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Wednesday, 19 September 2018

Lakha Sidhana history, biography in hindi (लक्खा सिधाना )

Lakha Sidhana history, biography in hindi (लक्खा सिधाना ) एक साधारण किसान का बेटा जिसका सपना आर्मी में भर्ती होने का था अपने घर की  कुल  10 किल्ले  जमीन होने के कारण  लक्खा  घर  से एक  मध्यवर्गीय परिवार से  तलूक रखता था । लक्खा के घरवाले यह चाहते थे थे कि उनका बेटा बड़ा होकर किसी नौकरी पर लग जाए लेकिन लखा ने कोई और ही रास्ता चुन लिया । आज हम बात करने जा रहे हैं किसी टाइम जुर्म के बेताज बादशाह रह चुके लखविंदर सिंह सरां उर्फ लखा सिधाना की । एक झूठी शोहरत और दुनिया में अपना नाम बनाने के लिए लखविंदर सिंह कब इस जुर्म की दुनिया में प्रवेश कर गया और लखविंदर सिंह से गैंगस्टर लखा सिधाना बन गया इसका खुद लक्खा को भी नहीं पता । 
Lakha Sidhana history, biography in hindi (लक्खा सिधाना )

Lakha Sidhana history, biography in hindi (लक्खा सिधाना )


साल 2004 में पहली बार किसी छोटी सी झड़प को लेकर जेल जाने वाला लक्खा जुर्म की दुनिया में इस कदर घुस गया के 2004 से लेकर 2016 तक कोई भी साल ऐसा नहीं रहा जब लक्खा सिधाना जेल में ना गया हो । लक्खा के ऊपर करीब 50 से ज्यादा मुकदमे चले हैं । जिसमें कत्ल , डकैती, इरादा कत्ल जैसे संगीन आरोप रहे हैं। आज आलम यह है कि गैंगस्टर लखा सिधाना जुर्म की दुनिया से निकलकर एक अच्छा इंसान बनना चाहता है अगर आज लक्खा सिधाना की बात करें तो वह समाज सेवी के रूप में जाना जाता है कैसे एक गैंगस्टर समाज सेवी बना आज हम इस कहानी को शुरू से जानेंगे ।

History Of Lakha Sidhana


लक्खा सिधाना का जन्म 16 जनवरी 19 85 को पंजाब के बठिंडा शहर के कस्बा रामपुरा फूल में पढ़ने वाले गांव सिधाना में हुआ । लक्खा सिधाना बचपन में ही पढ़ाई में बहुत होशियार थे उन्होंने अपनी स्कूल की की पढ़ाई अपने गांव से की जिसके बाद वह रामपुरा फूल में मालवा कॉलेज में अपनी ग्रेजुएशन के लिए चले गए । मालवा कॉलेज से पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने DAV कॉलेज बठिंडा एडमिशन ले लिया और अपनी डबल M.A. पूरी की ।

जुर्म की दुनिया मे कदम


लक्खा सिधाना जब कॉलेज में पढ़ता था तो उसे भी यह लगने लगा कि उसका भी पूरे एरिया में नाम हो  उसे भी लोग जाने । इसी वजह से लक्खा जुर्म की दुनिया में आ गया साल 2004 में किसी झड़प को लेकर लेकर पहली बार जेल गया जिसके बाद यह सिलसिला आगे चलता रहा । झड़प के बाद कत्ल,  इरादा कत्ल , डकैती,  मारपीट जैसे कई संगीन आरोप के चलते लक्खा लगभग हर साल एक बार जेल में गया ।

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लक्खा ने अपनी एक इंटरव्यू में बताया कि उससे कुछ लोकल नेता यह सब काम करवाते थे । किसी को मारना पीटना पोलिंग बूथों पर कब्जा करना और किसी केस में उनसे गवाही दबाकर किसी दूसरे आदमी को उन के झूठे केस में फंसा देना ऐसे काम लक्खा सिधाना और उनके दोस्तों से करवाए जाते थे । लक्खा के कहने के मुताबिक 2008 में उन्होंने कई पोलिंग बूथों पर कब्जे किए,  साल 2006 में लक्खा के ऊपर कत्ल का इल्जाम लगेऔर इसी तरह के कई और संगीन आरोपों के चलते लक्खा लगभग 30 से 40 बार जेल गया ।

जुर्म की दुनिया से वापस आना


वोह कहते हैं ना कि जिंदगी की कीमत उसे ही पता चलती है जिसने मौत को करीब से देखा हो । ऐसा ही कुछ हुआ लक्खा सिधाना के साथ लखा के ऊपर दो बार  हमला हुआ पहली बार लक्खा के दो गोरिया सिर पर लगी लेकिन वह बच गया । दूसरी बार लक्खा की 5 गोलियां पेट में लगी लेकिन किस्मत अच्छी होने की वजह से लक्खा इस बार भी बच गया । लेकिन इस बार यह गोलियां लक्खा को उसकी जिंदगी की कीमत का एहसास करा गई ।



