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Wednesday, 11 July 2018

How Internet work in hindi (इंटरनेट क्या है इस का मालिक कौन है)

How Internet work in hindi (इंटरनेट क्या है इस का मालिक कौन है)

दोस्तों आज के जमाने में हम 2 घंटे तक बिना कुछ खाए पिए तो रह सकते हैं मगर 2 घंटे इंटरनेट के बिना रहना बहुत मुश्किल है ।क्या आपने कभी सोचा है कि जो इंटरनेट आप रोजाना इस्तेमाल करते हैं वह काम कैसे करता है और इंटरनेट का मालिक कौन है ?
how internet work in hindi
Setup internet

आप में से बहुत लोग यह सोचते होंगे कि इंटरनेट सेटेलाइट के द्वारा काम करता होगा जा केबल के द्वारा काम करता होगा ।तो दोस्तों आज हम आपके इन सारे सवालों के जवाब देंगे और आपको बताएंगे के जो पैसा आप इंटरनेट इस्तेमाल करने के बदले Airtel, Idea जा Jio को देते हैं असल में वह पैसा किस के पास जाता है और कैसे यह पूरा नेटवर्क काम करता है।

How Internet work in hindi (इंटरनेट क्या है इस का मालिक कौन है)

पूरा इंटरनेट असल में तीन भागों में बटा हुआ है जिनके द्वारा हम इंटरनेट इस्तेमाल कर पाते हैं। आपको आसान तरीके से समझाने के लिए हम YouTube का उदाहरण लेते हैं जैसे कि आप अपने घर पर बैठे YouTube पर कोई वीडियो देख रहे हैं वह वीडियो आपको YouTube के सरवर से दिखाई जा रही है । तो दोस्तों जैसे कि आपको पता है कि YouTube का सर्वर अमेरिका में है और जिस कंपनी का इंटरनेट आप इस्तेमाल करते हैं जैसे कि Airtel, Vodafone जा Idea इन सब की पहुंच अमेरिका तक नहीं है ।मगर फिर भी आप वह वीडियो अमेरिका के सरवर से देख रहे हैं इसमें होता यह है के हमारी लोकल कंपनीज हमारा डाटा दूसरी बड़ी कंपनियों को दे देती हैं जो हमारे डेटा को चैन्नई जा मुम्बई तक पहुंचाती है और इंटरनेशनल प्रोवाइडर उस डेटा को आगे अमेरिका तक ले कर जाते हैं। जिनकी द्वारा हम पूरी दुनिया में कहीं भी कुछ भी देख सकते हैं।

Tier 1 : 


जैसे कि हमने बताया की इंटरनेट हमारे तक तीन भागों में से होकर आता है ।उनमें से टीयर वन में वह बड़ी कंपनी होती हैं जो अपने पैसे खर्च कर पूरी दुनिया मैं केवल के माध्यम से एक सरवर को दूसरे सरवर से जोड़ती है ।जैसे कि भारत में टाटा कम्युनिकेशन और रिलायंस जिओ हैं ।जिन ने समुंदर में अपनी खुद की केबल विशआई हुई है।  एक बार केबल बिछाने के बाद इंटरनेट बिल्कुल फ्री होता है बस खर्च उन केबल की रिपेयर का होता है जैसे समंदर में कोई केबल किसी शार्क ने काट दी तो यह लोग उसके साथ बैकअप के लिए कुछ और केवल बिछा कर रखते हैं।  जिससे वह कटी हुई केवल का डेटा ट्रांसफर करते हैं ।

यह जो केवल समंदर में बिछाई जाती है इसको Fiver optical cable  या   submarine केवल कहते हैं इस को बचाने के लिए काफी खर्च आता है। एक बार केबल बिछाने के बाद यह बड़ी कंपनियां उन केवल के माध्यम से जो ट्रैफिक जाता है उनका pr/gb के हिसाब से यह कंपनियां खर्च वसूलती है ।नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक कर आप पूरी दुनिया में बिछाई गई फाइबर ऑप्टिकल केबल को देख सकते हैं

Submarine Cable Map


Tier 2 :

 दूसरे नंबर पर वह बड़ी नेशनल कंपनी आ जाती है जो अपनी केवल पूरे देश में बिछा देती है। जिनके माध्यम से बड़े-बड़े शहरों को एक दूसरे से जोड़ा जाता है और उन सबको आखिर में उस पॉइंट पर जोड़ दिया जाता है जहां पर टीयर वन कंपनी में लिंक दिया था ।जैसे कि हमारे भारत में इंटरनेट का 95% ट्रैफिक मुंबई से होकर जाता है इसके अलावा भारत मे भी ऐसे कई सरवर है जिन तक पहुंचने के लिए टीयर वन की जरूरत नहीं पड़ती उन सबके लिए निक्सी नाम की एक कंपनी ने पूरे भारत के सर्वर को जुड़ा हुआ है।

how work internet
cable map

Read this Why jio so cheap ( Jio itna sasta kyu hai )


                 history of samsung in hindi

Tier 3:

  यह वो लोकल कंपनियां होती है जो Tier 2 से लिंक लेकर हमारे लोकल शहर में हमें इंटरनेट मुहैया करवाती है इनमें से जैसे conect, a t t, Countery link  जैसी कंपनियां जो इंटरनेट को हमारे PC या लैपटॉप तक पहुंचाती है ।ऐसे जब हम इंटरनेट पर कोई चीज़ देखते हैं तो हमारा लोकल इंटरनेट प्रोवाइडर हमारा डाटा नेशनल इंटरनेट प्रोवाइडर को भेज देता है और नेशनल इंटरनेट प्रोवाइडर उस डाटा को ऑप्टिकल केबल के के माध्यम से उस सरवर तक भेज देता है।

Owner of internet :

इंटरनेट का मालिक कोई नहीं है सबसे पहले Tier 1 कंपनियां इंटरनेट की खपत के हिसाब से टियर-2 टू से पैसे वसूलते हैं । जितने GB डाटा जिस कंपनी की केबल से गुजरा होता है वह पर जी बी के हिसाब से अपना खर्च वसूलती है ।उसके बाद टियर 2 कंपनियां भी इसी तरह टियर 3 से पैसे वसूलती है और आगे टियर 3 जो हमारे घर तक इंटरनेट पहुंचाता है वोह हम से पैसे वसूलता है । इस तरह यह पैसा 3 भागो में बांटा जाता है।


हमें उम्मीद है दोस्तों कि आपको समझ में आ गया होगा कि इंटरनेट काम कैसे करता है और इसका मालिक कौन है। आपको हमारा आर्टिकल कैसा लगा हमें कमेंट करके जरूर बताएं अपना कीमती समय देने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।

Tuesday, 10 July 2018

Sanjay dutt biography in hindi संजय दत्त का जीवन पिरचय

Sanjay dutt biography

दोस्तों आज हम जिस शख्स के बारे में बात करने जा रहे हैं उसको वक़्त और हालातों ने रियल हीरो से रियल विलेन बना दिया। दोस्तो मैं बात करने जा रहा हूं बॉलीवुड के जाने-माने अभिनेता संजय दत्त के बारे में।  संजय दत्त ने अब तक बॉलीवुड की कुल 190 फिल्मों में काम किया है जिसमें उन्होंने पुलिस गैंगस्टर और अलग-अलग रोल निभाए है और इसी एक्टिंग के कारण संजय दत्त लोगों में हरमन प्यारे हो गए ।
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Sanjay dutt


                 Biography of Padman Anurachlam murnatham

मगर इसके साथ साथ वह विवादों मैं भी रहे है । जिन में से 1993 के मुम्बई हमलो में उन का नाम आना । जिस लिए अब उनकी लाइफ पर आधारित एक बॉलीवुड मूवी संजू वी चुकी है जिसमें रणबीर कपूर ने संजय दत्त का रोल निभाया है तो चलिए दोस्तों संजय दत्त की जीवन की कहानी को हम शुरू से जानते हैं।


Birth and Mother Father :

संजय दत्त का जन्म 29 जुलाई 1959 को मुंबई में हुआ। संजय दत्त के माता पिता बॉलीवुड के जाने-माने सितारे हैं। उनके पिता का नाम सुनील दत्त और माता का नाम नरगिस है। संजय दत्त ने अपनी स्कूली शिक्षा दा लॉरेंस स्कूल से की और उसके बाद वह आगे की पढ़ाई के लिए एलफिंस्टन कॉलेज गए।

sanjay dutt films :

क्योंकि संजय दत्त को एक्टिंग विरासत मैं ही मिली थी इसलिए उन्होंने सबसे पहले अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत 1972 में रेशमा और शेरा नाम की मूवी में बाल कलाकार के रूप में की।
मगर संजय दत्त को फिल्म में लीड रोल करने के लिए बहुत ज्यादा मेहनत करनी पड़ी और उनकी यह मेहनत 1981 में उनकी पहली फिल्म Rocky मैं दिखाई दी और यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर हिट रही।

