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Wednesday, 7 February 2018

Biography of Chris Gayle in hindi (कैसे कचरा उठाने वाला बना करोड़पति)

दोस्तो Chris Gayle क्रिकेट की दुनिया का एक चमकता सितारा , क्रिस गेल को आज कौन नहीं जानता मगर इस मुकाम को पाने के लिए क्रिस गेल ने कितनी मेहनत की है इस को कोई नहीं जानता। क्रिस गेल ने कितने ज्यादा बुरे हालातों में अपना क्रिकेट केरियर शुरू किया और कैसे आज इस मुकाम पर पहुंचे , तो चलिए दोस्तों आप को बताते हैं क्रिस गेल की जिंदगी की सारी कहानी।

Chris Gayle  का जनम 21 सितम्बर 1979 को Kingstone Jamaica में हुआ। दोस्तो हम किसी वी कामज़ाब शक्स को हस्ते और मुस्कराते तो देख लेते हैं मगर उस शक्स का उस मुकाम तक पहुंचने का सफर कैसा रहा उस पर हमारा ध्यान नहीं जाता। ऐसा ही एक शक्स है Chris Gayle जो हमेशा मुस्कराता रहता है।
मगर आप में से बहुत कम लोग यह जानते हैं के Chris Gayle ने अपनी ज़िंदगी में बहुत ही संघर्ष किया है, Chris Gayle का परिवार एक कच्ची झोंपड़ी में रहता था । घर में बहुत ज्यादा गरीबी होने के कारण Chris Gayle अपनी पढाई वी पूरी नहीं कर पाए। आप को यह जान कर हैरानी होगी के Chris Gayle आपने परिवार का पेट पालने के लिए जगह जगह कचरा इक्ठा किया करते थे ।



Chris Gayle ने एक चैनल को दी interview में बताया के कभी कभी उस को चोरी वी करनी पड़ती थी जब उस के पास खाने को कुछ नहीं होता था। मगर उस वक़्त Chris Gayle वी यह नहीं जानता था के एक दिन किस्मत उस पर ऐसे मेहरबान होगी के वह दुनिया के अमीर लोगो में से एक होंगे। 
Cricket Carrier : Chris Gayle की क्रिकेट करियर की शुरुआत Lucca Cricket Club से हुई थी। उस वक़्त Chris Gayle अंडर 19 में पहली बार खेले थे। आगे चल कर उनोह ने अपना पहला ODI मैच भारत के खिलाफ 1999 को खेला और पहला टी20 New Zealand के खिलाफ 2006 में खेला।
शुरुआत में Chris Gayle का बल्ला नहीं चला जिस के चलते उन को बहुत कुछ सुनना पढ़ा मगर अपनी मेहनत और लगन के बल पर सब से पहले 2002 में एक ही साल में 1000 रन बनाने का रिकॉर्ड आपने नाम किया। उस के बाद Chris Gayle ने कभी भी पीछे मुड़ कर नहीं देखा । Chris Gayle दुनिया के पहले ऐसे खिलाडी हैं जिनोह ने आपने पहले मैच की पहली बाल पर सिक्स मारा है।

Chris Gayle दुनिया के 4 ऐसे खिलाडी हैं जिनोह ने टेस्ट मैच में Triple Ceuntery लगा रखी है। अगर हम टी20 की बात करें तो टी20 मैच के इतिहास का पहला सैंकड़ा वी Chris Gayle ने ही लगाया है। टी20 में उस का बेस्ट स्कोर 175 रन है। 2007 से लेकर 2010 तक क्रिस गेल West Indies टीम के कप्तान वी रह चुके हैं।
Chris Gayle इतने गरीब परिवार में पैदा होने के बावजूद वी आज उस मुकाम तक पहुँच गए हैं जहाँ पहुँचने का लोग सपना देखते है। 

Luxery Cars and Income Of Chris Gayle : अगर हम आमदन दी बात करें तो एक साल की आमदन 5 बिलियन डॉलर से लेकर 7 बिलियन डॉलर के वीच है। हालहि में Chris Gayle ने जमैका में एक लग्जरी हाउस खरीदा है जिस की कीमत 22.5 करोड़ है। अगर गाड़ीयों की बात करें तो Chris Gayle के पास 8 lugsry Cars है। जिन में से Mercedes Benz, Range Rover, Lamborghini and Audi जैसी बड़ी गाड़ियां हैं।
तो दोस्तो यह थी Chris Gayle की कहानी , अपना कीमती समय देने की लिए आप का बहुत बहुत धन्यवाद। अगर आप ऐसी Motivational Storys के लिए हमारा Facebook Page लाइक करें ता के जब भी हम ऐसे Motivational आर्टिकल Update करें तो आप को उस का लिंक Facebook पे मिल जाए।
   

Tuesday, 6 February 2018

Biography of Rupinder Gandhi in hindi ( Real story of gangster Rupinder Gandhi)

उसका जन् दो अक्टूबर को हुआ था, इसलिए पिता ने नाम गांधी रखने का फैसला किया, रुपिंदर गांधी। 22 वर्ष की आयु तक वह गांव का सरपंच बन गया, राष्ट्रीय स्तर का फुटबॉल खिलाड़ी और चंडीगढ़ की पंजाब यूनिवर्सिटी का छात्र और स्थानीय यूथ आइकन था। गांव के लोगों के लिए वह आदर्श और प्यारा लड़का बाहर हिंसा का पर्याय बन गया, जिसके नाम से भी लोग कांपते थे।
गांधी की जिंदगी में जल्‍द ही चीजें बदल गईं। गांव के प्रसिद्ध लड़के की छोटी लड़ाइयां, गैंग वॉर्स में बदल गईं। सड़कों पर हथियार लहराए जाने लगे और रुपिंदर के लिए जो आदर था, वह भय में बदल गया। लुधियाना जिले के रसूलरा गांव का रहने वाला गांधी अपनेन नाम के उलट हिंसा का पर्याय बन गया।