दूसरा लक्खा के कहने के मुताबिक कि वह जब भी जेल जाता था तो जेल में वह कुछ किताबें पढ़ा करता था जिसमें कुछ मार्क्सवाद की किताबें, लेनिन ,भगत सिंह की जीवनी और ऐसे ही कुछ और देश भक्तों की जिंदगी के बारे में उसने कई साल पड़ा । जिससे उसके मन में में अपने देश के लिए कुछ अच्छा काम करने की प्रेरणा जागी जिसके बाद लक्खा ने जुर्म की दुनिया से बाहर आकर कुछ अच्छा काम करने का सोचा ।

लक्खा के कहने के मुताबिक एक बार कचहरी में  किसी झगड़े के चलते लक्खा से एक व्यक्ति का कत्ल हो गया जिसके बाद लक्खा को कुछ साल जेल भी जाना पड़ा। लेकिन लक्खा के कहने के मुताबिक यह काम उसकी जिंदगी का सबसे बुरा काम था जिसका उसे आज भी पछतावा है । लक्खा कहता है के मुताबिक जिस व्यक्ति का उस ने कत्ल कीया था उसके मरने के बाद जो हालत उसके परिवार की हुई उसे देखकर लक्खा को अपने आप से नफरत होने लगी। जिसके बाद लक्खा ने ऐसे कामों को छोड़कर एक अच्छा इंसान बनने की सोची ।

लक्खा सिधाना के कुल 44 साथी इन्ही गैंगवॉर में मारे गए । जिस में से कुछ को पुलिस ने  इनकाउंटर में मार दिया और कुछ को दूसरे गैंग ने अपनी रंजिस के चलते मार दिया । लक्खा को भी 2 वार मारने को कोशिश की गई लेकिन वोह बच गया ।

राजनीति में आना


बठिंडा के ही कुछ राजनेताओं से बहस के बाद लक्खा ने उनको हराने के लिए राजनीति में आने का फैसला लिया लेकिन एक गैंगस्टर को कोई भी पार्टी टिकट देने के लिए तैयार नही थी । जिस के लिए लक्खा ने 17 सितम्बर 2012 को रामपुर फूल में एक बहुत बड़ी रैली की । रैली में इकठ को देख कर PPP पंजाब पीपल पार्टी ने लक्खा को MLA की टिकट दी । लक्खा इस चुनाव में जीत नही स्का । लक्खा को इस चुनाव में 10000 से ऊपर वोट हासिल हुई ।


Lakha Sidhana history, biography in hindi (लक्खा सिधाना )




आज लक्खा सिधाना अपने आप को एक समाज सेवी के रूप में देखता है । हालहि में उनोह ने पंजाबी गानो में गैंगस्टर और नशा को प्रमोट करने के विरोध में काफी चर्चा में रहा । इस के इलावा पंजाब में नेशनल हाईवे पर पंजाबी भाषा को सब से ऊपर लिखने के लिए वहाँ पर लगे सिग्न बोर्डो पर काली स्याही पोछ दी थी । जिस के लिए लक्खा को जेल बी जाना पड़ा था । इस के इलावा वह गांव गांव में जा कर नशे के विरोध में भाषण देते हैं ।

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Tuesday, 10 July 2018

Sanjay dutt biography in hindi संजय दत्त का जीवन पिरचय

Sanjay dutt biography

दोस्तों आज हम जिस शख्स के बारे में बात करने जा रहे हैं उसको वक़्त और हालातों ने रियल हीरो से रियल विलेन बना दिया। दोस्तो मैं बात करने जा रहा हूं बॉलीवुड के जाने-माने अभिनेता संजय दत्त के बारे में।  संजय दत्त ने अब तक बॉलीवुड की कुल 190 फिल्मों में काम किया है जिसमें उन्होंने पुलिस गैंगस्टर और अलग-अलग रोल निभाए है और इसी एक्टिंग के कारण संजय दत्त लोगों में हरमन प्यारे हो गए ।
sanjay dutt biography in hindi
Sanjay dutt


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मगर इसके साथ साथ वह विवादों मैं भी रहे है । जिन में से 1993 के मुम्बई हमलो में उन का नाम आना । जिस लिए अब उनकी लाइफ पर आधारित एक बॉलीवुड मूवी संजू वी चुकी है जिसमें रणबीर कपूर ने संजय दत्त का रोल निभाया है तो चलिए दोस्तों संजय दत्त की जीवन की कहानी को हम शुरू से जानते हैं।


Birth and Mother Father :

संजय दत्त का जन्म 29 जुलाई 1959 को मुंबई में हुआ। संजय दत्त के माता पिता बॉलीवुड के जाने-माने सितारे हैं। उनके पिता का नाम सुनील दत्त और माता का नाम नरगिस है। संजय दत्त ने अपनी स्कूली शिक्षा दा लॉरेंस स्कूल से की और उसके बाद वह आगे की पढ़ाई के लिए एलफिंस्टन कॉलेज गए।

sanjay dutt films :