इसके अगले ही साथ संजय दत्त की माता नरगिस की मृत्यु हो। गई जिससे संजय दत्त को बहुत भारी सदमा लगा इस दुख से उबरने के लिए संजय दत्त ने ड्रग्स का सहारा लेना शुरू कर दिया जिसके चलते संजय दत्त को पहली बार ड्रग्स रखने के जुर्म में जेल भी जाना पड़ा।


Persnol life :

संजय दत्त की पहली शादी रिचा से हुई लेकिन ब्रेन ट्यूमर के कारण 1996 में उनका देहांत हो गया ।उसके बाद संजय दत्त ने रिया पिलाई से शादी की लेकिन कुछ समय बाद दोनों का तलाक हो गया। 2008 में संजय दत्त ने मान्यता से शादी कर ली जिससे उनको दो जुड़वा बच्चे हुए जिसमें से ladaki  का नाम इकरा और लड़के का नाम शहरान है।


Case and Carrier :

संजय दत्त का कैरियर बहुत ही उतार चढ़ाव भरा रहा जिस के लिए उन्हें जेल के काफी चक्कर काटने पड़े। असल मे 1993 में मुम्बई में कुल 12जगहों पर  आतन्कवादी हमले हुए। जिन में 257 लोग मारे गए और 700 के करीब लोग जख्मी हुए ।

 संजय दत्त का नाम इस हमलो के साथ जुड़ा और कहा गया के जो हथ्यार आतंकवादियो के पास थे वो हथ्यार संयज दत्त के पास से आये थे। जिस के लिए संयज दत्त को लोगो का काफी गुस्सा भी झेलना पड़ा और इसी के कारण उन को 4 साल की सजा भी हुई।  मगर 1995 में उन्ह बेल मिल गई फिर 1997 से उनोह ने फिल्मों में दुबारा काम करना शुरू किया और कई हिट फिल्में की।

इसी के चलते 2006 में संजय दत्त को आतंकवादियों का साथ देने के जुर्म में निर्दोष पाया गया ।जिसमें वह बरी हो गए लेकिन अवैध हथियार रखने के लिए 2013 मैं उन्हें 5 साल की सजा हुई क्योंकि संजय दत्त कुछ समय पहले ही जेल में बता चुके थे जिसके लिए उन्होंने जेल में सिर्फ 42 महीने गुजारने थे ।संजय दत्त की जेल में अच्छा बर्ताव करने और नियमों का पालन करने के कारण उनकी सजा में से 102 दिन और कम कर दिए गए जिसके चलते 25 फरवरी 2016 को संजय दत्त को रिहा कर दिया गया।

Sanjay dutt biopic Sanju:

जैसा के हुम् ने पहले बताया के संयज दत्त की जिंदगी पर आधारित फिल्म संजू बन चुकी है जिस में संजय दत्त का रोल रणबीर कपूर ने बहुत ही अच्छे तरीके से निभाया है और लोगो ने भी रणबीर कपूर के इस रोल को काफी पसंद किया है। यह फ़िल्म हिट हो चुकी है।

दोस्तो संजय दत्त भले ही अपने जुर्म के कारण दोषी रहे हो मगर आज वो अपनी सज़ा काट चुके हैं। संयज दत्त का कहना है के अगर कोई वयक्ति अपने जुर्मों की सज़ा काट ले फिर वो दोषी नही रहता। दोस्तो आप को संयज दत्त की कौन सी फ़िल्म पसंद है हमे कमेंट करके जरूर बताए। आप का कीमती समय देने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।

Monday, 11 June 2018

Yuvraj singh biography in hindi युवराज सिंह का जीवन परिचय

Yuvraj Singh biography in Hindi युवराज सिंह का जीवन परिचय  


  नमस्कार दोस्तों आज हम बात करने जा रहे हैं एक ऐसे क्रिकेट खिलाड़ी की जिन्होंने भारत का नाम पूरी दुनिया में रोशन किया है ।आज हम बात करने जा रहे हैं एक ऐसे प्रेरणादायक शख्स के बारे में जिन्होंने कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी को भी मात दे दी और अपना क्रिकेट कैरियर दोबारा शुरू किया ।जी हां दोस्तों मैं बात करने जा रहा हूं भारतीय क्रिकेट टीम के सिक्सर किंग युवराज सिंह के बारे में ।6.1 फीट का और 78 किलो वजनी  यह खिलाड़ी  जब क्रीज पर आता है  तो  दुनिया के बड़े-बड़े बॉलर  के पसीने छूट जाते हैं ।युवराज सिंह आज भारतीय क्रिकेट टीम के बहुत ही जाने माने खिलाड़ी हैं पूरी दुनिया में युवराज सिंह के लाखों फैन हैं तो चलिए दोस्तों इस महान खिलाड़ी की जीवनी को हम शुरू से जानते हैं।

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जन्म और बचपन  : 

युवराज सिंह का जन्म 12 दिसंबर 1981 को चंडीगढ़ में हुआ। युवराज सिंह के पिता का नाम जोगराज सिंह है जो के पूर्व क्रिकेटर रह चुके हैं ।इसके अलावा युवराज सिंह के पिता पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री के जाने माने अभिनेता है। यवराज सिंह की माता का नाम शबनम सिंह है। इसके अलावा युवराज सिंह के भाई का नाम जोरावर सिंह है। छोटी ही उम्र में युवराज सिंह के माता-पिता का तलाक हो गया था जिसके चलते युवराज सिंह को अपनी माता के पास रहना पड़ा। 

युवराज सिंह ने अपनी पढ़ाई  DAV स्कूल  चंडीगढ़ से  हासिल की । युवराज सिंह को बचपन में टेनस और रोलर स्केटिंग करना बहुत अच्छा लगता था मात्र 11 साल की उम्र में युवराज सिंह ने रोलर स्केटिंग में 14 अवार्ड जीत लिए थे। मगर युवराज सिंह के पिता योगराज सिंह अपने बेटे को एक क्रिकेटर बनाना चाहते थे जिसके चलते उन्होंने नाराज होकर एक दिन युवराज सिंह के जीते हुए सभी मेडल और ट्रॉफी बाहर फेंक दिए और पिता के दबाव के चलते युवराज सिंह ने रोलर स्केटिंग छोड़ कर अपना ध्यान क्रिकेट की तरफ लगाया ।बचपन में युवराज सिंह के कोच नवजोत सिंह सिद्धू थे लेकिन उससे युवराज सिंह के खेल में ज्यादा निखार नहीं आया ।जिसके चलते जोगराज सिंह सिंह ने खुद युवराज को ट्रेनिंग देना शुरू किया।

नवजोत सिंह सिद्धू ने एक इंटरव्यू में बताया कि जब युवराज के पिता युवराज को स्टेडियम में ट्रेनिंग देते थे तो आधे स्टेडियम की लाइट्स बंद कर दी जाती थी और टेनिस बॉल को गीला किया जाता था जिससे वह और तेज निकलती थी और युवराज सिंह को अंधेरे में उस गेंद को जज करना पड़ता था । जिससे युवराज सिंह की बैठक में चमत्कारी निखार आया ।

Cricket Career :

युवराज सिंह ने  अपने क्रिकेट कैरियर की शुरुआत 1996 की जब उन्हें अंडर-19 पंजाब के लिए चुना गया आगे चलकर युवराज सिंह को भारतीय अंडर-19 के लिए चुन लिया गया। युवराज सिंह ने अपने पहले ही टूर्नामेंट में बहुत अच्छा प्रदर्शन किया। यह टूर्नामेंट ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ था जहां पर उनका सर्वाधिक स्कोर 84 रन था जो कि 82 गेंदों में बनाए थे ।

इसी टूर्नामेंट में युवराज सिंह को मैन ऑफ द टूर्नामेंट  से भी नवाजा गया ।अगर हम टेस्ट मैच की बात करें तो युवराज सिंह ने 2002 में इंग्लैंड के खिलाफ अपने सबसे ज्यादा रन 324 बनाएं। 2003 में बांग्लादेश के खिलाफ युवराज सिंह ने अपना पहला शतक जमाया 2005 से 2006 के बीच युवराज सिंह को 3 बार मैन ऑफ द सीरीज भी चुना गया।

अगर हम T20 की बात करें तो  युवराज सिंह को 2007 में पहली बार भारतीय T20 क्रिकेट टीम मैं शामिल किया गया जब राहुल द्रविड़ ने भारतीय कप्तानी से इस्तीफा दिया तो महेंद्र सिंह धोनी को कप्तान बनाया गया और युवराज सिंह को एक हिटर के रूप में टीम शामिल किया गया ।

2007 में वर्ल्ड कप से पहले भारत में इंग्लैंड के खिलाफ एक सीरीज खेली जिसमें युवराज सिंह को गेंदबाजी करते समय इंग्लैंड के एक खिलाड़ी मसकीयस ने 5 गेंदों में 5 छक्के जड़े । जिस का बदला युवराज सिंह ने 19 सितंबर 2007 T20 वर्ल्ड कप मैं एक मैच के दौरान इंग्लैंड के गेंदबाज स्ट्रीट ब्रॉड को छह गेंदों में छह छक्के जड़कर लिया।

