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Sunday, 17 February 2019

Kashmir Crisis / Issue in Hindi - कश्मीर की समस्या क्या है ।

Kashmir Crisis / Issue in Hindi - कश्मीर की समस्या क्या है । 


दोस्तों जैसे कि हाल ही में कश्मीर में हालत काफी खराब हो चुकी है । वहां पर आए दिन आतंकवादियों और भारतीय सेना के बीच झड़प होती रहती है जिसने आज तक काफी सैनिकों की जान चली गई है आज हम आपको पूरे मसले के बारे में बताएंगे के आखर कश्मीर में ऐसे हालात क्यों बने इसके पीछे की हिस्ट्री क्या है और अब तक इस मसले को सुलझाने के लिए कितने बार कोशिशें हो चुकी हैं ।
Kashmir Crisis / Issue in Hindi - कश्मीर की समस्या क्या है ।

History Of Kashmir


सबसे पहले कश्मीर मौर्य सल्तनत का हिस्सा हुआ करता था उसके बाद 5 से लेकर 14वीं सदी तक जहां पर अलग-अलग हिंदू राजाओं का राज रहा 14वी सदी से लेकर 16 वीं सदी तक इस्लाम कश्मीर में आया कश्मीर की काफी पापुलेशन ने इस्लाम को अपना लिया जहां तक के उस वक्त 77 प्रतिशत कश्मीरी लोगों ने इस्लाम को अपना लिया जिसके बाद वहां के राजा ने इस्लाम कबूल लिया ।


सन 1586 मैं कश्मीर पर मुगलों ने हमला कर दिया और इसे अपने सल्तनत का हिस्सा बना लिया ।

1751 को अहमदशाह अब्दाली ने कश्मीर पर हमला कर दिया और इसी अपने नेतृत्व कर लिया जिसके बाद 1751 से लेकर 1819 तक कश्मीर में अफगानों का राज रहा ।

1819 में महाराजा रंजीत सिंह ने कश्मीर पर हमला कर इसे जीत लिया ।

1846 में पहले एंग्लो युद्ध में अंग्रेजो ने सिखों को हरा दिया और कश्मीर पर अपना कब्ज़ा कर लिया । उस वक़्त महाराजा गुलाब सिंह डोगरा कश्मीर का राजा बना । जिस के लिए उस ने अंग्रेजो को 70 लाख रुपए भी दिए ।

Starting of Kashmir Conflict


जब 1947 में भारत आज़ाद हुआ अंग्रेजो ने भारत को छोड़ा तब कश्मीर में महाराजा हरि सिंह का राज था । महाराजा हरि सिंह ने उस वक़्त अकेले रहने का फैसला किया । वह कश्मीर को भारत का स्विज़तरलैंड देखना चाहते थे । उनोह ने ना तो भारत और ना ही पाकिस्तान के साथ जाने का फैसला किया ।


Sheikh Abdulla


इसी बीच सन 1931 से National Confarenece Party सत्ता में आई । जिसके लीडर शेख अब्दुल्लाह थे । यह पार्टी कश्मीर में लोकतंत्र चाहती थी । इन का मानना था के कश्मीर में राजा को हटा कर चुनाव कराए जाए । इसी तरह भारत में भी कांग्रेस लोकतंत्र चाहती थी जिस के लिए कांग्रेस इन्हें पूरी मदद देती थी ।

Events Of 1997
1947 की घटनाएं


जब उनसे 47 में भारत और पाकिस्तान का विभाजन हुआ तो भारत में जितने भी मुस्लिम कम्युनिटी थी उन्हें पाकिस्तान भेज दिया गया इसी तरह से कश्मीर में 77% मुस्लिम कम्युनिटी थी जिसके कारण मोहम्मद अली जिन्ना कश्मीर को पाकिस्तान का हिस्सा मानता था लेकिन वहां का राजा अपना अलग देश बनाना चाहता था राजा हरि सिंह का कहना था कि वह भारत और पाकिस्तान व्यापार जारी रखेंगे सभी रोड खुले रहेंगे ।  इस के लिए उस ने पाकिस्तान के साथ एक कॉन्ट्रैक्ट किया । इसी तरह का कॉन्ट्रैक्ट वह भारत के साथ भी करने वाले थे लेकिन उसी वक़्त भारत में दंगे हो गए ।
Kashmir Crisis / Issue in Hindi - कश्मीर की समस्या क्या है ।


कश्मीर में पुंज के इलाके में महाराजा हरि सिंह की आर्मी में कुछ अंग्रेजी सैनिकों को मार डाला जो उस वक्त ब्रिटिश आर्मी के लिए काम करते थे । इस छोटी सी लड़ाई को हिंदू मुस्लिम दंगे कहकर पहला दिया गया और पाकिस्तान ने अपनी मुस्लिम की कम्यूनिटी की सहायता के लिए अपने लड़ाके कश्मीर में भेज दिए । उन लड़ाकों ने महाराजा हरि सिंह की फ़ौज पर हमला कर दिया । जिस के बाद महाराजा हरि सिंह ने भारत से मदद मांगी ।

भारत सरकार ने महाराजा हरि सिंह के साथ 26 ओकटुबेर 1947 को एक कांट्रैक्ट किया जिसमें महाराजा हरि सिंह ने यह कहा कि अगर भारत उनकी मदद करता है तो वह भारत के साथ मिलने को तैयार हैं । इस के बाद भारत सरकार ने अपनी फौज को कश्मीर की घाटी में उतारा और भारती आर्मी ने पाकिस्तान आर्मी को पीछे धकेल देते हुए कश्मीर को पाकिस्तान के कब्जे से छुड़ा लिया ।
Kashmir Crisis / Issue in Hindi - कश्मीर की समस्या क्या है ।

दूसरी तरफ पाकिस्तानी इस कॉन्ट्रैक्ट को पूरी तरह से गलत घोषित कर दिया उनका कहना था कि जो फैसला दबाव के चलते लिया गया है और यह फैसला एक ऐसे राजा के द्वारा लिया गया है जिस को कश्मीर के लोग भी नही मानते ।

Interfare Of United Nation


1948 में भारत और पाकिस्तान यूनाइटेड नेशन के पास कश्मीर मसले को लेकर गए इसके लिए यूनाइटेड नेशन ने एक मिशन बहाया जिसका नाम कमीशन ऑफ इंडिया एंड पाकिस्तान रखा । इस कमीशन ने भारत और पाकिस्तान का दौरा किया इसके अलावा उन्होंने कश्मीर में अलग-अलग जगह पर जाकर लोगों की राय भी ली जिस के बाद इनोह ने इस मसले के हल के लिए 3 रूल बनाए । यह रूल दोनो देशो की मर्ज़ी से लागू हो सकते थे ।