क्योंकि संजय दत्त को एक्टिंग विरासत मैं ही मिली थी इसलिए उन्होंने सबसे पहले अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत 1972 में रेशमा और शेरा नाम की मूवी में बाल कलाकार के रूप में की।
मगर संजय दत्त को फिल्म में लीड रोल करने के लिए बहुत ज्यादा मेहनत करनी पड़ी और उनकी यह मेहनत 1981 में उनकी पहली फिल्म Rocky मैं दिखाई दी और यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर हिट रही।

इसके अगले ही साथ संजय दत्त की माता नरगिस की मृत्यु हो। गई जिससे संजय दत्त को बहुत भारी सदमा लगा इस दुख से उबरने के लिए संजय दत्त ने ड्रग्स का सहारा लेना शुरू कर दिया जिसके चलते संजय दत्त को पहली बार ड्रग्स रखने के जुर्म में जेल भी जाना पड़ा।


Persnol life :

संजय दत्त की पहली शादी रिचा से हुई लेकिन ब्रेन ट्यूमर के कारण 1996 में उनका देहांत हो गया ।उसके बाद संजय दत्त ने रिया पिलाई से शादी की लेकिन कुछ समय बाद दोनों का तलाक हो गया। 2008 में संजय दत्त ने मान्यता से शादी कर ली जिससे उनको दो जुड़वा बच्चे हुए जिसमें से ladaki  का नाम इकरा और लड़के का नाम शहरान है।


Case and Carrier :

संजय दत्त का कैरियर बहुत ही उतार चढ़ाव भरा रहा जिस के लिए उन्हें जेल के काफी चक्कर काटने पड़े। असल मे 1993 में मुम्बई में कुल 12जगहों पर  आतन्कवादी हमले हुए। जिन में 257 लोग मारे गए और 700 के करीब लोग जख्मी हुए ।

 संजय दत्त का नाम इस हमलो के साथ जुड़ा और कहा गया के जो हथ्यार आतंकवादियो के पास थे वो हथ्यार संयज दत्त के पास से आये थे। जिस के लिए संयज दत्त को लोगो का काफी गुस्सा भी झेलना पड़ा और इसी के कारण उन को 4 साल की सजा भी हुई।  मगर 1995 में उन्ह बेल मिल गई फिर 1997 से उनोह ने फिल्मों में दुबारा काम करना शुरू किया और कई हिट फिल्में की।

इसी के चलते 2006 में संजय दत्त को आतंकवादियों का साथ देने के जुर्म में निर्दोष पाया गया ।जिसमें वह बरी हो गए लेकिन अवैध हथियार रखने के लिए 2013 मैं उन्हें 5 साल की सजा हुई क्योंकि संजय दत्त कुछ समय पहले ही जेल में बता चुके थे जिसके लिए उन्होंने जेल में सिर्फ 42 महीने गुजारने थे ।संजय दत्त की जेल में अच्छा बर्ताव करने और नियमों का पालन करने के कारण उनकी सजा में से 102 दिन और कम कर दिए गए जिसके चलते 25 फरवरी 2016 को संजय दत्त को रिहा कर दिया गया।

Sanjay dutt biopic Sanju:

जैसा के हुम् ने पहले बताया के संयज दत्त की जिंदगी पर आधारित फिल्म संजू बन चुकी है जिस में संजय दत्त का रोल रणबीर कपूर ने बहुत ही अच्छे तरीके से निभाया है और लोगो ने भी रणबीर कपूर के इस रोल को काफी पसंद किया है। यह फ़िल्म हिट हो चुकी है।

दोस्तो संजय दत्त भले ही अपने जुर्म के कारण दोषी रहे हो मगर आज वो अपनी सज़ा काट चुके हैं। संयज दत्त का कहना है के अगर कोई वयक्ति अपने जुर्मों की सज़ा काट ले फिर वो दोषी नही रहता। दोस्तो आप को संयज दत्त की कौन सी फ़िल्म पसंद है हमे कमेंट करके जरूर बताए। आप का कीमती समय देने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।

Monday, 9 July 2018

Alfred Nobel Biography in Hindi अल्फ्रेड नोबेल की जीवनी

Alfred Nobel Biography in Hindi अल्फ्रेड नोबेल की जीवनी

दोस्तों आज मैं जिस सक्श की बात करने जा रहा हु शायद आप में से बहुत लोग उस के बारे में जानते वी होंगे . आज मैं बात करने जा रहा हु Alfred Nobal के बारे में ।
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Alfred nobal


आप को पता ही होगा के नोबल पुरस्कार दुनिया में सब से बड़ा पुरस्कार है , यह पुरस्कार दुनिया भर में शांति और परगति के क्षेत्र में काम करने वाले लोगो को दिया जाता  है , लेकिन आप को यह जानकार बहुत हैरानी होगी के शांति के लिए दिया जाने वाला यह पुरस्कार Dynamite की खोज करने वाले विज्ञानक अल्फ्रेड नोबल की याद में दिया जाता है , जिन के लोग अपने इस  अविष्कार की वजेह से बहुत नफरत करते थे और अल्फ्रेड नोबल को मौत का सुदागर नाम से पुकारते थे , आपको इस की पूरी कहानी हम शुरू से बताते हैं ।