IPL Career : 

अगर हम युवराज सिंह की IPL कैरियर की बात करें तो वह उनके लिए इतना अच्छा नहीं रहा ।अपने IPL कैरियर में युवराज सिंह अपने फैंस की उम्मीदों पर खरे नहीं उतर पाए हैं ।2011 में अपना इलाज कराने के बाद युवराज सिंह 2012 में भारत आए। 

सबसे पहले युवराज सिंह को किंग्स इलेवन पंजाब  में  बतौर कप्तान  खिलाया गया  लेकिन युवराज सिंह का प्रदर्शन इतना अच्छा नहीं रहा । उससे अगले साल पुणे वॉरियर्स ने 14 करोड़ में युवराज सिंह  को खरीदा। उससे अगले ही साल कॉन्ट्रोवर्सी के चलते यह टीम आईपीएल से बाहर हो गई ।2014 में युवराज सिंह को रॉयल चैलेंज बैंगलोर ने 14 करोड़ में खरीदा 2015 में युवराज सिंह को दिल्ली ने 16 करोड़ मैं खरीदा। 2016 में हैदराबाद ने युवराज सिंह को 7 करोड़ में खरीदा  युवराज सिंह का IPL कैरियर इतना अच्छा नहीं रहा।

Records : 


युवराज सिंह ने बहुत से रिकॉर्ड अपने नाम किए हैं जिनमें सबसे पहले छह गेंदों पर छह छक्के लगाने का रिकॉर्ड युवराज सिंह के नाम है T20 के इतिहास में ऐसा करने वाले युवराज सिंह पहले खिलाड़ी हैं। इसके अलावा युवराज सिंह पहले ऐसे ऑलराउंडर हैं जिन्होंने वर्ल्ड कप में 300 से अधिक कराना और 15 विकेट लिए हो । 2011 वर्ल्ड कप में सबसे लंबा छक्का मारने का रिकॉर्ड भी  युवराज सिंह के नाम है जो कि 120 मीटर लंबा था।


Faimly : 

युवराज सिंह के पिता का नाम योगराज सिंह और उनकी माता का नाम शबनम सिंह है इसके अलावा युवराज सिंह के भाई का नाम जोरावर सिंह है 2015 में युवराज सिंह ने अपनी फ्रेंड हेजल कीच के साथ इंगेजमेंट कराई और 30 नवंबर 2016 को दोनों ने शादी कर ली ।

Interesting Fact about yuvraj singh life:

युवराज सिंह को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट टीम में सबसे पहला चेक 21 लाख का मिला था जो के उन्होंने अपनी माता को दिया था।


युवराज सिंह ने 2 पंजाबी मूवी मैं भी काम किया है जिनमें से "पुत सरदारा दे "और "मेहंदी शगना "दी हैं।
युवराज सिंह को उनके फैन युवी कह कर बुलाते हैं।

युवराज सिंह ने एक बॉलीवुड मूवी "Jumbo" मैं काम किया है जो कि एक एमिनेशन मूवी है जिसमें युवराज सिंह ने अपनी आवाज रिकॉर्ड कराई है।

2011 में युवराज सिंह ने कैंसर का इलाज कराने के बाद YouWeCan नाम की एक संस्था चलाई है जो कैंसर के मरीजों की सहायता करती है।


युवराज सिंह ने अपनी जिंदगी पर आधारित एक ऑटो बायोग्राफी भी लिखी है जिसका नाम "टेस्ट ऑफ माय लाइफ" है।

युवराज सिंह का लकी नंबर 12 हैं इसलिए वह 12 नंबर की जर्सी पहनते हैं।

इसके अलावा 2011 में युवराज सिंह की जिंदगी में एक बहुत बड़ा बदलाव आया जब उन्हें पता चला कि उनके लंग में कैंसर है लेकिन अच्छी बात यह थी यह अभी पहली स्टेज पर ही था। इसलिए युवराज सिंह अमेरिका गए वहां उन्होंने बीसटन मैं कीमोथैरेपी कराई जिसकी 1 साल बाद मैं बिल्कुल ठीक हो गए।

तो दोस्तों यह तो थी युवराज सिंह की जिंदगी की कहानी हमें उम्मीद है यह आपको हमारे द्वारा दी गई जानकारी अच्छी लगती होगी। अपना कीमती समय देने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद और आपको हमारा आर्टिकल कैसा लगा हमें कमेंट करके जरूर बताएं।

Friday, 8 June 2018

5 best ways to earning online in hindi ( make money online )

5 best ways to earning online in hindi ( make money online )


दोस्तों जैसे के आप सब जानते है हम इन्टरनेट के लिए इतने पैसे खर्च करते है . मगर क्या आप को पता है के कुछ लोग इन्टरनेट से पैसे कमाते वी है. जी हाँ दोस्तों कुछ लोग इन्टरनेट से लाखो की हिसाब से पैसे कमा रहे है , तो चलिए मैं आप को ऐसे 5 बेहतरीन तरीके बताउगा जिस से आप बी इन्टरनेट से पैसे कमा सकते है . दोस्तों वैसे तो और वी बहुर तरीके है इन्टरनेट से पैसे कमाने के मगर आज मैं आप को बेस्ट 5 तरीके के बारे में बतौगा . तो चलिए दोस्तों शुरू करते है .


5 best ways to earning online in hindi ( make money online )



1 Youtube:

सब से पहला और बेस्ट तरीका है youtube , इस के लिये आप को youtube पर एक चैनल बनाना होगा , चैनल बनाने क बाद आप को अपनी खुद की विडियो अपलोड करनी होगी अपनी आवाज में , एक बात यहाँ ध्यान देने वाली है के आप किसी दुसरे की विडियो डाउनलोड करके अपने चैनल पे अपलोड नहीं कर सकते , उस को youtube पहचान लेता है वोह अपलोड नहीं होती , अगर हो वी गई तो जिस की आप ने विडियो डाली है वोह youtube को शिकयत करेगा तो आप का चैनल बंद कर दिया जाएगा , विडियो डालने की बाद आप को उस विडियो को शेयर करना होता है जब आप के टोटल दस हज़ार व्यू हो जाते है तो आप अपने चेन्नल monitize कर सकते हो जिस से आप के विडियो के आगे ऐड आना शुरू हो जाएगा जिस से के आप को कमाई होगी 


2 Afilated markiting: 


इस से आप किसी व् इ कमर्स साईट पर जैसे के अमेज़न , फ्लिप्कार्ट वगेरा पर मेम्बरशिप ले सकते है और उन के प्रोडक्ट को वेच कर उस में से अपना कमिशन ले सकते है , इस के लिया आप को पहले मेम्बरशिप लेनी है वोह बिलकुल फ्री है और जो प्रोडक्ट आप को वेचना है उस को सर्च करना है उस के बाद वो कम्पनी आप को उस का एक लिंक देगी आप को उसे शेयर करना है जितने वी लोग उस लिंक से जा कर चीज़े खरीदे गे उस का आप को क्मिशिन मिलेगा 


3.Domain: दोस्तों मैं आप को बता दू के डोमेन एक url होता है , जिसे हम साईट वी कहते है जैसे के www.myindia.com यह एक डोमेन है , कुछ लोग इसे खरीद लेते है जैसे के उद्धरण के तोर पे रेलिन्स जिओ कम्पनी है और यह अपना फ़ोन लांच करने जा रही है और मुझे पता है के यह फ़ोन कम्पनी अपने वेबसाइट पर वेचेगी तो मैंने पहले ही  www.jiophone.com  नाम का डोमेन खरीद लिया , अब कम्पनी यह देखे गी के यह डोमेन किस के पास है आप इस डोमेन पे for selling लिख के छोड़ देगे जब कम्पनी को इस साईट की जरूरत होगी तो वोह आप से सम्पर्क करेगी और आप उस को अपना डोमेन लाखो में वेच सकोगे 




4. Fiver.com यह एक ऑनलाइन साईट है यहाँ आप सब कुछ वेच सकते है , यहाँ पर कम से कम कीमत 5 डोलर होती है किसी वी काम की , अब हम आप को बताते है के इस पर काम क्या क्या होते है , आप यहाँ किसी को website desgine करके दे सकते हो , किसी को आर्टिकल लिखाना होता है आप उस को वोह व् लिख के दे सकते हो अगर आप का फेसबुक पर कोई पेज है जिस के लाखो में लाइक है तो किसी को अपने प्रोडक्ट लोगो में दिखना होता है तो वोह आप को कम से कम 5 डोलर देगा उस के प्रोडक्ट का लिंक शेयर करने के आप ज्यादा वी ले सकते हो मगर कम से  कम 5 डोलर होते है


5. Website: अगर आप के पास अछि नॉलेज है तो आप अपनी खुद की एक website बना सकते हो उस पे अछि पोस्ट डालो जिस को देखने लोग आपकी website पे आए . और फिर आप अपनी website को google adsense से जोड़ना होगा जिस से google आप की साईट पर ऐड देगा आप ने देखा होगा ऐसी बहुत सी websites है जिस पे आप को ऐड दिखती होगी तो उन लोगो को उस ऐड के वी पैसे मिलते है तो दोस्तों आप ऐसे वी इन्टरनेट से पैसे कम सकते है.






