाद शेख अब्दुल्लाह की सरकार बनी तब से वहां पर बहुत बड़ी मात्रा में दंगे होने शुरू हो गए जिसके चलते शेख अब्दुल्ला की सरकार को रिजाइन देना पड़ा जिसके बाद कश्मीरी पंडितों को वहां के आतंकवादी संगठनों ने निशाना बनाया कई कश्मीरी पंडितों को मार डाला गया और दूसरों को वहां से बाहर जाने के लिए कहां गया इसी तरह 19 और 20 जनवरी को लगभग 2.5 से 3 लाख कश्मीरी पंडितों ने कश्मीर वैली को छोड़ दिया और आज कश्मीरी पंडित कैंपों में रहते हैं वहां पर इनकी हालत बहुत खस्ता है कई बार कश्मीरी पंडितों को वापस कश्मीर में शिफ्ट करने की बात बोली गई है लेकिन अभी तक नहीं हो पाया है ।

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  • 1990 में कश्मीर में बहुत ज्यादा बैलेंस होने के कारण भारतीय सरकार ने सेना को AFSPA ( Armed Force Special Act ) का अधिकार दे दिया गया जिसके तहत भारतीय सेना के जवान कश्मीर में किसी वी घर में जाकर तलाशी कर सकते हैं और शक होने पर किसी पर भी गोली चला सकते हैं ।



  • 1990 से 2004 तक भारतीय फ़ौज ने कश्मीर में के ऑपरेशन चलाए जिस में काफी संख्या में अन्तकवादियो को मारा गया । जिस के बाद 2004 से कश्मीर में थोड़ी शांति हुई है ।


दोस्तो यह थी पूरी कश्मीर की कहानी हमे उम्मीद है आप को हमारा आर्टिकल अच्छा लगा होगा । आगे से हमारे आर्टिकल की जानकारी के लिए हमे फेसबुक पर फॉलो करें ।






Monday, 7 January 2019

अब ऊंची जाति वाले जनरल कैटेगिरी में आर्थिक तौर पर गरीब लोगों को मिलेगा 10 % कोटा

7 जनवरी 2019 को भारत सरकार ने एक बहुत बड़ा फैसला लेते हुए ऐलान किया है कि ऊंची जाति वाले जर्नल केटेगरी में आने वाली आर्थिक तौर पर कमजोर लोगों को भी एक अलग से आरक्षण दिया जाएगा यह आरक्षण सभी सरकारी जगह पर लागू होगा फिर चाहे वह नौकरी या पढ़ाई या कोई भी सरकारी सहूलियत हो ।
Union Cabnit Approvs 10% Reservation for ecnomically weaker class
Union Cabnit Approvs 10% Reservation for ecnomically weaker class
उससे पहले हमारे देश में आरक्षण सिर्फ SC, ST, OBC को मिलता था । लेकिन भारत सरकार ने 7 जनवरी को इतिहासिक फैसला लेते हुए इस मे थोड़ा बदलाव किया है । हुम् आप को बता दे के अब भारत मे जनरल कोटा 50 % है लेकिन इस बिल के आने के बाद यह कोटा बढ़ कर 60% हो जाएगा जिस में से 10% उन लोगो के होगा जो आते तो जनरल कैटागिरी में हैं लेकिन आर्थिक तौर पर कमज़ोर हैं ।
आज से पहले बहुत सी सरकारों ने इस फैसले पर विचार किया था लेकिन बात आगे बढ़ नही पाई । 7 जनवरी को मोदी सरकार ने इसे लागू करने का सुझाव दिया है ।
हुम् आप को जहां पर बता दे के यह बिल अभी से लागू नही होगा । क्यों कि हमारे संविधान के 15, 16 आर्टिकल के तहत सरकार इसे सीधा बदल नही सकती । इस ल लिए सरकार को यह बिल पहले लोक सभा फिर राज सभा और उस के बाद राष्ट्रपति से पास कराना होगा ।



कौन होंगे वो 10% में आने वाले लोग


  • अभी तक जो बात सहमने आई उस के अनुसार इस कैटेगिरी में आने वाले लोगो के पास साल की कमाई 8 लाख से कम होनी चाहिए ।
  • उन के पास अपनी जमीन होनी चाहिए लेकिन वो ज़मीन 5 एकड़ से ज्यादा नही होनी चाहिए ।
  • उन के पास जो घर हो वो 1000 सेक्यूर फ़ीट से कम हो ।



यह कुछ शर्तें होगी इस आरक्षण के लिए । यह अभी तक कि शर्ते हैं सांसद में जाने के बाद जब इस पर बहस होगी तो यह कुछ बदल भी सकती है ।

आज से पहले कितनी वार इस आरक्षण को लाने की कोशिश हुई


  1. साल 2007 में मध्यप्रदेश की BSP सरकार ने यह आवाज़ उठाई थी । वहां की कांग्रेस सरकार ने भी इस फैसले का साथ दिया था ।
  2. 2014 में समाजवादी पार्टी ने एक केबनिट बिठाया था जिस ने यह सभ जांच की थी कि ऊंची जाति वाले लोगो को भी आरक्षण मिलना चाहिए जा नही ।
  3. 2016 में चंद्र बाबू नायडू ने भी ऊंची जाति वाले लोगो के लिए आरक्षण की मांग की थी ।

Wednesday, 12 December 2018

Phoolan Devi Biography in Hindi - फूलन देवी का जीवन परिचय


Phoolan Devi Biography in Hindi - फूलन देवी का जीवन परिचय

फूलन देवी एक ऐसी लड़की जिसका छोटी जाति में लड़की के तौर पर जन्म पाना मानो उस के लिए एक अभिशाप बन गया था । लेकिन फिर भी उनकी आंखों में डर ना हो कर साहस की तपन दिखती थी ।

