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Thursday, 14 March 2019

5 all-time IPL records that are unlikely to be broken (IPL के 5 रिकॉर्ड जो कभी नहीं टूटेंगे )

5 all-time IPL records that are unlikely to be broken (IPL के 5 रिकॉर्ड जो कभी नहीं टूटेंगे )

आईपीएल भारत का एक बहुत ही हरमन प्यारा खेल है।  इसे क्रिकेट का एक महाकुम्भ भी कहा जाता है।  जब यह टूर्नामेंट भारत में आजोजन किया जाता है तो पूरे वर्ल्ड से क्रिकेट के बड़े बड़े नाम इस टूर्नमेंट में शामिल होते हैं।  इस टूर्नामेंट में हर साल कई नए नए रिकॉर्ड बनते हैं।  आज हम इस लेख में उन्ही पांच रिकॉर्ड के बारे में बात करेंगे जो क्रिकेट की दुनिया में पहली वार बने है और आने वाले समय में उन का टूट पाना बहुत ही मुश्किल है।  
5 all-time IPL records that are unlikely to be broken (IPL के 5 रिकॉर्ड जो कभी नहीं टूटेंगे )
5 all-time IPL records that are unlikely to be broken (IPL के 5 रिकॉर्ड जो कभी नहीं टूटेंगे )

1 . Chris Gayle’s 175 : 

दोस्तों अगर हम एक दिवसीय क्रिकेट की बात करें तो बहुत ही काम खिलाडी उस मैच में 175 रन का आंकड़ा पार कर पाते है।  लेकिन वेस्टइंडीज के खिलाडी क्रिस गेल ने यह काम t 20  क्रिकेट में बहुत ही आसानी के साथ कर दिया।  Chinnaswamy stadium Banglore में रॉयल चैलेंजर बंगलोर की तरफ से खेलते हुए पुणे वोर्रीयर की टीम के खिलाफ क्रिस गेल ने सिर्फ 66 गेंदों में 175 रन जड़ दिए।  जो आज तक क्रिकेट के इतहास में कोई भी खिलाडी नहीं कर पाया।  आने वाले समय में इस रिकॉर्ड का टूटना लगभग न मुन्कन है। 
5 all-time IPL records that are unlikely to be broken (IPL के 5 रिकॉर्ड जो कभी नहीं टूटेंगे )
5 all-time IPL records that are unlikely to be broken (IPL के 5 रिकॉर्ड जो कभी नहीं टूटेंगे )

2 . Sohail Tanvir’s six-wicket haul

राजस्थान रॉयल की तरफ से खेलते हर सोहिल तनवीर ने कमाल का बोलिंग स्पेल डाला।  उनोह ने चेन्नई सुपरकिंग्स के साथ एक मैच में सिर्फ 14 रन देकर 6 विकेट झटके।  यह स्पेल अपने आप में एक रिकॉर्ड है।  जयपुर में हुए इस मैच में सब से ज्यादा विकेट लेकर सोहैल तनवीर ने पर्पल कैप भी अपने नाम की।  आज तक यह रिकॉर्ड कोई नहीं तोड़ पाया है। 

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3 .Suresh Raina’s consecutive matches


सुरेश रैना जो के भारतीय टीम के एक बहुत बड़े खिलाडी है उनोह ने अपने नाम 3873 रन बनाने का रिकॉर्ड किया है।  यह रन उनोह ने 133 मैचों में 34 की एवरेज के साथ बनाए है।  इस के इलावा वह दुनिया के पहले ऐसे खिलाडी है जिनोह लगातार 133 मैच खेले है।  इन सभी मैचों में बिना किसी इंजरी और किसी कारण के सुरेश रैना ने लगातार इतने मैच खेले हैं और अपना बहुत अच्छा प्रदर्शन किया है।  

4 . Royal Challengers Bangalore’s highest ever team total



23 अप्रैल 2013 को बंगलौर के चिन्नास्वामी स्टेडियम में पुणे के खिलाफ खेलते हुए रॉयल चैलेंजर बंगलौर ने एक बहुत बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम किया।  रॉयल चैलेंजर बंगलोर ने अपने 20 ओवरों में कुल 263 रन बनाए।  आज तक आईपीएल के इतहास में इतना बड़ा टोटल कोई टीम नहीं बना पाई है।  इसी मैच में क्रिस गेल ने 66 गेंदों में 175 रन बना कर सब से ज्यादा रन बनाने वाले खिलाडी का रिकॉर्ड अपने नाम किया। आईपीएल में दूसरे नंबर पर 248 रन का टोटल है जो के रॉयल चैलेंजर बंगलौर ने ही बनाया है। 

5 . 37 runs in one over


क्रिस गेल ने ही रॉयल चैलेंजर बंगलौर की तरफ से खेलते हुए कोच्ची टस्कर्स केरला की टीम के खिलाफ Prasanth Parameshwaran के एक ओवर में 37 रन जड़ दिए।  परसंथ के इस ओवर में कुल 36 रन आए जिस में से एक बॉल नो बॉल थी।  जिस के चलते  एक ओवर में 37 रन बने।  आजतक आईपीएल में किसी भी  खिलाडी ने यह कारनामा नहीं किया है।  आने वाले समय में इस रिकॉर्ड का टूट पाना भी लगभग न मुंकिन सा है। 