Alfred Nobel Biography in Hindi अल्फ्रेड नोबेल की जीवनी


अल्फ्रेड नोबल का जनम 21 oct 1833 को स्वीडन में हुआ , अल्फ्रेड नोबल के पिता पहाड़ो से पत्थर तोड़ कर पुल बनाने का काम करते थे , मगर स्वीडन में काम की कमी होने के कारण अल्फ्रेड का परीवार रूस के सेंटपेतेर्ब्र्ग में आ गया , यहाँ आ कर अल्फ्रेड का परिवार रूस की सर्कार के लिए बंदूक में पाए जाने वरूद बनाया करते थे ।

फक्टेरी खोलने के कुछ समय बाद क्रीमिया का युद्ध शुरू हो गया जिस में बरूद मांग तेज़ी से बढ़ गई और अल्फ्रेड के पिता का कारोबार तेज़ी से चल पढ़ा , और उन के पास बहुत सारे पैसे बी हो गए , जिस से अल्फ्रेड के पिता ने अल्फ्रेड की पढाई के लिए घर में अच्छे टीचर रख लिए जिस से अल्फ्रेड को chimistery में अपनी अछि पकड़ बना ली , उस के अल्फ्रेड अमेरिका अपनी अगली पढाई के लिए चले गे ।

अपनी पढाई पूरी करने के बाद अल्फ्रेड पेरिस आ गे यहाँ पर वोह अस्कानियो से मिले जिनो ने तीन साल पहले ही Nitroglycerin की खोज की थी , यह एक पैसा विस्फोटक था जो वरूद से कही जायदा शक्तिशाली हुआ करता था , मगर उस में एक कमी थी क्यों की वोह एक जगह से दूसरी जगह पर नहीं लेकर जा सकते थे क्यों कु वोह कही वी फट सकता था , उसी के बीच क्रीमिया का युद्ध वी ख़तम हो चूका था इस लिए अल्फ्रेड का परिवार वापस स्वीडन आ गया , साथ ही अल्फ्रेड Nitroglycerin का एक सेम्पल लेकर अपने घर आ गे , अल्फ्रेड इस में शोध करना चाहते थे जिस से इस से विस्फोट न हो ।

अल्फ्रेड अपने भाई के साथ मिल कर इस पे रिसर्च करने लगे मगर इसी वीच 3 sep 1864 उनकी लैब में एक व्लास्ट हो गया जिस से अल्फ्रेड के भाई की मौत हो गई , जिस के बाद अल्फ्रेड के पिता ने यह काम छोड़ दिया , और स्वीडन की सरकार ने वी रिसर्च लैब शहर में खोलने पर रोक लगा दी , यह अल्फ्रेड और उस के परिवार के लिए बहुत कठिन समय था , मगर अल्फ्रेड ने कुछ समय बाद शहर के बहार एक और लैब बनवाया , और कुछ सालो के बाद ही अल्फ्रेड ने NItroglycerin में सिलिका मिला कर उस का एक पेस्ट बना लिया , जिस को कही वी लेकर जा सकते थे , और इस को कोई वी आकार दिया जा सकता था , इस खोज का नाम उनोह ने Dynamite नाम से किया ।


उन के दुवारा बनाया गिया Dynamite की मांग पूरी दुनिया में होने लगी और उनोह ने अपनी इस कम्पनी को 20 से जयादा देशो में खोल दिया , मगर समय के साथ इस का परियोग युद्ध में वी होने लगा , इस की वजेह से बहुत से लोगो की जान चली गई जिस का पूरा आरोप अल्फ्रेड नोबल पर लगा , अब लोग उन् से नफरत करने लगे थे , और लोग अल्फ्रेड नोबल को मौत का सुदागर बुलाते थे ।



इस के बाद अल्फ्रेड नोबल बहुत दुखी हुए , अपनी मेहनत से पूरी दुनिया में नाम करने के बाद वेह बदनाम हो कर नहीं मरना चाहते थे , इस लिए उनोह ने लोगो की हेल्प करनी शुरू कर दी और मरने के बाद अपनी सारी सम्पति उन लोगो को पुरस्कार देने के लिए दान कर दी जो दुनिया मे शांति और परगति के लिए काम करेंगे ।

10 dec 1896 को अल्फ्रेड नोबल की मौत हो गई , लेकिन हर साल उन के दुवारा दान की गई सम्पति से इस विशव का सब से बड़ा पुरस्कार नोबल पुरस्कार दिया जाता है , आज लोग उन को एक महान विज्ञानक और समाज सेवक के नाम से याद किया करते हैं।

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Friday, 29 June 2018

Mintu gurusaria biography in hindi( डाकुआँ दा मुंडा ) मिन्टू गुरुसरिया की जीवनी

 Mintu gurusaria biography in hindi( डाकुआँ दा मुंडा )

दोस्तों आज हम जिस हीरो की बात करने जा रहे हैं। उसने अपनी जिंदगी में वह करके दिखाया है,
 जो हर किसी के बस में नहीं होता कहने को तो वह एक साधारण से घर का लड़का था लेकिन आज वह दूसरे लोगों के लिए एक प्रेरणा दायक इंसान बन चुका है ।
जी हां दोस्तों मैं बात करने जा रहा हूं पंजाबी जर्नलिस्ट मिंटू गुरु सरिया के बारे में
जिन्होंने अपनी जिंदगी में बहुत से बुरे काम बुरे समय और बुरे लोगों के साथ बताने के बावजूद आज दूसरे लोगों के लिए प्रेरणादायक बन चुके हैं।
mintu gurusaria