Phoolan Devi Biography in Hindi - फूलन देवी का जीवन परिचय
Phoolan Devi Biography in Hindi - फूलन देवी का जीवन परिचय
फूलन देवी एक ऐसी लड़की जिसका छोटी जाति में लड़की के तौर पर जन्म पाना मानो उस के लिए एक अभिशाप बन गया था । लेकिन फिर भी उनकी आंखों में डर ना हो कर साहस की तपन दिखती थी ।


Phoolan Devi Biography in Hindi - फूलन देवी का जीवन परिचय:

बचपन से ही जीवन संघर्षों के बीच घिर चुका था । एक के बाद एक बहुत सारे जुल्म हो रहे थे ऊंची जाति के लोग भेदभाव और यौन उत्पीड़न करते रहे और ऐसे में दूसरा कोई होता तो अपने जीवन को पूरी तरह से खत्म करने की सोचता लेकिन फूलन देवी जैसे निडर महिला ने अपने ऊपर हुए जुल्मो का ऐसा बदला लिया के लोग उसे इज्जत की नज़रों से देखने लगे । आज हम फूलन देवी की इस कहानी को शुरू से जाने गे । कैसे एक साधारण लड़की डाकू बनी और डाकू से राजनेता ।

Phoolan Devi Biography in Hindi - फूलन देवी का जीवन परिचय

(जनम और बचपन) 

कहानी की शुरुआत होती है 10 अगस्त 1963 से जब उत्तर प्रदेश के जालौन जिले के एक छोटे से गांव में मल्लाह के अंतर्गत फूलन देवी का जन्म हुआ।

 मल्लाह बेसिकली नाव चलाने वालों और मछुआरों के समुदाय को कहा जाता था और इस समुदाय में जन्म लेने की वजह से शुरू से ही फूलन देवी ने गरीबी का सामना किया उनके बड़े से ज्वाइन फैमिली के पास 1 एकड़ जमीन थी ।  जिस में पुराना नीम का पेड़ लगा हुआ था ।

 जब फूलन 11 वर्ष की थी तो उनके दादा दादी की मौत हो गई । फिर घर के मुखिया फूलन देवी के पिता के बड़े भाई बने और फिर घर के मुखिया पद को संभालने के बाद से उनका कहना था कि खेत में मौजूद पुराने नीम के पेड़ को काट देना चाहिए ताकि पेड़ वाले एरिया में भी उपजाऊ खेती किया जा सके ।

Phoolan Devi Biography in Hindi - फूलन देवी का जीवन परिचय

 इस बात से फूलन देवी के पिता भी काफी हद तक सहमति थी लेकिन 11 साल की फूलन देवी को यह बिल्कुल भी समझ नहीं आई और पेड़ काटने गए अपने चचेरे भाई को गालियां देते हुए खदेड़ दिया ।

फिर दोनों के बीच जमकर गाली ग्लोच हुआ । फूलन देवी की जुबान से निकले शब्दों को समाज स्वीकार नहीं कर पा रहा था क्योंकि गांव में कभी भी किसी महिला ने पुरुष के खिलाफ इस तरह की आवाज नहीं उठाई थी

और फिर इसका नतीजा यह हुआ कि फूलन देवी का जबरन उसे 3 गुना ज्यादा उम्र के व्यक्ति के साथ बाल विवाह करवा दिया गया और उनके पति का नाम था पुत्तीलाल भल्ला । शादी के बाद से पुत्ती लाल फूलन देवी के ऊपर बहुत सारा अत्त्याचार करता रहा।
Phoolan Devi Biography in Hindi - फूलन देवी का जीवन परिचय
Phoolan Devi Biography in Hindi - फूलन देवी का जीवन परिचय
इन्हीं सभी बातों से तंग आकर फूलन देवी ने अपने ससुराल से भागने का फैसला कर डाला और फिर वहां से भाग कर अपने मायके आ गई लेकिन यहां पर भी उन्हें बहुत सारे अपमान झेलने पड़े ।

एक वार फिर से फूलन देवी का सामना हुआ उनके चचेरे भाई मयदीन के साथ । क्योंकि अभी भी उनसे पेड़ वाले झगड़े के लिए बदला लेना चाहता था और फिर बदले की भावना से मयदीन ने नजदीकी पुलिस स्टेशन में जाकर फूलन देवी के खिलाफ चोरी का इल्जाम लगा दिया और फिर फूलन देवी को 3 दिन जेल में बिताने पड़े लेकिन शर्मशार कर देने वाली बात यह थी कि पुलिस थाने में पुलिस वालों ने फूलन के साथ कई वार बलात्कार किया ।

Phoolan Devi Biography in Hindi - फूलन देवी का जीवन परिचय

फिर डरा धमका कर  फूलन को छोड़ दिया और फिर वापस घर आने के बाद फूलन देवी को फिर से ससुराल भेजने की तैयारी की जाने लगी ।

उन्होंने पहले तो फूलन देवी को अपनाने से मना किया लेकिन कुछ पैसे देने के बाद से वह भी राजी हो गए हैं और अपनी ऑटो बायोग्राफी फूलन देवी ने बताया कि उनका पति वापस आने के बाद उन्हें बहुत मारता और जबर्दस्ती उन के साथ संबध बनाता ।

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इन सभी बातों से तंग आकर 16 साल की उम्र में फूलन देवी एक बार फिर से अपने ससुराल से भाग निकली लेकिन इस बार वह अपने मायके नहीं गई बल्कि उस ने 2 वक़्त की रोटी के लिए डाकुओं के गैंग को जॉइन कर लिया ।

 इस गैंग में शामिल होने वाली वह पहली लड़की थी और फिर धीरे-धीरे समय बीतने के साथ उनके साथी डाकुओं में भी उनका कद बड़ा होने लगा था और कुछ महीनों के बाद फूलन देवी ने एक-एक करके अपने सभी जुल्मो का बदला लेना शुरू किया ।