Gangster Vicky Gaunder { खिलाड़ी से गैंग्स्टर बनने का सफर }


गाँधी की मौत: रुपिंदर गाँधी ने बहुत से ऐसे काम किए जिस से उस की दुश्मनी बढ़ती चली गई। गाँधी को लोग अपना मसीहा मानते थे मगर कई लोग ऐसे वि थे जो गाँधी को खत्म करना चाहते थे। क्यों की गाँधी बहुत सी गैंगवार में शामल था जिस के कारण उस पर हत्त्या , मार पीट जैसे कई केस चल रहे थे। जिस के कारण उस की कई पोलिटिकल नेताओ और कुछ गैंगस्टर से दुश्मनी हो गई थी। जिस के कारण वोह लोग गाँधी को खत्म करना चाहते थे। आज से करीब 12 साल पहले उसकी निर्मम हत्‍या कर दी गई। गाँधी को 5 सितम्बर 2003 को अगवा किया गया । उस को एक गांव सलोड़ी में रखा गया । वहां गाँधी को 2 गोलिया मारी गई और उस का मिर्त्तु सरीर भाखड़ा नहर में फेंक दिया गया। , जब गाँधी की डेडबॉडी पुलिस को मिली तो पुलिस ने चोरी छिपे उस का अंतिम संस्कार किया। इस का कारण हम आप को बताते है। असल में गांधी के फैन फोल्वेर बहुत ज्यादा थे पुलिस को यह दर था कि कही अमन शांति न भांग हो जाए इस लिए पुलिस ने रुपिंदर गाँधी का अंतिम संस्कार खुद ही किया। जैसे के हम ने आप को बताया है कि गांधी के अंतिम संस्कार को ले कर वी काफी मतभेद है , रुपिंदर गाँधी के भाई का कहना है कि गांधी की डेडबॉडी पुलिस को नहीं मिली थी यह सब फॉर्मेल्टी के लिए किया गया था। ऐसे ही गाँधी के कई दोस्तों का वी यही कहना है कि पुलिस को डर था कि गांधी के पीछे नौजवान बहुत ज्यादा है जिस के कारण पुलिस ने इस मसले को रफा दफा करने और राज में दंगे भड़कने के डर से सब चोरी छिपे किया। किसी को यह पुख्ता नहीं कराया गया कि वह बॉडी रुपिंदर गाँधी की ही थी। यह कहना है रुपिंदर गाँधी के कई फैन्स और दोस्तों का।10 दिन बाद उस का अंतिम संस्कार किआ गया। वही गाँधी के भाई मनिदर मिंडी का कहना है कि यह अफवाह है उन का कहना है कि गांधी का सरीर नहीं मिला। पंजाबी मूवी 'रूपिंदर गांधी- द गैंगस्‍टर?' बन गई है और यह अगले हफ्ते 11 सितंबर को स्‍क्रीन्‍स पर आ जाएगी। फिल्‍म के नाम पर लगा क्‍वेशन मार्क निश्‍िचततौर पर रसूलरा गांव के उस उधेड़बुन का प्रतिनिधित्‍व करता है कि रुपिंदर प्रसिद्ध था या कुख्‍यात।

Biography of Mintu gurusaria ( डाकुआँ दा मुंडा )




गांव के लोग उसे ऐसे शख्‍स के रूप में याद करते हैं, जो राष्‍ट्रीय स्‍तर का खिलाड़ी था। लड़कियों की शादी में लोगों की मदद करता था और गरीब बच्‍चों के लिए दवाएं लाता था। मगर, गांव के बाहर उसके खिलाफ मारपीट, अवैध हथियार रखने और हत्‍या तक के केस दर्ज थे। हमारे लिए तो यह बड़ी बात है कि हमारे सरपंच रहे गांधी पर फिल्‍म बन रही है।


गांव के छात्र कहते हैं कि वह हमारे हीरो हैं। हम उनकी यूनियन के सदस्‍य बनना चाहते हैं और उनकी याद में काम करना चाहते हैं। गांव में गांधी के फैन्‍स बताते हैं हमें नहीं पता कि वह बाहर क्‍या थे और किन मामलों में वे शामिल थे। हम तो बस इतना जानते हैं कि वह हमेशा बड़ों की इज्‍जत करते थे और गरीबों की मदद करते थे।
रुपिंदर गांधी के भाई की फायरिंग में मौत:
रुपिंदर गांधी के भाई पर कुछ अज्ञात लोगों ने फायरिंग की थी, जिसके बाद उसकी मौत हो गई। दो अज्ञात लोगों ने मनविंदर मिंदी के घर पर  फायरिंग की थी, जिसके बाद मिंदी गंभीर रुप से घायल हो गया था।उसे इलाज के लिए लुधियाना के अपोलो अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
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Friday, 26 January 2018

Gangster Vicky Gounder life story (खिलाडी से गेंगस्टर बनने का सफ़र )


Biography of Gangster Vicky Gounder life story , histroy 
दोस्तों विक्की गौंडर का पूरा नाम Harjinder Singh Bhuller है , कभी ऐसा वी समय था के Vicky Gounder पर उस के परिवार वाले और गांव वाले गर्व किया करते थे , मगर थोड़े ही समय बाद विक्की अपराध की दुनिया में परवेश कर गिया और जो लोग कभी उस पर गर्व महसूस करते थे वोह लोग उस से दूर होने लगे , आज हम गैंगस्टर विकी गौंडर की जिन्दगी के बारे में जाने गे के कैसे वोह अपराध की दुनिया में आया और उस पर कौन कौन से केस दर्ज थे.