Wednesday, 3 October 2018

History of Internet, Domain and Website in Hindi

History of Internet, Domain and Website in Hindi  आज के इस व्यापक और आधुनिक मायाजाल सामान Internet का मूल Cold War है । 1960 - 70 के दशक में Cold War अपने लेवल पर था और रशिया और अमेरिका दोनों देशों के सर पर परमाणु हमले की तलवार लटक रही थी । अगर परमाणु बम का हमला होता है तो इन हालत में निकलने वाले विकिरण के कारण संदेश का आदान-प्रदान ही खत्म हो जाएगा  और आप अपने ही देश के किसी सेना के डिवीजन को या नेता को कोई भी सीक्रेट संदेश नहीं भेज सकते ।

 इन सब खतरों को अमेरिका ने भी भांप लिया था इसलिए अमेरिका ने एक ऐसी कार्यप्रणाली बनाने की सोची जो अंडरग्राउंड केबल के द्वारा एक दूसरे से जोड़ती हो और कोई सन्देश आसानी से एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाया जा सके । और अमेरिका के राष्ट्रपति देश के किसी भी कोने के किसी भी बंकर में हो फिर भी उनको कांटेक्ट करके उनके डिसीजन को लागू किया जा सके ।
History of Internet, Domain and Website in Hindi
History of Internet, Domain and Website in Hindi 

History of Internet, Domain and Website in Hindi  


अमेरिका की सरकार की यह भी दरखास्त थी कि इसका कोई केंद्र ना हो । इसलिए एक ऐसी संचालित कार्यप्रणाली बनानी थी जिसे पावर ऑन करते ही देश के सारे कंप्यूटर एक दूसरे से जुड़ जाए और किसी एक कंप्यूटर के खराब होने पर पूरे नेटवर्क पर कोई असर न पड़े ।



History of Internet :
इंटरनेट का इतिहास 


आखिरकार ऐसे नेटवर्क को बनाने के लिए पेंटागन के ARPA यानी एडवांस रिसर्च प्रोजेक्ट एजेंसी को नियुक्त किया गया । ARPA और अमेरिकन सरकार ने मिलजुल कर एक ऐसे ही नेटवर्क का सर्जन किया जिसे शुरुआत में ARPNET कहा गया और अमेरिका के सभी खास कंप्यूटर्स को ARPANET से जोड़ दिया गया । साल 1990 आते-आते कोल्ड वर खत्म होने की कगार पर आ गया और उस वक्त परमाणु युद्ध होने के बाद भी हट चुके थे । इसलिए डिफेंस के लिए खोजी गई इस टेक्नोलॉजी को National Science Foundation को सौंप दिया गया और यह आधुनिक आविष्कार अब सार्वजनिक बन चुका था ।

History of Domain 
डोमेन का इतिहास 


जो 1990 आते-आते ARPNET की जगह INTERNET के नाम से जाना जाने लगा । अब तक INTERNET में कोई Website या Domain जैसी चीज नहीं थी क्योंकि 1990 तक एक कंप्यूटर को दूसरे कंप्यूटर से केबल के द्वारा जोड़ा जाता था । हमें कोई डाटा चाहिए तो डाटा किस कंप्यूटर में है उसका हमें पता होना चाहिए अगर हमें पता नहीं है के कौन सा डाटा किस कंप्यूटर में है तो हम उसे नहीं पा सकते इस तरीके से और ARPNET काम करता था ।



1984 में डॉक्टर जॉन पोस्टल Domain Registration बनाया जिसे आज हम .Com, .org, .in के नाम से जानते हैं । इसके जरिए से वेबसाइट बनाई जा सकती थी और इसके बाद वेबसाइट बनने लगी लेकिन वेबसाइट सिर्फ शहरों तक ही सीमित थी ।

History of World Wide Web (WWW)
डब्ल्यू डब्ल्यू डब्ल्यू का इतिहास 


लेकिन 1991 में Tim Berners-Lee नाम के वैज्ञानिक ने इस समस्या को हमेशा के लिए सुलझा दिया । जब उन्होंने w.w.w. यानी वर्ल्ड वाइड वेब की खोज की कुछ ही समय में डब्ल्यू डब्ल्यू डब्ल्यू इंटरनेशनल नेट बन गया और सारे डोमिन इसी नाम से रजिस्टर्ड होने लगे।
History of Internet, Domain and Website in Hindi
Tim Berners-Lee

History of Wi Fi 
वाई फाई का इतिहास 


1991 के बाद इंटरनेट पर कोई भी चीज छुपी नहीं रही । इंटरनेट की कामयाबी की तरफ 1995 में इंटरनेट स्पीड 28.8 kbps थी और उस समय इंटरनेट यूज करने वालों की तादात लगभग एक करोड़ साठ लाख थी । एक अनुमान के मुताबिक उस समय दुनिया के 0.2% लोग इंटरनेट इस्तेमाल कर रहे थे लेकिन 22 साल बाद आज 2017 में इंटरनेट के एवरेज स्पीड 5.6 mbps है और दुनिया में तकरीबन 307 करोड लोग इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं ।

एक अनुमान के मुताबिक दुनिया के 40% लोग इंटरनेट से आपस में जुड़े हुए हैं और इन्हीं 22 सालों में इंटरनेट की स्पीड में 195% बढ़ोतरी हुई है ।

History of Internet, Domain and Website in Hindi 

1999 में Dr. John O'Sullivan ने 18 साल की उम्र में ही वायलेंस फर्टिलिटी नेटवर्क बनाया जिसे आज हम WiFi से जानते हैं । वॉइस ऑफलाइन नेटवर्क कनेक्शन में मोबाइल और कांटेक्ट में बदलकर इंटरनेट को बिना वॉइस शेयर करना संभव कर दिया । यह तो बस एक नेटवर्क की शुरुआत थी इंटरनेट की वजह से दुनिया में कहीं अविष्कारों ने जन्म लिया और कई खोजें की गई ।