Phoolan Devi Biography in Hindi - फूलन देवी का जीवन परिचय
Phoolan Devi Biography in Hindi - फूलन देवी का जीवन परिचय
फूलन ने एक ही गांव के 22 राजपूतों को एक लाइन में खड़ा कर गोलियों से भून डाला । इसके अलावा फूलन ने कई पुलिस वालों को मौत के घाट उतार दिया जिन्होंने उनके साथ बलात्कार किया था । इन सभी घटनाओं के बाद बहुत सारे लोग फूलन को देवी के रूप में पूजने लगे ।

क्यों कि उस ने अपने सम्मान के लिए राजपूतों का नरसंहार का डाला । एक साथ 22 कत्ल करने के बाद फूलन देवी सभी अखबारों और टीवी चैनलों की सुर्खियों में आ गई जिसके बाद सरकार ने फूलन के ऊपर ध्यान देना शुरू किया स्पेशल आर्मी फोर्स और पुलिस ने मिलकर फूलन देवी को ढूंढ निकाला और उनके बाकी साथियों को पुलिस इनकाउंटर में मार दिया गया ।

Phoolan Devi Biography in Hindi - फूलन देवी का जीवन परिचय


 यहां से 2 साल के बाद फूलन देवी को गिरफ्त में ले लिया गया और फिर उनके साथ के बाकी कुछ बचे हुए डाकूओ ने भी 1983 में पुलिस के सामने आत्म सम्परपन कर दिया ।

फूलन देवी के ऊपर 48 अपराधों का आरोप था जिस में कत्ल , लूट, जैसे मामले दर्ज थे । फूलन को उम्र भर जेल में रखने का आदेश दिया कि 11 साल जेल में गुजारने के बाद 1994 में जब मुलायम सिंह जादव की सरकार उत्तर प्रदेश में बनी तो फूलन पर लगे सभी आरोप से उन्ह बरी कर दिया गया ।

समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर फूलन देवी ने दो बार लोकसभा के मेंबर ऑफ पार्लियामेंट का चुनाव मिर्जापुर से अपने नाम किया ।
Phoolan Devi Biography in Hindi - फूलन देवी का जीवन परिचय


25 जुलाई 2001 को दिल्ली बंगले के बाहर 3 लोगो ने उसे भून डाला ।
पर इस तरह से फूलन देवी ने दुनिया को अलविदा कह दिया और 200 फूलन देवी को मारे जाने के पीछे शेर सिंह राणा का हाथ बताया जाता है इस पर 22 राजपूतों को एक लाइन में खड़ा करके मारने का बदला लिया ।

दोस्तों से थी बैंडिट क्वीन  फूलन देवी की कहानी हमने फूलन देवी की ऑटो बायोग्राफी का लिंक भी  अपने लेख में दिया है अगर आप खरीदना चाहते हैं तो उसे लिंक पर क्लिक करें और आपको हमारा लेख कैसा लगा हमें कमेंट करके जरूर बताएं अपना कीमती समय देने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद ।

Wednesday, 14 November 2018

Acharya Chankaya Biography | Books | History | Kuttlaya | Chankaya Neeti | Hindi

Acharya Chankaya Biography | Books | History | Kuttlaya | Chankaya Neeti | Hindi : भारत में बहुत से ऐसे महान लोगों ने जन्म लिया जिन्होंने अपने ज्ञान के बलबूते परअपना नाम इतिहास के पन्नों में दर्ज करवा दिया और ऐसे ही समझदार लोगों की लिस्ट में एक नाम सामने आता है आचार्य चाणक्य का ।

जो कि एक टीचर, फिलॉस्फर, राजनेता और एक रॉयल एडवाइजर थे और इन्हें पूरी दुनिया की सबसे महान पॉलीटिशियन के तौर पर जानती है । चाहे बीता हुआ पुराना समय हो या फिर आज का सफल व्यक्ति बनने के लिए हर कोई चाणक्य द्वारा बताए गए  असूलों पर ही चलना चाहता हैं ।

Acharya Chankaya  Biography | Books | History | Kuttlaya | Chankaya Neeti | Hindi
Acharya Chankaya  Biography | Books | History | Kuttlaya | Chankaya Neeti | Hindi

आज हम महान जानी चाणक्य की पूरी लाइफ स्टोरी को जानते हैं कि किस तरह से अपने अपमान का बदला लेने के लिए उन्होंने नंद वंश को खत्म कर मौर्य शासन की नींव रखी ।

चाणकय का जन्म और बचपन
( Birth and Childhood of Chankaya )


कहानी की शुरुआत होती है आज से करीब 371 ईसा पूर्व पहले । जब चाणक्य नाम के एक गांव में चाणक्य का जन्म हुआ और यह गांव बेसिकली उस समय गोल्ल रीजन के अंतर्गत आता था ।

चाणक्य को लोग कौटिल्य और विषनगुप्त के नाम से भी जानते थे । चाणक्य के दिमाग को देखते हुए उनके पिता ने उन्हें तक्षशिला के एक स्कूल में पढ़ाई करने के लिए भेज दिया और वहां पर चाणक्य अर्थशास्त्र और वेदों के बारे में अच्छी जानकारी हो गई ।


Acharya Chankaya Biography | Books | History | Kuttlaya | Chankaya Neeti | Hindi


वहीं चाणक्य को पढ़ाने का मौका भी मिला । चाणक्य के समय में एक जगह हुआ करता था पाटलिपुत्र जिसे की आज हम पटना के नाम से जानते हैं और उस समय पाटलिपुत्र एक बहुत ही शक्तिशाली राज्य मगध की राजधानी था ।

चाणकय को बेइज्जत करना 


मगद पर उस समय नंद वंश का साम्राज्य था और वहां के राजा धनानंद के ने एक बहुत बड़ा सा यज्ञ करवाया । उस समय चाणक्य भी वहीं पर मौजूद थे और फिर चाणक्य ब्रह्मभोज के समय ब्राह्मण के गद्दी पर जा बैठे ।

जब राजा धनानंद वहां आए तो उन्होंने चाणकय के पहनावे को देख कर भरी सभा में उनका मजाक बनाया और आचार्य चाणक्य को ब्रह्मभोज के बीच में ही गद्दी से उठा दिया ।

इसी वजह से क्रोधित होकर आचार्य चाणक्य ने अपनी चोटी खोल दी और राजा धनानंद को कहा कि वह नंद वंश का सफाया कर ही चोटी बांधगे ।

चाणकय ने अपनी बेज्जती का बदला कैसे लिया ?