विकी गौंडर मुक्तसर जिले के गांव समारा का रहने वाला था , जो के पंजाब के पूर्व मुख मंत्री परकाश सिंह बादल के विधानसभा हलके लम्बी में आता है ,विकी गौंडर डिस्कस थ्रो का बहुत ही अच्छा खिलाडी था ,मिडल स्कूल में स्टेट लेवल पर मैडल जीतने के बाद उस ने आगे की पढाई और ट्रेनिंग के लिए जालन्धर में स्पीड फण्ड अकैडमी ज्वाइन कर लिया ,  उस ने डिस्कस थ्रो में ३ गोल्ड और 2 सिल्वर मैडल जीते थे , जिस के कारण विकी को पूरे मुक्तसर में हर कोई जानता था , वेह एक नेशनल लेवल का खिलाडी था ,

क्रोधी सुभाह के विकी गौंडर ने बाद में अपराध की दुनिया में कदम रखा और हाईवे पर डाका डालने लगा , उस की एस अपराधिक गतिविदियो  के चलते उस के परिवार ने उस से किनारा कर लिया , विकी के पिता मेहर सिंह का कहना है के जब विकी अपराधी बन गिया तो हम ने उस से किनारा कर लिया ,
जनवरी 2015 में गैंगस्टर सुखा काह्ल्वा के कतल के बाद विकी गौंडर सुखियो में आ गिया दिसम्बर 2015 में तरनतारन पुलिस ने उसे सुखा के कतल में शामल होने की वजह से उसे गिरफ्तार कर लिया , गिरफ्तारी के बाद विकी गौंडर को रोपड़ जेल में रखा गिया था मगर वहां एक लड़ाई के बाद उसे नाभा जेल में शिफ्ट कर दिया गिया , 30 अप्रैल को गैंगस्टर जसविन्द्र सिंह रॉकी के कतल के बाद विकी ने जेल से फेसबुक पर एक पोस्ट डाल कर ख़ुशी जाहर की , पुलिस ने बताया था के पंजाब में उस पर डकेती और कतल जैसे 10 से 12 मामले दर्ज हैं और हरयाणा में वी इतने ही मामले दर्ज थे ,

27 नवम्बर 2016 को 10 लोग नाभा जेल पर हमला करके वहां से 6 लोगो को छुड़ा कर ले गए जिस में विकी गौंडर , हरविंदर सिंह , मिंटू , कश्मीर सिंह , गुरप्रीत सेरों ,नीतू दिओल को जेल से भगाने में सफल रहे थे.


उस के कुछ समय बाद भटिंडा में विकी के साथीओ की एक पुलिस मुकाबले में मौत हो गई थी , जो के एक फोर्चुनेर गाडी को छीन कर भागने की कोशिश कर रहे थे ,
जिस के बाद पंजाब पुलिस उस को लगातार खोज रही थी , जिस के चलते 26 जनवरी 2018 को मुक्तसर के पुन्जावा गांव के पास पुलिस ने विकी गौंडर को पुलिस मुकाबले में मार दिया, और विकी के साथ उस का साथी प्रेम लाहोरिया को वी पुलिस ने मुकाबले में मार दिया , 

Sunday, 21 January 2018

Biography of Arunachalam Muruganantham in Hindi ( Story of Real Padman)

Biography of Arunachalam Muruganantham : आरुणाचलम मुरुर्गनंथम भारत के एक जाने माने समाज सेवक हैं , जिनों ने एक ऐसे विषे पर काम किया है जिस के बारे में लोग बात करने से वी कतराते हैं।

मुरुगनंथम्म ने कम कीमत में सैनेट्री पैड बनाने वाली मशीन बना कर भारत ही नहीं  बल्कि पूरे विशव में नाम कमाया। उन की मशीन दुवारा बनाए गए पैड दुसरे बाजार में मिलने वाले पैड के मुकाबले 3 गुना सस्ते होते हैं। उन की यह मशीने पूरे भारत में अबतक 28 राजो में लग चुकी हैं। किसी वी अछे कॉलेज की डिग्री ना होने के बावजूद जो काम अरुणाचलम मुरुगनाथम ने कर दिखाया वह बाकि ही काबिलेतारीफ है। मुरुगनाथम ने महलाओं को पीरियड्स में होने वाली प्रॉब्लम के लिए कम दाम पर पैड उपलब्ध कराए । जिस के लिए उनेह 2016 में भारत सरकार की तरफ से उनेह पदम् श्री पुरस्कार से वी निवाजा जा चूका है।
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     दोस्तों मुरुगनाथम ने एक ऐसी मुश्किल का हल ढूंढ़ निकाला जो काफी समय से भारत में चल रही थी, जिस के कारण महलाओं को काफी बीमारियो का सामना करना पढता था। तो चलिए दोस्तों अरुणाचलम मुरुगनाथम की इस कहानी को हम शुरू से जानते हैं ।

Real Story of Padman :  मुरुगनाथम का जनम 1966 में तमिलनाडु में हुआ था। छोटी ही उम्र में मुरुगनाथम के पिता का एक सड़क हादसे में दिहान्त हो गया। जिस के कारण घर की हालात बहुत खराब हो गए और उन का बचपन बहुत ही गरीबी में बीता। 14 साल की उम्र में घर की गरीबी के कारण मुरुगनाथम को पढाई छोड़नी पड़ी और वह खेतो में मजदूरी और वेल्डिंग का काम करने लगे , जिस के कारण अब घर के हालात काफी ठीक हो चुके थे। 

पैड बनाने का आईडिया : 1998 में उन की शादी शांति नाम की लड़की से हुई , एक दिन मुरुगनाथम ने अपनी पत्नी को एक बहुत ही गन्दा कपडा हाथ में लेजाते देखा , जिस को उस की पत्नी periouds में इस्तमाल करती थी , मुरुगनाथम ने एक इंटरव्यू में बताया के वह कपडा इतना गन्दा था के उस से वह अपनी बाइक वी साफ़ न करें ।
मुरुगनाथम ने अपनी पत्नी को कहा के वह Periouds में पैड का इस्तेमाल क्यों नहीं करती तो उन की पत्नी ने कहा के जा तो वोह घर के लिए दूध खरीद सकती है जा फिर इतने पैसो में Sanetery Pad । क्यों की उस समय इन पैड की कीमत बहुत ज्यादा थी। 