आप को मेरा आर्टिकल कैसा लगा मुझे कमेंट करके जरुर बताए और आगे शेयर करे धन्यवाद!

Thursday, 7 June 2018

Biography of Mujeeb Ur Rehman (Mystery Spiner) in hindi ( मुजीब उर रहमान की जीवनी)

Biography of Mujeeb Ur Rehman (Mystery Spiner) in hindi ( मुजीब उर रहमान की जीवनी):

  
Mujeeb Ur Rehmaan 

दोस्तों आज मैं जिस शख्स की बात करने जा रहा हूं वह क्रिकेट की दुनिया का एक चमकता सितारा है ।जिसने यह मुकाम बहुत ही छोटी उम्र में हासिल कर लिया है दोस्तों मैं बात करने जा रहा हूं अफगानिस्तान के मिस्ट्री स्पिनर मुजीब उर रहमान की, जो कि हाल ही में चले इंडियन प्रीमियर लीग में किंग्स इलेवन पंजाब की तरफ से खेले और अपनी गेंदबाजी से सबको हैरान कर दिया।

यह 17 वर्षीय खिलाड़ी बहुत ही अच्छा खेला जिसके सामने अंतर्राष्ट्रीय स्तर के बड़े खिलाड़ी जैसे एबी डिविलियर्स , विराट कोहली और केन विलियमसन जैसे दिग्गज भी ढेर हो गए ।तो चलिए दोस्तों आज हम आपको मुजीब उर रहमान की जिंदगी की पूरी कहानी शुरू से बताते हैं।


जन्म और बचपन :मुजीब उर रहमान का जन्म 26 मार्च 2001 को अफगानिस्तान के खोस्त मैं हुआ।  जब मुजीब सिर्फ 3 महीने के थे तो उनके पिता का देहांत हो गया घर में बहुत ज्यादा गरीबी होने के कारण मुजीब ज्यादा पढ़ लिख नहीं पाए ,यही वजह है कि आज भी मुजीब जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बात करते हैं तो अपनी भाषा पास्तो मैं ही बात करते हैं उनके कोच आगे उसको अंग्रेजी में बदलकर बताते हैं।

मुजीब उर रहमान एक लेग स्पिनर हैं अपनी 17 वर्षीय उम्र में इतनी कारगर गेंदबाजी से मुजीब ने सबको प्रभावित किया है अगर हम मुजीब के शरीर की बन्त्र बात करें तो  उनका कद 5 फुट 11 इंच है इसके अलावा बाइसेप्स का आकार 14 इंच और छाती का आकार 40 इंच है इसके अलावा आंखें भूरे रंग की है।

मुजीब को छोटी ही उम्र से क्रिकेट खेलना बहुत पसंद था जिसके चलते वह अपनी गेंदबाजी को निखारते गए, एक इंटरव्यू में मुजीब ने बताया के जो वह कैरम बाल डालते है वह बाल उन्होंने भारत के जाने-माने स्पिनर अश्विन से उनकी वीडियो देखकर सीखी है । इसके अलावा मुजीब एक ही ओवर में 5 तरीके की बाल डाल सकते हैं जिसके चलते मुजीब को मिस्ट्री स्पिनर के नाम से भी बुलाया जाता है।

Cricket Career :मुजीब ने अपने एक दिवसीय क्रिकेट कैरियर की शुरुआत 5 दिसंबर 2017 को आयरलैंड के खिलाफ की,  इसके अलावा 5 फरवरी 2018 को अपने T20 कैरियर की शुरुआत जिंबाब्वे के खिलाफ खेलकर की ।मुजीब ने अब तक 43 एक दिवसीय और 38 T20 मुकाबले खेले हैं जिसमें उन्होंने अपनी मिस्ट्री गेंदबाजी से सबको प्रभावित किया है।

घरेलू लीग्स : इसके अलावा अगर हम मुजीब उर रहमान की लीग मैं बात करें तो 2017 में मुजीब उर रहमान स्पीन घर क्षत्र के लिए खेले जिसके बाद 2017 में ही बूस्ट डिफेंडर्स और उसके बाद इसी साल बांग्लादेश प्रीमियर लीग और 2017 में ही कामिला विक्टोरिया और हाल ही में 2018 में इंडियन प्रीमियर लीग में खेले

Lifestyle : अगर हम मुजीब और रहमान की लाइफस्टाइल की बात करें तो मुजीब अभी कुंवारे हैं इसके अलावा उनके पसंदीदा खिलाड़ी अफगानिस्तान के ही स्पिनर राशिद खान हैं


Property :मुजीब के पास 2018 में कुल संपत्ति 30000000 है मुजीब के बारे में एक बात बहुत मशहूर है के जे दुनिया का सबसे कम उम्र का करोड़पति है जिसने अपनी मेहनत पर इतनी संपत्ति बनाई है।


तो दोस्तों यह तो थी अफगानिस्तान की मिस्ट्री स्पिनर मुजीब उर रहमान की जिंदगी की कहानी हमें उम्मीद है कि आपको हमारे द्वारा दी गई जानकारी अच्छी लगती होगी आप हमें कमेंट करके हमारा मनोबल बढ़ा सकते हैं अपना कीमती समय देने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद

Wednesday, 16 May 2018

History of Veerapan life Biography of Veerapan ( डाकू वीरप्पन का इतहास )

History of Veerapan life Biography of Veerapan ( डाकू वीरप्पन का इतहास )

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दोस्तों आज हम बात करने जा रहे हैं आतंक के दूसरे नाम के बारे में जिसका नाम था वीरप्पन। वीरप्पन भारत का बहुत बड़ा डाकू स्मगलर और चंदन तस्कर था। जिस को पकड़ने के लिए तमिलनाडु की सरकार को 20 साल लग गए बड़ी-बड़ी मूछें वाले वीरप्पन ने सरकार के पसीने छोटा दिए थे । जिसके लिए सरकार ने वीरप्पन पर 5 करोड़ का इनाम भी रखा था विरप्पन ने हाथी दांत ,चंदन की लकड़ी, शेर की खाल और इसके अलावा किडनैपिंग जैसी बहुत सी वारदातों को अंजाम दिया।
वीरप्पन को पकड़ने के लिए भारत सरकार को कई साल लग गए जिसमें बहुत से जवानों की जान चली गई और करोड़ों की संपत्ति का नुकसान भी हुआ तो चलिए दोस्तों चंदन तस्कर वीरप्पन की कहानी को हम शुरू से जानते हैं।



वीरप्पन का जन्म 18 जनवरी 1952 को कर्नाटक जिले के गोपीनाथन गांव में हुआ था वीरप्पन को तस्करी का काम विरासत मैं मिला था।  उससे पहले वीरप्पन के पिता एक जाने-माने डाकू और चंदन तस्कर थे वीरप्पन के पिता का जंगल के आसपास की गांव में बहुत खौफ था जिसके चलते वीरप्पन को यह काम अपने पिता और कुछ रिश्तेदारों से विरासत में मिला।

वीरप्पन ने 10 साल की उम्र में क्राइम की दुनिया में कदम रखा जब उसने अपने एक साथी की मदद से दूसरे तस्कर को मार दिया जब इस बात की भनक वन अधिकारियों को लगी तो वीरप्पन ने तीन वन अधिकारियों को भी मार डाला
1970 में वीरप्पन एक चंदन तस्कर गिरोह में शामिल हो गया जिसके बाद उसने हाथी दांत की तस्करी करना शुरू कर दिया।
1983 में वो एक बार पुलिस के हत्थे चढ़ा पुलिस ने उसे एक कमरे में कैद किया लेकिन वह वहां से रहस्यमई तरीके से भाग गया।
1987 में वीरप्पन ने वन अधिकारी चिदंबरम को पहले अगवा किया फिर उसे मौत के घाट उतार दिया जिसके बाद वीरप्पन सुर्खियों में आ गया।
9 अप्रैल 1990 को उसने तीन पुलिस अफसर को मार दिया
जिसके बाद कर्नाटक सरकार और तमिलनाडु सरकार ने वीरप्पन को पकड़ने के लिए एक  स्पेशल टास्क फोर्स का गठन किया ।

History of Veerapan life Biography of Veerapan ( डाकू वीरप्पन का इतहास )

लेकिन 1991 में वीरप्पन ने एक सीनियर पुलिस ऑफिसर का कत्ल कर दिया और उसके सर को  कलम कर दिया  जिसके 3 साल बाद  उस ऑफिसर का सर  जंगल में से मिला था क्योंकि वह उसके काम में दखल दे रहा था।