यहां से ही आचार्य चाणक्य का मकसद हो गया कि वह नंद वंश का सफाया कर अपने द्वारा किसी चुने गए आदमी को मगध का राजा बनाएगा । इसके बाद आचार्य चाणक्य जंगल में चले गए और वहां जाकर उन्होंने सोने के सिक्के बनाए ।

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जो के किसी खास मकसद के लिए बनाए गए थे । उन्होंने करीब 800 मिलीयन सिक्के बनाकर जंगल में ही कहीं दफन कर दिए और किसी ऐसे आदमी की खोज में निकल गए जो नंद वंश के राजा धनानंद की जगह ले सके ।

चंद्रगुप्त मौर्या से दोस्ती 


इसी दौरान आचार्य चाणक्य ने एक बच्चे को दूसरे बच्चों के साथ बहादुरी से लड़ते हुए देखा ।उसे देखने के बाद ही अचार्य चाणक्य जी समझ गए थे की यह लड़का नंद वंश का सफाया कर सकता है और क्या उसके बारे में पता लगाया तो पता चला कि यह लड़का मौर्य साम्राज्य का वंश चंद्रगुप्त मौर्य है । जिसके पिता की हत्या राज्य के लालच में कर दी गई थी और उन्हें राज सिंहासन से निकाल दिया गया था ।

इसी दौरान आचार्य चाणक्य की दोस्ती नंद वंश के राजा धनानंद के बेटे से हो गई वह बी गद्दी के बिल्कुल काबिल था लेकिन अचार्य चाणक्य को चंद्रगुप्त मौर्य और धनानंद के बेटे में से किसी एक को चुनना था और इसीलिए उन्होंने दोनों की परीक्षा लेने का फैसला किया ।

चंद्रगुप्त मौर्या की परीक्षा


आचार्य चाणक्य ने दोनों को एक एक धागा दिया और उनको अपने गले में डालने के लिए कहा । जिसके बाद अचार्य चाणकय ने धनानंद के बेटे को चंद्रगुप्त के गले से वह धागा निकालने के लिए कहा ।

लेकिन शर्त यह थी की जब चंद्रगुप्त मौर्य सो रहे हो उस वक़्त यह धागा निकलना था और उसे पता व नही चलना चाहिए था । लेकिन धनानन्द के पुत्र जब भी धागा निकालने जाते तो चंद्रगुप्त को पता चल जाता इसलिए वह असफल रहा ।

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फिर अचार्य चाणक्य ने चंद्रगुप्त मौर्य को वही धागा धनानंद के बेटे गले से निकालने के लिए कहा । जब धनानंद के बेटे सो रहे थे तो चंद्रगुप्त ली उसका गला काट दिया और वह धागा आचार्य चाणक्य को सौंप दिया जिससे अचार्य चाणक्य को मगध का नया राजा मिल चुका था ।

जिसके बाद आचार्य चाणक्य ने वोह सिक्के निकाल कर एक बड़ी फ़ौज तयार की जिसके बलबूते पर चंद्रगुप्त मौर्य और अचार्य चाणक्य ने नंद वंश के राजा धनानंद को हराकर अपना साम्राज्य कायम किया और उस साम्राज्य में आचार्य चाणक्य प्रधानमंत्री के रूप में रहे ।

Acharya Chankaya  Biography | Books | History | Kuttlaya | Chankaya Neeti | Hindi



इस तरह से अचार्य चाणक्य ने अपने आप को एक सफल और समझदार राजनेता होने का परिणाम दिया । जब तक चाणकय जिंदा रहे उनोह एक अच्छे राजनेता की तरह शाषन किया ।

चाणकय दुवारा लिखी गई किताबे
( Books of Chankaya )


इसी दौरान चाणकय ने 2किताबें भी लिखी जिस में पहली थी ' Chankaya Neeti ' जिस में उनोह ने बताया कि एक अच्छे राजा को कैसे काम करना चाहिए जिस से उन की प्रजा उन्हें प्यार करे । दूसरी किताब थी ' Arthshashter ' जिस में उनोह ने अर्थशास्त्र से जुड़े कुछ नियम बताएँ हैं ।


Acharya Chankaya  Biography | Books | History | Kuttlaya | Chankaya Neeti | Hindi
Acharya Chankaya  Biography | Books | History | Kuttlaya | Chankaya Neeti | Hindi

चाणकय की मृत्यु
( Death Of Chankaya )


चाणकय की मृत्यु को लेकर विद्वानों के अलग अलग विचार हैं । कुछ विद्वानों का कहना है कि चाणकय ने खाने और जल का त्याग कर दिया था और यह त्याग तब तक किया जब तक उनकी मृत्यु नही हो गई ।

दूसरा विचार यह भी है कि जिस स्तर पर चाणकय पहुंच चुके थे उस वक़्त उनके बहुत से दुश्मन बन चुके थे । जिस के तहत उन की मृत्यु एक षड्यंत्र के तहत हुई थी ।