आपने बहुत से सेलिब्रिटी की जिंदगी पर बनी कई फिल्में देखी होगी लेकिन मिंटू गुरु सरिया ना तो बहुत बडा फिल्मी सितारों या बड़ा खिलाड़ी या वैज्ञानिक नहीं है
लेकिन फिर भी उसकी जिंदगी पर एक पंजाबी मूवी बनकर तैयार हो चुकी है दोस्तों कोई भी फिल्म उस शख्स की जिंदगी पर ही बनाई जाती है ।
जिसने अपनी जिंदगी में कुछ बड़ा किया हो उसी तरह मिंटू गुरु सरिया ने भी जैसे अपनी जिंदगी में उतार चढ़ाव देखें और आखिर में Khalnayak से एक नायक बनकर उभरे आज हम उस हीरो की जिंदगी को शुरू से जाने गे।

जन्म और बचपन : मिंटू गुरु सरिया का पूरा नाम बृजेंद्र सिंह मिंटू है उसका परिवार पाकिस्तान से आकर पंजाब में बसा था
 पाकिस्तान में उनका गांव राजा जंग था मिंटू गुरु सरिया का जन्म 26 जुलाई 1979 को पंजाब के फाजिल्का के गुरुसर गांव में हुआ ।
जो कि राजस्थान के बॉर्डर पर लगता है बॉर्डर पर बसने के कारण ही यहां पर नशा ज्यादा मात्रा में मिलता है ।
मिंटू के पिता का नाम बलदेव सिंह और माता का नाम जसवीर कौर है। मिन्टू के दादा और पििता नशा तस्करी का काम करते थे। जिन के लिए उन को डाकू कह कर बुलाया जााता ।

बचपन में मिंटू पढ़ाई में बहुत होशियार था जिसके चलते उसने अपनी पढ़ाई गांव के स्कूल में ही पूरी की और उसके बाद आगे की पढ़ाई के लिए अबोहर दाखिला लिया।
अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई के लिए मिंटू ने मलोट दाखिला ले लिया
लेकिन यहां पर बुरे लोगों की संगत के चलते उसे नशेे की लत लग गई मिंटू ने अपनी एक इंटरव्यू में बताया कि एक समय ऐसा था जब वह 1 दिन नशे कि 100 गोली खा लेेेता था।

उस वक़्त मिन्टू ने अपनी ज़िंदगी से भड़क कर गलत रास्ते पर चल पड़े थे । नशे के लिए किसी को मारना लूट पाट करना ऐसे काम उन के लिए आसान थे।

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कोई भी उन को नशे का लालच दे कर ले जाता था और अपना काम करा लेता था।
इसी दोष में उन के पिता को भी एक वार जेल हो गई और उन की जेल में ही मौत हो गई।

लेकिन इसी के साथ साथ मिन्टू के दिल मे अच्छा इंसान बनने की चाहत भी बरकरार थी।

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अपनी जिंदगी के कई साल ऐसे ही बर्बाद करने के बाद एक वार उन का एक्सीडेंट हो गया
और डॉक्टर ने उसे कई महीने आराम करने के लिए कहा । मिन्टू अपना समय गुजरने के लिए कुछ किताबें पड़ता रहता जिन का उस की ज़िंदगी पर बहुत गहरा असर पड़ा। 
बड़े बड़े शूरवीरो की कहानिया पड़ कर उन के मन मे यह ख्याल आया के में ऐसे नही मरना मुझे कुछ करना है।
जिस के चलते उस ने पत्रकारी क्षेत्र में आने का फैसला किया। और आज मिन्टू पंजाब के जाने माने पत्रकार हैं । 

Mintu gurusaria faimly :


 मिन्टू ने अपनी दोस्त मनदीप कौर के साथ शादी कर ली और उन का एक बेटा भी है।
मिन्टू ने अपनी ऑटोबायोग्राफी में बताया के उन को अपनी ज़िंदगी मे अच्छा बनाने के लिए उन की पत्नी का बहुत सहजोग मिला है।

Books : 

मिन्टू की सब से ज्यादा मशहूर किताब उन की अपनी ज़िंदगी पर आधारित "डाकुआँ द मुंडा " है।
जिन में उनोह ने अपनी ज़िन्दगी की कहानी लिखी है। इन के इलावा एक और किताब ज़िन्दगी के आशिक़ भी लिखी है। 

दोस्तो यह थी एक आम लड़के की कहानी के कैसे उस ने अपने जज्बे से उस नरक भारी ज़िन्दगी से निकल कर दूसरे लोगो के सहमने एक मिसाल पेश की है। आज मिन्टू पंजाब में नशे के खिलाफ एक मुहिम चला रहे हैं। इस के इलावा उन की जीवनी को पढ़ कर बहुत से लोग प्रेरित हुए हैं। हम इस महान इंसान को सलाम करते हैं।