real padman documentary
  
फिर एक दिन मुरुगनाथम अपनी पत्नी को खुश करने के लिए बाजार से पैड खरीदने गए तो उनोह ने देखा के पैड की कीमत बहुत ज्यादा थी । जब उनोह ने पैड को हाथ में पकड़ के देखा तो उनोह ने अंदाज़ा लगाया के इन पैड को सिर्फ 10 पैसो में तैयार किया जा सकता है मगर उन की कीमत उस से 40 गुना ज्यादा थी।
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  जो मुश्किल Periouds में उन की पत्नी को होती है वही मुश्किल न जाने कितनी महलाओं को होती होगी ।
वही से मुरुगनाथम ने कम कीमत में अच्छे पैड बनाने का बीड़ा उठाया । पहले वह उन पैड की जाँच अपनी पत्नी से कराते थे। मगर कुछ समय बाद उन की पत्नी ने उन के इस काम के लिए इनकार कर दिया। उस के बाद वह पैड की जांच मेडिकल कॉलेज की लड़कियो से कराने लगे। मगर उस समय कोई वी लड़की इस विषय पर खुल के बात नहीं करना चाहती थी । जिस के कारण उन लड़कियो ने वी मुरुगनाथम को ज्यादा मदद न की। मुरुगनाथम उस समय एक ऐसी क्रन्तिकारी विचारधारा पे काम कर रहे थे जब भारत में सेक्स और Periouds का नाम लेना वी अच्छा नहीं समझा जाता था। 

उस के बाद मुरुगनाथम ने खुद पर ही इस्तमाल करके पैड की जाँच करने का फैसला किया। जिस के लिए उनोह ने एक ब्लेडर में जानवर का खून लिए और एक पाइप से वह खून पैड के ऊपर गिरता । जब वह साइकिल चलाते तो झटके से वह खून ज्यादा गिरने लगता , जिस से पैड अपना असली रूप खोह देता और जगह से हट जाता।
2 साल की मेहनत के बाद मुरुगनाथम को पता चला के जो पैड बाजार में उपलब्ध हैं उन में फाइवर का इस्तेमाल होता है, जिस के बाद मुरुगनाथम ने एक ऐसा पैड बना लिया को बहुत ही टिकाऊ था।
  मुरुगनाथम का यह रिसर्च तो पूरा हो चूका था मगर उस के साहमने बड़ी मुश्किल तब आई जब उनेह पता चला के पद बनाने के लिए जो मशीन इस्तमाल होती हैं उन की कीमत 3.5 करोड़ है । जो के मुरुगनाथम के लिए बहुत बड़ी रकम थी। मगर उस ने होंसला नहीं छोड़ा और थोड़े ही समय में एक ऐसी मशीन बना डाली जो इन पैड को बना सकती थी और उस की कीमत सिर्फ 65000 थी और इस मशीन को कोई वी चला सकता था। 


   दोस्तों मुरुगनाथम की इस मेहनत से ही आज लड़कियों के Periouds में वरते जाने वाले पैड इतने सस्ते में मिलने लगे और जिस के चलते दूसरी वडी कंपनीयो को वी Sanetery Pad की कीमत कम करनी पड़ी।
मशीन के कामज़ाब होने के बाद बहुत सारे लोगो ने मुरुगनाथम को मशीन को कमर्सलाइजे करके वेचने का वी सुझाब दिया । मगर मुरहनाथम्म ने ऐसा नहीं किया और सभी ऑफर की ठुकरा दिया। 

आज अरुणाचलम मुरुगनाथम की ज़िन्दगी पर अक्षय कुमार की एक मूवी वी बन चुकी है। उन की इस मेहनत ना सिर्फ महलाओं की ज़िंदगी में बड़ा बदलाव लाया उस के साथ ही महलाओं को पैसे कमाने का जरिया वी मिल गया। हम सब को गर्व है हमारे देश के इस Real Padman of India पर। 

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Thursday, 14 December 2017

Biography of Dr. Manmohan Singh in hindi

                    Biography of Dr. Manmohan Singh in hindi

दोस्तों प्रतिभा पैसो की मोहताज़ नहीं , जिस के अंदर काबिलिअत होती है वोह आपने लक्ष को कभी न कभी पा ही लेता है , चाहे रास्ते में कितनी वि रूकावटे क्यों न हो
  दोस्तों यह बात हमारे पुर्व पर्धान मंत्री श्री डोक्टर मनमोहन सिंह के जीवन पर पूरी फिट बैठती है ।

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आप सब डॉ मनमोहन सिंह के बारे में तो जानते ही होंगे मगर उन की पीछे की जिन्दगी के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं , डॉ मनमोहन सिंह की जिन्दगी बहुत ही मुश्किलों में से गुजरी , जब देश का बटवारा हुआ तो बहुत से लोग भारत से पाकिस्तान गए और बहुत से पाकिस्तान से भारत आए , उस समय कोई नहीं जानता था के इन में से एक नन्हा बालक मनमोहन सिंह बी है जिस की तकदीर में हिन्दोस्तान की हकूमत लिखी हुई है । उन की सादगी और काबिलिएअत को आज हर कोई मानता है , इतने बुरे दौर से गुजरने के बाद डॉ मनमोहन सिंह ने कभी भी आपने भाषणों में अपनी निजी जिन्दगी में आई कठनाई को गिना कर वोट नहीं माँगा
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जनम और बचपन : बटवारे में अपना सब कुछ गवा कर पाकिस्तान से भारत के अमिर्त्सर में वसने वाले डॉ मनमोहन सिंह का जनम 26 सितम्बर 1932 को पाकिस्तान के गाह नाम स्थान पर हुआ , बचपन में ही डॉ मनमोहन सिंह के सर के ऊपर से माँ का साया उठ गया तो उन का पालन पोषण उन की दादी ने किया, घर में बहुत ज्यादा गरीबी होने के कारण डॉ सिंह अपनी पढाई को पूरा नहीं कर पा रहे थे , मगर डॉ मनमोहन सिंह ने हिमंत नहीं हारी डॉ सिंह पढाई में बहुत ही हुश्यार थे जिस के कारण इन को sacholership मिलती रही और इनोह ने अपनी पढाई जारी रखी ।