तो दोस्तो यह थी महान राजनेता चाणकय की कहानी । अगर आप को इस लेख से जुड़ी और जानकारी के बारे में पता है जो इस लेख में नही दी गई तो कृपया आप हमें जरूर बताएं । अपना समय देने के लिए आप का बहुत बहुत धन्यवाद ।

Wednesday, 3 October 2018

History of Internet, Domain and Website in Hindi

History of Internet, Domain and Website in Hindi  आज के इस व्यापक और आधुनिक मायाजाल सामान Internet का मूल Cold War है । 1960 - 70 के दशक में Cold War अपने लेवल पर था और रशिया और अमेरिका दोनों देशों के सर पर परमाणु हमले की तलवार लटक रही थी । अगर परमाणु बम का हमला होता है तो इन हालत में निकलने वाले विकिरण के कारण संदेश का आदान-प्रदान ही खत्म हो जाएगा  और आप अपने ही देश के किसी सेना के डिवीजन को या नेता को कोई भी सीक्रेट संदेश नहीं भेज सकते ।

 इन सब खतरों को अमेरिका ने भी भांप लिया था इसलिए अमेरिका ने एक ऐसी कार्यप्रणाली बनाने की सोची जो अंडरग्राउंड केबल के द्वारा एक दूसरे से जोड़ती हो और कोई सन्देश आसानी से एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाया जा सके । और अमेरिका के राष्ट्रपति देश के किसी भी कोने के किसी भी बंकर में हो फिर भी उनको कांटेक्ट करके उनके डिसीजन को लागू किया जा सके ।
History of Internet, Domain and Website in Hindi
History of Internet, Domain and Website in Hindi 

History of Internet, Domain and Website in Hindi  


अमेरिका की सरकार की यह भी दरखास्त थी कि इसका कोई केंद्र ना हो । इसलिए एक ऐसी संचालित कार्यप्रणाली बनानी थी जिसे पावर ऑन करते ही देश के सारे कंप्यूटर एक दूसरे से जुड़ जाए और किसी एक कंप्यूटर के खराब होने पर पूरे नेटवर्क पर कोई असर न पड़े ।



History of Internet :
इंटरनेट का इतिहास 


आखिरकार ऐसे नेटवर्क को बनाने के लिए पेंटागन के ARPA यानी एडवांस रिसर्च प्रोजेक्ट एजेंसी को नियुक्त किया गया । ARPA और अमेरिकन सरकार ने मिलजुल कर एक ऐसे ही नेटवर्क का सर्जन किया जिसे शुरुआत में ARPNET कहा गया और अमेरिका के सभी खास कंप्यूटर्स को ARPANET से जोड़ दिया गया । साल 1990 आते-आते कोल्ड वर खत्म होने की कगार पर आ गया और उस वक्त परमाणु युद्ध होने के बाद भी हट चुके थे । इसलिए डिफेंस के लिए खोजी गई इस टेक्नोलॉजी को National Science Foundation को सौंप दिया गया और यह आधुनिक आविष्कार अब सार्वजनिक बन चुका था ।

History of Domain 
डोमेन का इतिहास 


जो 1990 आते-आते ARPNET की जगह INTERNET के नाम से जाना जाने लगा । अब तक INTERNET में कोई Website या Domain जैसी चीज नहीं थी क्योंकि 1990 तक एक कंप्यूटर को दूसरे कंप्यूटर से केबल के द्वारा जोड़ा जाता था । हमें कोई डाटा चाहिए तो डाटा किस कंप्यूटर में है उसका हमें पता होना चाहिए अगर हमें पता नहीं है के कौन सा डाटा किस कंप्यूटर में है तो हम उसे नहीं पा सकते इस तरीके से और ARPNET काम करता था ।



1984 में डॉक्टर जॉन पोस्टल Domain Registration बनाया जिसे आज हम .Com, .org, .in के नाम से जानते हैं । इसके जरिए से वेबसाइट बनाई जा सकती थी और इसके बाद वेबसाइट बनने लगी लेकिन वेबसाइट सिर्फ शहरों तक ही सीमित थी ।

History of World Wide Web (WWW)
डब्ल्यू डब्ल्यू डब्ल्यू का इतिहास 


लेकिन 1991 में Tim Berners-Lee नाम के वैज्ञानिक ने इस समस्या को हमेशा के लिए सुलझा दिया । जब उन्होंने w.w.w. यानी वर्ल्ड वाइड वेब की खोज की कुछ ही समय में डब्ल्यू डब्ल्यू डब्ल्यू इंटरनेशनल नेट बन गया और सारे डोमिन इसी नाम से रजिस्टर्ड होने लगे।
History of Internet, Domain and Website in Hindi
Tim Berners-Lee

History of Wi Fi 
वाई फाई का इतिहास 


1991 के बाद इंटरनेट पर कोई भी चीज छुपी नहीं रही । इंटरनेट की कामयाबी की तरफ 1995 में इंटरनेट स्पीड 28.8 kbps थी और उस समय इंटरनेट यूज करने वालों की तादात लगभग एक करोड़ साठ लाख थी । एक अनुमान के मुताबिक उस समय दुनिया के 0.2% लोग इंटरनेट इस्तेमाल कर रहे थे लेकिन 22 साल बाद आज 2017 में इंटरनेट के एवरेज स्पीड 5.6 mbps है और दुनिया में तकरीबन 307 करोड लोग इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं ।

एक अनुमान के मुताबिक दुनिया के 40% लोग इंटरनेट से आपस में जुड़े हुए हैं और इन्हीं 22 सालों में इंटरनेट की स्पीड में 195% बढ़ोतरी हुई है ।

History of Internet, Domain and Website in Hindi 

1999 में Dr. John O'Sullivan ने 18 साल की उम्र में ही वायलेंस फर्टिलिटी नेटवर्क बनाया जिसे आज हम WiFi से जानते हैं । वॉइस ऑफलाइन नेटवर्क कनेक्शन में मोबाइल और कांटेक्ट में बदलकर इंटरनेट को बिना वॉइस शेयर करना संभव कर दिया । यह तो बस एक नेटवर्क की शुरुआत थी इंटरनेट की वजह से दुनिया में कहीं अविष्कारों ने जन्म लिया और कई खोजें की गई ।