वीरप्पन  ने हाथी दांत के लिए 2000 हाथियों को मार दिया था।
1992 में वीरप्पन ने रामपुरा थाने में हमला बोल दिया जहां पर उसने पांच पुलिस अफसर को मार डाला और वहां से सारा असला लूट कर भाग गया।
1993 में BSF ने एक मिशन में वीरप्पन को पकड़ने के लिए एक स्पेशल टीम बनाई लेकिन उनके मिशन में सबसे बड़ी बाधा भाषा आ रही थी क्योंकि वह एक दूसरे की भाषा को नहीं समझ पाते थे ।जिसके चलते यह मिशन असफल हो गया और इसमें कई बीएसएफ जवानों की जान चली गई।

veerapan biography history hindi


एक बार वीरप्पन ने बम से एक बस को उड़ा दिया जिसमें 22 लोगों की जान चली गई इसके अलावा उसने 5 एसटीएफ के जवानों को मार दिया। जिसके बाद BSF और एसटीएफ के एक मिशन में वीरप्पन के 9 लोग पकड़े गए।
जिसके बाद 1996 में वीरप्पन ने गुस्से में आकर 19 पुलिस अफसर को मार डाला।

सन 2000 में उसने अपनी जिंदगी का सबसे बड़ा क्राइम किया जिसमें उसने कन्नड़ के मशहूर अभिनेता राजकुमार का अपहरण कर लिया। जिसके बाद पूरा मीडिया इस अपहरण की कवरेज में लग गया और वीरप्पन का आतंक पूरे भारत में फैल गया। 108 दिन के बाद वीरप्पन ने 50 करोड़ की फ्रोती लेकर उसे छोड़ दिया।

2002 में वीरप्पन ने कर्नाटक की एक मंत्री को पहले अपहरण करके फिर मौत के घाट उतार दिया जिसके बाद सरकार ने वीरप्पन को पकड़ने वाले को 5 करोड़ के इनाम की घोषणा की क्योंकि वैसे भी सरकार का वीरप्पन को पकड़ने के लिए 500 करोड़ खर्च हो चुका था।
18 ओकटुबेर 2000 को वीरप्पन और उस के दो साथियो को STF की टीम ने मौत के घाट उतार दिया इस मिशन की अगवाई विजय कुमार कर रहे थे।

तो दोस्तों यह थी वीरप्पन के आतंक की कहानी आपको हमारा आर्टिकल कैसा लगा हमें कमेंट करके जरूर बताएं अपना कीमती समय देने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।

Monday, 14 May 2018

Story of Pokhran in hindi ( India's first Nuclear test ) smiling budha

नमस्कार दोस्तों आज इस आर्टिकल में मैं आपको बताऊंगा के कैसे भारत एक परमाणु शक्ति देश बना आज इस दुनिया में कुछ चुनिंदा देश हैं जिनके पास परमाणु शक्ति है और भारत उन देशों में से एक है । जो पहला परमाणु परीक्षण किया गया बो राजस्थान के जैसलमेर से 100 किलोमीटर दूर पोखरण नाम की जगह पर किया गया और इस मिशन के पीछे बहुत ही रोचक कहानी है ।
श्री जवाहरलाल नेहरू से लेकर श्री अटल बिहारी वाजपेई जी तक भारत के कई प्रधानमंत्री रहे सभी ने परमाणु शक्ति पर बहुत जोर दिया मगर जिस समय भारत को जी मिशन पूरा करना था उस समय अमेरिका समेत P5 देशों ने पूरी दुनिया में परमाणु हथियार बनाने पर रोक लगाई हुई थी तो चलिए दोस्तों पोकरण की इस स्टोरी को हम शुरू से जानते है।
Nuclear Weapons Age : दोस्तों 21वीं सदी में लगभग सभी देशो के पास अपने अपने परमाणु हथियार हैं अगर किसी भी समय युद्ध शुरू हो जाता है और उसमें किसी एक देश ने परमाणु हथियार का इस्तेमाल कर दिया तो पूरी दुनिया को खत्म होने में ज्यादा वक्त नहीं लगेगा । आज से कुछ समय पहले जब हम कहते थे कि जो चीज एक झटके में हजारों लोगों को मार सकती है तो वह सिर्फ कहने की बातें थी लेकिन 1940 के बाद यह सच साबित हो गया जब पहली बार अमेरिका ने 1945 में जापान के हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराए और एक ही झटके में पूरे के पूरे शहर तबाह कर दिए गए और उसके बाद वहां पर फैले रेडियेशन की वजह से आने वाले कई सालों तक लोग ऐसे ही मरते रहे।

परमाणु की खोज : परमाणु की खोज सबसे पहले दूसरे विश्वयुद्ध में अमेरिका ने की अमेरिका ने 1945 में परमाणु बम की खोज की जिस मिशन का नाम था प्रोजेक्टर महानतम इसके बाद रूस ने और उसके कुछ समय बाद फ्रांस में परमाणु बम बना लिए थे । 1964 में चाइना ने भी परमाणु हथियार बना लिए जिसके चलते चीन दुनिया का चौथा परमाणु शक्ति देश बन गया चाइना के बाद भारत को भी परमाणु शक्ति पर अपना ध्यान केंद्रित करना था । इससे पहले 1962 में भारत ने चाइना से युद्ध हारा था जिसके चलते भारत को यह लगने लगा कि आप उसे भी परमाणु शक्ति देश बनना होगा।

Homi Jahangir Bhaba : होमी जहांगीर बाबा भारत के एक बहुत ही बड़े वैज्ञानिक रह चुके हैं होमी जहांगीर बाबा ने भारत सरकार को 1940 में ही अपना ध्यान परमाणु शक्ति की ओर बढ़ाने के लिए जोड़ दिया उनका कहना था कि हम परमाणु हथियार तो नहीं मगर परमाणु से बिजली का उत्पादन कर सकते हैं इसलिए हमें जरूरी नहीं है कि परमाणु से हथियार ही बनाने हैं हम इसका इस्तेमाल बिजली के लिए कर सकते हैं जिस लिए उन्होंने टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च और बाबा एटॉमिक रिसर्च सेंटर की नींव रखी आज भी भारत के यह दो बहुत बड़े रिसर्च सेंटर है । जहां पर आज भी परमाणु के ऊपर रिसर्च हो रही है और इन्हीं दो इंस्टिट्यूट से भारत के लिए बहुत बड़े बड़े वैज्ञानिक निकले हैं।

Pokhran 1 : भारत ने अपना पहला परमाणु परीक्षण 18 मई 1974 को किया जिसका नाम था स्माइलिंग बुद्धा क्योंकि उस दिन बुद्धा पूर्णिमा थी । मिशन पूरा होते ही भारत दुनिया में शटा ऐसा देश बन गया जिसके पास परमाणु बनाने की टेक्नोलॉजी आ चुकी थी । इस मिशन  में भारत के 3 बड़े वैज्ञानिक होमी सेठना ,राजा रमन्ना और बसंती नाग चौधरी थे। इस मिशन के सक्सेसफुल होने के बाद उस समय के प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने  दुनिया को यह विश्वास दिलाया कि हम परमाणु का इस्तेमाल शांति के कामों के लिए करेंगे जैसे की बिजली बनाना हम परमाणु से कोई परमाणु हथियार नहीं बनाएंगे । हालांकि कि हम ऐसा कर सकते हैं हमारे पास परमाणु बनाने की टेक्नोलॉजी है मगर हम ऐसा नहीं करेंगे इसके बाद पूरी दुनिया में भारत के लिए बहुत नाराजगी पाई की पश्चिमी देश इससे बहुत नाराज थे

Second Nuclear Test : दोस्तों जहां पर सवाल यह पैदा होता है कि जब हमने पहली परमाणु परीक्षण कर लिया था तो हमें दोबारा इसका परीक्षण करने की क्या जरूरत थी हम आपको बता दें कि जो पहला परीक्षण था उसमें भारत ने सिर्फ परमाणु टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया था अब हमारा मिशन परमाणु हथियार बनाना था के परमाणु से मिसाइल कैसे बनाई जाए और उससे बम को कैसे बनाया जाए यह हमारा मिशन था
मगर उस समय इमरजेंसी के चलते यह पूरा न हो सका उस कर कर प्रधान मंत्री इस मे ज्यादा दिलचस्पी नही लेते थे जिस के चलते 1995 में पी वी नरसिम्हा राव के समय इस मिशन को दोबारा शुरू किया गया 