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Monday, 11 June 2018

Yuvraj singh biography in hindi युवराज सिंह का जीवन परिचय

Yuvraj Singh biography in Hindi युवराज सिंह का जीवन परिचय  


  नमस्कार दोस्तों आज हम बात करने जा रहे हैं एक ऐसे क्रिकेट खिलाड़ी की जिन्होंने भारत का नाम पूरी दुनिया में रोशन किया है ।आज हम बात करने जा रहे हैं एक ऐसे प्रेरणादायक शख्स के बारे में जिन्होंने कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी को भी मात दे दी और अपना क्रिकेट कैरियर दोबारा शुरू किया ।जी हां दोस्तों मैं बात करने जा रहा हूं भारतीय क्रिकेट टीम के सिक्सर किंग युवराज सिंह के बारे में ।6.1 फीट का और 78 किलो वजनी  यह खिलाड़ी  जब क्रीज पर आता है  तो  दुनिया के बड़े-बड़े बॉलर  के पसीने छूट जाते हैं ।युवराज सिंह आज भारतीय क्रिकेट टीम के बहुत ही जाने माने खिलाड़ी हैं पूरी दुनिया में युवराज सिंह के लाखों फैन हैं तो चलिए दोस्तों इस महान खिलाड़ी की जीवनी को हम शुरू से जानते हैं।

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जन्म और बचपन  : 

युवराज सिंह का जन्म 12 दिसंबर 1981 को चंडीगढ़ में हुआ। युवराज सिंह के पिता का नाम जोगराज सिंह है जो के पूर्व क्रिकेटर रह चुके हैं ।इसके अलावा युवराज सिंह के पिता पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री के जाने माने अभिनेता है। यवराज सिंह की माता का नाम शबनम सिंह है। इसके अलावा युवराज सिंह के भाई का नाम जोरावर सिंह है। छोटी ही उम्र में युवराज सिंह के माता-पिता का तलाक हो गया था जिसके चलते युवराज सिंह को अपनी माता के पास रहना पड़ा। 

युवराज सिंह ने अपनी पढ़ाई  DAV स्कूल  चंडीगढ़ से  हासिल की । युवराज सिंह को बचपन में टेनस और रोलर स्केटिंग करना बहुत अच्छा लगता था मात्र 11 साल की उम्र में युवराज सिंह ने रोलर स्केटिंग में 14 अवार्ड जीत लिए थे। मगर युवराज सिंह के पिता योगराज सिंह अपने बेटे को एक क्रिकेटर बनाना चाहते थे जिसके चलते उन्होंने नाराज होकर एक दिन युवराज सिंह के जीते हुए सभी मेडल और ट्रॉफी बाहर फेंक दिए और पिता के दबाव के चलते युवराज सिंह ने रोलर स्केटिंग छोड़ कर अपना ध्यान क्रिकेट की तरफ लगाया ।बचपन में युवराज सिंह के कोच नवजोत सिंह सिद्धू थे लेकिन उससे युवराज सिंह के खेल में ज्यादा निखार नहीं आया ।जिसके चलते जोगराज सिंह सिंह ने खुद युवराज को ट्रेनिंग देना शुरू किया।

नवजोत सिंह सिद्धू ने एक इंटरव्यू में बताया कि जब युवराज के पिता युवराज को स्टेडियम में ट्रेनिंग देते थे तो आधे स्टेडियम की लाइट्स बंद कर दी जाती थी और टेनिस बॉल को गीला किया जाता था जिससे वह और तेज निकलती थी और युवराज सिंह को अंधेरे में उस गेंद को जज करना पड़ता था । जिससे युवराज सिंह की बैठक में चमत्कारी निखार आया ।

Cricket Career :

युवराज सिंह ने  अपने क्रिकेट कैरियर की शुरुआत 1996 की जब उन्हें अंडर-19 पंजाब के लिए चुना गया आगे चलकर युवराज सिंह को भारतीय अंडर-19 के लिए चुन लिया गया। युवराज सिंह ने अपने पहले ही टूर्नामेंट में बहुत अच्छा प्रदर्शन किया। यह टूर्नामेंट ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ था जहां पर उनका सर्वाधिक स्कोर 84 रन था जो कि 82 गेंदों में बनाए थे ।

इसी टूर्नामेंट में युवराज सिंह को मैन ऑफ द टूर्नामेंट  से भी नवाजा गया ।अगर हम टेस्ट मैच की बात करें तो युवराज सिंह ने 2002 में इंग्लैंड के खिलाफ अपने सबसे ज्यादा रन 324 बनाएं। 2003 में बांग्लादेश के खिलाफ युवराज सिंह ने अपना पहला शतक जमाया 2005 से 2006 के बीच युवराज सिंह को 3 बार मैन ऑफ द सीरीज भी चुना गया।

अगर हम T20 की बात करें तो  युवराज सिंह को 2007 में पहली बार भारतीय T20 क्रिकेट टीम मैं शामिल किया गया जब राहुल द्रविड़ ने भारतीय कप्तानी से इस्तीफा दिया तो महेंद्र सिंह धोनी को कप्तान बनाया गया और युवराज सिंह को एक हिटर के रूप में टीम शामिल किया गया ।