Who is Owner of Internet 
इंटरनेट का असली मालिक कौन है


सच बात कहूं तो इसका कोई मालिक नहीं है इसे उपयोग करने वाले सब उसके मालिक है क्योंकि इंटरनेट का आविष्कार अमेरिका के पब्लिक सेक्टर में हुआ है । जिसमें अमेरिकन डिफेंस और रिसर्च यूनिवर्सिटी के पैसे लगे थे । अगर इसका आविष्कार कैसे प्राइवेट सेक्टर में किया होता तो कंपनियां अपने नाम की पेटर्न बनवाकर नफाखोरी शुरु कर देती । लेकिन पूंजीवादी देश की सरकार या सरकार के दुवारा चलने वाली यूनिवर्सिटी को बिजनेस में कोई दिलचस्पी नहीं होती । आगे भी FM Radio और TV की खोज सरकार के पैसों द्वारा की गई मगर बाद में इन खोजों को प्राइवेट व्रतों के लिए ट्रांसफर कर दिया गया ।

History of ISP ( Internet Service Provider )


परिणाम स्वरूप विश्व में कई सारे छोटे-छोटे इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर यानी आईएसपी शुरू हो गए जिन्होंने अपने लोकल नेटवर्क को वैश्विक इंटरनेट के साथ जोड़ दिया और इस तरह इंटरनेट की जाल पूरी दुनिया में फैल गई यह वही प्राइवेट सर्विस प्रोवाइडर है जो हमसे डाटा के लिए कुछ पैसे लेते हैं ।

Interesting Fact About Internet
इंटरनेट से जुड़े रोचक तथ 


पूरे विश्व के इंटरनेट का मायाजाल कितना बड़ा है इसका जवाब यह है कि हम कल्पना भी ना कर सके उतना बड़ा फिर भी अगर इसे आंकड़ों के द्वारा समझ ना हो तो आप यह जान लो के समुंदर के तल में कुल 8 लाख किलोमीटर लंबे fiver Optical Cable विशे हुए हैं और जमीन में लाखों किलोमीटर विशे केवल अलग ।

जिनमें से हर क्षण डाटा का वाहन होता है जिससे दुनिया के लोग अपने पर्सनल कंप्यूटर से या पर्सनल मोबाइल से इंटरनेट के साथ जुड़े हुए रहते हैं । गूगल के अनुसार उसके डेटाबेस में एक हजार अरब से भी ज्यादा वेबपेज है और हर रोज उनकी संख्या बढ़ रही है। विश्व में आज प्रति मिनिट 500000 से भी ज्यादा वेबपेज बन रहे हैं ।
आज दुनिया के बड़े-बड़े बिज़नस और फाइनेंशियल सिस्टम इंटरनेट पर निर्भर हैं एक अनुमान के मुताबिक अगर दुनिया में इंटरनेट से 1 घंटे के लिए बंद हो जाए तो दुनिया की आर्थिक व्यवस्था को 1 Tarbillion का नुकसान होगा और दुनिया तकरीबन 6 दिन पीछे हो जाएगी ।

दोस्तों आप को हमारा लेख History of Internet, Domain and Website in Hindi  कैसा लगा हमे कमेंट करके जरूर बताएं। 

Tuesday, 2 October 2018

Baba Harbhajan singh Real Story and History in Hindi - बाबा हरभजन सिंह

Baba Harbhajan singh Real Story and History in Hindi  बाबा हरभजन सिंह क्या कभी कोई सैनिक मृत्यु के पश्चात भी अपनी ड्यूटी कर सकता है ?

क्या किसी मृत सैनिक की आत्मा अपना कर्तव्य निभाते हुए देश की सीमा पर रक्षा कर सकती है ?

आप सबको यह सवाल अजीब लग रहा है आप सब कहते होंगे कि भला ऐसे कैसे हो सकता है । लेकिन सिक्कम में रहने वाले लोगों और वहां पर तैनात सैनिकों से अगर आप सवाल पूछेंगे तो वह कहेंगे जी हां ऐसा पिछले 45 सालों से लगातार हो रहा है । उन सब का मानना है कि पंजाब रेजीमेंट के जवान हरभजन सिंह की आत्मा पिछले 45 सालों से लगातार देश की सीमा पर रक्षा कर रही है । 

सैनिकों का कहना है कि आत्मा चीन की तरफ से होने वाले किसी भी हमले के बारे में उन्हें बता देती है और यदि भारतीय सैनिकों को चीन के सैनिकों का कोई भी मूवमेंट पसंद नहीं आता है तो उसके बारे में और चीन के सैनिकों को भी पहले ही बता देते हैं ताकि बात ज्यादा नहीं बिगड़े और मिलजुलकर बातचीत से उसका हल निकल जाए ।
Baba Harbhajan singh Real Story and History in Hindi - बाबा हरभजन सिंह

आप चाहे इस पर यकीन करें या ना करें पर खुद चीनी सैनिक भी इस पर विश्वास करते हैं इसलिए भारत और चीन के बीच होने वाली हर फ्लैग मीटिंग में हरभजन सिंह के नाम की या खाली कुर्सी लगाई जाती है ताकि वह मीटिंग अटेंड कर सके ।

Baba Harbhajan singh Real Story and History in Hindi - बाबा हरभजन सिंह 

हरभजन सिंह का जन्म 30 अगस्त 1946 को जिला गुजरावाला में जो कि वर्तमान पाकिस्तान में हुआ । हरभजन सिंह पंजाब रेजीमेंट के जवान थे जो कि 1966 में आर्मी में भर्ती हुए थे पर मात्र 2 साल की नौकरी करके 1968 में सिक्किम में एक दुर्घटना में मारे गए । एक दिन वह खच्चर पर बैठकर नदी पार कर रहे थे तो खच्चर सहित नदी में बह गए और काफी आगे निकल गए ।