Hindu College Amirtsar से 12th करने के बाद उनोह ने पंजाब यूनिवर्सिटी से अपनी greduation की पढाई पूरी की . पढाई में अछे नंबर आने के बावजूद डॉ मनमोहन सिंह को लन्दन की Cambridge university में दाखला मिल गया जहाँ से उनोह ने अर्थ शाश्त्र में डिग्री हासिल की ।
भारत वापस लोट कर उनोह ने पंजाब यूनिवर्सिटी और दिल्ही स्कूल ऑफ़ इक्नोमिक्स में विद्यार्थियो को सिक्षा दी ।
  • 1987-1990  तक डॉ मनमोहन सिंह को जानेवा में सेक्टरी जनरल ऑफ़ साउथ कमिशन के पद पर नियुक्त किया गिया ।
  • 1958 डॉ मनमोहन सिंह का विवाह गुरशरन कौर के साथ हुआ ।
  • 1971 में वेह भारतीए पर्शास्नक सेवा में शामिल हुए और The Ministery of Commerce में बतोर सलाहकार नियक्त रहे ।
  • अपनी योगता के बल पर डॉ मनमोहन सिंह 1982 से 1985 तक रिज़र्व बैंक इंडिया  के गवर्नर रहे ।
  • 1991 में जब पि वि राव भारत के प्रधान मंत्री बने तो उनोह ने डॉ मनमोहन सिंह को वित् मंत्री के पद पर नियुक्त किया ।
  • 2004 में जब केंदर में कांग्रेस की सरकार आई तो कांग्रेस की चेयर परसन सोनिया गाँधी ने डॉ मनमोहन सिंह को प्रधान मंत्री के पद पर नियुक्त किया ।
  • 2009 में जब दुबारा कांग्रेस ने डॉ मनमोहन सिंह को PM कैंडिडेट अन्नौंस किया तो कांग्रेस ने 2004 में 145 शीटों के मुकाबले  200 से उपर शीटे हासिल की ।

Working period of Manmohan singh: जब 2004 में पूरी दुनिया में मंदी के बादल शाए हुए थे तो डॉ सिंह ने अपनी आर्थिक नीतिओ और दूरदृष्टि से देश को इस मंदी से बचाई रखा ,  अपने दस साल के कार्यकाल में उनोह ने राष्ट्री जांच इज्न्न्सी का गठन , मनरेगा स्कीम , सूचना का अधिकार , भोजन का अधिकार , आधार योजना , भूमि अधिग्रेह्न कनून , जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं को लागू कराने का श्रेय डॉ मनमोहन सिंह को जाता है ।

Awards: अपने जीवन में डॉ मनमोहन सिंह ने बहुत से अवार्ड हासिल किए जिस में से 1981 पदम् विभूसन, 1985 में जवाहर लाल नेहरू शताब्दी अवार्ड , बेस्ट फाइनेंस मनिस्टर के लिय युरोमोनी अवार्ड शामिल है।

चे ग्वेरा एक क्रन्तिकारी ( History Of Che Guevara In Hindi )


आप को यह जानकार अहेस्चारिए होगा के डॉ मनमोहन सिंह जिस केंब्रे university के कभी स्टूडेंट रहे थे आज वहां पर रिसर्च सेचोलेर के लिए डॉ मनमोहन सिंह सेचोलेर्शिप के नाम से सेचोलेर्शिप प्रोग्राम चलाया जाता है , जो के हर भारतीए के लिए गर्व की बात है।
दोस्तों डॉ मनमोहन सिंह की इस कहानी से हमे यह सीख मिलती है के अगर आप में कुछ करने का जज्बा हो तो हालत कितने वी बतर क्यों न हो आप अपने लक्ष में जरुर सफल होते हैं , अगर आप को हमारे आर्टिकल अछे लगते हैं तो हमे कमेंट करके जरुर बताए और आगे से ऐसे आर्टिकल को पढने के लिए हमारा फेसबुक पेज जरुर लिखे करे ता के जब वी हम कोई नया आर्टिकल अपडेट करें तो आप को फेसबुक के जरिए notification मिल जाए , धन्यवाद


Saturday, 9 December 2017

Biography of Thomas Alva Edison in hindi

             Biography of Thomas Alva Edison in hindi
“ हमारी सब से बड़ी कमजोरी होती है हार मान लेना , सफलता प्राप्त करने का सब से आसान तरीका है एक वार फिर कोशिश करना “


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                     यह कहना है सदी के महान विज्ञानक Thomas Alva Edison का , इस महान विज्ञानक को आज भला कौन नहीं जान ता , थॉमस अल्वा एडिसन ने करीब एक हज़ार से उपर आविष्कार किए जिस में सब से बड़ा अविष्कार बिजली का बल्ब , भाफ से चलने वाला इंजन और टेलीग्राम थे , थॉमस अल्वा एडिसन को बचपन से ही पागल समझा जाता था, वेह इतने पागल थे के एक वर उनोह ने एक चिडिया को कीड़े खाते हुए देखा , थॉमस को लगा के उड़ने के लिए कीड़े खाना जरूरी है , उस ने बहुत सारे कीड़े पकड़ लिए और उन को मार कर पानी में एक घोल बना लिया , उस के बाद थॉमस ने यह घोल अपने एक दोस्त को पिला दिया , वेह अपने दोस्त को घोल पीने के बाद उड़ता देखना चाहते थे , मगर उस के बाद थॉमस के दोस्त की तबीअत बहुत खराब हो गई जिस के लिए थॉमस को बहुत डांट सुननी पड़ी