1 . पाकिस्तान को आपने लड़ाके कश्मीर से हटाने होंगे ।
2. भारत को अपनी फ़ौज कश्मीर से वापस बुलानी होगी । सिर्फ उतनी हो फ़ोर्स कश्मीर में रखी जाए जो law and order को मेंटेन रखे ।
3.  कश्मीर में लोगो से वोटिंग कराई जाए । जिस में वोह अगर पाकिस्तान में जाना चाहे जा भारत में रहने चाहे और अगर वो चाहे तो अपना अलग देश भी बना सकते हैं ।
  लेकिन इस के बाद पाकिस्तान ने अपनी फ़ौज कश्मीर से नही हटाई और ना ही भारत ने अपनी फ़ौज को वहां से हटाया है । पाकिस्तान कहता है कि अगर हमने फौज हटाई तो भारत कश्मीर पर कब्जा कर लेगा और इसी तरह भारत कहता है कि अगर हमने पॉज कम की तो पाकिस्तान कश्मीर पर अटैक कर उस पर कब्जा कर लेगा तब से लेकर अब तक दोनों देशों के बीच कश्मीर को लेकर इसी तरह से खींचातानी चल रही है ।

Militancy in 1990


1987 मैं कश्मीर की सरकार को लेकर वहां पर चुनाव कराए गए जिसमें शेख अब्दुल्लाह की पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस मुख्य तौर पर भूमिका निभा रही थी और वही नेशनल कांग्रेस पार्टी को भारतीय कांग्रेस का भी समर्थन था जिसके चलते चुनाव में बहुत बड़े स्तर पर धांधली की गई और नेशनल कॉन्फ्रेंस पार्टी बहुत बड़े फर्क के साथ जीत गई जिसके बाद कश्मीर में कहीं जगह पर हड़ताल रोष धरने भी हुए लेकिन थोड़े ही समय के बाद यह हड़ताल और धरने दंगों का रूप ले गए और बहुत सारी जगह पर जानी और माली नुकसान हुआ । पाकिस्तान ने इस बात का पूरा फायदा उठाया और उन्होंने आपने Jammu Kashmir Leberation Front उर Hizb Ul Mujahbdeen जैसे आंतकवादी संगठनों को कश्मीर में भेज दिया और इस मसले को कश्मीर की आजादी के साथ जोड़ दिया । उनका कहना था कि भारत सरकार हमारे साथ भेदभाव कर रही है और हमें आजाद कश्मीर लेना है जिसक तहत वोह जवान लड़कों को loc कि इस पार भेज कर ट्रेनिंग देते ।
Kashmir Crisis / Issue in Hindi - कश्मीर की समस्या क्या है ।

Some Other Fact About Kashmir Issue
कश्मीर समस्या से जुड़े कुछ और तथ्य



  • सन 1948 में दोनों देशों के बीच समझौता हुआ जिसके तहत जब तक कश्मीर का कोई पक्का हल नहीं हो जाता तब तक दोनों देश गोलीबारी बंद करते हैं और 1948 में ही LOC को दोनों देशों का बॉर्डर मान लिया गया । हालांकि जय इंटरनेशनल बॉर्डर नहीं कहलाती लेकिन जब तक कश्मीर मसले को लेकर कोई समझौता नहीं हो जाता तब तक एलओसी लाइन बॉर्डर का काम करेगी ।



  • 1962 में जब भारत कि चीन के साथ लड़ाई लगी उसके बाद चीन ने भारत के बहुत बड़े एरिया पर कब्जा कर लिया इसी तरह 1965 में पाकिस्तानी कश्मीर का एक बहुत बड़ा हिस्सा जिसका नाम शक्सगम वैली था चीन को गिफ्ट कर दिया इसी तरह से अगर आज कोई कश्मीर को लेकर समझौता होता है तो उस में चीन भी शामिल होगा क्योंकि कश्मीर पर चीन का भी कब्जा हो चुका है ।




  • सन 1984 में भारत में पाकिस्तान और चीन पर निगरानी रखने के लिए सियाचिन ग्लेशियर पर भारतीय रोज को भेजा आज से पहले इस ग्लेशियर पर कोई नहीं पहुंच पाया था और अब यह स्थान दुनिया का सबसे ऊंचाई वाला बैटलफील्ड है ।



  • 1990 में कश्मीर घाटी में जो पंडित रहते थे उन्हें वहां से भगा दिया गया । यह कश्मीरी पंडित वहां पर सभी अच्छी नौकरी पर तैनात थे लेकिन जब 1987 की चुनाव के बाद शेख अब्दुल्लाह की सरकार बनी तब से वहां पर बहुत बड़ी मात्रा में दंगे होने शुरू हो गए जिसके चलते शेख अब्दुल्ला की सरकार को रिजाइन देना पड़ा जिसके बाद कश्मीरी पंडितों को वहां के आतंकवादी संगठनों ने निशाना बनाया कई कश्मीरी पंडितों को मार डाला गया और दूसरों को वहां से बाहर जाने के लिए कहां गया इसी तरह 19 और 20 जनवरी को लगभग 2.5 से 3 लाख कश्मीरी पंडितों ने कश्मीर वैली को छोड़ दिया और आज कश्मीरी पंडित कैंपों में रहते हैं वहां पर इनकी हालत बहुत खस्ता है कई बार कश्मीरी पंडितों को वापस कश्मीर में शिफ्ट करने की बात बोली गई है लेकिन अभी तक नहीं हो पाया है ।

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  • 1990 में कश्मीर में बहुत ज्यादा बैलेंस होने के कारण भारतीय सरकार ने सेना को AFSPA ( Armed Force Special Act ) का अधिकार दे दिया गया जिसके तहत भारतीय सेना के जवान कश्मीर में किसी वी घर में जाकर तलाशी कर सकते हैं और शक होने पर किसी पर भी गोली चला सकते हैं ।



  • 1990 से 2004 तक भारतीय फ़ौज ने कश्मीर में के ऑपरेशन चलाए जिस में काफी संख्या में अन्तकवादियो को मारा गया । जिस के बाद 2004 से कश्मीर में थोड़ी शांति हुई है ।


दोस्तो यह थी पूरी कश्मीर की कहानी हमे उम्मीद है आप को हमारा आर्टिकल अच्छा लगा होगा । आगे से हमारे आर्टिकल की जानकारी के लिए हमे फेसबुक पर फॉलो करें ।