  2 दिन की तलाशी के बाद जब उनका शव नहीं मिला तो वह एक साथ के सपने में आकर अपने शव की जगह बताई और सुबह वही से शव बरामद कर अंतिम संस्कार किया ।

हरभजन सिंह के इस चमत्कार के बाद साथी सैनिकों की उन में आस्था बड़ गई । उन्होंने उनके बंकर को एक मंदिर का रूप दे दिया । जब बाद में उनके चमत्कार बढ़ने लगे और विशाल जनसमूह की आस्था का केंद्र हो गए । तो उनके लिए एक मंदिर का निर्माण किया गया जो है बाबा हरभजन सिंह मंदिर । 

Baba Harbhajan singh Real Story and History in Hindi - बाबा हरभजन सिंह 

यह मंदिर 13000 फुट की ऊँचाई पर है । बंकर वाला मंदिर इस मंदिर से 1000 फिट ज्यादा ऊंचाई पर स्थित है । मंदिर के अंदर बाबा हरभजन सिंह की एक फोटो और उनका सामान रखा है । बाबा हरभजन सिंह अपनी मृत्यु के बाद से ही लगातार ड्यूटी दे रहे हैं इनके लिए बकायदा तन्खाह भी दी जाती है । उनकी भारतीय सेना में बकायदा एक रैंक है जिस को नियमानुसार उनका प्रमोशन भी किया जाता है ।

यहां तक कि उन्हें कुछ साल पहले तक 2 महीने की छुट्टी पर गांव भी भेजा जाता था । इसके लिए ट्रेन में सीट रिजर्व की जाती थी । 3 सैनिकों के साथ उनका सारा सामान उनके गांव भेजा जाता था तथा 2 महीने पूरे होने पर वापस सिक्कम लाया जाता था ।

जब हरभजन सिंह छुटी पर होते थे तो सारा बॉर्डर हाई अलर्ट पर रहता था । क्योंकि उस वक्त सैनिकों को बाबा की मदद नहीं मिल पाती थी लेकिन बाबा का सिक्किम से जाना और वापस आना एक धार्मिक आयोजन का रूप लेता जा रहा था । 

Baba Harbhajan singh Real Story and History in Hindi - बाबा हरभजन सिंह 

जिसमें की बड़ी संख्या में जनता इकट्ठी होने लगी कुछ लोग इस आयोजन को अंधविश्वास को बढ़ावा देने वाला मानते थे । इसलिए उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया । क्योंकि सेना में किसी भी प्रकार का अंधविश्वास की मनाही है लिहाजा सेना ने बाबा हरभजन को छुट्टी पर भेजना बंद कर दिया । अब बाबा साल के 12 महीने ड्यूटी देते हैं ।

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मंदिर में बाबा का एक कमरा भी है जिस में प्रतिदिन सफाई करके बिस्तर लगाया जाता है बाबा की सेना की वर्दी और जूते रखे जाते हैं । कहते हैं कि रोज उनके कमरे की सफाई करने पर उनके जूतों में कीचड़ और चादर में सरवटे पाई जाती है । बाबा हरभजन सिंह का मंदिर सेनिको और लोगों की आस्था का केंद्र है ।
Baba Harbhajan singh Real Story and History in Hindi - बाबा हरभजन सिंह



इस इलाके में आने वाला हर नया सैनिक सबसे पहले बाबा की धूप लगाने आता है । इस मंदिर को लेकर यहां के लोगों में एक अजीब सी मान्यता यह भी है इस मंदिर में पानी से भर कर पानी की बोतलें रखी जाती हैं कहा जाता है कि उस पानी में चमत्कारिक औषधीय गुण आ जाते हैं । 

इस पानी को पीने से लोगों के रोग मिट जाते हैं । इसलिए इस मंदिर के नाम पर बोतलों का अंबार लगा रहता है । यह पानी 21 दिन के अंदर प्रयोग में लाया जाता है और इस दौरान मांसाहार व शराब करना निषेध होता है ।

दोस्तो यह थी बाबा हरभजन सिंह की रहस्यमयी कहानी । आप को हमारा लेख कैसा लगा हमे कमेंट करके जरूर बताएं ।

Saturday, 29 September 2018

Conman Natwarlaal Biography | History | Real Story in Hindi - ठग नटवरलाल की जीवनी

Conman Natwarlaal Biography | History | Real Story in Hindi - ठग नटवरलाल की जीवनी :  मिथिलेश कुमार श्रीवास्तव एक ऐसा नाम है जिस नाम को सुनकर आपको शायद कोई चेहरा याद नहीं आ रहा होगा लेकिन वहीं अगर नटवरलाल नाम लिया जाए तो आप लगभग मुहावरा बन चुके इस नाम को कभी भूल ही नहीं पाए होंगे । 
Conman Natwarlaal Biography | History | Real Story in Hindi - ठग नटवरलाल की जीवनी

अपनी संगीन और चालाकी भरी ठगी से एक समय काफी मशहूर नटवरलाल को ढूंढने के लिए भारत की पुलिस ने एड़ी से चोटी तक की ताकत लगा दी थी । लेकिन यह ठग जितनी रहस्यमई तरीके से हिरासत में लिया जाता था उतने ही नाटकीय तरीके से फरार भी हो जाया करता और जो सबसे ज्यादा हैरान कर देने वाली बात तो यह है कि यह भारत का एकमात्र ऐसा ठग था जिस ने ठगी के लिए न तो कभी किसी हथ्यार का इस्तेमाल किया और ना ही किसी से पैसे छीने ।