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बचपन और जनम thomas edison children : थॉमस अल्वा एडिसन का जनम 11 फरबरी  1847 को अमेरिका में हुआ , उन के पिता का नाम Samuel Edison और माता का नाम Nancy Matthews था , थॉमस एडिसन अपने 7 बहिन और भैएओ में सब से छोटे थे , जब थॉमस एडिसन थोड़े बड़े हुए तो उन के माता पिता ने उन का admition एक school में करा दिया मगर थोड़े ही समय बाद उन को school से निकाल  दिया गिया , क्यों की एडिसन school में अपने अधिअप्को से बहुत ज्यादा सवाल पूछते थे , जिस के कारण सभी एडिसन को एक मंद्बुधि बचा समझते थे , एक दिन एडिसन को school से निकाल दिया गिया , और वेह एक पत्र लेकर अपनी माँ के पास आया, उस पत्र को पढने के बाद एडिसन ने अपनी माँ से पुछा के इस पे क्या लिखा है तो एडिसन की माँ ने उसे कहा के इस पे लिखा है के आप का बचा बहुत हुश्यार है इस के लिए हमारा school बहुत छोटा है , इस लिए आप इसे घर पर ही पढाए , जिस के बाद एडिसन की माँ ने 9 साल की उम्र से एडिसन को घर में पढ़ना शुरू कर दिया

Thomas Edison life Facts : एडिसन ने एक रसाइन की किताब में एक पार्योग देखा जिस को उस ने घर में करने के लिए एक छोटी सी पार्योग शाला बनाई मगर किसी बात से नाराज़ हो कर एडिसन की माँ ने उस का सारा सामान बाहर  फेंक दिया, जिस के बाद एडिसन पर्योगशाला दुवारा बनाना चाहते थे जिस के लिए उन को पैसो की जरुरुत थी जिस के लिए एडिसन ने रेलवेज में नौकरी करनी शुरू कर दी और रेल के ही पुराने डिब्बे में अपनी पर्योगशाला बना ली , मगर एक दिन किसी कारण से पार्योग के समय एडिसन के हाथ से कुछ तिज़ाब नीचे गिर गए और उन के मिश्रण से डिब्बे में आग लग गई , जिस के बाद वहां के गार्ड ने गुस्से में एडिसन के कान पर एक जोर का तमाचा जड़ दीया जिस से एडिसन को ऊचा सुनने लग गिया था
जिस के बाद एडिसन बहुत खुश था उन का कहना थ के अच्छा हुआ आज के बाद उन को बेकार की बातें नहीं सुनाई देंगी और वोह अपने काम को ज्यादा ध्यान से कर पाएंगे

Watch video ,, Motivational moment of Thomas edison life

अविष्कार( Thomas Edison inventions ) : थॉमस एडिसन में अपना पहला अविष्कार Edison universal stock printer था , जिस को बेचने में वेह सफल रहे , जिस को उनोह ने 40000 डोलर में वेचा जो के उस समय एक बहुत बड़ी रकम थी

बलब का आविष्कार : थॉमस एडिसन का कहना था के हम बिजली को इतना सस्ता बना देंगे के अमीर लोग ही मोमबतिया जलाएंगे , जिस के बाद उनोह ने बलब बनाने के लिए दिन रात मेहनत की और जिस में वेह दस हज़ार बार असफल रहे ,32 वर्ष की उम्र में उनोह ने बलब का अविष्कार किया , 21 ओक्टुबर 1879 को दुनिया का पहला बलब सारा दिन चलता रहा , और दूर दूर से हजारो लोग इसे देखने आने लगे , लोगो के लिए यह एक चमत्कार था , जब एडिसन से पुछा गिया के आप दस हज़ार वार असफल होने के बाद वि कैसे इस काम पर लगे रहे तो एडिसन ने कहा के मैं दस हज़ार वार असफल नहीं हुआ मैंने ऐसे दस हज़ार रस्ते ढूँढ लिए हैं जो किसी काम नहीं आते

उन की इस सकारात्मक सोच ने पूरी दुनिया को यह सिखाया के जब तक सफलता न मिले आगे बढ़ते रहो
दोस्तों कहानी यही ख़तम नहीं होती अब थॉमस एडिसन एक बहुत ही महान विज्ञानक बन गए थे , एक दिन थॉमस एडिसन फुर्सत के पलो में बेठे थे तो उन को अलमारी में से वही पुराना ख़त मिला जो school से निकालते वक़्त टीचर ने उसे दिया था , जिस को पढने के बाद थॉमस एडिसन बहुत रोए उस ख़त में लिखा था के आप का बचा मंद्बुधि है किरपा इसे आज के बाद इसे school में न भेजे , जिस के बाद थॉमस एडिसन ने अपनी डेरी में लिखा "एक महान माँ ने एक मंद्बुधि बचे को सदी का महान विज्ञानक बना दिया।"

18 ओक्टुबर 1931 को इस महान विज्ञानक ने दुनिया को अलविदा कह दिया , उस समय उन की उम्र 84 वर्ष की थी ,जिस दिन थॉमस एडिसन की मौत हुई उस दिन शोक में पूरे अमेरिका की बिजली बंद कर दी गई थी , मरते वक़्त थॉमस एडिसन ने कहा के उनोह ने कभी वी काम नहीं किया यह सब तो उन के लिए एक मनोजन था

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Thursday, 16 November 2017

Biography of Kartar Singh Sarabha in hindi

                 
 Biography of Kartar singh Sarabha in hindi
भारत योधो और सूरबीरो का देश है , भारत के इतेहस में देखा जाए तो आप को अनेक शूरवीर मिलेगे जिन्हों ने देश के लिए अपनी जिंदगी कुर्बान कर दी , ऐसे ही सूरबीरो की वजह से आज हम एक सवतंत्र भारत में साँस ले रहे हैं , इन सूरबीरो में से ही एक थे करतार सिंह सराभा जीनो ने 20वी  सदी में अंग्रेजो के खिलाफ जंग लड़ी जिस समय अंग्रेज पूरी दुनिया में अपनी हकूमत काइम कर चुके थे , तो चलिए हम जानते हैं सरदार करतार सिंह सराभा के जीवन के बारे में।
जनम और बचपन :  करतार सिंह सराभा का जनम 24 मई 1896 में माता साहिब कौर की कोख से हुआ , करतार सिंह के पिता का नाम सरदार मंगल सिंह था , मगर बदकिस्मती से करतार सिंह के पिता का दिहांत हो गया जिस के कारण करतार सिंह का पालन पोषण करतार सिंह के दादा जी ने किया जिन का नाम सरदार बदन सिंह था , करतार सिंह छोटी उम्र में ही पढाई के साथ साथ खेलो और दूसरी चीजों में वी अवल थे जिस के कारण उस के दोस्त उसे अफलातून बताते थे ।