2007 में वर्ल्ड कप से पहले भारत में इंग्लैंड के खिलाफ एक सीरीज खेली जिसमें युवराज सिंह को गेंदबाजी करते समय इंग्लैंड के एक खिलाड़ी मसकीयस ने 5 गेंदों में 5 छक्के जड़े । जिस का बदला युवराज सिंह ने 19 सितंबर 2007 T20 वर्ल्ड कप मैं एक मैच के दौरान इंग्लैंड के गेंदबाज स्ट्रीट ब्रॉड को छह गेंदों में छह छक्के जड़कर लिया।

IPL Career : 

अगर हम युवराज सिंह की IPL कैरियर की बात करें तो वह उनके लिए इतना अच्छा नहीं रहा ।अपने IPL कैरियर में युवराज सिंह अपने फैंस की उम्मीदों पर खरे नहीं उतर पाए हैं ।2011 में अपना इलाज कराने के बाद युवराज सिंह 2012 में भारत आए। 

सबसे पहले युवराज सिंह को किंग्स इलेवन पंजाब  में  बतौर कप्तान  खिलाया गया  लेकिन युवराज सिंह का प्रदर्शन इतना अच्छा नहीं रहा । उससे अगले साल पुणे वॉरियर्स ने 14 करोड़ में युवराज सिंह  को खरीदा। उससे अगले ही साल कॉन्ट्रोवर्सी के चलते यह टीम आईपीएल से बाहर हो गई ।2014 में युवराज सिंह को रॉयल चैलेंज बैंगलोर ने 14 करोड़ में खरीदा 2015 में युवराज सिंह को दिल्ली ने 16 करोड़ मैं खरीदा। 2016 में हैदराबाद ने युवराज सिंह को 7 करोड़ में खरीदा  युवराज सिंह का IPL कैरियर इतना अच्छा नहीं रहा।

Records : 


युवराज सिंह ने बहुत से रिकॉर्ड अपने नाम किए हैं जिनमें सबसे पहले छह गेंदों पर छह छक्के लगाने का रिकॉर्ड युवराज सिंह के नाम है T20 के इतिहास में ऐसा करने वाले युवराज सिंह पहले खिलाड़ी हैं। इसके अलावा युवराज सिंह पहले ऐसे ऑलराउंडर हैं जिन्होंने वर्ल्ड कप में 300 से अधिक कराना और 15 विकेट लिए हो । 2011 वर्ल्ड कप में सबसे लंबा छक्का मारने का रिकॉर्ड भी  युवराज सिंह के नाम है जो कि 120 मीटर लंबा था।


Faimly : 

युवराज सिंह के पिता का नाम योगराज सिंह और उनकी माता का नाम शबनम सिंह है इसके अलावा युवराज सिंह के भाई का नाम जोरावर सिंह है 2015 में युवराज सिंह ने अपनी फ्रेंड हेजल कीच के साथ इंगेजमेंट कराई और 30 नवंबर 2016 को दोनों ने शादी कर ली ।

Interesting Fact about yuvraj singh life:

युवराज सिंह को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट टीम में सबसे पहला चेक 21 लाख का मिला था जो के उन्होंने अपनी माता को दिया था।


युवराज सिंह ने 2 पंजाबी मूवी मैं भी काम किया है जिनमें से "पुत सरदारा दे "और "मेहंदी शगना "दी हैं।
युवराज सिंह को उनके फैन युवी कह कर बुलाते हैं।

युवराज सिंह ने एक बॉलीवुड मूवी "Jumbo" मैं काम किया है जो कि एक एमिनेशन मूवी है जिसमें युवराज सिंह ने अपनी आवाज रिकॉर्ड कराई है।

2011 में युवराज सिंह ने कैंसर का इलाज कराने के बाद YouWeCan नाम की एक संस्था चलाई है जो कैंसर के मरीजों की सहायता करती है।


युवराज सिंह ने अपनी जिंदगी पर आधारित एक ऑटो बायोग्राफी भी लिखी है जिसका नाम "टेस्ट ऑफ माय लाइफ" है।

युवराज सिंह का लकी नंबर 12 हैं इसलिए वह 12 नंबर की जर्सी पहनते हैं।

इसके अलावा 2011 में युवराज सिंह की जिंदगी में एक बहुत बड़ा बदलाव आया जब उन्हें पता चला कि उनके लंग में कैंसर है लेकिन अच्छी बात यह थी यह अभी पहली स्टेज पर ही था। इसलिए युवराज सिंह अमेरिका गए वहां उन्होंने बीसटन मैं कीमोथैरेपी कराई जिसकी 1 साल बाद मैं बिल्कुल ठीक हो गए।

तो दोस्तों यह तो थी युवराज सिंह की जिंदगी की कहानी हमें उम्मीद है यह आपको हमारे द्वारा दी गई जानकारी अच्छी लगती होगी। अपना कीमती समय देने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद और आपको हमारा आर्टिकल कैसा लगा हमें कमेंट करके जरूर बताएं।