Who is Owner of Internet 
इंटरनेट का असली मालिक कौन है


सच बात कहूं तो इसका कोई मालिक नहीं है इसे उपयोग करने वाले सब उसके मालिक है क्योंकि इंटरनेट का आविष्कार अमेरिका के पब्लिक सेक्टर में हुआ है । जिसमें अमेरिकन डिफेंस और रिसर्च यूनिवर्सिटी के पैसे लगे थे । अगर इसका आविष्कार कैसे प्राइवेट सेक्टर में किया होता तो कंपनियां अपने नाम की पेटर्न बनवाकर नफाखोरी शुरु कर देती । लेकिन पूंजीवादी देश की सरकार या सरकार के दुवारा चलने वाली यूनिवर्सिटी को बिजनेस में कोई दिलचस्पी नहीं होती । आगे भी FM Radio और TV की खोज सरकार के पैसों द्वारा की गई मगर बाद में इन खोजों को प्राइवेट व्रतों के लिए ट्रांसफर कर दिया गया ।

History of ISP ( Internet Service Provider )


परिणाम स्वरूप विश्व में कई सारे छोटे-छोटे इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर यानी आईएसपी शुरू हो गए जिन्होंने अपने लोकल नेटवर्क को वैश्विक इंटरनेट के साथ जोड़ दिया और इस तरह इंटरनेट की जाल पूरी दुनिया में फैल गई यह वही प्राइवेट सर्विस प्रोवाइडर है जो हमसे डाटा के लिए कुछ पैसे लेते हैं ।

Interesting Fact About Internet
इंटरनेट से जुड़े रोचक तथ 


पूरे विश्व के इंटरनेट का मायाजाल कितना बड़ा है इसका जवाब यह है कि हम कल्पना भी ना कर सके उतना बड़ा फिर भी अगर इसे आंकड़ों के द्वारा समझ ना हो तो आप यह जान लो के समुंदर के तल में कुल 8 लाख किलोमीटर लंबे fiver Optical Cable विशे हुए हैं और जमीन में लाखों किलोमीटर विशे केवल अलग ।

जिनमें से हर क्षण डाटा का वाहन होता है जिससे दुनिया के लोग अपने पर्सनल कंप्यूटर से या पर्सनल मोबाइल से इंटरनेट के साथ जुड़े हुए रहते हैं । गूगल के अनुसार उसके डेटाबेस में एक हजार अरब से भी ज्यादा वेबपेज है और हर रोज उनकी संख्या बढ़ रही है। विश्व में आज प्रति मिनिट 500000 से भी ज्यादा वेबपेज बन रहे हैं ।
आज दुनिया के बड़े-बड़े बिज़नस और फाइनेंशियल सिस्टम इंटरनेट पर निर्भर हैं एक अनुमान के मुताबिक अगर दुनिया में इंटरनेट से 1 घंटे के लिए बंद हो जाए तो दुनिया की आर्थिक व्यवस्था को 1 Tarbillion का नुकसान होगा और दुनिया तकरीबन 6 दिन पीछे हो जाएगी ।

दोस्तों आप को हमारा लेख History of Internet, Domain and Website in Hindi  कैसा लगा हमे कमेंट करके जरूर बताएं। 

Tuesday, 2 October 2018

Baba Harbhajan singh Real Story and History in Hindi - बाबा हरभजन सिंह

Baba Harbhajan singh Real Story and History in Hindi  बाबा हरभजन सिंह क्या कभी कोई सैनिक मृत्यु के पश्चात भी अपनी ड्यूटी कर सकता है ?

क्या किसी मृत सैनिक की आत्मा अपना कर्तव्य निभाते हुए देश की सीमा पर रक्षा कर सकती है ?

आप सबको यह सवाल अजीब लग रहा है आप सब कहते होंगे कि भला ऐसे कैसे हो सकता है । लेकिन सिक्कम में रहने वाले लोगों और वहां पर तैनात सैनिकों से अगर आप सवाल पूछेंगे तो वह कहेंगे जी हां ऐसा पिछले 45 सालों से लगातार हो रहा है । उन सब का मानना है कि पंजाब रेजीमेंट के जवान हरभजन सिंह की आत्मा पिछले 45 सालों से लगातार देश की सीमा पर रक्षा कर रही है । 

सैनिकों का कहना है कि आत्मा चीन की तरफ से होने वाले किसी भी हमले के बारे में उन्हें बता देती है और यदि भारतीय सैनिकों को चीन के सैनिकों का कोई भी मूवमेंट पसंद नहीं आता है तो उसके बारे में और चीन के सैनिकों को भी पहले ही बता देते हैं ताकि बात ज्यादा नहीं बिगड़े और मिलजुलकर बातचीत से उसका हल निकल जाए ।
Baba Harbhajan singh Real Story and History in Hindi - बाबा हरभजन सिंह

आप चाहे इस पर यकीन करें या ना करें पर खुद चीनी सैनिक भी इस पर विश्वास करते हैं इसलिए भारत और चीन के बीच होने वाली हर फ्लैग मीटिंग में हरभजन सिंह के नाम की या खाली कुर्सी लगाई जाती है ताकि वह मीटिंग अटेंड कर सके ।

Baba Harbhajan singh Real Story and History in Hindi - बाबा हरभजन सिंह 

हरभजन सिंह का जन्म 30 अगस्त 1946 को जिला गुजरावाला में जो कि वर्तमान पाकिस्तान में हुआ । हरभजन सिंह पंजाब रेजीमेंट के जवान थे जो कि 1966 में आर्मी में भर्ती हुए थे पर मात्र 2 साल की नौकरी करके 1968 में सिक्किम में एक दुर्घटना में मारे गए । एक दिन वह खच्चर पर बैठकर नदी पार कर रहे थे तो खच्चर सहित नदी में बह गए और काफी आगे निकल गए ।