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ग़दर पार्टी में शामिल होना   करतार सिंह सराभा ने उड़ीसा में अपनी पढाई पूरी की और आगे की पढाई के लिए उनोह ने 1912 में अमेरिका जाने का फैसला किया , वहा जाने के बाद उन को पढाई का खर्च उठाने के लिए काम वी करना पढता था जहाँ करतार सिंह और उन के दुसरे साथी मजदूरों के साथ अंग्रेज बुरा विवहार करते थे , जहा से करतार सिंह के मन में अंग्रेजो के लिए नफरत पैदा गई।
1913 में लाला हरिदियाल का भाषण सुन ने के बाद उनोह ने ग़दर पार्टी में शामिल होने का फैसला किया , जहा पर वोह साप्ताहिक अखबार “ ग़दर “ की सारी जिमेवारी सँभालते थे , इस अख़बार के कारण वहा रहने वाले सारे हिंदी मजदूरों को अग्रेजो के खिलाफ लड़ने और आज़ादी हासिल करने का जोश पैदा हुआ ।

भारत में वापस आना    25 जुलाई 1914 को अंग्रेजो और जर्मन के वीच युद्ध शुरू हो गया जिस के कारण अब ग़दर पार्टी के लिए एक मौका था जिस की अपील पर हज़ारो देशभग्त भारत में लौट आए और इन में से के बंदरगाहों पर पकडे गे ।
करतार सिंह सारभा वी उन में से एक थे जो के श्रीलंका के रास्ते से भारत में आए और भारत में काफी इंकलाबी काम किए जिस में से बुम्ब बनाना , हथ्यार इकठे करना और फोज में देश के आज़ादी के लिए परचार करना था ।


ग़दर पार्टी के नाकाम्ज़बी और शहीदी    ग़दर पार्टी के अनुसार 21 फरबरी 1915 को पूरे देश में एक साथ आज़ादी की लहर को चलाना था मगर ग़दर पार्टी के ही एक सदस्य किरपाल सिंह ने अंग्रेजो तक सारी जानकारी पहुंचा दी जिस के कारण 21 फरबरी से बदल कर इस की तरीख 19 फरबरी कर दी मगर इस बार वी अंग्रेजो तक सारी जानकारी चले जाने के बाद अंग्रेजो ने फ़ौज से सारे हथ्यार शीन लिए और सभी ग़दर पार्टी के सदस्यओ को पकड़ना शुरू कर दिया , पहले तो करतार सिंह और उस के साथिओ ने अफगानिस्तान भागने का फैसला किया , मगर बाद में वोह एक हमदर्द गंडा सिंह के पास गए जिस ने उन सब को गिरफ्तार करा दिया ,
करतार सिंह सारभा और इन के साथिओ के उपर डाका डालने , देशद्रोह और कातिल के मुकदमे चलाए गए जिस के कारण इन में से 24 गद्रियो को फंसी और 17 को उम्रकैद की सजा दी गई , मगर बाद में 17 को वी फंसी की सजा दे दी गई ।
16 नवम्बर 1915 को करतार सिंह साराभा के साथ उन के 6 साथिओ को फांसी दे दी गई , जब करतार सिंह सारभा को फंसी दी गई तब उन की उम्र सिर्फ 19 साल की थी , जिस के बाद सरदार भगत सिंह (Bhagat singh) वी करतार सिंह सराभा की कुर्बानी से परभावित हो कर देश की आज़ादी के लिए अपना बलिदान देने का फैसला किया .


Sunday, 5 November 2017

Biography of Satya Nadella in Hindi

                           
Biography of Satya Nadella in Hindi
दोस्तों आप सब का हमारे ब्लॉग पर हार्दिक स्वागत है , आज मैं जिस सख्श के बारे में बात करने जा रहा हु शायद आप सब ने उन का नाम पहले कही न कही तो सुना ही होगा , जी हाँ दोस्तों मैं बात करने जा रहा हु एक ऐसे सख्श के बारे में जो दुनिया में सब से ज्यादा सेल्लरी लेने वाले लोगो में से एक है , मैं बात करने जा रहा हु दुनिया की सब से बड़ी कम्पनी microsoft के CEO Satya Nadella के बारे में , जो आपनी मेहनत और लगन के बल पर आज दुनिया के सब से अमीर इंसान बिल गेट्स की कुर्सी पर जा बेठा है ,
Satya Nadella का कहना है के मैं जितनी किताबे पढ़ सकता हु उस से ज्यादा खरीद लेता हु , मैं जितने कोर्सेज ऑनलाइन कर सकता हु उस से कही ज्यादा में participate कर लेता हु , उन की इन बातो से पता चलता है के Satya Nadella को हमेशा कुछ निया सीखने की चाहता रहती थी ,