नटवरलाल सिर्फ और सिर्फ अपनी बातों के तीर चलाता और सामने वाला इंसान खुद फंस जाता । तो चलिए दोस्तो आज हम जानते हैं नटवरलाल की कहानी ।

History of Natwarlaal 


तो इस कहानी की शुरुआत होती है 1912 में जब बिहार के एक छोटे से गांव मंगरा में नटवरलाल का जन्म हुआ । बताया जाता है कि नटवरलाल का बचपन से ही पढ़ाई में ज्यादा मन नहीं लगता था लेकिन खेल में वह सब से आगे थे । अपने स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद उस ने  वकालत में डिग्री हासिल की और वकील बन गया ।

 वकालत की पढ़ाई का इस्तेमाल उस ने ठगी के काम के लिए किया और वह अपनी चालसाजी और ठगी को अंजाम देने के लिए नोबेल की कहानियों से आइडिय लिया करता था ।  हर बार नटवरलाल अपने अनोखे अंदाज और अलग-अलग नाम और पहचान के साथ ठगी करता और यही वजह थी के लोग उसे पकड़ने में नाकाम रहते ।

बताया जाता है कि उसके शिकार में ज्यादातर तो मिडल क्लास के सरकारी कर्मचारी होते थे । जा छोटे शहर के पैसे वाले व्यापारी जिनसे नटवरलाल ताजमहल वेचने तक का सौदा कर लेता था और यह तो छोटे शहर के व्यापारियों से तीन बार ताजमहल बेचने में भी सफल हो गया था ।


Conman Natwarlaal Biography | History | Real Story in Hindi - ठग नटवरलाल की जीवनी


 इसके अलावा उसने राष्ट्रपति भवन और संसद भवन को भी नीलाम कर दिया था । कहतें हैं कि नटवरलाल ने अपने जीवन काल में  52 से ज्यादा नामों का इस्तेमाल करके अरबों खरबों रुपए की ठगी को अंजाम दिया । 

यहां तक कि अपनी गजब की कमेंसिंग पावर और खुद पर अटूट विश्वास की वजह उस ने सरकार को यह दावा किया था कि अगर सरकार उसे आगिआ दे तो वो भारत का सारा विदेशी कर्ज़ उतार सकता है ।

आपको यह जानकर हैरानी होगी कि नटवरलाल ने खुद का एक स्कूल सिर्फ इसलिए खोला था ताकि वह बच्चों के घर का फाइनेंसियल कंडीशन जान सके और फिर आमिर घरों से लाखों रुपए ठग कर फरार हो गया था ।

इसके अलावा नटवरलाल शॉर्ट सिगनेचर करने में भी बहुत ही माहिर था वह अपने टैलेंट की वजह से देश के नामी व्यापारियों को अपना निशाना बनाते जिस में  टाटा, बिरला, धीरूभाई अंबानी को भी अपना निशाना बना चुका था और उसने बहुत सारे लोगो को जाली चेक और ड्राफ्ट दे कर लाखों की ठग्गी कर गया था ।
Conman Natwarlaal Biography | History | Real Story in Hindi - ठग नटवरलाल की जीवनी
नटवरलाल दुवारा दिया गया एक चेक 



नटवरलाल100 से भी ज्यादा मामलों में दोषी पाया गया था । जिसकी वजह से 8 राज्यों की पुलिस उसे पूरी शिद्दत के साथ ढूंढ रही थी । नटवरलाल को उसके ठगी के लिए 113 साल की सजा सुनाई गई लेकिन उस ने सिर्फ 20 साल ही जेल की हवा खाई ।

Conman Natwarlaal Biography | History | Real Story in Hindi - ठग नटवरलाल की जीवनी

वह 9 बार गिरफ्तार किया गया था लेकिन कैसे भी करके हर बार नए नए तरीके से वह फरार हो जाता और उसके फरार हो जाने की वजह से कई सारे सिपाही और थानेदार भी निलंबित किए गए थे । आखिरी वार वह 1996 में ग्रिफ्तार किया गया था । उस वक़्त उस की उम्र 84 साल थी लेकिन इस उम्र में भी वोह पुलिस की गरिफ्त से भागने में सफल रहा ।

नटवरलाल ने अपने किसी भी काम को लेकर कभी शर्मिंदगी महसूस नही की । वह कहता था कि वो लोगो से कभी हथ्यार दखा कर पैसे नही लेता । उस का कहना था कि " मैं लूट कर गरीबों को देता हूं और मैंने कभी भी किसी हथियार का इस्तेमाल भी नहीं किया है ।

Conman Natwarlaal Biography | History | Real Story in Hindi - ठग नटवरलाल की जीवनी


 लोगों से बहाने बनाकर पैसे मांगे और लोग हाथ जोड़कर पैसे देते गए" और ऐसे अपराधों को अंजाम देने के बावजूद नटवरलाल के फैन्स की कमी नहीं थी ।
Conman Natwarlaal Biography | History | Real Story in Hindi - ठग नटवरलाल की जीवनी
नटवरलाल हिरासत के वक़्त 



यहां तक कि बिहार में उसके गांव के लोगों की मांग थी के नटवरलाल नाम का एक समार्ग बनना चाहिए ।  लोगों का मानना था कि भला आदमी था वह गरीबो की मदद करता था । नटवरलाल की मृत्यु को लेकर अभी भी असमंजस है।
  नटवरलाल के भाई गंगा प्रसाद श्रीवास्तव का कहना है कि 1996 में उन्होंने नटवरलाल का अंतिम संस्कार कर दिया था लेकिन उनके वकील बताते हैं कि 25 जुलाई 2009 को उनकी मृत्यु हुई और इसीलिए उन्होंने 2009 में ही कोर्ट में अनुरोध किया कि नटवरलाल के खिलाफ लगे  सभी अपराधों को खत्म कर देना चाहिए ।

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