  2 दिन की तलाशी के बाद जब उनका शव नहीं मिला तो वह एक साथ के सपने में आकर अपने शव की जगह बताई और सुबह वही से शव बरामद कर अंतिम संस्कार किया ।

हरभजन सिंह के इस चमत्कार के बाद साथी सैनिकों की उन में आस्था बड़ गई । उन्होंने उनके बंकर को एक मंदिर का रूप दे दिया । जब बाद में उनके चमत्कार बढ़ने लगे और विशाल जनसमूह की आस्था का केंद्र हो गए । तो उनके लिए एक मंदिर का निर्माण किया गया जो है बाबा हरभजन सिंह मंदिर । 

Baba Harbhajan singh Real Story and History in Hindi - बाबा हरभजन सिंह 

यह मंदिर 13000 फुट की ऊँचाई पर है । बंकर वाला मंदिर इस मंदिर से 1000 फिट ज्यादा ऊंचाई पर स्थित है । मंदिर के अंदर बाबा हरभजन सिंह की एक फोटो और उनका सामान रखा है । बाबा हरभजन सिंह अपनी मृत्यु के बाद से ही लगातार ड्यूटी दे रहे हैं इनके लिए बकायदा तन्खाह भी दी जाती है । उनकी भारतीय सेना में बकायदा एक रैंक है जिस को नियमानुसार उनका प्रमोशन भी किया जाता है ।

यहां तक कि उन्हें कुछ साल पहले तक 2 महीने की छुट्टी पर गांव भी भेजा जाता था । इसके लिए ट्रेन में सीट रिजर्व की जाती थी । 3 सैनिकों के साथ उनका सारा सामान उनके गांव भेजा जाता था तथा 2 महीने पूरे होने पर वापस सिक्कम लाया जाता था ।

जब हरभजन सिंह छुटी पर होते थे तो सारा बॉर्डर हाई अलर्ट पर रहता था । क्योंकि उस वक्त सैनिकों को बाबा की मदद नहीं मिल पाती थी लेकिन बाबा का सिक्किम से जाना और वापस आना एक धार्मिक आयोजन का रूप लेता जा रहा था । 

Baba Harbhajan singh Real Story and History in Hindi - बाबा हरभजन सिंह 

जिसमें की बड़ी संख्या में जनता इकट्ठी होने लगी कुछ लोग इस आयोजन को अंधविश्वास को बढ़ावा देने वाला मानते थे । इसलिए उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया । क्योंकि सेना में किसी भी प्रकार का अंधविश्वास की मनाही है लिहाजा सेना ने बाबा हरभजन को छुट्टी पर भेजना बंद कर दिया । अब बाबा साल के 12 महीने ड्यूटी देते हैं ।

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मंदिर में बाबा का एक कमरा भी है जिस में प्रतिदिन सफाई करके बिस्तर लगाया जाता है बाबा की सेना की वर्दी और जूते रखे जाते हैं । कहते हैं कि रोज उनके कमरे की सफाई करने पर उनके जूतों में कीचड़ और चादर में सरवटे पाई जाती है । बाबा हरभजन सिंह का मंदिर सेनिको और लोगों की आस्था का केंद्र है ।
Baba Harbhajan singh Real Story and History in Hindi - बाबा हरभजन सिंह



इस इलाके में आने वाला हर नया सैनिक सबसे पहले बाबा की धूप लगाने आता है । इस मंदिर को लेकर यहां के लोगों में एक अजीब सी मान्यता यह भी है इस मंदिर में पानी से भर कर पानी की बोतलें रखी जाती हैं कहा जाता है कि उस पानी में चमत्कारिक औषधीय गुण आ जाते हैं । 

इस पानी को पीने से लोगों के रोग मिट जाते हैं । इसलिए इस मंदिर के नाम पर बोतलों का अंबार लगा रहता है । यह पानी 21 दिन के अंदर प्रयोग में लाया जाता है और इस दौरान मांसाहार व शराब करना निषेध होता है ।

दोस्तो यह थी बाबा हरभजन सिंह की रहस्यमयी कहानी । आप को हमारा लेख कैसा लगा हमे कमेंट करके जरूर बताएं ।

Saturday, 29 September 2018

Conman Natwarlaal Biography | History | Real Story in Hindi - ठग नटवरलाल की जीवनी

Conman Natwarlaal Biography | History | Real Story in Hindi - ठग नटवरलाल की जीवनी :  मिथिलेश कुमार श्रीवास्तव एक ऐसा नाम है जिस नाम को सुनकर आपको शायद कोई चेहरा याद नहीं आ रहा होगा लेकिन वहीं अगर नटवरलाल नाम लिया जाए तो आप लगभग मुहावरा बन चुके इस नाम को कभी भूल ही नहीं पाए होंगे । 
Conman Natwarlaal Biography | History | Real Story in Hindi - ठग नटवरलाल की जीवनी

अपनी संगीन और चालाकी भरी ठगी से एक समय काफी मशहूर नटवरलाल को ढूंढने के लिए भारत की पुलिस ने एड़ी से चोटी तक की ताकत लगा दी थी । लेकिन यह ठग जितनी रहस्यमई तरीके से हिरासत में लिया जाता था उतने ही नाटकीय तरीके से फरार भी हो जाया करता और जो सबसे ज्यादा हैरान कर देने वाली बात तो यह है कि यह भारत का एकमात्र ऐसा ठग था जिस ने ठगी के लिए न तो कभी किसी हथ्यार का इस्तेमाल किया और ना ही किसी से पैसे छीने ।