परीक्षण का पकड़े जाना : जब भारत दोबारा इस मिशन पर काम करना शुरू किया तो हमारे यह टेस्ट दो बार पकड़े गए क्योंकि उस समय पूरी दुनिया में परमाणु हथियार बनाने पर रोक लगाई गई थी जिसके चलते अमेरिका को भी शक था कि भारत परमाणु टेक्नोलॉजी के बाद परमाणु हथियार भी बनाएगा जिसके चलते अमेरिका की खुफिया एजेंसी सीआईए ने अपनी सिपाई सेटेलाइट से पूरी नजर बनाई हुई थी जब भी भारत जय टेस्ट करने जाता तो अमेरिका की तरफ से फोन आ जाता कि अगर आप ऐसा करोगे तो इसका अंजाम अच्छा नहीं होगा। जिस के लिए भारत को दो बार यह टेस्ट बीच मे रोकने पढे। 



Pokhran 2 : आखिर में भारत ने 11 मई 1998 को 3 और 13 मई 1998 को 2 परमाणु डिवाइसेस का परीक्षण किया गया। उस समय भारत के प्रधान मंतरी अटल बिहारी वाजेपयी थे। जिस में  Dr. APJ Abdul kalam , Rajgopal chidambram और Anil Kakodkar मेन विज्ञानक थे इस के इलावा और भी बहुत विज्ञानक थे। इस मे खास बात यह थी यह मिशन बहुत ही चोरी से किया गया। ज्यादा काम रात को होता था ,  जब वहां पर आंधी चलती थी तो इस काम को किया जाता था त जो सेटलाइट की नज़र में न आया जाए। जो मुखय विज्ञानक थे वो आर्मी की वर्दी पहन कर जाते थे। एक एक कार विज्ञानक टेस्ट वाली जगह पर जाता था। इस मे खास बात के टेस्ट वाली जगह से कुछ दूर एक स्पेशल क्रिकेट ग्राउंड बनाया गया जिस में आर्मी के हज़ारो जवान खेलते रहते थे। जिस से सेटलाइट से देखने पर यह लगता था के यहां पर कोई खेल टूर्नामेन्ट चल रहा है। 

दुनिया में नाराजगी: 11 मई 1998 कि शाम को भारत के प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेई जी ने TV पर मुझे अनाउंस कर दिया कि भारत ने परमाणु हथियार बना लिए हैं उसके बाद 13 मई को अमेरिका ने भारत के व्यापार पर रोक लगा दी इसके अलावा अमेरिका की तरफ से जो भी इम्युनिटी ऐड आती थी वह बंद हो गई इसके अलावा भारत जो भी दक्षिणी देशों के साथ व्यापार करता था वह बंद कर दिया गया मगर कुछ ही समय बाद कारगिल का युद्ध शुरू हो गया जिसमें पूरी दुनिया को जय लगा कि भारत इस युद्ध में परमाणु हथियार का इस्तेमाल जरूर करेगा लेकिन भारत ने ऐसा नहीं किया जिसके चलते भारत ने दुनिया को यह विश्वास दिला दिया के भारत कभी भी पहले परमाणु हथियार का इस्तेमाल नहीं करेगा अगर पूरी दुनिया परमाणु हथियार नष्ट करती है तो उनके साथ भारत भी अपने परमाणु हथियार नष्ट कर देगा जिसके 2 सालों बाद ही भारत पर लगाई गई सभी रोक हटा दी गई और आज भारत एनएसजी को छोड़कर सभी परमाणु ग्रुप का मेंबर है अगर आपने इस कहानी को बॉलीवुड स्टाइल में देखना है तो इस पर जॉन अब्राहम की फिल्म परमाणु भी बन चुकी है

Wednesday, 7 February 2018

Biography of Chris Gayle in hindi (कैसे कचरा उठाने वाला बना करोड़पति)

दोस्तो Chris Gayle क्रिकेट की दुनिया का एक चमकता सितारा , क्रिस गेल को आज कौन नहीं जानता मगर इस मुकाम को पाने के लिए क्रिस गेल ने कितनी मेहनत की है इस को कोई नहीं जानता। क्रिस गेल ने कितने ज्यादा बुरे हालातों में अपना क्रिकेट केरियर शुरू किया और कैसे आज इस मुकाम पर पहुंचे , तो चलिए दोस्तों आप को बताते हैं क्रिस गेल की जिंदगी की सारी कहानी।

Chris Gayle  का जनम 21 सितम्बर 1979 को Kingstone Jamaica में हुआ। दोस्तो हम किसी वी कामज़ाब शक्स को हस्ते और मुस्कराते तो देख लेते हैं मगर उस शक्स का उस मुकाम तक पहुंचने का सफर कैसा रहा उस पर हमारा ध्यान नहीं जाता। ऐसा ही एक शक्स है Chris Gayle जो हमेशा मुस्कराता रहता है।
मगर आप में से बहुत कम लोग यह जानते हैं के Chris Gayle ने अपनी ज़िंदगी में बहुत ही संघर्ष किया है, Chris Gayle का परिवार एक कच्ची झोंपड़ी में रहता था । घर में बहुत ज्यादा गरीबी होने के कारण Chris Gayle अपनी पढाई वी पूरी नहीं कर पाए। आप को यह जान कर हैरानी होगी के Chris Gayle आपने परिवार का पेट पालने के लिए जगह जगह कचरा इक्ठा किया करते थे ।



Chris Gayle ने एक चैनल को दी interview में बताया के कभी कभी उस को चोरी वी करनी पड़ती थी जब उस के पास खाने को कुछ नहीं होता था। मगर उस वक़्त Chris Gayle वी यह नहीं जानता था के एक दिन किस्मत उस पर ऐसे मेहरबान होगी के वह दुनिया के अमीर लोगो में से एक होंगे। 
Cricket Carrier : Chris Gayle की क्रिकेट करियर की शुरुआत Lucca Cricket Club से हुई थी। उस वक़्त Chris Gayle अंडर 19 में पहली बार खेले थे। आगे चल कर उनोह ने अपना पहला ODI मैच भारत के खिलाफ 1999 को खेला और पहला टी20 New Zealand के खिलाफ 2006 में खेला।
शुरुआत में Chris Gayle का बल्ला नहीं चला जिस के चलते उन को बहुत कुछ सुनना पढ़ा मगर अपनी मेहनत और लगन के बल पर सब से पहले 2002 में एक ही साल में 1000 रन बनाने का रिकॉर्ड आपने नाम किया। उस के बाद Chris Gayle ने कभी भी पीछे मुड़ कर नहीं देखा । Chris Gayle दुनिया के पहले ऐसे खिलाडी हैं जिनोह ने आपने पहले मैच की पहली बाल पर सिक्स मारा है।

Chris Gayle दुनिया के 4 ऐसे खिलाडी हैं जिनोह ने टेस्ट मैच में Triple Ceuntery लगा रखी है। अगर हम टी20 की बात करें तो टी20 मैच के इतिहास का पहला सैंकड़ा वी Chris Gayle ने ही लगाया है। टी20 में उस का बेस्ट स्कोर 175 रन है। 2007 से लेकर 2010 तक क्रिस गेल West Indies टीम के कप्तान वी रह चुके हैं।
Chris Gayle इतने गरीब परिवार में पैदा होने के बावजूद वी आज उस मुकाम तक पहुँच गए हैं जहाँ पहुँचने का लोग सपना देखते है। 

Luxery Cars and Income Of Chris Gayle : अगर हम आमदन दी बात करें तो एक साल की आमदन 5 बिलियन डॉलर से लेकर 7 बिलियन डॉलर के वीच है। हालहि में Chris Gayle ने जमैका में एक लग्जरी हाउस खरीदा है जिस की कीमत 22.5 करोड़ है। अगर गाड़ीयों की बात करें तो Chris Gayle के पास 8 lugsry Cars है। जिन में से Mercedes Benz, Range Rover, Lamborghini and Audi जैसी बड़ी गाड़ियां हैं।
तो दोस्तो यह थी Chris Gayle की कहानी , अपना कीमती समय देने की लिए आप का बहुत बहुत धन्यवाद। अगर आप ऐसी Motivational Storys के लिए हमारा Facebook Page लाइक करें ता के जब भी हम ऐसे Motivational आर्टिकल Update करें तो आप को उस का लिंक Facebook पे मिल जाए।
   

Thursday, 25 January 2018

What is Swaminathan report(स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश)


                                 
  What is Swaminathan report ?
 स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट क्या है
दोस्तों आप ने देखा होगा के आज के समय में किसान हर राज में आन्दोलन कर रहे हैं , उन की मुख्य मांग है के Swaminathan Report को लागू किया जाए . सवाल यह उठता है के आखिर क्या है इस स्वामी नाथन रिपोर्ट में , इस स्वामी नाथन रिपोर्ट को कुछ  लोग Swaminathan Ayog (स्वामीनाथन आयोग) वी कहते हैं , आखिर यह कोण था स्वामी नाथन और क्या था इस की रिपोर्ट में आज हम  इस के बारे में पूरी detail में आप को बताने वाले हैं ।


Who is Swaminathan : स्वामी नाथन का पूरा नाम है MS Swaminathan , इन का जनम 1925 को तमिलनाडु में हुआ था , मगर सब से पहले स्वामीनाथन 1966 में सुर्खियो में आए , 1966 में स्वामीनाथन ने गेंहू का एक नया बीज तयार किया , पंजाब में जो गेंहू उगाया जाता था और जो गेंहू मक्सिको में उगाया जाता था उन दोनों की ब्रीद को मिला कर एक नया बीज तयार किआ जिस का उत्पादन ज्यादा था ।