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Satya Nadella जनम 19 अगस्त 1967 आंध्र परदेश के हेद्राबाद में हुआ था , उन के पिता का नाम बुकपुर्म नाडेला था और वोह एक IAS ऑफिसर थे . सत्य नाडेला बचपन से ही पढाई में काफी आगे थे उनोह ने अपनी पढाई की शुरुआत हेद्राबाद से ही की , उस के बाद उनो ने Mnipal university से इलेक्ट्रिकल की बचुलर डिग्री हासिल की , उस के नाडेला अमेरिका चले गे वहा विस्कोंसिन university से मास्टर ऑफ़ साइंस और चिकागो university से MBA किया ।
आपनी पढाई ख़तम करने के बाद नाडेला ने 1992 microsoft कम्पनी को ज्वाइन किया । नाडेला के कम्पनी ज्वाइन करने से पहले microsoft सिर्फ ऑफिस के काम के लिए ही जानी जाती थी मगर नाडेला ने microsoft के कई बड़े परोजेक्ट पर काम किया जिस में से ऑनलाइन सर्विसेज , advertisment , सॉफ्टवेयर , गेमिंग इन सब पर कम किया और कम्पनी को नई दिशा दी , जिस में से microsoft की xbox गेमिंग सर्विस आज पूरी दुनिया में काफी फेमस है ।सत्य नादेल्ला की इसी मेहनत और लगन के कारण उस को 14 फरबरी 2014 को microsoft का सीईओ बना दिया गिया , इस से पहले microsoft के सीईओ बिल गेट्स थे किसी बी इन्सान के लिए बिल गेट्स की कुर्सी पर बेठना अपने आप में बहुत बड़ी बात है । Satya Nadella ने सन 1992  अपनी school की एक फ्रेंड अनुपमा से शादी की , आज सत्य नादेल्ला अपने परिवार के साथ अमेरिका में रहते है , आज सत्य नादेल्ला  की अगर हम सेलरी की बात करे तो ( Sellary of Satya Nadella ) 100 करोड़ से उपर है ।

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Saturday, 28 October 2017

History of Royal Enfield bike ( Bullet ) in hindi ( Royal Enfield की सफलता की कहानी )

दोस्तों आज हम बात कर रहे एक इंडियन ब्रांड की जो पूरी दुनिया में मशहूर है , आज हम बात क
कर रहे हैं Royal Enfield की जिस की बाइक सिर्फ भारत में ही नहीं पूरी दुनिया में लोक प्रियता हैं। Royal Enfield की बुलेट बाइक आज के समय में बाजार में धूम मचा रही है , आप को जान कर हैरानी होगी के Royal Enfield लोगो में इतना ज्यादा लोकप्रिय है के लोग इस की बाइक लेने के लिए कई कई महीने इंतज़ार करते हैं। इस बाइक की खास बात इस का शक्तिशाली इंजन और मजबूत पार्ट्स हैं ।आज Royal Enfield को एक भारती ब्रांड से जाना जाता है , मगर इस के पीछे वि बहुत दिलचस्प कहानी है जिस के बारे में आज हम आप को बताएंगे । 
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History of Royal Enfield bike ( Bullet ) in hind
दोस्तों Royal Enfield कंपनी की शुरुआत आज से करीब 125 साल पहले इंग्लैंड में हुई थी। इस कंपनी की शुरुआत अल्बर्ट ऐ डी और आर डब्लू स्मिथ ने 1892 में की थी। उस समय इस कंपनी का नाम EADIE MANUFACTURING LIMITED था। उस वक़्त यह कंपनी बन्दूक के पार्ट्स बनाने का काम करती थी।1896 में आगे चल कर इसी कंपनी में से एक और कंपनी बनाई गई जिस का नाम The New Enfield Cycle Company रखा गया , अब यह कंपनी साइकिल और इस के कुछ पार्ट बनाती थी। इस के कुछ समय बाद कंपनी ने इस में कुछ बदलाव  करने की सोची और 1901 में साइकिल पर ही इंजन सेट कर दिया और अपनी पहली बाइक पेश की जिस में उनोह ने इंर्ब नाम की कंपनी का इंजन use किया। Royal Enfield को पहली बार सफलता 1914 में मिली जब उन की बनाई बाइक को पहले विशव युद्ध के समय इंग्लैंड ने खरीदा और उस के कुछ समय बाद रूस ने वी उन के दुवारा बनाई बाइक को खरीदने का फैसला किया।
और उस के बाद Enfield पूरी दुनिया में मशहूर हो गया  दूसरे विशव युद्ध में Royal Enfield की बाइक्स को बहुत बाद अवसर पर खरीदा गया। 


History of Royal Enfield bike ( Bullet ) in india
India में Royal Enfield को 1949 में पहली बार लाया गया । उस वक़्त इस कंपनी को कोई नहीं जानता था । 1954 में पहली बार भारत की सेना और पुलिस के लिए इस बाइक को खरीद गया जो के Enfield का 350 cc मोडल था। 


1955 में Royal Enfield ने Madras Motors के साथ पार्टनरशिप की और इस तरह से Royal Enfield India की शुरुआत हुई। मगर इस समय यह बाइक के कुछ पार्ट इंग्लैंड से मंगवाते थे मगर 1966 के बाद सभी पार्ट भारत में बनने शुरू हो गए ।
  आगे चल कर Royal एनफील्ड England को काफी घाट हुआ जिस के कारण 1971 में कंपनी बंद करनी पड़ी। मगर भारत में इस कंपनी का प्रोडक्शन जारी रखा गया । उस वक़्त भारत में वी इस कंपनी को काफी घाटा हो रहा था । जिस के कारण इस को Eicher motors ने खरीद लिया और Eicher Motors के मालक बिक्रमलाल के बेटे सिदार्थ ने समय के हिसाब से इस बाइक में कुछ बदलाव किए जिस के कारण फिर से इस बाइक की सेल बढ़ गई।
जैसे के आप देख रहे हैं आज के समय में एनफील्ड की बाइक्स भारत के साथ साथ अमेरिका, साउथ अफ्रीका , ऑस्ट्रेलिया, जैसे 50 से ज्यादा देशो में वेचे जाते हैं ।
2013 में Enfield ने कुल 81446 बाइक्स वेचे इस के अगले ही साल 2014 में 123018 बाइक्स वेची गई।
और हालहि में 18 सितम्बर 2017 को Royal Enfield की classic 350 और classic 500 लांच की गई।
दोस्तों हमे उम्मीद है के आप को Royal Enfield की यह स्टोरी जरूर पसंद आई होगी । ऐसी की जानकारी आगे पाने के लिए हमारा फेसबुक पेज लाइक करे , धन्यवाद ।