नटवरलाल सिर्फ और सिर्फ अपनी बातों के तीर चलाता और सामने वाला इंसान खुद फंस जाता । तो चलिए दोस्तो आज हम जानते हैं नटवरलाल की कहानी ।

History of Natwarlaal 


तो इस कहानी की शुरुआत होती है 1912 में जब बिहार के एक छोटे से गांव मंगरा में नटवरलाल का जन्म हुआ । बताया जाता है कि नटवरलाल का बचपन से ही पढ़ाई में ज्यादा मन नहीं लगता था लेकिन खेल में वह सब से आगे थे । अपने स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद उस ने  वकालत में डिग्री हासिल की और वकील बन गया ।

 वकालत की पढ़ाई का इस्तेमाल उस ने ठगी के काम के लिए किया और वह अपनी चालसाजी और ठगी को अंजाम देने के लिए नोबेल की कहानियों से आइडिय लिया करता था ।  हर बार नटवरलाल अपने अनोखे अंदाज और अलग-अलग नाम और पहचान के साथ ठगी करता और यही वजह थी के लोग उसे पकड़ने में नाकाम रहते ।

बताया जाता है कि उसके शिकार में ज्यादातर तो मिडल क्लास के सरकारी कर्मचारी होते थे । जा छोटे शहर के पैसे वाले व्यापारी जिनसे नटवरलाल ताजमहल वेचने तक का सौदा कर लेता था और यह तो छोटे शहर के व्यापारियों से तीन बार ताजमहल बेचने में भी सफल हो गया था ।


Conman Natwarlaal Biography | History | Real Story in Hindi - ठग नटवरलाल की जीवनी


 इसके अलावा उसने राष्ट्रपति भवन और संसद भवन को भी नीलाम कर दिया था । कहतें हैं कि नटवरलाल ने अपने जीवन काल में  52 से ज्यादा नामों का इस्तेमाल करके अरबों खरबों रुपए की ठगी को अंजाम दिया । 

यहां तक कि अपनी गजब की कमेंसिंग पावर और खुद पर अटूट विश्वास की वजह उस ने सरकार को यह दावा किया था कि अगर सरकार उसे आगिआ दे तो वो भारत का सारा विदेशी कर्ज़ उतार सकता है ।

आपको यह जानकर हैरानी होगी कि नटवरलाल ने खुद का एक स्कूल सिर्फ इसलिए खोला था ताकि वह बच्चों के घर का फाइनेंसियल कंडीशन जान सके और फिर आमिर घरों से लाखों रुपए ठग कर फरार हो गया था ।

इसके अलावा नटवरलाल शॉर्ट सिगनेचर करने में भी बहुत ही माहिर था वह अपने टैलेंट की वजह से देश के नामी व्यापारियों को अपना निशाना बनाते जिस में  टाटा, बिरला, धीरूभाई अंबानी को भी अपना निशाना बना चुका था और उसने बहुत सारे लोगो को जाली चेक और ड्राफ्ट दे कर लाखों की ठग्गी कर गया था ।
Conman Natwarlaal Biography | History | Real Story in Hindi - ठग नटवरलाल की जीवनी
नटवरलाल दुवारा दिया गया एक चेक 



नटवरलाल100 से भी ज्यादा मामलों में दोषी पाया गया था । जिसकी वजह से 8 राज्यों की पुलिस उसे पूरी शिद्दत के साथ ढूंढ रही थी । नटवरलाल को उसके ठगी के लिए 113 साल की सजा सुनाई गई लेकिन उस ने सिर्फ 20 साल ही जेल की हवा खाई ।

Conman Natwarlaal Biography | History | Real Story in Hindi - ठग नटवरलाल की जीवनी

वह 9 बार गिरफ्तार किया गया था लेकिन कैसे भी करके हर बार नए नए तरीके से वह फरार हो जाता और उसके फरार हो जाने की वजह से कई सारे सिपाही और थानेदार भी निलंबित किए गए थे । आखिरी वार वह 1996 में ग्रिफ्तार किया गया था । उस वक़्त उस की उम्र 84 साल थी लेकिन इस उम्र में भी वोह पुलिस की गरिफ्त से भागने में सफल रहा ।

नटवरलाल ने अपने किसी भी काम को लेकर कभी शर्मिंदगी महसूस नही की । वह कहता था कि वो लोगो से कभी हथ्यार दखा कर पैसे नही लेता । उस का कहना था कि " मैं लूट कर गरीबों को देता हूं और मैंने कभी भी किसी हथियार का इस्तेमाल भी नहीं किया है ।

Conman Natwarlaal Biography | History | Real Story in Hindi - ठग नटवरलाल की जीवनी


 लोगों से बहाने बनाकर पैसे मांगे और लोग हाथ जोड़कर पैसे देते गए" और ऐसे अपराधों को अंजाम देने के बावजूद नटवरलाल के फैन्स की कमी नहीं थी ।
Conman Natwarlaal Biography | History | Real Story in Hindi - ठग नटवरलाल की जीवनी
नटवरलाल हिरासत के वक़्त 



यहां तक कि बिहार में उसके गांव के लोगों की मांग थी के नटवरलाल नाम का एक समार्ग बनना चाहिए ।  लोगों का मानना था कि भला आदमी था वह गरीबो की मदद करता था । नटवरलाल की मृत्यु को लेकर अभी भी असमंजस है।
  नटवरलाल के भाई गंगा प्रसाद श्रीवास्तव का कहना है कि 1996 में उन्होंने नटवरलाल का अंतिम संस्कार कर दिया था लेकिन उनके वकील बताते हैं कि 25 जुलाई 2009 को उनकी मृत्यु हुई और इसीलिए उन्होंने 2009 में ही कोर्ट में अनुरोध किया कि नटवरलाल के खिलाफ लगे  सभी अपराधों को खत्म कर देना चाहिए ।