इस लिए स्वामीनाथन को ‘Hari Kranti Ka Janak’ वी बोला जाता उन की इस शोध के लिए उनेह पदम् श्री , पदम् विभूसन और वि बहुत सारे अवार्ड से निवाजा गिया ।

What is Swaminathan Commission  :  देश की आजादी के बाद किसानो की हालत पर किसी का ध्यान न गिया जिस के कारण किसानो की हालत बहुत विगड गई और इस हालत को सुधरने के लिए सर्कार दुवारा 2004 में National Commission of Farmar बनाया गिया , जिस के मुख अधक्ष थे स्वामीनाथन . इस कमिशन को ही स्वामीनाथन कमिशन कहा जाता है ।

2006 में स्वामीनाथन ने सिर्फ 2 साल में अपनी 5 रिपोर्टे सरकार के पास जम्हा करा दी थी , मगर अबतक 11 साल हो चुके हैं अबतक किसी वी सरकार ने स्वामीनाथन की एक वी सिफारश को लागू नहीं किया है , स्वामीनाथन ने अपनी रिपोर्ट में 6 बातों पर सब से ज्यादा जोर दिया ।

स्वामीनाथन रिपोर्ट की सिफर्शे :( how to pronounce swaminathan)

1.      स्वामीनाथन ने अपनी पहली सिफारश में सरकार को बोला के जो किसान भूमि हीन हैं मतलब के जिन के पास भूमि नहीं है , और जो भूमि सरकार के पास खाली पड़ी है उन को उन किसानो में वांट दिया जाना चहिए ता जो गरीब किसान है वोह उन में खेती कर सके और  जो जमीन सरकार के पास बेकार पड़ी है उस से कुछ अनाज पैदा किआ जा सके ।

2.     स्वामीनाथन की दूसरी मुख बात थी के कैसे किसान आतम हत्या को रोका जाए , उस पर उनोह ने कहा के जो MSP मतलब के जो सरकार दुवारा फसल के दाम दिए जाते हैं उस में जो किसान की लागत आई है उस से 50% ज्यादा दाम उस फसल के ताए किए जाने चहिए।

3.     इस रिपोर्ट में जो तीसरा सब से बड़ा बिंदु था वोह था के सरकार फसल की सिंजाई के लिए पानी का अच्छा बन्दोबस्त होना चाहिए , मतलब के सरकार कुछ ऐसे कदम उठाए जिस से वरिश के पानी को जम्हा कर सिंजाई के लिए वरता जाए ।

4.     किसान की फसल का बीमा होना चाहिए  , दूसरी इसी बिंदु में उनोह ने बात कही के सरकार के दुवारा एक ऐसा फण्ड होना चाहिए अगर किसी राज्य में सूखा पड जाए जा किसी और कुदरती आफत से किसान की फसल बर्बाद हो जाए तो सर्कार उस फण्ड में से किसान की मदद कर सके ।

5.     उस वक़्त जो भूखमरी चल रही थी पूरे देश में उस पर उनोह ने कहा के सरकार GDP का 1% खाद सुरक्षा पर खर्च करे ता जो हर विअकती को खाना मिल सके , उनोह ने कहा के जो हमारे स्टोर में रखा गया खाना है जो खुले में सड रहा है , उस के अछि जगह मे स्टोर किया जाना चाहिए ।

6.     फसल की पैदावार को बढाने के लिए सरकार दुवारा गांव और कस्बो में सरकारी लेबोरटरी खोली जाए जो मिटटी की जांच करे और किसान को यह बताएं के इस मिटटी में कौन सी फसल उगानी है और मौसम और मिटटी के हिसाब से जिस फसल की पैदावार ज्यादा है उस को ही उगाया जाए ता जो किसान की पैदावार बड जाए।

स्वामीनाथन की इस रिपोर्ट में यह 6 बातें कही गई हैं इस के बाद कृषि विगानियो ने वि यह माना है के अगर सरकार इन 6 बातों को सुनिचत कर देती है तो किसान की हालत में काफी जायदा सुधार आया जाएगा , उस की जिन्दगी पहले से काफी खुशहाल हो जाएगी , मगर अब तक इतनी सरकारें आये मगर किसी ने इस रिपोर्ट को लागू नहीं किया ।

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Thursday, 16 November 2017

Bhopal gas tragedy(History) in hindi( भोपाल गेस कांड )

                                                                                   
  Bhopal gas history : 2 दिसम्बर 1984 को मध्य प्रदेश के ' भोपाल ' शहर में एक बहुत ही मंदभागी घटना हुई। जिस को ' भोपाल गैस त्रासदी ' के नाम से वी जाना जाता है। यह घटना पूरे भारत में अबतक की सब से बड़ी घटना है जहाँ एक साथ इतने लोगो की जान गई। भोपाल गैस कांड पर सरकारी दस्तवेज और अलग अलग टीवी और अखबारों के अलग अलग मत हैं , सरकारी दस्तावेजो के अनुसार इस त्रासदी में मरने वालो की गिनती सब से पहले 2200 बताई गई , मगर बाद में मध्य प्रदेश की सरकार की एक रिपोर्ट में यह गिनती 3700 बताई गई। मगर इस के इलावा कई और विभिन स्रोतों में बताया गया है के 8000 के करीब मौते तो पहले 2 सप्ताह में ही हो गई थी । उस के बाद कई बीमारियो के चलते 8000 मौते बाद में हुई। मध्य प्रदेश की सरकार ने इस बात को माना है के इस गैस कांड में कुल 5 लाख लोग प्रभावित हुए हैं । भोपाल गैस कांड अबतक की सब से बड़ी उदजोगिक घटना है । 

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Bhopal Gass Tregedy accident: 1969 में भोपाल में एक कारखाना लगाया गया जिस का नाम Union Carbide Plant Bhopal था। जहाँ पर मिथाइल आइसोसाइनाइट ( Methyl Icosyanate ) नाम का पदार्थ बनता था । जो के कीटनाशक बनाने के लिए बनाया जाता ता। 


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सुरक्षा में कमी : नवम्बर 1984 को कारखाने में सुरक्षा के इंतजाम काफी कम थे , वहां पर लगे सभी मैनुअल अंग्रेजी में थे मगर वहां पर काम करने वाले कर्मचारियो को अंग्रेजी का इतना ज्ञान नहीं था। वहां पर लगे हवा के वेंट जिस से पाइपो की सफाई की जाती थी वह पूरी तरह से काम नहीं करते थे। टैंक नम्बर 610 में काफी मात्रा में गैस इकठी हो गई थी , इस मिथाइल आइसोसाइनाइट गैस को कम तापमान पर रखा जाता है , मगर पावर का खर्च कम करने के लिए गैस को ठंडा करने वाले फ्रीजिंग प्लांट वी बन्द पढ़े थे जिस के कारण टैंक का तापमान बढ़ गया । 2 और 3 दिसम्बर की रात मिथाइल आइसोसाइनाइट नाम का विषैला पदार्थ एक पानी के रूप में बहार आने लगा जिस के कारण 50 मिनट में ही लगभग 30 मेट्रिक टन गैस बाहर वातावरण में प्रवेश कर गई।


मानुषी शरीर पर भार्वब (bhopal gas tragedy effects)  : MIC नाम की गैस के लीक होने के बाद वहां एक बादल बन गया जो के हवा के बहाव के कारण शहर की ओर चल  पढ़ा। जिस से इस का सब से पहले पर्भाव 14 साल के कम उम्र के बच्चों और गर्ववती महलाओं के ऊपर देखने को मिला। जिस के कारण आँखों में जलन, उलटी, सांस लेने में दिक्कत आने लगी , थोड़ी ही देर में इस गैस ने 2200 लोगो को चपेट में ले लिया। 
जिस के बाद भोपाल में कई साल तक इस गैस का प्रभाव देखने को मिला जिस के चलते अपंग बच्चे पैदा हुए , 1988 में सरकार ने भोपाल मेमोरियल हस्पताल एवं रिसर्च सेंटर खोला, जहाँ पर सभी को निशुल्क इलाज किया जाता था। 

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इस कांड के 2 दिन बाद ही सरकार ने राहत कार्य शुरू कर दिया , मध्य प्रदेश की सरकार ने इस त्रासदी से निपटने के लिए 1 लाख 40 हज़ार डॉलर की राशि पीड़तों के इलाज और पुनर्वास के लिए खर्च की ।
इस त्रासदी के 4 दिन बाद यूनियन कार्बाइड के अधयक्ष औए सी इ ओ वारेन एंडरसन के खिलाफ मामला दर्ज कर गिरफ्तार किया गया। मगर 3 घंटे बाद ही उनेह 2200 डॉलर जुरमाना दे कर मुकत कर दिया गया।