Wednesday, 3 October 2018

History of Internet, Domain and Website in Hindi

History of Internet, Domain and Website in Hindi  आज के इस व्यापक और आधुनिक मायाजाल सामान Internet का मूल Cold War है । 1960 - 70 के दशक में Cold War अपने लेवल पर था और रशिया और अमेरिका दोनों देशों के सर पर परमाणु हमले की तलवार लटक रही थी । अगर परमाणु बम का हमला होता है तो इन हालत में निकलने वाले विकिरण के कारण संदेश का आदान-प्रदान ही खत्म हो जाएगा  और आप अपने ही देश के किसी सेना के डिवीजन को या नेता को कोई भी सीक्रेट संदेश नहीं भेज सकते ।

 इन सब खतरों को अमेरिका ने भी भांप लिया था इसलिए अमेरिका ने एक ऐसी कार्यप्रणाली बनाने की सोची जो अंडरग्राउंड केबल के द्वारा एक दूसरे से जोड़ती हो और कोई सन्देश आसानी से एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाया जा सके । और अमेरिका के राष्ट्रपति देश के किसी भी कोने के किसी भी बंकर में हो फिर भी उनको कांटेक्ट करके उनके डिसीजन को लागू किया जा सके ।
History of Internet, Domain and Website in Hindi
History of Internet, Domain and Website in Hindi 

History of Internet, Domain and Website in Hindi  


अमेरिका की सरकार की यह भी दरखास्त थी कि इसका कोई केंद्र ना हो । इसलिए एक ऐसी संचालित कार्यप्रणाली बनानी थी जिसे पावर ऑन करते ही देश के सारे कंप्यूटर एक दूसरे से जुड़ जाए और किसी एक कंप्यूटर के खराब होने पर पूरे नेटवर्क पर कोई असर न पड़े ।



History of Internet :
इंटरनेट का इतिहास 


आखिरकार ऐसे नेटवर्क को बनाने के लिए पेंटागन के ARPA यानी एडवांस रिसर्च प्रोजेक्ट एजेंसी को नियुक्त किया गया । ARPA और अमेरिकन सरकार ने मिलजुल कर एक ऐसे ही नेटवर्क का सर्जन किया जिसे शुरुआत में ARPNET कहा गया और अमेरिका के सभी खास कंप्यूटर्स को ARPANET से जोड़ दिया गया । साल 1990 आते-आते कोल्ड वर खत्म होने की कगार पर आ गया और उस वक्त परमाणु युद्ध होने के बाद भी हट चुके थे । इसलिए डिफेंस के लिए खोजी गई इस टेक्नोलॉजी को National Science Foundation को सौंप दिया गया और यह आधुनिक आविष्कार अब सार्वजनिक बन चुका था ।

History of Domain 
डोमेन का इतिहास 


जो 1990 आते-आते ARPNET की जगह INTERNET के नाम से जाना जाने लगा । अब तक INTERNET में कोई Website या Domain जैसी चीज नहीं थी क्योंकि 1990 तक एक कंप्यूटर को दूसरे कंप्यूटर से केबल के द्वारा जोड़ा जाता था । हमें कोई डाटा चाहिए तो डाटा किस कंप्यूटर में है उसका हमें पता होना चाहिए अगर हमें पता नहीं है के कौन सा डाटा किस कंप्यूटर में है तो हम उसे नहीं पा सकते इस तरीके से और ARPNET काम करता था ।



1984 में डॉक्टर जॉन पोस्टल Domain Registration बनाया जिसे आज हम .Com, .org, .in के नाम से जानते हैं । इसके जरिए से वेबसाइट बनाई जा सकती थी और इसके बाद वेबसाइट बनने लगी लेकिन वेबसाइट सिर्फ शहरों तक ही सीमित थी ।

History of World Wide Web (WWW)
डब्ल्यू डब्ल्यू डब्ल्यू का इतिहास 


लेकिन 1991 में Tim Berners-Lee नाम के वैज्ञानिक ने इस समस्या को हमेशा के लिए सुलझा दिया । जब उन्होंने w.w.w. यानी वर्ल्ड वाइड वेब की खोज की कुछ ही समय में डब्ल्यू डब्ल्यू डब्ल्यू इंटरनेशनल नेट बन गया और सारे डोमिन इसी नाम से रजिस्टर्ड होने लगे।
History of Internet, Domain and Website in Hindi
Tim Berners-Lee

History of Wi Fi 
वाई फाई का इतिहास 


1991 के बाद इंटरनेट पर कोई भी चीज छुपी नहीं रही । इंटरनेट की कामयाबी की तरफ 1995 में इंटरनेट स्पीड 28.8 kbps थी और उस समय इंटरनेट यूज करने वालों की तादात लगभग एक करोड़ साठ लाख थी । एक अनुमान के मुताबिक उस समय दुनिया के 0.2% लोग इंटरनेट इस्तेमाल कर रहे थे लेकिन 22 साल बाद आज 2017 में इंटरनेट के एवरेज स्पीड 5.6 mbps है और दुनिया में तकरीबन 307 करोड लोग इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं ।

एक अनुमान के मुताबिक दुनिया के 40% लोग इंटरनेट से आपस में जुड़े हुए हैं और इन्हीं 22 सालों में इंटरनेट की स्पीड में 195% बढ़ोतरी हुई है ।

History of Internet, Domain and Website in Hindi 

1999 में Dr. John O'Sullivan ने 18 साल की उम्र में ही वायलेंस फर्टिलिटी नेटवर्क बनाया जिसे आज हम WiFi से जानते हैं । वॉइस ऑफलाइन नेटवर्क कनेक्शन में मोबाइल और कांटेक्ट में बदलकर इंटरनेट को बिना वॉइस शेयर करना संभव कर दिया । यह तो बस एक नेटवर्क की शुरुआत थी इंटरनेट की वजह से दुनिया में कहीं अविष्कारों ने जन्म लिया और कई खोजें की गई ।



Who is Owner of Internet 
इंटरनेट का असली मालिक कौन है


सच बात कहूं तो इसका कोई मालिक नहीं है इसे उपयोग करने वाले सब उसके मालिक है क्योंकि इंटरनेट का आविष्कार अमेरिका के पब्लिक सेक्टर में हुआ है । जिसमें अमेरिकन डिफेंस और रिसर्च यूनिवर्सिटी के पैसे लगे थे । अगर इसका आविष्कार कैसे प्राइवेट सेक्टर में किया होता तो कंपनियां अपने नाम की पेटर्न बनवाकर नफाखोरी शुरु कर देती । लेकिन पूंजीवादी देश की सरकार या सरकार के दुवारा चलने वाली यूनिवर्सिटी को बिजनेस में कोई दिलचस्पी नहीं होती । आगे भी FM Radio और TV की खोज सरकार के पैसों द्वारा की गई मगर बाद में इन खोजों को प्राइवेट व्रतों के लिए ट्रांसफर कर दिया गया ।