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Monday, 17 September 2018

Real Story and History Thugs of Hindostan in hindi

Real Story and History Thugs of Hindostan in hindi : ठग एक ऐसा शब्द है जिसे इतिहास के पन्नों में लिखा तो गया लेकिन इसे सिर्फ और सिर्फ इतिहास बना कर भुलाया नहीं जा सका बल्कि समय-समय पर इस की बहुत सारी चर्चाएं भी होती रही और इन मे से ही एक चर्चित कहानी पर व्यस्त है आमिर खान की आने वाली फिल्म ठग्स ऑफ हिंदुस्तान । यह फिल्म असल मे  1839 में Philip Meadows Taylor के द्वारा लिखी गई  नवल Confession of a Thug पर आधारित है
Real Story and History Thugs of Hindostan in hindi


। जहां भारत और ब्रिटेन के कलचर की स्टोरी को बताया गया है और दोस्तों यह नॉवल पब्लिश होने के बाद से इतनी ज्यादा पॉपुलर हुई के इससे 19वीं शताब्दी क्या बेस्ट सेलिंग बुक का टाइटल दिया गया और रानी विक्टोरिया भी इस बुक की रीडर बनी ।

ठग कौन थे और क्या करते थे ? 


दरअसल ठग शब्द एक समय पर प्रोफेशनल चोरों और हत्यारों के लिए यूज किया जाता था जो कि पूरे भारत में कई सालों तक एक जगह से दूसरे जगह घूम घूम कर चोरी करते थे और खास करके वह अंग्रेजों और व्यापारियों को अपना निशाना बनाते थे और कहा जाता है कि जब अंग्रेजों से हमारे देश के राजा महाराजा भी हार मान चुके थे । तो इन्ही ठगों ने अंग्रेजों के नाक में दम कर रखा था । इन का मर्डर करने का तरीका भी बहुत ही अजीब था ।


Real Story and History Thugs of Hindostan in hindi


मर्डर करने के लिए यह एक रुमाल का इस्तेमाल करते थे जिसके दोनों सिरों पर एक एक सिक्का बन्ध रहता था और इसी रुमाल से वह  मुसाफिरों को मौत की नींद सुला देता थे ।
पहले तो यह ठग मुसाफिरों का विश्वास जीतते थे और फिर उसे यह पता लगा लेते थे कि उनके पास कितना पैसा और कितना कीमती सामान है और सही समय का इंतजार करते थे । जिस के बाद से वोह उन की हत्या करके उनका सारा पैसा और सामान लूट लिया करते थे और फिर लूट और हत्या के बाद इन लाशों को दफना दिया जाता था और इस तरह से कोई भी सुराग जमीन के अंदर ही दफन हो जाता औरअंग्रेजी हुकूमतों को यह भी नहीं पता चल पाता था कि आखिरकार उनके व्यापारी गायब कहां हो गए ।

ठगों से कैसे छुटकारा पाया गया ?


इन खतरनाक ठगों से बचने के लिए एक वार तो ईस्ट इंडिया कम्पनी ने यह फरमान जारी कर दिया था कि कोई भी व्यपारी एकेला किसी सफर पर नही निकलेगा।
अगर कोई जाएगा भी तो सिर्फ गरूपों में ।
इस के बावजूद भी ठगों ने हार नहीं मानी और अब तो यह पूरे ग्रुप को ही गायब कर दिया करते थे
जब अंग्रेजों ने अपने सभी हथकंडे अपना लिए तो ठगों का पता लगाने के लिए अंग्रेजो ने Wiliam Henery Sleeman को भारत बुलाया । जो के अपनी बहादरी और चालाकी के लिए जाने जाते थे । साथ ही वह  हिंदी उर्दू और अलग-अलग कई तरह की भाषाओं की नॉलेज भी रखता था । जिसकी वजह से कोई भी अपराधी उन  से बचके नहीं निकल पाता था । विलियम को अपने शुरुआती जांच में ही यह पता चला कि लोगों के गायब होने के पीछे ठगों का पूरा गिरोह काम कर रहा है ।


बहराम ठगों का नेता : 


दोस्तों अभी तक जो ठगी होती आ रही थी उन सब ठगों का मेन लीडर ठग बहराम । जिसे कि उस टाइम के लोग Kings of thugs के नाम से भी जानते थे । बहराम ठग उस समय नार्थ इंडिया की औंध स्टेट में एक्टिव रहता था। उसके बारे में बताया जाता है कि उसने अकेले ही 1000 से ऊपर मर्डर किए थे और इसीलिए आज भी बहराम को दुनिया की सीरियल किलर में से एक माना जाता है।



Thug behram

लेकिन वोह कहते हैं कि बुराई का अंत तो बुरा ही होता है भले ही यह ठग खास करके अंग्रेजों को अपना शिकार बनाते थे जिन्होंने हमारे भारत पर कई सालों तक राज किया और हमें गुलाम बनाकर रखा लेकिन एक सही सोच रखने वालों के लिए यह हमेशा ही गलत था ।


Real Story and History Thugs of Hindostan in hindi


आखिर में विलियम अपने सिपाहियो के साथ मिल कर ठग बहराम को पकड़ लिया और 1845 को ठग बहराम को बीच सड़क पर फांसी पर लटका दिया गया। उस की मौत के बाद यह गिरोह थोड़े ही समय मे खत्म हो गया। कहा जाता है कि अमीर खान की आने वाली फिल्म Thugs Of Hindosatan इसी कहानी पर आधारित है । आप को हमारा लेख कैसा लगा हमे कमेंट करके जरूर बताएं ।

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Monday, 20 August 2018

Why Dwayne The Rock dvided money (रॉक पैसे क्यों बांट रहा है , क्या है इस का सच ?)