Biography of Kartar Singh Sarabha in hindi

                 
 Biography of Kartar singh Sarabha in hindi
भारत योधो और सूरबीरो का देश है , भारत के इतेहस में देखा जाए तो आप को अनेक शूरवीर मिलेगे जिन्हों ने देश के लिए अपनी जिंदगी कुर्बान कर दी , ऐसे ही सूरबीरो की वजह से आज हम एक सवतंत्र भारत में साँस ले रहे हैं , इन सूरबीरो में से ही एक थे करतार सिंह सराभा जीनो ने 20वी  सदी में अंग्रेजो के खिलाफ जंग लड़ी जिस समय अंग्रेज पूरी दुनिया में अपनी हकूमत काइम कर चुके थे , तो चलिए हम जानते हैं सरदार करतार सिंह सराभा के जीवन के बारे में।
जनम और बचपन :  करतार सिंह सराभा का जनम 24 मई 1896 में माता साहिब कौर की कोख से हुआ , करतार सिंह के पिता का नाम सरदार मंगल सिंह था , मगर बदकिस्मती से करतार सिंह के पिता का दिहांत हो गया जिस के कारण करतार सिंह का पालन पोषण करतार सिंह के दादा जी ने किया जिन का नाम सरदार बदन सिंह था , करतार सिंह छोटी उम्र में ही पढाई के साथ साथ खेलो और दूसरी चीजों में वी अवल थे जिस के कारण उस के दोस्त उसे अफलातून बताते थे ।

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ग़दर पार्टी में शामिल होना   करतार सिंह सराभा ने उड़ीसा में अपनी पढाई पूरी की और आगे की पढाई के लिए उनोह ने 1912 में अमेरिका जाने का फैसला किया , वहा जाने के बाद उन को पढाई का खर्च उठाने के लिए काम वी करना पढता था जहाँ करतार सिंह और उन के दुसरे साथी मजदूरों के साथ अंग्रेज बुरा विवहार करते थे , जहा से करतार सिंह के मन में अंग्रेजो के लिए नफरत पैदा गई।
1913 में लाला हरिदियाल का भाषण सुन ने के बाद उनोह ने ग़दर पार्टी में शामिल होने का फैसला किया , जहा पर वोह साप्ताहिक अखबार “ ग़दर “ की सारी जिमेवारी सँभालते थे , इस अख़बार के कारण वहा रहने वाले सारे हिंदी मजदूरों को अग्रेजो के खिलाफ लड़ने और आज़ादी हासिल करने का जोश पैदा हुआ ।

भारत में वापस आना    25 जुलाई 1914 को अंग्रेजो और जर्मन के वीच युद्ध शुरू हो गया जिस के कारण अब ग़दर पार्टी के लिए एक मौका था जिस की अपील पर हज़ारो देशभग्त भारत में लौट आए और इन में से के बंदरगाहों पर पकडे गे ।
करतार सिंह सारभा वी उन में से एक थे जो के श्रीलंका के रास्ते से भारत में आए और भारत में काफी इंकलाबी काम किए जिस में से बुम्ब बनाना , हथ्यार इकठे करना और फोज में देश के आज़ादी के लिए परचार करना था ।


ग़दर पार्टी के नाकाम्ज़बी और शहीदी    ग़दर पार्टी के अनुसार 21 फरबरी 1915 को पूरे देश में एक साथ आज़ादी की लहर को चलाना था मगर ग़दर पार्टी के ही एक सदस्य किरपाल सिंह ने अंग्रेजो तक सारी जानकारी पहुंचा दी जिस के कारण 21 फरबरी से बदल कर इस की तरीख 19 फरबरी कर दी मगर इस बार वी अंग्रेजो तक सारी जानकारी चले जाने के बाद अंग्रेजो ने फ़ौज से सारे हथ्यार शीन लिए और सभी ग़दर पार्टी के सदस्यओ को पकड़ना शुरू कर दिया , पहले तो करतार सिंह और उस के साथिओ ने अफगानिस्तान भागने का फैसला किया , मगर बाद में वोह एक हमदर्द गंडा सिंह के पास गए जिस ने उन सब को गिरफ्तार करा दिया ,
करतार सिंह सारभा और इन के साथिओ के उपर डाका डालने , देशद्रोह और कातिल के मुकदमे चलाए गए जिस के कारण इन में से 24 गद्रियो को फंसी और 17 को उम्रकैद की सजा दी गई , मगर बाद में 17 को वी फंसी की सजा दे दी गई ।
16 नवम्बर 1915 को करतार सिंह साराभा के साथ उन के 6 साथिओ को फांसी दे दी गई , जब करतार सिंह सारभा को फंसी दी गई तब उन की उम्र सिर्फ 19 साल की थी , जिस के बाद सरदार भगत सिंह (Bhagat singh) वी करतार सिंह सराभा की कुर्बानी से परभावित हो कर देश की आज़ादी के लिए अपना बलिदान देने का फैसला किया .


Sunday, 12 November 2017

भाखड़ा नंगल बांध से जुड़े कुछ तथ्य, (Facts about bhakhra nangal dam)

भाखड़ा नंगल बांध से जुड़े कुछ तथ्य, (Facts about bhakhra nangal dam)
भाखड़ा नंगल बांध प्रोजोजन भारत की सब से बड़ी जल परजोजना है। इस से यहाँ 1325 मेगावाट बिजली का उत्पादन होता है उस के साथ ही इस से पंजाब , हरयाणा , और राजस्थान में 40000 वर्ग किलोमीटर में फैले खेतो की संजाई वी की जाती है। आज हम आप को इस बांध से जुड़े कुछ तथ्य बताएंगे और साथ ही यह वी बताएंगे के अगर यह बांध टूट जाए तो कितनी तबाही मचा सकता है। 



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निर्माण : भाखड़ा नंगल बांध का निर्माण 1948 में शुरू हुआ था और यह 1963 में पूरा हुआ 1970 में यह काम करने लग गया था । 22 अकतुबर 1963 को भारत के पहले प्रधान मंत्री जवाहरलाल नेहरू ने इस का उद्घाटन किया।

स्तिथि: असल में भाखड़ा और नंगल दो अलग अलग बांध है  मगर एक ही परजोजना का हिस्सा हैं । भाखड़ा बांध उचाई पर बना है और उचाई से आने वाले पानी के बहाव को कम करने के लिए नंगल बांध बना है। भाखड़ा बांध हिमाचल प्रदेश के विलासपुर ज़िले के भाखड़ा गांव में बना है और नंगल पंजाब के नंगल में बना है , अगर किसी कारण से भाखड़ा बाँध टूट जाए तो नंगल बांध इस से आने वाले सारे पानी को रोक सकता है । 

ऊंचाई :(Hieght) भाखड़ा  बांध 226 मीटर ऊँचा है और इस की दिवार की ऊंचाई  520 मीटर और मोटाई 9 मीटर जनि के 30 फुट है  । यह टिगरी डेम के बाद भारत का सब से ऊंचा बांध है।
लागत : इस परजोजना में उस समय 245 करोड़ और 28 लाख रुपए खर्च आए थे। इस को बनाने के लिए इतना कंक्रीट लगा था के संसार की सभी सड़को को दुवारा बनाया जा सकता है।
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पानी का लेवल ( bhakhra dam water level) : भाखरा बांध पर पानी का स्तर आम तौर पर 1500 फूट के आस पास रहता है , मगर इस साल अगस्त में सब से ज्यादा स्तर रिकॉर्ड किया गिया जो के 1631.08 फूट रहा . गोविन्द सागर झील :( Govind sagar lake ) भाखड़ा जिस पानी को रोक कर रखता है उस को गोविन्द सागर झील कहते हैं । यह झील 168.35 वर्ग किलोमीटर में फैली हुई है। इस का नाम सिखों के दसवें गुरु श्री गुरु गोविंद सिंह जी के नाम पर रखा गया है। इस झील को बनाने के लिए 341 गांव के लोगो को विस्थापित किया गया था । 


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अगर भाखड़ा नंगल बांध टूट जाए : दोस्तों वैसे तो ऐसा कभी हो ही नहीं सकता के यह बांध टूट जाए । 2009 के बाद इस बांध की सुरक्षा और कड़ी कर दी गई है। 2009 के बाद यहाँ आने वाले सैलानियो के लिए इसे बंद कर दिया गया है ।
इस बाँध का निर्माण इतना मजबूत किया गया है के यह कभी भी टूट सकता अगर एक बांध टूट जाए तो दूसरा उस पानी के भंडार को रोक सकता है। मगर किसी कारण से दोनों बांध टूट जाए तो भयंकर तबाही मच सकती है। पंजाब, हरयाणा और राजस्थान के कई इलाकों में पानी भर सकता है। अगर पानी का वहाव तेज़ हुआ तो सब कुछ मलवे ने बदल जाएगे और आने वाले कई सालों तक वहां खेती करना असम्बव हो जाएगे।
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