History of ISP ( Internet Service Provider )


परिणाम स्वरूप विश्व में कई सारे छोटे-छोटे इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर यानी आईएसपी शुरू हो गए जिन्होंने अपने लोकल नेटवर्क को वैश्विक इंटरनेट के साथ जोड़ दिया और इस तरह इंटरनेट की जाल पूरी दुनिया में फैल गई यह वही प्राइवेट सर्विस प्रोवाइडर है जो हमसे डाटा के लिए कुछ पैसे लेते हैं ।

Interesting Fact About Internet
इंटरनेट से जुड़े रोचक तथ 


पूरे विश्व के इंटरनेट का मायाजाल कितना बड़ा है इसका जवाब यह है कि हम कल्पना भी ना कर सके उतना बड़ा फिर भी अगर इसे आंकड़ों के द्वारा समझ ना हो तो आप यह जान लो के समुंदर के तल में कुल 8 लाख किलोमीटर लंबे fiver Optical Cable विशे हुए हैं और जमीन में लाखों किलोमीटर विशे केवल अलग ।

जिनमें से हर क्षण डाटा का वाहन होता है जिससे दुनिया के लोग अपने पर्सनल कंप्यूटर से या पर्सनल मोबाइल से इंटरनेट के साथ जुड़े हुए रहते हैं । गूगल के अनुसार उसके डेटाबेस में एक हजार अरब से भी ज्यादा वेबपेज है और हर रोज उनकी संख्या बढ़ रही है। विश्व में आज प्रति मिनिट 500000 से भी ज्यादा वेबपेज बन रहे हैं ।
आज दुनिया के बड़े-बड़े बिज़नस और फाइनेंशियल सिस्टम इंटरनेट पर निर्भर हैं एक अनुमान के मुताबिक अगर दुनिया में इंटरनेट से 1 घंटे के लिए बंद हो जाए तो दुनिया की आर्थिक व्यवस्था को 1 Tarbillion का नुकसान होगा और दुनिया तकरीबन 6 दिन पीछे हो जाएगी ।

दोस्तों आप को हमारा लेख History of Internet, Domain and Website in Hindi  कैसा लगा हमे कमेंट करके जरूर बताएं। 

Tuesday, 2 October 2018

Baba Harbhajan singh Real Story and History in Hindi - बाबा हरभजन सिंह

Baba Harbhajan singh Real Story and History in Hindi  बाबा हरभजन सिंह क्या कभी कोई सैनिक मृत्यु के पश्चात भी अपनी ड्यूटी कर सकता है ?

क्या किसी मृत सैनिक की आत्मा अपना कर्तव्य निभाते हुए देश की सीमा पर रक्षा कर सकती है ?

आप सबको यह सवाल अजीब लग रहा है आप सब कहते होंगे कि भला ऐसे कैसे हो सकता है । लेकिन सिक्कम में रहने वाले लोगों और वहां पर तैनात सैनिकों से अगर आप सवाल पूछेंगे तो वह कहेंगे जी हां ऐसा पिछले 45 सालों से लगातार हो रहा है । उन सब का मानना है कि पंजाब रेजीमेंट के जवान हरभजन सिंह की आत्मा पिछले 45 सालों से लगातार देश की सीमा पर रक्षा कर रही है । 

सैनिकों का कहना है कि आत्मा चीन की तरफ से होने वाले किसी भी हमले के बारे में उन्हें बता देती है और यदि भारतीय सैनिकों को चीन के सैनिकों का कोई भी मूवमेंट पसंद नहीं आता है तो उसके बारे में और चीन के सैनिकों को भी पहले ही बता देते हैं ताकि बात ज्यादा नहीं बिगड़े और मिलजुलकर बातचीत से उसका हल निकल जाए ।
Baba Harbhajan singh Real Story and History in Hindi - बाबा हरभजन सिंह

आप चाहे इस पर यकीन करें या ना करें पर खुद चीनी सैनिक भी इस पर विश्वास करते हैं इसलिए भारत और चीन के बीच होने वाली हर फ्लैग मीटिंग में हरभजन सिंह के नाम की या खाली कुर्सी लगाई जाती है ताकि वह मीटिंग अटेंड कर सके ।

Baba Harbhajan singh Real Story and History in Hindi - बाबा हरभजन सिंह 

हरभजन सिंह का जन्म 30 अगस्त 1946 को जिला गुजरावाला में जो कि वर्तमान पाकिस्तान में हुआ । हरभजन सिंह पंजाब रेजीमेंट के जवान थे जो कि 1966 में आर्मी में भर्ती हुए थे पर मात्र 2 साल की नौकरी करके 1968 में सिक्किम में एक दुर्घटना में मारे गए । एक दिन वह खच्चर पर बैठकर नदी पार कर रहे थे तो खच्चर सहित नदी में बह गए और काफी आगे निकल गए ।



  2 दिन की तलाशी के बाद जब उनका शव नहीं मिला तो वह एक साथ के सपने में आकर अपने शव की जगह बताई और सुबह वही से शव बरामद कर अंतिम संस्कार किया ।

हरभजन सिंह के इस चमत्कार के बाद साथी सैनिकों की उन में आस्था बड़ गई । उन्होंने उनके बंकर को एक मंदिर का रूप दे दिया । जब बाद में उनके चमत्कार बढ़ने लगे और विशाल जनसमूह की आस्था का केंद्र हो गए । तो उनके लिए एक मंदिर का निर्माण किया गया जो है बाबा हरभजन सिंह मंदिर । 

Baba Harbhajan singh Real Story and History in Hindi - बाबा हरभजन सिंह 

यह मंदिर 13000 फुट की ऊँचाई पर है । बंकर वाला मंदिर इस मंदिर से 1000 फिट ज्यादा ऊंचाई पर स्थित है । मंदिर के अंदर बाबा हरभजन सिंह की एक फोटो और उनका सामान रखा है । बाबा हरभजन सिंह अपनी मृत्यु के बाद से ही लगातार ड्यूटी दे रहे हैं इनके लिए बकायदा तन्खाह भी दी जाती है । उनकी भारतीय सेना में बकायदा एक रैंक है जिस को नियमानुसार उनका प्रमोशन भी किया जाता है ।

यहां तक कि उन्हें कुछ साल पहले तक 2 महीने की छुट्टी पर गांव भी भेजा जाता था । इसके लिए ट्रेन में सीट रिजर्व की जाती थी । 3 सैनिकों के साथ उनका सारा सामान उनके गांव भेजा जाता था तथा 2 महीने पूरे होने पर वापस सिक्कम लाया जाता था ।

जब हरभजन सिंह छुटी पर होते थे तो सारा बॉर्डर हाई अलर्ट पर रहता था । क्योंकि उस वक्त सैनिकों को बाबा की मदद नहीं मिल पाती थी लेकिन बाबा का सिक्किम से जाना और वापस आना एक धार्मिक आयोजन का रूप लेता जा रहा था । 

Baba Harbhajan singh Real Story and History in Hindi - बाबा हरभजन सिंह 

जिसमें की बड़ी संख्या में जनता इकट्ठी होने लगी कुछ लोग इस आयोजन को अंधविश्वास को बढ़ावा देने वाला मानते थे । इसलिए उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया । क्योंकि सेना में किसी भी प्रकार का अंधविश्वास की मनाही है लिहाजा सेना ने बाबा हरभजन को छुट्टी पर भेजना बंद कर दिया । अब बाबा साल के 12 महीने ड्यूटी देते हैं ।

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मंदिर में बाबा का एक कमरा भी है जिस में प्रतिदिन सफाई करके बिस्तर लगाया जाता है बाबा की सेना की वर्दी और जूते रखे जाते हैं । कहते हैं कि रोज उनके कमरे की सफाई करने पर उनके जूतों में कीचड़ और चादर में सरवटे पाई जाती है । बाबा हरभजन सिंह का मंदिर सेनिको और लोगों की आस्था का केंद्र है ।
Baba Harbhajan singh Real Story and History in Hindi - बाबा हरभजन सिंह



इस इलाके में आने वाला हर नया सैनिक सबसे पहले बाबा की धूप लगाने आता है । इस मंदिर को लेकर यहां के लोगों में एक अजीब सी मान्यता यह भी है इस मंदिर में पानी से भर कर पानी की बोतलें रखी जाती हैं कहा जाता है कि उस पानी में चमत्कारिक औषधीय गुण आ जाते हैं । 

इस पानी को पीने से लोगों के रोग मिट जाते हैं । इसलिए इस मंदिर के नाम पर बोतलों का अंबार लगा रहता है । यह पानी 21 दिन के अंदर प्रयोग में लाया जाता है और इस दौरान मांसाहार व शराब करना निषेध होता है ।

दोस्तो यह थी बाबा हरभजन सिंह की रहस्यमयी कहानी । आप को हमारा लेख कैसा लगा हमे कमेंट करके जरूर बताएं ।

Monday, 17 September 2018

Real Story and History Thugs of Hindostan in hindi

Real Story and History Thugs of Hindostan in hindi : ठग एक ऐसा शब्द है जिसे इतिहास के पन्नों में लिखा तो गया लेकिन इसे सिर्फ और सिर्फ इतिहास बना कर भुलाया नहीं जा सका बल्कि समय-समय पर इस की बहुत सारी चर्चाएं भी होती रही और इन मे से ही एक चर्चित कहानी पर व्यस्त है आमिर खान की आने वाली फिल्म ठग्स ऑफ हिंदुस्तान । यह फिल्म असल मे  1839 में Philip Meadows Taylor के द्वारा लिखी गई  नवल Confession of a Thug पर आधारित है
Real Story and History Thugs of Hindostan in hindi


। जहां भारत और ब्रिटेन के कलचर की स्टोरी को बताया गया है और दोस्तों यह नॉवल पब्लिश होने के बाद से इतनी ज्यादा पॉपुलर हुई के इससे 19वीं शताब्दी क्या बेस्ट सेलिंग बुक का टाइटल दिया गया और रानी विक्टोरिया भी इस बुक की रीडर बनी ।

ठग कौन थे और क्या करते थे ? 


दरअसल ठग शब्द एक समय पर प्रोफेशनल चोरों और हत्यारों के लिए यूज किया जाता था जो कि पूरे भारत में कई सालों तक एक जगह से दूसरे जगह घूम घूम कर चोरी करते थे और खास करके वह अंग्रेजों और व्यापारियों को अपना निशाना बनाते थे और कहा जाता है कि जब अंग्रेजों से हमारे देश के राजा महाराजा भी हार मान चुके थे । तो इन्ही ठगों ने अंग्रेजों के नाक में दम कर रखा था । इन का मर्डर करने का तरीका भी बहुत ही अजीब था ।


Real Story and History Thugs of Hindostan in hindi


मर्डर करने के लिए यह एक रुमाल का इस्तेमाल करते थे जिसके दोनों सिरों पर एक एक सिक्का बन्ध रहता था और इसी रुमाल से वह  मुसाफिरों को मौत की नींद सुला देता थे ।
पहले तो यह ठग मुसाफिरों का विश्वास जीतते थे और फिर उसे यह पता लगा लेते थे कि उनके पास कितना पैसा और कितना कीमती सामान है और सही समय का इंतजार करते थे । जिस के बाद से वोह उन की हत्या करके उनका सारा पैसा और सामान लूट लिया करते थे और फिर लूट और हत्या के बाद इन लाशों को दफना दिया जाता था और इस तरह से कोई भी सुराग जमीन के अंदर ही दफन हो जाता औरअंग्रेजी हुकूमतों को यह भी नहीं पता चल पाता था कि आखिरकार उनके व्यापारी गायब कहां हो गए ।

ठगों से कैसे छुटकारा पाया गया ?


इन खतरनाक ठगों से बचने के लिए एक वार तो ईस्ट इंडिया कम्पनी ने यह फरमान जारी कर दिया था कि कोई भी व्यपारी एकेला किसी सफर पर नही निकलेगा।
अगर कोई जाएगा भी तो सिर्फ गरूपों में ।
इस के बावजूद भी ठगों ने हार नहीं मानी और अब तो यह पूरे ग्रुप को ही गायब कर दिया करते थे
जब अंग्रेजों ने अपने सभी हथकंडे अपना लिए तो ठगों का पता लगाने के लिए अंग्रेजो ने Wiliam Henery Sleeman को भारत बुलाया । जो के अपनी बहादरी और चालाकी के लिए जाने जाते थे । साथ ही वह  हिंदी उर्दू और अलग-अलग कई तरह की भाषाओं की नॉलेज भी रखता था । जिसकी वजह से कोई भी अपराधी उन  से बचके नहीं निकल पाता था । विलियम को अपने शुरुआती जांच में ही यह पता चला कि लोगों के गायब होने के पीछे ठगों का पूरा गिरोह काम कर रहा है ।


बहराम ठगों का नेता : 


दोस्तों अभी तक जो ठगी होती आ रही थी उन सब ठगों का मेन लीडर ठग बहराम । जिसे कि उस टाइम के लोग Kings of thugs के नाम से भी जानते थे । बहराम ठग उस समय नार्थ इंडिया की औंध स्टेट में एक्टिव रहता था। उसके बारे में बताया जाता है कि उसने अकेले ही 1000 से ऊपर मर्डर किए थे और इसीलिए आज भी बहराम को दुनिया की सीरियल किलर में से एक माना जाता है।



Thug behram

लेकिन वोह कहते हैं कि बुराई का अंत तो बुरा ही होता है भले ही यह ठग खास करके अंग्रेजों को अपना शिकार बनाते थे जिन्होंने हमारे भारत पर कई सालों तक राज किया और हमें गुलाम बनाकर रखा लेकिन एक सही सोच रखने वालों के लिए यह हमेशा ही गलत था ।


Real Story and History Thugs of Hindostan in hindi


आखिर में विलियम अपने सिपाहियो के साथ मिल कर ठग बहराम को पकड़ लिया और 1845 को ठग बहराम को बीच सड़क पर फांसी पर लटका दिया गया। उस की मौत के बाद यह गिरोह थोड़े ही समय मे खत्म हो गया। कहा जाता है कि अमीर खान की आने वाली फिल्म Thugs Of Hindosatan इसी कहानी पर आधारित है । आप को हमारा लेख कैसा लगा हमे कमेंट करके जरूर बताएं ।

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Wednesday, 29 August 2018

Top 5 Mysterious creature of World - दुनिया के 5 रहस्मयी जानवर

Top 5 Mysterious creature of World - दुनिया के 5 रहस्मयी जानवर : सदियों से कुछ ऐसे जानवरों का अस्तित्व रहा है जिन की इंसानों के साथ मुठभेड़ की खबरें आती रहती हैं लेकिन फिर भी इनका अस्तित्व अभी भी रहस्यमयी है।  कुछ लोग इन पर विश्वास करते हैं और कुछ लोग इन्हें सिर्फ कल्पना मानते हैं। 

Top 5 Mysterious creature of World - दुनिया के 7 रहस्मयी जानवर
Top 5 Mysterious creature of World - दुनिया के 5 रहस्मयी जानवर

दोस्तों आज मैं आपको दुनिया के ऐसे ही 5 रहस्यमई जानवरों के बारे में बताऊंगा जिनको सालों से देखी जाने की घटनाएं सामने आ रही है लेकिन किसी ठोस सबूत ना होने के अभाव से इनका अस्तित्व को पूरी तरह से सिद्ध भी नहीं किया जा सकता।चलो दोस्तों शुरू करते हैं ।

Yeti : 



पहले नंबर पर है येती। येती को हिम मानव के नाम से भी जाना जाता है।यह हिमालय क्षेत्र का सबसे प्रसिद्ध रहस्यमय जीव है।  जिसे देखे जाने की खबरें पक्षपाती रहती हैं और कई न्यूज़ चैनल हिस्ट्री चैनल तथा डिस्कवरी चैनल इन के ऊपर कई डॉक्यूमेंट्री भी बना चुकी है। इस क्षेत्र में पडने वाली कई मोनेस्ट्री में इन की खोपड़िया भी देख सकते है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार ही मानव की ऊंचाई लगभग 7 से 8 फीट बताई गई है शरीर पर भालू की तरह सफेद या ब्राउन बाल तेज गंध की भयानक तेज आवाज बताई गई है लेकिन क्या सच में ही ऐसे है या आज भी एक विवादित सवाल है।
Top 5 Mysterious creature of World
Yeti

Chupacabara:


दूसरे नंबर पर है छुपा काबरा । जिसे बकरिया खाने वाला शैतान भी कहते हैं लगभग 1970 से इसे देखा जा रहा है मेक्सिको उत्तरी अमेरिका से लेकर इंडोनेशिया तक सैकड़ों लोग इसे देखे जाने का दावा करते हैं । कई लोग उसके संभावित ठिकानों पर इसे पकड़ने के लिए भी गए लेकिन नाकामयाब रहे हैं कई किसानों और प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि जानवरों की तरह अपने शिकार को मार कर तुरंत नहीं खाता। उसे छोटे-छोटे खाव देकर उनका खून पीता है जिन्होंने इसे देखा है उनका कहना यह है कि जो चमकती हुई लाल आंखे और टांगे एक जैसी होती है तथा कंगारू की तरह दौड़ता है
Top 5 Mysterious creature of World
Chupacabara

Jersey Devil :


तीसरे नंबर पर है जर्सी डेविल। जर्सी डेविल अमेरिका के सबसे बड़े रहस में से एक है और लगभग 200 लोगों ने इसे प्रत्यक्ष देखने का दावा किया है। जर्सी डेविल को अमेरिका के न्यूजर्सी क्षेत्र में हमेशा देखा जा सकता है और सुना गया है इसे लगभग सन 1700 से देखे जाने की खबरें आ रही हैं लेकिन 90 के दशक से इसे सबसे ज्यादा देखा जा रहा है और कई लोगों से इसकी आमने सामने होने की खबरें भी आ रही हैं । इस के डर से कई लोग रात के समय न्यू जर्सी के जंगलों में भी नहीं जाते। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार जर्सी डेविल लगभग 4.5 फीट लंबा और घोड़े के सर वाला है जो पिछले दो पैरों पर चलता है और इन पैरों के घोड़े जैसे हैं ।

Top 5 Mysterious creature of World
Jersey Devil 

Loch Ness Monster


नेस मॉन्स्टर चौथे नंबर पर है दुनिया का सबसे प्रसिद्ध रहस्यमयी प्राणियो में से एक है । इस को सैकड़ों लोग देखने का दावा करते हैं और इसकी कई तस्वीरें भी प्रसिद्ध है जिनके ऊपर काफी रिसर्च भी हो चुकी है। आप जब भी दुनिया के रहस्य के बारे में जानने का प्रयास करेंगे तो आपको नेस मॉन्स्टर का रहस्य जरूर मिलेगा। लगभग सभी चैनलों ने इनके ऊपर कई डॉक्यूमेंट्री बना चुके हैं और सैकड़ों लोग इसे ढूंढने के लिए पैसा और समय बर्बाद कर चुके हैं लेकिन उनके हाथ सिर्फ निराशा ही हाथ लगी है लेकिन अभी भी लोग इसे देखी जाने का दावा करते हैं और उनके अनुसार यह सच है इसे पानी से बाहर कभी भी नही देखा गया। इस से अनुमान लगाया जा रहा है कि यह एक जलीय जीव है।
Top 5 Mysterious creature of World
Loch Ness Monster

Mothman:


मौथमेंन दक्षिणी वर्जीनिया में पाया जाने वाला एक रव्हस्यामी प्राणी है।  सन 1966 से इसे देखे जाने की खबरें आ रही हैं । इसे देखने वाले लोगों का कहना है कि इंसान की तरह दिखता है और इसके पंख भी हैं वहीं कुछ न्यूज़ रिपोर्टर ने इसे मौथमेंन नाम दे दिया है। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि यह लगभग 7 फीट लंबा और 200 टन वजन का जीव है जिसके 10 फीट तक फैले हुए पंख हैं । चमकती हुई लाल आंखें हैं यह कुत्ते जितने बड़े जानवरों को खा सकता है और चूहे जैसी इसकी आवाज है।
Top 5 Mysterious creature of World
Mothman

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Tuesday, 14 August 2018

Interesting fact about Independence day in hindi ( 15 अगस्त के बारे में अनसुनी बातें )

Interesting fact about Independence day in hindi ( 15 अगस्त के बारे में अनसुनी बातें ) : 15 अगस्त का दिन कई बातों में बहुत खास है सबसे बड़ी बात कि 15 अगस्त 1947 के दिन भारत को अंग्रेजों की गुलामी से आजादी मिली थी।
आखिर अंग्रेजों के सम्राज्य के खिलाफ 1857 को पहली बार क्रांति हुई मगर यह असफल रही । जिस के करीब 90 साल बाद भारतीयों ने आखिर गुलामी की जंजीरों को तोड़ दिया।
Interesting fact about Independence day in hindi ( 15 अगस्त के बारे में अनसुनी बातें )


दोस्तों हमारी तरफ से आप सब को स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त की हार्दिक शुभकामनाएं। आज हम आपको 15 अगस्त के बारे में कुछ अनसुनी बातों से जानू कराएंगे जिनके बारे में आप में से बहुत कम लोग जानते होंगे ।

Interesting fact about Independence day in hindi ( 15 अगस्त के बारे में अनसुनी बातें )


  • 15 अगस्त को हमारे देश के प्रधानमंत्री दिल्ली के लाल किला से झंडा लहराते हैं लेकिन 15 अगस्त 1947 को ऐसा नहीं हुआ था । इस दिन से अगले दिन भारत के पहले प्रधानमंत्री श्री जवाहरलाल नेहरू ने 16 अगस्त 1947 को लाल किला से झंडा लहराया था।



  • भारत के स्वतंत्रता दिवस भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा रेखा नहीं थी इसका ऐलान 17 अगस्त 1947 को हुआ था। पाकिस्तान 14 अगस्त को अपने स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाता है।



  • 15 अगस्त को भारत को आजादी जरूर मिल गई थी लेकिन उस वक्त भारत का कोई राष्ट्रगान नहीं था ।श्री रविंद्र नाथ टैगोर ने 'जन गण मन' को 1911 में लिख दिया था लेकिन संविधान सभा ने इसे 24 जनवरी 1950 को राष्ट्रगान के रूप में घोषित किया।



  • इस दिन भारतीय ₹1 $1 के बराबर था। पेट्रोल का रेट 1.89 रुपए लीटर और सोने का भाव 88 रुपए 62 पैसे प्रति 10 ग्राम था।



  • 1929 को कांग्रेस ने अंग्रेजों से स्वतंत्र देश की मांग की थी जिसके बाद 1929 से लेकर 1947 तक कांग्रेस 26 जनवरी को भारत के स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाती रही।



  • भारत के साथ 15 अगस्त विशव के 3 और देशो का भी आज़ादी दिवस है।15 अगस्त दक्षिणी कोरिया जापान से , ब्रिटेन से बहरीन 15 अगस्त 1971 को और फ्रांस से कांगो 15 अगस्त 1960 को आज़ाद हुआ।



  • अपनी आजादी के बाद पुर्तगाल देश ने अपने सविधान में गोवा को पुर्तगाल का हिस्सा घोषित कर दिया था लेकिन भारतीय फौज ने 19 दिसंबर 1961 को गोवा पर अपना कब्जा किया और इसे भारत का मुड़ से हिस्सा बनाया।



  • जब पूरा देश 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता दिवस के जश्न में डूबा था लेकिन उस वक्त महात्मा गांधी जी इस जश्न में शामिल नहीं हो पाए क्योंकि पूरे देश मे उस वक़्त दंगे हो रहे थे और वह कोलकाता में हिंदू मुस्लिम दंगो को रोकने में लगे थे।



  • 15 अगस्त 1982 को भारतीय प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी के भाषण के साथ ही भारत के उस वक़्त के TV चैनल दूरदर्शन पर रंगीन प्रसारण की शुरुआत हुई ।



  • 15 अगस्त को ही भारतीय फौज में बहादुरी के लिए दिया जाने वाला वीर पुरस्कार को मान्यता दी गई थी।



  • इस दिन ही भारतीय पोस्टल कोड की शुरुआत हुई थी। जो कि डाक सेवा में इस्तेमाल होता है। वह 6 अंको का होता है।



आखिर भारतीयों की दी गई कुर्बानियां और भारत के 32 करोड़ लोगों के विरोध के सामने अंग्रेजी हुकूमत को अपने घुटने देखने पड़े और ब्रिटिश साम्राज्य आखिरी वायसराय लाड माउंटबेटन नेम 14 अगस्त 1947 को भारत को अंग्रेजी हुकूमत से मुक्त कर दिया और 15 अगस्त को भारतीयों ने आजादी की सुबह का आनंद माना।

इसके साथ ही दूसरी तरफ बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण दंगे शुरू हो गए जिसमें हिंदू मुस्लिम और सिख हजारों लाखों की गिनती में मारे गए और अरबों की संपत्ति का नुकसान हुआ।

तो दोस्तों यह थे 15 अगस्त से जुड़े कुछ रोचक तथ्य हमे उम्मीद है आपको हमारे दुवारा दी गई जानकारी अछि लगी होगी । आगे से ऐसे जानकारी हासिल करने के लिए हमारा फेसबुक पेज लाइक करे।

Monday, 6 August 2018

History of Saragarhi battle in hindi ( सारागढ़ी की लड़ाई का इतिहास)

History of Saragarhi battle in hindi ( सारागढ़ी की लड़ाई का इतिहास) :  दोस्तों अगर आपसे दुनिया में किसी ऐसी लड़ाई के बारे में पूछा जाए जिसमें मुट्ठी भर सैनिको ने हजारों की तादाद में दुश्मन सेना को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया हो
 तो आप में से बहुत लोग ग्रीक स्पार्टनस और परशियन की लड़ाई के बारे में बताएंगे। उसके पीछे का कारण यह है कि उस पर 300 मूवी बन चुकी है।

History of Saragarhi battle in hindi ( सारागढ़ी की लड़ाई का इतिहास)

       सिर्फ 300 ग्रीक स्पार्टन्स ने हजारों की गिनती में परशियन सैना का मुकाबला किया और अपने देश का सर झुकने नहीं दिया ,अगर मैं कहूं कि इससे भी भयानक लड़ाई हमारे सिख सैनिकों ने लड़ी है ।

तो आपको हमारे सिख रेजिमेंट सेना पर गर्व महसूस होगा ।हम में से बहुत लोग इस महान गाथा के बारे में नहीं जानते क्योंकि हम को किताबों में इसके बारे में नहीं पढ़ाया जाता। आज मैं आपको 21 उन महान शूरवीरो के बारे में बताऊंगा जिन्होंने अपने देश के लिए अपना बलिदान दे दिया।


History of Saragarhi battle in hindi ( सारागढ़ी की लड़ाई का इतिहास)

यह बात है 1897 की जब भारत अंग्रेजों का गुलाम था लेकिन उस वक्त भारतीय सेना में 36 वी सिख रेजीमेंट की ड्यूटी सारागढ़ी के किला में थी। जो कि उस वक्त भारत में होता था और आज सारागढ़ी गांव पाकिस्तान में चला गया है।
उस वक्त अफगान पश्तून सेना इस किले को जीतना चाहती थी क्योंकि यह कला राजनीतिक दृष्टिकोण से बहुत महत्वपूर्ण था
क्योंकि यह किला दो और किलो के बीच में कम्युनिकेशन का काम करता था।
 भूगोलिक रूप से यह किला गुलिस्तान और लोखर्ट के बिल्कुल बीच में स्थित था जिससे तीनों किलो की सेना आपस में संपर्क कर पाती थी।
सितंबर 1897 को सारागढ़ी और उसके पास लगते कुछ इलाकों में कुछ लोगों ने अंग्रेजो के खिलाफ  विद्रोह कर दिया जिस के चलते स्थानीय आफरीदी और अफगानों के साथ मिल गए।

Battle of Saragarhi 

12 सितंबर 1897 की सुबह को अफगानों ने सारागढ़ी पर हमला कर दिया। सारागढ़ी के किले को 10000 अफगान सैनिकों ने चारों तरफ से घेर लिया। किले को चारों तरफ से घिरा देख वहां की सिग्नल इंचार्ज गुरमुख सिंह ने गुलिस्तान किले में मौजूद अंग्रेजी अफसर कर्नल होफटन को मदद के लिए संदेश भेजा।

लेकिन कर्नल की तरफ से यह संदेश मिला के इतनी जल्दी सारागढ़ी में इतनी सेना नहीं भेजी जा सकती कर्नल ने 36वी सिख रेजिमेंट के जवानों को किला छोड़ कर किसी सुरक्षित जगह पर जाने के लिए कहा।
  लेकिन किला चारों तरफ से घिरा होने के बावजूद कर्नल ने उन्हें आत्म समर्पण करने को कहा।

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लेकिन उन 21 सिख सैनिकों ने दुश्मन के साहमने घुटने टेकने की बजाय हज़ारों की गिनती में मजूद दुश्मन सेना से लड़ने का हिम्मत भर फैसला लिया।
सब से पहले नायक लाल सिंह और भगवान सिंह ने किले से बाहर निकल कर अचानक ही दुश्मनो पर ताबड़तोड़ गोलियां चला दी और आगे बढ़ते हुए वीरगति पा गए।
उस के बाद सैनिक कमांडर ईश्वर सिंह ने बाकी बचे सिख सेनको के साथ मिल कर " बोले सोह निहाल" के जयकारे लगा कर दुश्मन पर गोलियां चलना शुरू कर दिया। 

इस को देख कर अफगान सेना को लगा कि किले के अन्दर बड़ी तादाद में सेना है। जिस लिए उनोह ने किले के दरवाजे को तोड़ने की कोशिस की मगर असफल रहे। 

History of Saragarhi battle in hindi ( सारागढ़ी की लड़ाई का इतिहास)

बाद में उनोह में किले की एक दीवार को गिरा दिया और किले में घुस गए । सिर्फ 19 सिख सैनिको सुबह से ले कर देर रात तक लड़ते रहे और सभी के सभी सैनिक शहीद हो गए।

सुबह होते ही भारतीय ब्रटिश सेना ने अपनी सेना को सारागढ़ी में उतार दिया और किला वापस जीत लिया।

इस लड़ाई में अफगान सेना किला जीतने में असफल रही जब यह खबर यूरोप पहुंची तो किसी ने भी इस पर यकीन नहीं किया।

 लेकिन जब कर्नल होफटन ने यह पूरी कहानी संसद में सुनाई तो सभी ने इन 21 सिख सेनको को सलाम किया। 

Some Fact About Battle of Saragarhi 


  • सारागढ़ी की इस लड़ाई को UNESCO ने दुनिया की 5 सब से बड़ी लड़ाइयों में शामिल किया है।


  • इन 21 सैनिको को मरण उपरन्त इंडियन आर्डर ऑफ मैरिट से नवाजा गया है। जो के वीर चक्कर के बराबर है।


  • आज भारतीय सेना की सिख रेजिमेंट हर साल 12 सितम्बर को 'सारागढ़ी दिवस' मनाती है।


  • ब्रिटिश अमेरिका और यूरोप के कई देशों में स्कूल में सारागढ़ी की लड़ाई के बारे में पढ़ाया जाता है।


  • सारागढ़ी की लड़ाई पर आधारित एक बॉलीवुड मूवी "सारागढ़ी" भी बन चुकी है।

तो दोस्तों यह तो थी हमारे आर्मी के 21 सिख सैनिकों की बहादुरी की कहानी आज भी इनके जैसे हजारों सैनिक सीमा पर अपना बलिदान दे रहे हैं। हम सबको हमारी सेना का सम्मान करना चाहिए क्योंकि इनकी कुर्बानियां की बदौलत ही आज हम अपने घर में अपने परिवार के साथ एक सुखी जिंदगी जी रहे हैं।

तो दोस्तों आपको हमारा आर्टिकल History of Saragarhi battle in hindi ( सारागढ़ी की लड़ाई का इतिहास) कैसा लगा हमें कमेंट करके जरूर बताएं और आगे से हमारे आर्टिकल की जानकारी लेने के लिए हमारा Facebook पेज लाइक करें अपना कीमती समय देने के लिए आपका धन्यवाद।