दोस्तों हमारी तरह आपने भी Facebook पर जॉनसन रॉक कि कई फोटोस और वीडियो देखी होगी जिसमें द रॉक ढ़ेरों पैसे बाटते नज़र आ रहे हैं। इस के लिए बोला यह जाता है कि आप फ़ोटो और वीडियो को लाइक और शेयर करे साथ ही कमेंट करने को बोला जाता है। 

जिस के बाद कुछ Lucky Winners को पैसे दिए जाते हैं और कुछ वीडियो में तो The Rock को गाड़ियों को गिफ्ट देते हुए भी दिखाया गया है।
The Rock

मज़ाक ही मज़ाक में इन फोटोज और वीडियो पर हजारों लाखों की गिनती में लाइक और कमेंट हो जाते हैं। आखिर क्या है इस के पीछे का सच आइए जानते हैं।

rock money


जब हम ने इस पर पड़ताल शुरू की तो हमे पहली Facebook Id  Dwahayne Jhonshone के नाम से मिली , पहली बात तो यह स्पेलिंग गलत हैं। दूसरा जब हम ने इस का url चेक किया तो वोह भी गलत था।

rock dvided money


असल में यह एक फेक Facebook अकाउंट था जोके जॉनसन रोक के नाम पर बना था ।

दोस्तो लोगो को बुधु बनाने का काम सिर्फ हमारे देश मे ही नही चलता बल्कि बड़े बड़े देशों में भी यह काम खूब चलता है। इस के कुछ दिन बाद हमे एक एकाउंट और मिला जो के जॉनसन रॉक के नाम पर ही था और इस मे भी वही माज़रा था। तो हम में इस कि भी पड़ताल की।

rock

इस बार यह एकाउंट Dwayne J के नाम पर था। हालहि में रॉक की एक मूवी आई थी जिस का पोस्टर इन लोगो ने अपने कवर पेज पर लगाया था।

 तो हम ने इस का url चेक किया तो यह Mohammad jonet के नाम पर था। जिस से यह प्रूव हो गया कि यह एकाउंट भी फेक है।

money diveded truth

अगर हम रॉक के असली पेज पर जाए जो के फेसबुक के दुवारा एप्रूव्ड है तो उस पर आप को कोई ऐसी वीडियो जा फ़ोटो नही मिलेगी जिस में रॉक किसी को भी ककी पैसे जा गाड़ी का लालच देते नजर आए।

ऐसा क्यों करते हैं लोग , इस से क्या फायदा होता है



आप में से बहुत लोगों के दिमाग में यह बात आ रही होगी के कुछ लोग आखिर ऐसा क्यों करते हैं उनको इससे क्या फायदा होता है हम आपको बताते हैं इसके पीछे का सच लोग Facebook पर ऐसे पेज बनाकर उन पेज पर सिर्फ लाइक इकट्ठा करते हैं ।

जिसके बाद वह online earning websites पर जा कर जिस में freelecncer जा fiver जैसी वेबसाइट हैं उन पर अपने पेज का लिंक डालते हैं। पेज पर इतने लाइक्स देख कर कुछ लोग जा कम्पनियां अपने प्रोडक्ट की ऐड उस पेज पर देने के लिए तैयार हो जाती हैं।

अगर किसी कम्पनी को अपने प्रोडक्ट की ऐड देनी है तो वो इन से सम्पर्क करती हैं।
जिस के बाद यह लोग उन से पैसे ले कर उन की वेबसाइट का लिंक जा फिर सीधा प्रोडक्ट की ऐड अपने पेज पर देते हैं।

इस के इलावा कुछ लोगो आपनी वेबसाइट को गूगल के पहले पेज पर लाना चाहते हैं तो वोह लोग थोड़े पैसे दे कर अपने किसी वेबसाइट का लिंक उस पेज पर छोड़ देते हैं। जिस को देख कर कुछ लोग उस लिंक पर क्लिक करते हैं और सीधा उस ऐड देने वाले आदमी की वेबसाइट पर पहुंच जाते है।

ऐसे ही सेंकडो की गिनती में लोग वहां चले जाते हैं जिस से गूगल को लगता है कि इस वेबसाइट पर कोई अच्छा कंटेंट है । इस लिए गूगल उस को अपने सर्च में पहले पेज पर दिखाना शुरू कर देता है।


हमें उम्मीद है दोस्तों कि आपको यह सारा माजरा समझ में आ गया होगा आगे से ऐसी जानकारी से जुड़े आर्टिकल पढ़ने के लिए हमारा Facebook पेज जरूर लाइक करें।

Friday, 10 August 2018

What is Z Plus Z, X and Y Security in Hindi

What is Z Plus  Z, X and Y Security in Hindi : आपने अक्सर TV पर यह सुना होगा कि किसी भी VVIP और VIP को Z या फिर Z Plus सिक्योरिटी दे दी गई है या किसी से यह सिक्योरटी छीन लई गई है। सिर्फ Z Plus ही नही X, Y और Z सिक्योरटी के बारे में भी सुना होगा।इन सब के इलावा SPG नाम की एक सुरक्षा श्रेणी और होती है जो सिर्फ देश के प्रधान मंत्री और उन के परिवार की सुरक्षा के लिए होती है। 
 आज हम इसी विषय पर बात करने वाले हैं , हम आप को बताएंगे के किस VVIP और VIP को किस श्रेणी की सिक्योरटी दी जाती है । इन श्रेणियो में कितने जवान होते हैं और इन का साल का खर्च कितना होता है।
What is Z Plus  Z, X and Y Security in Hindi



X, Y, Z, and Z Plus Security Holder:

यह सिक्योरिटी  उन लोगों को दी जाती है जिनकी जान को लगातार खतरा बना रहता है और जिनकी जान चले जाने से देश में अमन कानून की स्थिति बिगड़ सकती है और दंगा फसाद हो सकता इनमें से कुछ लोगों सूची इस प्रकार है।

The President

The Prime Minister

Chief Ministers

Union Ministers

MPs

MLAs

bureaucrats

Former Bureaucrats

Judges

Former Judges

Businessmans

Cricketers

Film Stars

Saints 


What is Z Plus  Z, X and Y Security in Hindi

जब भी किसी VIP को लगता है कि उसकी जान को खतरा है और उसे सिक्योरिटी लेनी है तो वह अपने पास के किसी पुलिस स्टेशन में एक एप्लीकेशन देता है। 
जिसको पुलिस स्टेशन के अधिकारी आगे इंटेलिजेंस ब्यूरो को सौंप देते हैं उसके बाद इंटेलिजेंस एजेंसी उस व्यक्ति की पूरी पड़ताल करती हैं कि इस व्यक्ति की जान को वाक्य में ही खतरा है अगर है तू किन लोगों से है। 

जिसके बाद इंटेलिजेंस एजेंसी की कमेटी उस राज्य के Home Secretary और Director General को उस व्यक्ति की सिक्योरिटी के लिए सिफारिश करती है. VIP को एक बार अपनी एप्लीकेशन को यूनियन होम मिनिस्टर से अप्रूवल करवाना पड़ता है जिसके बाद उसे सिक्योरिटी दी जाती है और वह सिक्योरिटी भी इंटेलिजेंस एजेंसी  तय करती है कि उस व्यक्ति को किस श्रेणी की सिक्योरिटी दी जानी चाहिए।

What is SPG Security? 


Special Protection Group इसका गठन 1988 को प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद किया गया। यह सिक्योरिटी ग्रुप प्रधानमंत्री और उनके परिवार की सुरक्षा के लिए होता है इसमें NSG, CRPF और ITBP के जवान होते हैं।

What is X Security ?

इस सिक्योरिटी श्रेणी में सिर्फ एक Armad Force का जवान और एक पुलिस का जवान होता है इसमें कमांडो का कोई जवान नहीं होता हमारे देश में मंत्रिमंडल के सभी नेताओं को अपना पद संभालते ही यह सिक्योरिटी मिल जाती है।
 इसके अलावा अगर किसी दूसरे व्यक्ति को मुझे सिक्योरिटी चाहिए तो उसे हमारे देश के इंटेलिजेंस ब्यूरो से अपने एप्लीकेशन को अप्रूव करवाना पड़ता है।

What is Y Security ?

अब बात करते हैं Y  सिक्योरिटी के बारे में इस सिक्योरिटी में 11 लोग होते हैं। इसमें दो कमांडो के ऑफिसर दो सिक्योरिटी ऑफिसर और इसके अलावा ITBP और CRPF पुलिस के जवान होते हैं।

What is Z Security ?

इस सिक्योरिटी ग्रुप में कुल 22 लोग होते हैं जिनमें से चार या पांच Commando के ऑफिसर होते हैं इनके अलावा बाकी NSG, ITBP, CRPF के पुलिस के जवान होते हैं इनके अलावा इनको एक एस्कॉर्ट कार भी मुहिया करवाई जाती है।
इन जवानों के पास एके-47 राइफल होती है।

What is Z Plus Security ?

Z Plus Security में  टोटल 36 लोगों का सुरक्षा घेरा होता है जिसमें से 10 कमांडो और दूसरे ITBP CRPF और पुलिस के सबसे बेहतरीन काम करने वाले ऑफिसर होते हैं।
 इन के पास MP 5 Submachine Gun होती है जो देखते ही देखते दुश्मन की धज्जियां उड़ा देती है।

 इनके पास जो भी दूसरा समान होता है सब मे  GPS लगा होता है त जो मुश्किल के समय इन से सम्पर्क हो सके।
 इसके अलावा के अलावा इसमें शामिल किए जाने वाले सभी जवान मार्शल आर्ट में भी Expert होते हैं।
भारत में लगभग 17 लोगों के पास जेड प्लस सिक्योरिटी है।




How Much Money Spent per Month on these Security?
इन सुरक्षा श्रेणिओ पर हर महीने कितना खर्च आता है ?


इनमें से सबसे ज्यादा खर्च जेड प्लस सिक्योरिटी पर होता है जेड प्लस सिक्योरिटी का 1 महीने का खर्चा लगभग 25 लाख  रुपए है।

Z Security का एक महीने का खर्च लगपग 20 लाख है।

Y Security पर हर महीने 10 लाख और X  सिक्योरिटी पर  7 लाख रुपए खर्च आते हैं।

दोस्तों हमें उम्मीद है कि आप को हमारे देश में VIP लोगों को दी जाने वाली सभी सुरक्षा श्रेणियां के बारे में पूरी जानकारी मिल गई होगी अगर आप आगे से ऐसे ही आर्टिकल पढ़ना चाहते हैं तो हमारे फेसबुक पेज को जरूर लाइक करें हम जब भी कोई नई पोस्ट अपलोड करते हैं तो उसका लिंक आप को वहां मिल जाएगा।