Thursday, 7 June 2018

Biography of Mujeeb Ur Rehman (Mystery Spiner) in hindi ( मुजीब उर रहमान की जीवनी)

Biography of Mujeeb Ur Rehman (Mystery Spiner) in hindi ( मुजीब उर रहमान की जीवनी):

  
Mujeeb Ur Rehmaan 

दोस्तों आज मैं जिस शख्स की बात करने जा रहा हूं वह क्रिकेट की दुनिया का एक चमकता सितारा है ।जिसने यह मुकाम बहुत ही छोटी उम्र में हासिल कर लिया है दोस्तों मैं बात करने जा रहा हूं अफगानिस्तान के मिस्ट्री स्पिनर मुजीब उर रहमान की, जो कि हाल ही में चले इंडियन प्रीमियर लीग में किंग्स इलेवन पंजाब की तरफ से खेले और अपनी गेंदबाजी से सबको हैरान कर दिया।

यह 17 वर्षीय खिलाड़ी बहुत ही अच्छा खेला जिसके सामने अंतर्राष्ट्रीय स्तर के बड़े खिलाड़ी जैसे एबी डिविलियर्स , विराट कोहली और केन विलियमसन जैसे दिग्गज भी ढेर हो गए ।तो चलिए दोस्तों आज हम आपको मुजीब उर रहमान की जिंदगी की पूरी कहानी शुरू से बताते हैं।


जन्म और बचपन :मुजीब उर रहमान का जन्म 26 मार्च 2001 को अफगानिस्तान के खोस्त मैं हुआ।  जब मुजीब सिर्फ 3 महीने के थे तो उनके पिता का देहांत हो गया घर में बहुत ज्यादा गरीबी होने के कारण मुजीब ज्यादा पढ़ लिख नहीं पाए ,यही वजह है कि आज भी मुजीब जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बात करते हैं तो अपनी भाषा पास्तो मैं ही बात करते हैं उनके कोच आगे उसको अंग्रेजी में बदलकर बताते हैं।

मुजीब उर रहमान एक लेग स्पिनर हैं अपनी 17 वर्षीय उम्र में इतनी कारगर गेंदबाजी से मुजीब ने सबको प्रभावित किया है अगर हम मुजीब के शरीर की बन्त्र बात करें तो  उनका कद 5 फुट 11 इंच है इसके अलावा बाइसेप्स का आकार 14 इंच और छाती का आकार 40 इंच है इसके अलावा आंखें भूरे रंग की है।

मुजीब को छोटी ही उम्र से क्रिकेट खेलना बहुत पसंद था जिसके चलते वह अपनी गेंदबाजी को निखारते गए, एक इंटरव्यू में मुजीब ने बताया के जो वह कैरम बाल डालते है वह बाल उन्होंने भारत के जाने-माने स्पिनर अश्विन से उनकी वीडियो देखकर सीखी है । इसके अलावा मुजीब एक ही ओवर में 5 तरीके की बाल डाल सकते हैं जिसके चलते मुजीब को मिस्ट्री स्पिनर के नाम से भी बुलाया जाता है।

Cricket Career :मुजीब ने अपने एक दिवसीय क्रिकेट कैरियर की शुरुआत 5 दिसंबर 2017 को आयरलैंड के खिलाफ की,  इसके अलावा 5 फरवरी 2018 को अपने T20 कैरियर की शुरुआत जिंबाब्वे के खिलाफ खेलकर की ।मुजीब ने अब तक 43 एक दिवसीय और 38 T20 मुकाबले खेले हैं जिसमें उन्होंने अपनी मिस्ट्री गेंदबाजी से सबको प्रभावित किया है।

घरेलू लीग्स : इसके अलावा अगर हम मुजीब उर रहमान की लीग मैं बात करें तो 2017 में मुजीब उर रहमान स्पीन घर क्षत्र के लिए खेले जिसके बाद 2017 में ही बूस्ट डिफेंडर्स और उसके बाद इसी साल बांग्लादेश प्रीमियर लीग और 2017 में ही कामिला विक्टोरिया और हाल ही में 2018 में इंडियन प्रीमियर लीग में खेले

Lifestyle : अगर हम मुजीब और रहमान की लाइफस्टाइल की बात करें तो मुजीब अभी कुंवारे हैं इसके अलावा उनके पसंदीदा खिलाड़ी अफगानिस्तान के ही स्पिनर राशिद खान हैं


Property :मुजीब के पास 2018 में कुल संपत्ति 30000000 है मुजीब के बारे में एक बात बहुत मशहूर है के जे दुनिया का सबसे कम उम्र का करोड़पति है जिसने अपनी मेहनत पर इतनी संपत्ति बनाई है।


तो दोस्तों यह तो थी अफगानिस्तान की मिस्ट्री स्पिनर मुजीब उर रहमान की जिंदगी की कहानी हमें उम्मीद है कि आपको हमारे द्वारा दी गई जानकारी अच्छी लगती होगी आप हमें कमेंट करके हमारा मनोबल बढ़ा सकते हैं अपना कीमती समय देने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद