Showing posts with label world history. Show all posts
Showing posts with label world history. Show all posts

Friday, 10 November 2017

Guam Crisis / issue/ in hindi ( Why North koria warned USA for nuclear war )

Guam Crisis / issue/ Why North koria warned USA for nuclear war  : दोस्तों पिछले कुछ दिनों से Guam Crisis/ issue बहुत चर्चा में है। आज हम जाने गे के Guam Crisis क्या है , North Koriea और USA के वीच तनाव क्यों बढ़ रहा है , North Koriea ने Nuclear Attack करने की धमकी क्यों दी है और अगर दोनों देशों में जंग होती है तो क्या इस से 3rd world war हो सकती है ? इस के साथ ही हम जाने गे के इस problam का seloution क्या हो सकता है।
What is Guam: सब से पहले हम जानते हैं के Guam क्या है  दोस्तों गुआम नार्थ कोरिया और अमेरिका के वीच का एक टापू है जिस की आबादी लगभग 1.5 लाख के करीब है , जिस की लंबाई 49 किलोमीटर और चौड़ाई 19 किलोमीटर है। गुआम की नार्थ कोरिया से दूरी ( Distence Guam from North Koriea ) 2131 मील  है , यह टापू अमेरिका का हिस्सा है , इस पर रहने वाले लोग अमेरिका के विसनीक माने जाते हैं । Guam की राजधानी का नाम Hughana है। इस को अमेरिका ने 1898 में स्पेन से जीता था। 

What is Guam Crisis : अब हम जानते हैं के Guam Crisis क्या है असल में दोस्तों नार्थ कोरिया ने
intercontinental ballistic missile तयार कर ली है इस बात का पता अमेरिका की खुफिया विभाग को चल गया था , पहले तो सब को लगा के चलो intercontinental ballistic missile ही है इतना नुकसान नहीं करेगी मगर बाद में पता चला नार्थ कोरिया उस पर एक nuclear head का इस्तेमाल कर रहा है , उस के कुछ दिन बाद मीडिया ने जब अमेरिका के प्रेजिडेंट डोनाल्ड ट्रम्प से इस के बारे में पूछा तो उन का कहना था के " Face fire and fury like the world has never seen " इस का मतलब है के नार्थ कोरिया को ऐसी तबाही का सामना करना पड़ेगा जो आज तक दुनिया में किसी ने नहीं किया। जब यह बात मीडिया में आई तो इस पर नार्थ कोरिया के जवाब दिया के हम आप की Territory Guam पर हमारी मिजाइले दाग देंगे ।
हम आप को बता दे के नार्थ कोरिया ने Guam को टारगेट इस लिए किया है क्यों की गुआम में अमेरिका की आर्मी और एयरफोर्स के 2 बेस हैं और इस के साथ ही काफी मात्रा में गोल बारूद वी वहां पे अमेरिका की तरफ से रखा गया है। इस लिए नार्थ कोरिया ने कहा है के हम वह जगह ही तबाह कर देंगे यहाँ से हमारी तरफ fire and fury आएगी। 

Read this History of Kohinoor Diamond
World War 3 के बारे म कुछ तथ्य:
दोस्तों हम आप को बता दे के गुआम में अमेरिका का Andersen airforce base है जहाँ पर अमेरिका के
B2 Stealth Bomber हैं जो के किसी वी राडार की रेंज में आए बिना ही किसी वी देश पर बम गिरा सकते हैं । जिस से लगता है के नार्थ कोरिया को ऐसा करने से पहले अमेरिका रोक लगा।
दूसरा कारण यह है के नार्थ कोरिया ने खुद कहा है के जो intercontinental ballistic missiles हैं वोह अपने टारगेट से 8,10 किलोमीटर इधर उधर गिर सकती हैं मगर गुआम की क्षेत्रफल के हिसाब से इन मिजाइलो को गुआम पर गिराना बहुत मुश्किल है।
तीसरा अमेरिका ने साउथ कोरिया और गुआम में स्पेशल THAAD लगा रखे हैं जो intercontinental ballistic missile को अपने आप ख़तम कर देते हैं ।
इन कारणों से लगता है के नार्थ कोरिया के लिए गुआम को टारगेट करना बहुत मुश्किल है।  अब हम एक नज़र नार्थ कोरिया पर डालते हैं ।
अगर नार्थ कोरिया गुआम से कुछ दूरी पे कोई मिजाइल दागता है जनि के समुन्दर में कोई बड़ा बोम्ब जा मिज़ाइल जिस से समन्दर में सुनामी आ जाए जिस से गुआम में तबाही हो । मतलब  नार्थ कोरिया सीधा अमेरिका की ज़मीन पे हमला नहीं करता और अमेरिका नार्थ कोरिया पे मिलीट्री अटैक करता है तो तो रशिया और चाइना इस में डायरेक्ट इन्वॉल्व हो जाएंगे।
दूसरा अगर अमेरिका नार्थ कोरिया पर हमला करता है और वहां की सरकार टूट जाती है तो बहुत ज्यादा मात्रा में लोग नार्थ कोरिया से साउथ कोरिया में आएंगे जिस से साउथ कोरिया की इकॉनमी को खतरा है ।
Guam crisis seloution :
दोस्तों इस का पहला seloution यह है के जैसे ईरान
के नुक्लेअर प्रोग्राम में suxnet नाम का वायरस अमेरिका ने डाल दिया जिस से उस प्रोग्राम का पांचवा हिस्सा डिलीट हो गया था जिस से वह काफी साल पीछे चला गया , यहाँ व् suxnet का इस्तेमाल कीया जाए।
दूसरा नार्थ कोरिया और साउथ कोरिया आपस में बातचीत करे और अमेरिका अपने THAAD सिस्टम को साउथ कोरिया से हटा ले , क्यों की नार्थ कोरिया को इस से बहुत ज्यादा अप्पति थी ।
तो दोस्तों यह ता Guam का पूरा टॉपिक आने वाले exam में इस से कुछ पूछा जा सकता है, अगर आप को हमारा आर्टिकल अच्छा लगा तो शेयर जरूर करें।


Saturday, 4 November 2017

History of Kohinoor Diamond in hindi ( Kohinoor की कहानी )

                              History of Kohinoor diamond
Kohinoor एक वोह हीरा है जिस के लिए अनेक खुनी संघर्ष हुए हैं , जिस के बारे में हम इतेहस में वी पढ़ते है । कोहिनूर दुनिया की सब से कीमत हीरा है जिस की कोई कीमत नहीं है , क्यों की अब तक कोहिनूर हीरा कभी किसी ने खरीदा नहीं है यह हमेशा या तो लड़ाई में लूटा गिया है जा किसी एक राजा दुवारा दुसरे को तोहफे के वजो दिया गिया है । आज हम एक वेश कीमती हीरे की अबतक की कहानी के बारे में जानेगे , के कहा से कोहिनूर का जनम हुआ और कैसे यह कीमती हीरा भारत से इंग्लैंड तक पहुंचा ।


History of Kohinoor diamond

कोहिनूर का जनम : कहा जाता है के कोहिनूर हीरा सब से पहले दक्ष्ण भारत में आंध्र परदेश में गोलकुंडा की खदान से मिला था , गोलकुंडा की खुदान से और बी कई कीमती हीरे जैसे , द्र्यनूर , होप हीरा , निज़ाम जैसे लगभद दुनिया के 30 हीरे अबतक मिल चुके हैं। इस में से अबतक का सब से कीमती और सब से लम्बा खुनी इतेहस बनाने वाला हीरा कोहिनूर था , कोहिनूर कब खुदान से बहार आया इस का अबतक कही कोई जिकर नहीं मिलता ,  इस का सब से पहले सं 1304 में मालवा के एक राजा  मख्लाव देव की सम्पति में शामल था , तब कोहिनूर हीरा 785 कैरट का था
उस समय राजा मुख्लाव देव ने इस हीरे को गोलकुंडा राज के सेनापति मीर जुमला की हिफाज़त में रखा था मगर जब मीर जुमला को पता चला के इस हीरे के लिए कई राजा उस की हत्या करना चाहते हैं तो मीर जुमला वहा से भाग कर दिल्ही चला गिया और  राजा शाहजहा  के दरबार में पनाह ली और यह हीरा शाहजहाँ को भेंट किया , शाहजहा ने इस हीरे को बहुत ख़ुशी से स्वीकार किआ।

  • शाहजहा के बाद यह हीरा उस के पुत्र  औरंगजेब के पास चला गिया औरंगजेब को कोहिनूर से बहुत लिगाब था जब वि कोई बहार से मेहमान आता तो औरंगजेब सब को उस हीरे के दर्शन जरुर कराते , यह हीरा अब तक 279 कैरट का रह गिया था क्यों की इस से पहले शाहजहा ने इस हीरे को इटली के एक कारीगर बोर्गियो के दुवारा कटवा लिया था ।
  • इस के बाद इरान के राजा नादिरशाह ने दिल्ही पर हमला किआ यह कतलाम 58 दिन चला और इस के बाद नादिरशाह दिल्ही के राजा के पास पंहुचा जहा पर उस ने राजा मुहम्द शाह के मुख्ट में इस हीरे को देखा , उस वक़्त तक इस हीरे का कोई नाम नहीं था वह पर नादिरशाह ने इसे देखती की कहा “ को ही अनूर “ जिस का फारसी में अर्थ होता है “ रोशनी का पहाड़ “ और इस तरह इस कीमती हीरे को अपना नाम मिला . और इस तरेह नादिरशाह इस हीरे को अपने साथ ईरान ले गिया ।
  • 1773 में अफगान के राजा अहमद शाह ने ईरान पर हमला किया और इस हीरे को अपने कब्ज़े में ले लिया , अहमद शाह की मौत के बाद कोहिनूर हीरा उस के पुत्र शाह सुजान के पास चला गिया , जो बाद में अफगानिस्तान का राजा बना मगर उस के राजा बनते ही उसके सगे भाई ने शाह्सुजा को मारने का षड्जन्त्र रचा जिस लिए अपनी जान बचाने के लिए शाह्सुजा वहा से भाग के लाहोर के राजा रणजीत सिंह के पास आ गिया ।
  • शाह्सुजा ने इस हीरे को शेरे पंजाब महाराजा रणजीत सिंह को भेंट किया , महाराजा ने इस हीरे का ब्रेसलेट बनवाया , जिस को कभी कभी महाराजा पहना करते थे ।
  • 27 जून 1839 को महाराजा की मौत हो गई जिस के बाद यह हीरा उस के पुत्र दलीप सिंह के पास पहुंचा , दलीप सिंह बहुत छोटी उम्र में राजा बने जिस के कारण अंग्रेजो ने पंजाब को अपने राज में मिला लिया और इस हीरे को बिर्टेन की रानी के पास भेज दिया।
  • महारानी विक्टोरिया इस को और अच्छा आकार देना चाहती थी जिस के लिए 38 दिन की कशमकश के बाद कोहिनूर को नया आकार मिला जिस के कारण अब कोहिनूर महज़ 105.6 कैरट का रह गिया है ।

आज यह हीरा लन्दन में ब्रिटिश क्राउन जेवेलर्ज़ के पास है जो लन्दन में थेम्स नदी के पास है , कोहिनूर अबतक दुनिया के सब से बड़े हीरो में से एक है , यह हीरा दुनिया के एक सब से महंगा हीरा है जिस की कीमत खरबों में मानी जाती है



अगर आप हमारे आर्टिकल का notification तुरंत पाना चाहते हैं तो हमारी एंड्राइड एप को जरुर इंस्टाल करे , धन्यवाद!

Monday, 30 October 2017

History of Samsung Mobile / Electronics company in hindi( samsung की सफलता की रोचक कहानी )

                          History of Samsung Mobile / Electronics company in hindi
दोसतो आज हम बात करने  जा रहे मोबाइल क्षेत्र में दूसरी सब से बड़ी कंपनी Samsung की , Samsung का नाम सुनते ही हमारे दिमाग में सब से पहले क्या आता है , शायद मोबाइल , टीवी , ऐसी, जा इलेक्ट्रॉनिक्स की कुछ और चीज़े , अगर मैं कहूं के Samsung ने दुनिया की सब से ऊंची बिलडिंग बुर्ज खलीफा को वी बनाया है इतना ही नहीं अगर मैं कहूं के Samsung पानी में तैरने वाले शिप या मैं कहूं के Samsung लड़ाई के मैदान में काम आने वाले टैंक वी बनाती है । जी हां दोस्तों Samsung इलेक्ट्रॉनिक्स के इलावा 80 और अलग अलग क्षेत्र में काम करती है। आप को यह जान कर हैरानी होगी के Samsung का पूरे साउथ कोरिया का 17 % GDP रेवन्यू होता है , इस का मतलब के अगर Samsung कंपनी घाटे में चली जाए तो पूरे साउथ कोरिया देश की अर्थ व्यवस्था डगमगा जाएगी। इतना ही नहीं दोस्तों Apple , Google, और Microsoft कंपनी में जितने लोग काम करते हैं उतने ही लोग अकेली Samsung कंपनी में काम करते हैं । तो दोस्तों अबतक आप ने जाना के Samsung कितनी बफी कंपनी है ।
Read this History of Nokia in hindi
History of Samsung Mobile / Electronics Company: Samsung कंपनी की शुरुआत 1938 में Lee Byung Chul ने की थी । उस वक़्त Samsung कंपनी में सिर्फ 40 लोग काम करते थे । उस वक़्त यह कंपनी खाने पीने की चीज़े बनाती थी । जैसे जैसे कंपनी की कमाई बड़ी तो इन्हों ने कंपनी को और क्षेत्र में विकसित किया जिस में इंसोरेंस , सेकूरटी मुख्या थे।
उस के बाद 1969 में Samsung ने इलेक्ट्रॉनिक्स में वी अपने कदम बढ़ाए , यहाँ उन का पहला इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्ट P-3202 नाम का एक ब्लैक एंड वाइट टीवी था। जिस को Samsung ने 1970 में लांच किया। यह प्रोडक्ट बहुत कामज़ाब रहा उस के बाद Samsung ने VCR , Microwave, refregirater आदि बहुत प्रोडक्ट बनाए । 

मोबाइल इंडस्ट्री में कदम: 1983 में कंपनी ने टेली कॉम्युनिकेशन में वी कदम रखा , यहाँ उनो ने सब से पहले फोन बनाया जिस का नाम SC-100 था। हलाकि यह फ़ोन के कुछ ही यूनिट बिक पाए इस को लोगो ने बिलकुल पसंद नहीं किया। इस की असफलता के बाद कंपनी ने खूब रिसर्च की जिस के बाद  1988 में SH-100 नाम का पहला मोबाइल फ़ोन लांच किया गया। बदकिस्मती से यह मोबाइल के वि कुछ हज़ार यूनिट ही सेल हुए इस तरह अबतक Samsung मोबाइल बनाने में बिलकुल असफल रह चुकी थी।
1993 में कंपनी के डिरेक्टर ने 200 इंजीनियरों की टीम को एक साल में सब से अच्छा फ़ोन बनाने का टारगेट दिया जिस के एक साल बाद SS-700 नाम का एक मोबाइल फ़ोन लांच किया  गया जिस की लोगो ने खूब सराहना की , इस की खास बात यह थी के जिस वि ग्रहक को इस मोडल में कोई प्रॉब्लम आई उस मोडल को लोगो के साहमने जला दिया जाता था । जिस के कारण कंपनी लोगो का भरोसा जीतने में सफल रही।


भारत में दस्तक :फिर 2004 में Samsung के मोबाइल ने भारत में दस्तक दी , पहले कुछ साल Samsung के लिए भारत में समय बुरा ही गुजरा , लेकिन 2010 के बाद Samsung ने भारत में अपना पहला Samsung Galaxy S फ़ोन लांच किया जिस ने पूरे भारत में धूम मचा दी उस के बाद Samsung के Galaxy मोडल खूब बिके ।
यही वजह है के आज सैमसंग आईटी में दूसरी सब से बड़ी कंपनी है जिस में करीब 3 लाख 80 हज़ार लोग काम करते हैं , सैमसंग ने Samsung International Corporation के नाम पे बुर्ज खलीफा और पेट्रोन्नं टावर जैसे प्रोजेक्ट हासिल किए । इस के इलावा Samsung ने साउथ कोरिया के लिए K9 Thunder नाम का एक टैंक वि बनाया और Samsung की life Insurence कंपनी दुनिया की 14 सब से बड़ी कम्पनी है ।
दोस्तों आप को हमारा आर्टिकल कैसा लगा हमे कॉमेंट करके जरूर बताए , साथ ही रोजाना ऐसे आर्टिकल पाने के लिए हमारा एप्लीकेशन Education Hindi apk डाउनलोड करे , धनयवाद ।

Saturday, 28 October 2017

History of Royal Enfield bike ( Bullet ) in hindi ( Royal Enfield की सफलता की कहानी )

दोस्तों आज हम बात कर रहे एक इंडियन ब्रांड की जो पूरी दुनिया में मशहूर है , आज हम बात क
कर रहे हैं Royal Enfield की जिस की बाइक सिर्फ भारत में ही नहीं पूरी दुनिया में लोक प्रियता हैं। Royal Enfield की बुलेट बाइक आज के समय में बाजार में धूम मचा रही है , आप को जान कर हैरानी होगी के Royal Enfield लोगो में इतना ज्यादा लोकप्रिय है के लोग इस की बाइक लेने के लिए कई कई महीने इंतज़ार करते हैं। इस बाइक की खास बात इस का शक्तिशाली इंजन और मजबूत पार्ट्स हैं ।आज Royal Enfield को एक भारती ब्रांड से जाना जाता है , मगर इस के पीछे वि बहुत दिलचस्प कहानी है जिस के बारे में आज हम आप को बताएंगे । 
हमारे अर्टिकल की रोजाना अपडेट के लिए हमारा andorid app यहाँ से इंस्टाल करे Education Hindi

History of Royal Enfield bike ( Bullet ) in hind
दोस्तों Royal Enfield कंपनी की शुरुआत आज से करीब 125 साल पहले इंग्लैंड में हुई थी। इस कंपनी की शुरुआत अल्बर्ट ऐ डी और आर डब्लू स्मिथ ने 1892 में की थी। उस समय इस कंपनी का नाम EADIE MANUFACTURING LIMITED था। उस वक़्त यह कंपनी बन्दूक के पार्ट्स बनाने का काम करती थी।1896 में आगे चल कर इसी कंपनी में से एक और कंपनी बनाई गई जिस का नाम The New Enfield Cycle Company रखा गया , अब यह कंपनी साइकिल और इस के कुछ पार्ट बनाती थी। इस के कुछ समय बाद कंपनी ने इस में कुछ बदलाव  करने की सोची और 1901 में साइकिल पर ही इंजन सेट कर दिया और अपनी पहली बाइक पेश की जिस में उनोह ने इंर्ब नाम की कंपनी का इंजन use किया। Royal Enfield को पहली बार सफलता 1914 में मिली जब उन की बनाई बाइक को पहले विशव युद्ध के समय इंग्लैंड ने खरीदा और उस के कुछ समय बाद रूस ने वी उन के दुवारा बनाई बाइक को खरीदने का फैसला किया।
और उस के बाद Enfield पूरी दुनिया में मशहूर हो गया  दूसरे विशव युद्ध में Royal Enfield की बाइक्स को बहुत बाद अवसर पर खरीदा गया। 


History of Royal Enfield bike ( Bullet ) in india
India में Royal Enfield को 1949 में पहली बार लाया गया । उस वक़्त इस कंपनी को कोई नहीं जानता था । 1954 में पहली बार भारत की सेना और पुलिस के लिए इस बाइक को खरीद गया जो के Enfield का 350 cc मोडल था। 


1955 में Royal Enfield ने Madras Motors के साथ पार्टनरशिप की और इस तरह से Royal Enfield India की शुरुआत हुई। मगर इस समय यह बाइक के कुछ पार्ट इंग्लैंड से मंगवाते थे मगर 1966 के बाद सभी पार्ट भारत में बनने शुरू हो गए ।
  आगे चल कर Royal एनफील्ड England को काफी घाट हुआ जिस के कारण 1971 में कंपनी बंद करनी पड़ी। मगर भारत में इस कंपनी का प्रोडक्शन जारी रखा गया । उस वक़्त भारत में वी इस कंपनी को काफी घाटा हो रहा था । जिस के कारण इस को Eicher motors ने खरीद लिया और Eicher Motors के मालक बिक्रमलाल के बेटे सिदार्थ ने समय के हिसाब से इस बाइक में कुछ बदलाव किए जिस के कारण फिर से इस बाइक की सेल बढ़ गई।
जैसे के आप देख रहे हैं आज के समय में एनफील्ड की बाइक्स भारत के साथ साथ अमेरिका, साउथ अफ्रीका , ऑस्ट्रेलिया, जैसे 50 से ज्यादा देशो में वेचे जाते हैं ।
2013 में Enfield ने कुल 81446 बाइक्स वेचे इस के अगले ही साल 2014 में 123018 बाइक्स वेची गई।
और हालहि में 18 सितम्बर 2017 को Royal Enfield की classic 350 और classic 500 लांच की गई।
दोस्तों हमे उम्मीद है के आप को Royal Enfield की यह स्टोरी जरूर पसंद आई होगी । ऐसी की जानकारी आगे पाने के लिए हमारा फेसबुक पेज लाइक करे , धन्यवाद ।


Wednesday, 25 October 2017

History of Xiaomi (Mi) mobile company in hindi (MI की सफलता की कहानी )

दोस्तों आज मैं आप से बात करने जा रहा हु दुनिया की पांचवी सब से बड़ी मोबाइल बनाने वाली कम्पनी Xiaomi के बारे में , दोस्तों कुछ साल पहले शुरू होई एक chines कम्पनी ने थोड़े ही समय में आपनी पकड़ पूरी दुनिया में बना ली है इस कम्पनी के ख़ास बात यह है के Xiaomi के मोबाइल फोन्स में कम दाम में बहुत ही ज्यादा फीचर होते हैं जिस के कारण आज Xiaomi दुनिया की सब सी बड़ी कंपनिया में से जानी जाते है और इस ने यह मुकाम थोड़े ही समय में हासिल कर लिया है , इस कम्पनी की सफलता का पता इस बात से वी चलता है के कुछ देशो में Xiaomi को दुनिया की सब से बड़ी कम्पनी apple से compare किया जाता है जिस के लिए कुछ देशो में Xiaomi को apple of the china वी कहा जाता है ,  तो चलिए दोस्तों थोड़े ही समय में अपनी सफलता के झंडे गाड़ने वाली Xiaomi कम्पनी की story को हम शुरू से जानते हैं


कहानी की शुरुआत होती है 16 दसम्बर 1969 को MI के founder Lei Jun का  चाइना के एक शहर में  का जनम हुआ अपनी पढाई पूरी करने के बाद Lei ने 1992 में kingsoft नाम की एक कम्पनी में काम करना शुरू कर दिया फिर 1998 आते आते वोह उस कम्पनी के CEO बन गे
उस के अगले दो साल बाद ली ने ऑनलाइन बुक स्टोर बनाया जिस का नाम था  joya.com Lei  की यह website खूब चली फिर 2004 को ली ने इसे amazon को 75 मिलियन डोलर में वेच दिया . अब lee का इरादा कुछ बड़ा करने का था

6 अप्रैल 2010 को 7 लोगो के साथ मिल कर Xiaomi कम्पनी की शुरुआत की असल में यह कम्पनी एक सॉफ्टवेयर कम्पनी के तौर पर शुरू की गई थी , Xiaomi ने सब से पहले अपना एक launcher बनाया जो के google android पर फ़ोन में चलता था जिस का नाम MIUI था , यह सॉफ्टवेयर खूब चला
आगे चल कर Xiaomi ने hardware फीलिड में वी कदम बड़ा लिए  2011 में उनो ने MI1 के साथ अपना पहला samartphone लांच किया जिस को लोगो का जबरदस्त रेस्पोंस मिला इस की सफलता को देखते हुए Xiaomi अगले ही साल अपना दूसरा MI2 फ़ोन ले कर आया , इस फ़ोन के 10 मिलियन यूनिट सिर्फ 11 महीनो में ही विक गे  इस के इलावा MI2 smartphone को mobicity से मिल कर Australia , New Zealand, US , UK में वी वैचा गिया ,2014 तक  देखते ही देखते Xiaomi कम्पनी एक बहुत बड़ी कम्पनी बन गई जिस की कमाई 45 बिलियन डोलर तक पहुँच गई


Xiaomi कम्पनी ने भारत में पहली वार जुलाई 2014 में दस्तक दी उस के अगले ही साल 2015 में MI4i नाम का एक फ़ोन लांच किया जो के भारत की पर्मुख इ कॉमर्स website flipkart पर उपलब्द थी , और इस फ़ोन के 1 लाख यूनिट सिर्फ 4.2 सेकंड में ही विक गे , इस के बाद इस कम्पनी ने कभी वी पीछे मुड कर नहीं देखा ,इस के बाद Xiaomi एक के बाद एक सफल फ़ोन लांच करती रही जिस को पूरी दुनिया में खूब सरहाया गिया

अभी हालहि में लांच किया गया MI नोट 4 smartphone MI का सब से बेस्ट smartphone रह चूका है , इस के साथ ही अब Xiaomi पॉवर बैंक , लैपटॉप , बैंड और रावुटर जैसी बहुत सारी चीज़े बनाता है

Lei Jun चाइना के अब २३वे  सब से अमीर विअकती हैं FORBES की एक रिपोर्ट के अनुसार 2014 के बेस्ट bussines men of the year नाम का खिताब वी अपने नाम कर चुके हैं


हमारे आर्टिकल रोजाना पढने के लिए हमारा app डाउनलोड करे

                    ↕    Education Hindi apk

History of Facebook in hindi ,( Mark zuckerberg's Biography)

History of Facebook in hindi ,( Mark zuckerberg's Biography)
" जो चीज़े आसान हैं अगर आप उन को पहले करोगे तो आप असल में तर्रकी कर पाओगे " यह कहना है 100 करोड़ दे अधिक लोगो को आपस में जोड़ने वाले और facebook के संस्थापक Mark zuckerberg का।
दोस्तों हम सब facebook को use करते हैं मगर हम में से बहुत कम लोग यह जानते हैं के facebook कैसी बनी और कहाँ से इस का जनम हुआ , आज हम आप को facebook का इतिहास बताएगे , और साथ ही साथ में आप को Mark Zuckerberg की ज़िंदगी के बारे में भी जानू कराएंगे के कैसे mark के मन में facebook बनाने का आईडिया आया ,
Mark Zuckerberg का जनम 14 मई 1984 को White plains New York शहर में हुआ । मार्क के पिता पेशे से एक डॉक्टर थे जिनों से मार्क ने कंप्यूटर के बारे में बेसिक जानकारी हासिल की ,
12 साल की उम्र में mark ने अपने घर पर एक सॉफ्टवेर बनाया जिस का नाम उस ने zucknet रखा , यह सॉफ्टवेर के माधयम से mark अपने पिता से बात कर सकते थे जब वह अपने क्लीनिक में होते थे और यह software मार्क के पिता अपने क्लीनिक में दूसरे लोगो से बात करने के लिए वी use करते थे ।
Mark की कंप्यूटर में दिलचस्पी को देखते हुए mark के पिता ने एक कंप्यूटर टीचर को रखा जो हफ्ते म एक वार आ कर mark को कंप्यूटर के बारे में जानकारी देता था ।
अपने हाई स्कूल के समय mark ने एक ऐसा ऑडियो प्लेयर बनाया जिस में mp3 songs की लिस्ट बन जाती थी इस की खास बात यह थी के यह लॉस्ट user की एक्टिविटी को देखते हुए बनती थी जो यूजर उस समय सुनना चाहता था ।

read this history of Nokia in hindi

फिर mark ने Hawerd university में दाखला लिया 2003 में mark ने Hawred university की साइट को हैक कर लिया जो उस समय में सब से सेफ मानी जाती थी , मार्क ने यूनिवर्सिटी की साइट को इस लिए हैक कर लिया था क्यों की जब स्टूडेंट युनिवेर्सिटी में दाखला लेते थे तो उन का सारा डाटा और एक पासपोर्ट साइज फोटो साइट पे अपलोड रहती थी जब स्टूडेंट यूनिवर्सिटी से पढाई पूरी कर लेते थे तो  यही फोटो उन की डिग्री और cartificates पे लगनी होती थी जिस को ज्यादातर स्टूडेंट बदलना चाहते थे , इस लिए मार्क ने 2003 में साइट को हैक कर लिया,
साइट को हैक करने के बाद मार्क के हाथ यूनिवर्सिटी के सभी स्टूडेंट्स की फोटो लग गई , जिस का use उस ने अपनी एक साइट Facemash के लिए किया जिस में वह 2 स्टूडेंट्स की फोटो को आपस में campare करता था जिस में यूनिवर्सिटी के सभी स्टूडेंट वोट करते थे के दोनों में से कौन ज्यादा हॉट है  , Facemash थोड़े ही समय में यूनिवर्सिटी काफी फेमस हो गई । थोड़े ही समय में इस साइट पे बहुत ज्यादा ट्रैफिक आने लगा जिस में ज्यादातर ट्रैफिक हावर्ड के स्टूडेंट्स का था जिस के कारण server क्रैश हो गया , उस के बाद Mark पर यूनिवर्सिटी की साइट हैक करने का दोष लगा जिस को मार्क ने कबूल कर लिया और माफ़ी वी मांगी जिस के बाद उसे माफ़ कर दिया गया।

थोड़े समय बाद Mark के मन में एक खुद की सोशल वेबसाइट बनाने का आईडिया आया , 4 फरबरी 2004 को Mark ने thefacebook.com नाम का डोमेन register कराया। जो आज facebook.com के नाम से जाना जाता है , Mark के इस प्रोजेक्ट के लिए काफी पैसो की जरूरत थी जिस के लिए उन के एक दोस्त ने इस प्रोजेक्ट में अपना काफी पैसा इन्वेस्ट किया। आपने ध्यान इस प्रोजेक्ट पर लगाने के लिए Mark ने Hawerd university को छोड़ दिया।
2005 में facebook USA की सभी यूनिवर्सिटी के लिए लांच किया गया , जिस के बाद facebook पर काफी ट्रैफिक बढ़ने लगा जब यह ट्रैफिक 1 मिलियन तक पहुंचा तो yahoo ने इसे 1 अरब में खरीदने के लिए Mark को ऑफर दिया जिस को Mark ने नहीं माना।

read this how earn money from google 

इस के बाद Mark 2006 में कैलिफ़ोर्निया आए और 24 मई 2007 को Facebook प्लेटफार्म की घोषणा की जिस के बाद काफी सारी कंपनिया अप्लीकेशन devolp करने के लिए facebook से जुडी । मई 2008 में Mark ने Facebook concet प्रोगराम लांच किया जिस से अलग अलग वेबसाइट पर sign up करने की जगह सीधा facebook से लोग इन किया जा सकता था । जिसे Mark का मास्टर स्ट्रोक वी माना जाता है।

Mark ने 19 मई 2012 को अपनी एक चाईनी फ्रेंड रशील चैन से शादी की जिस से उन को एक बेटी वी है । Mark शुरू से ही apple कंपनी के founder Steev job को अपना रोल मॉडल मानते है । आज मार्क दुनिया के पांचवे सब से अमीर आदमी हैं और फेसबुक दूसरी सब से बड़ी website है । हालहि में Hawerd University ने यह कहा है के जो डिग्री Mark ने 2005 में छोड़ दी थी वह डिग्री अब Mark को दी जाएगी क्यों की जो मार्क ने कर दिखाया है वह एक ग्रेजुएशन वी नहीं कर सकता।
दोस्तों अगर आप को हमारा आर्टिकल अच्छा लगा तो शेयर जरूर करें , धन्याबाद।

हमारे आर्टिकल रोजाना पढने के लिए हमारा app डाउनलोड करे

                        Education Hindi apk

Monday, 23 October 2017

History of nokia in hindi ( nokia की पूरी कहानी )

History of nokia :दोस्तों आज मैं बात करने जा रहा हु हम में बहुत सारे लोगो का पहला मोबाइल फ़ोन Nokia की . वैसे तो दोस्तों nokia के मोबाइल samsung और apple के आ जाने के बाद गाइब से हो गए हैं , मगर यही आज से कुछ समय पहले की बात करें तो nokia मोबाइल फोंस का दूसरा नाम होती थी , इस फ़ोन की सब से खास बात इस का hardware माना जाता था इन फ़ोन के hardware को सब से मजबूत और टिकाऊ माना जाता था और दूसरा यह ब्रांड हम में से बहुत लोगो का पहला मोबाइल ब्रांड होने के कारण हम से emotionly वी जुड़ा हुआ है , आज भले ही nokia के मोबाइल बाज़ार में कम हो मगर लोगो का भरोसा इस ब्रांड पर आज वी बरक़रार है तो चलिए दोस्तों आज हम आप को nokia की पूरी कहानी बता देते हैं ।

History of nokia in hind दोस्तों nokia की शुरुआत सब से पहले Fredrik idestam नाम के आदमी ने 1865 में की थी उस समय इस की शुरुआत एक पेपर मिल के तौर पर हुई थ , 1871 में फ्रेडरिक ने आपने दोस्त लिओ के साथ मिल कर एक और कम्पनी बनाई जिस का उनो ने nokia AB रखा आप को बात दे के nokia फिनलैंड की एक नदी का नाम है और आगे चल कर 1922 में nokia ने दो कम्पनी finnish rubber works, finnish cable works  से मिल कर इलेक्ट्रोनिक का काम करने लगी।
 उस के बाद यही 3 कंपनिया एक में मर्ज़ हो कर 1967 को nokia corporation की सथापना की उस वक़्त nokia के कई कारोबार थे जिस में से केबल , रबर , एल्क्ट्रोनिक का काम था , उस के बाद सन 1970 में nokia ने networking और radio इंडस्ट्री में कदम रखा , अब nokia फिनलैंड की आर्मी के लिए radio एक्ब्मेंट बनाने का काम करती थी।
अब nokia एक बहुत बड़ी कम्पनी बन चुकी थी 1980 से 1990 के बीच nokia ने 3 बड़ी कंपनिया पहली टीवी बनाने वाली salora को 1984 में खरीदा उस के कंप्यूटर बनाने वाली luxer ab को 1985 और 1987 को एक और टीवी बनाने वाली oceanic को खरीदा जिस के बाद nokia टीवी बनाने वाली तीसरी सब से बड़ी कम्पनी बन गई ।

उस के बाद nokia ने मोबाइल फोंस की दुनिया में क्रांति लाने के लिए आपने कदम बड़ा लिए थे  1982  को nokia ने फ़ोन बनाने वाली कम्पनी mobira को खरीद कर अपना पहला फ़ोन लांच किआ जिस का नाम mobira senator था उस के बाद nokia मोबाइल इंडस्ट्री में सब को पीछे छोडती गई 1990 को nokia ने सीमर कम्पनी के साथ मिल कर पहला gsm network मोबाइल लांच किया जिस का नाम mobira cityman था जिस से दुनिया का पहला gsm काल फिनलैंड के प्राइम मिनिस्टर ने 1 जुलाई 1991 को किया , उस के बाद nokia मोबाइल फोंस की नंबर वन कम्पनी बन गई 1992  में nokia ने अपना पहला फ़ोन nokia 1011 लांच किया , इस के बाद nokia motorola को छोड़ कर सब से ज्यादा बिकने वाला ब्रांड बन  गिया ।


इस तरा nokia ने 2003 में अपना सब से ज्यादा बिकने वाला फ़ोन nokia 1100 लांच किया जो हम में से बहुत से लोगो का पहला मोबाइल वी रहा है आगे चल कर nokia ने अपना पहला केमरा फ़ोन nokia 7650 लांच किया उस के बाद nokia ने अपने केमरे के साथ कई मोडल लांच किए।


इन सब फ़ोन के कामजाब होने के बाद अब बाज़ार में samsung और apple वी आ चुकी थी जिस से nokia के बुरे दिन शुरू हो गे जिस से nokia की मार्किट बहुत ज्यादा कम हो गई उस के बाद nokia ने 2011 में microsoft से मिल कर nokia विंडो फ़ोन lumia 800 लांच किया जिस से nokia को कोई खास फ़ायदा नहीं हुआ जिस से nokia को बहुत घाटा हुआ और इस के बाद nokia ने अपने कई विंडो फ़ोन लांच किए जो लोगो को बिलकुल बी पसंद नहीं आए जिस से nokia का बहुत नुक्साम हुआ और कम्प्य बैंक क्रुफ्ट हो चुकी थी जिस के चलते 2013 में microsoft ने nokia को खरीद लिया जिस के चलते microsoft ने वी बहुत सारे फ़ोन लांच किए जो गाहको का मन लुभाने में असफल रहे ।


तो दोस्तों यह थी nokia की जर्नी जैसे के मैंने पहले वी आप को बताया के बहुत से लोगो का पहला फ़ोन होने के कारण लोगो का nokia से एक emotionly attacment बी है जिस से लोग nokia का साथ देने के लिए आज वी तयार हैं बस जरूरत है nokia को अपना बढिया फ़ोन बाज़ार में उतरने की . अगर आप को हमारा आर्टिकल अच्छा लगा तो शेयर जरुर करे । 

Saturday, 14 October 2017

Rohingya musilman issue/Crisis in hindi(रोहिंग्या मुसिल्मानो की सम्म्साय)

                 

Rohingya musilman issue/Crisis in hindi

दोस्तों आप ने अख़बार और न्यूज़ में रोहिंग्या मुस्लिमानो के बारे में पढ़ा होगा हर अखबार के पहले पेज पे रोहिंग्या मुसिल्मानो के बारे में कुछ न कुछ लिखा होता है ,आज के टाइम यह issue भारत , चीन , बांग्लादेश , थाईलैंड , ऑस्ट्रेलिया के लिया बहुत बड़ी समम्स्या बना हुआ है

 आने वाले exam में रोहिंग्या मुसिलाम्नो पर कुछ सवाल वी पूछे जा सकते हैं तो इस लिया आज हम आप को बताएँगे के रोहिंग्या मुसिल्मान कौन है और इन को म्यांमार आपने देश से क्यों निकाल रहा है इस का भारत पर क्या असर होगा और इस मुश्किल को कैसे हल किआ जा सकता है।


History ऑफ़ रोहिंग्या :सब से पहले हम जानते हैं के रोहिंग्या कौन हैं , रोहिंग्या एक मुसिलमन जाती है जो के सुन्नी धर्म को belong करती है यह म्यांमार का रिहान एरिया जो के बंगाल के बॉर्डर पर लगता है वहाँ रहते है सब से पहले यह रिहान में राज करने वाले राजा “ नारा मेखला ‘ के दरबार में नौकर थे उस वक़्त के राजाओ ने अपने दरबार में मुस्लिम पदवियो को रखा जिस लिए यह रेहान में बढ़ते गए ।


Rohingya musilman issue/Crisis in hindi


साल 1785 को वर्मा पर बुधो का हमला हुआ उनो ने रिहान में रहने वाले मुस्लिमानो को मारा और बाकी को वहाँ से खिदेड दिया इस दोरान करीब 35000 लोक बंगाल चले गए उस के बाद 1826 रिहान अंग्रेजो की 

कब्ज़े में आ गिया उनो ने बंगाल से इन को बुलाया और रिहान में वसने को कहा जिस की वजेह से बड़ी तदार में मुसिलमन वहा पहुंचे और म्यांमार के रिहान स्टेट में रहने लगे जिस की वजेह से वहां 

के बुधि इन को नफरत की निगाह से देखने लगे उस के बाद दूसरा विशव युद्ध हुआ जिस से म्यांमार में जापान का दबदबा बड़ा और अंग्रेज रिहान को छोड़ गे जिस के बाद वहां के लोगो

 ने रिहान के मुसिल्मानो को मारना शुरू  कर दिया  रोहिंग्या मुसिलमन यह चाहते थे के यहाँ अंग्रेज दुबारा आ जाए तो उन के लिए अच्छा होगा जिस लिए उनो ने जापानी सैनको की जासूसी

 करनी शुरू कर दी जब जापान को इस चीज़ का पता चला तो वहां अतयाचार और बढ़ गे और लाखो मुसिल्मान एक वर फिर बंगाल चले गे 1962 में इन मुसिल्मानो ने अपने लिए अलग रोहिंग्या देश की मांग की जो वहां की सरकार ने नहीं मानी तब से यह बिना देश वाले बन कर घूम रहे हैं।

1982 में म्यानमार की सैनको ने इन के सारे अधिकार छीन लिए इनको मारा गिया rape हुए घरो को जलया गया और यह तब से लेकर अबतक चला आ रहा है ।

कुछ समय पहले रोहिंग्या मुसिल्मानो की एक ग्रुप “ islamist jihadist” ने म्यांमार की फ़ौज की एक पोस्ट पे हमला कर दिया इस के बदले में उन की फ़ौज ने रेहान के मुसिल्मानो पर हमला कर दिया उन के घर जल्ला दिए  जिस के कारण अब फिर से वोह लोग रेहान छोड़ कर बंगाल और भारत में घुसने शुरू हो गे।


भारत पर असर : कुछ समय पहले भारत में bhodhgya जो के बुध धर्म का मंदिर है वहाँ बुम्ब धामाका हुआ जिस ने इस की जिमेवारी ली थी उस ने कहा था के हमारे रोहिंग्या में मुसिल्मानो पर हमले हो रहे हैं जिसका बदला लेने के लिए हम ने यह किआ जिस के लिए यह भारत की secourty के लिए खतरा है इस के इलावा हजारो में मुसिल्मान भारत आ रहे हैं जिन के लिए खाना और रहने को भारत की तरफ दे दिया जाता है जिस से हमारी इकॉनमी पर असर पढता है।  


भारत इस मुश्किल को कैसे हल कर सकता है : भारत एक ऐसी टीम बना सकता है जो म्यांमार की सरकार के साथ मिल के काम करे और इस को solve करे ।
भारत इस issue को ASEAN और BIMSTEC में उठाए और म्यांमार पर दबाव डाले इस issue को हल करने का ।
भारत में बुध धर्म वी है और यहाँ बोधगया में म्यांमार से हजारो सैलानी आते है और बुधिसम का जनम वी भारत में हुआ और भारत और म्यांमार के बुद्धिस्ट नेताओ की मीटिंग होती है जिस के लिए भारत के बुद्धिस्ट नेता म्यांमार पर इस issue को हल करने का दवाब दाल सकते हैं।



  दोस्तों अगर आप को हमारा यह आर्टिकल अच्छा लगा तो बेनंती है के इस को शेयर जरुर करे , धन्यवाद

Monday, 9 October 2017

ISIS क्या है इस के लड़ाके क्या चाहते है (History of ISIS in hindi)

      ISIS क्या है इस के लड़ाके क्या चाहते है (History of ISIS in hindi)

दोस्तों आप सब ने isis के बारे में सुना होगा उन की विडियो इन्टरनेट पे काफी विअरल होती है। जिस में वोह लोगो को बहुत बेरहमी से मारते दिखाए गए है, तो चलिए आज हम आप को isis के बारे में बताउगा के यह कौन है और यह क्या चाहते है ।

 History of ISIS :जब नाटो आर्मी इराक में सुदाम हुसैन के खिलाफ अपना अभयानं चला रही थी तभी 2006 में इराक में एक ग्रुप बना जिस का नाम अल्कैदा इराक था और इस आंतकवादी ग्रुप का नेता अब्भु बक्कर अल बगदादी था । 2009 में बगदादी सीरिया आया उस समय सीरिया में ग्रेह युद्ध चल  रहा था । उस समय यह ग्रुप इतनी पॉवर में नहीं था मगर 2011 में नाटो सेना ने सुदाम हुसैन को फांसी दे दी और इराक आजाद हो गया मगर इस लड़ाई में इराक बिलकुल ख़तम हो चूका था , अमेरिका ने अपनी सेना वापस बुला ली सेना के वापस जाते ही यह ग्रुप पॉवर में आ गया । बगदादी ने एस का नाम अब ISI रख लिया यानि इस्लामिक स्टेट ऑफ़ इराक , बाद में बगदादी ने इस का नाम ISIS यानि इस्लामिक स्टेट इराक एंड सीरिया क्र दिया। 2013 को सीरिया की अल्कैदा ग्रुप ने isis को समर्थन दे दिया जिस से यह ग्रुप बना और पॉवर में आया।



हथिआर और ट्रेनिग: जून 2013 को सीरिया की आर्मी ने यह ऐलान कर दिया के उस के पास हथ्यार नहीं है और वोह बागीओ से एक महीने में हार जाएगे , इस ऐलान के एक हफ्ते बाद अमेरिका , इजराइल , जॉर्डन , तुर्की , क़तर देशों ने सीरिया को हथ्यार पैसा और ट्रेनिंग देनी शुरू कर दी । इस से ही isis के दिन बदल गे वोह हथ्यार  एक साल में isis के पास चले गे isis के कई लड़ाके यहाँ से ट्रेनिंग वी ले चुके थे , और कुछ आर्मी के लोग वी isis में शामल हो गे । अब isis के सभी आधुनिक हथ्यार इकठा हो गे थे और US की एक रिपोर्ट के मुतावक isis में 20000 से 30000 लड़ाके भारती हो चुक्के थे ।

जून 2014 को isis ने पहली वर अपना एक विडियो जारी किआ जिस में उनो ने क्रिश्चिन लोगो को मारा और दुनिया का ध्यान अपनी तरफ खीचने के लिया मौत के नए नए तरीके इस्तमाल किए , और धीरे धीरे सीरिया और इराक के इलाको पर कब्ज़े करने शुरू कर दिए।

History of ISIS in hindi



आमदनी: आप लोग सोच रहे होगे के isis एक तरफ इराक सीरिया आर्मी से लड़ रहा है दूसरी तरफ नाटो फ़ौज से तो उन के पास इंतना पैसा कहा से आता है , हम आप को 2014 के कुछ आंकड़े दिखाते है , isis की एक दिन की कमाए 10 करोड़ थी।
isis के पास सीरिया के 8 बड़े उर्जा प्लांट थे ।

isis एक दिन में 34 से 40 हज़ार बैरल कचा तेल वेचता था ।
isis के पास 10 बड़े तेल की खूहे थे जिस की तस्करी वोह इराक , जोर्डन , तुर्की के ब्लैक मार्किट में करता था ।
इस के इलावा लूट , फिरोती से वी उस को बहुत अमदन होती थी ।


2014 में isis ने 600 मिलियन डोलर की कमाई की , जिस में से 500 मिलियन उनो ने बेंको से लुटे थे , एक रिपोर्ट के मुताबक isis ने साल 2014 में 100 मिलियन डोलर का कचा तेल वेचा ,  20 मिलियन लोगो को बंधिक बना के , और कुछ खाड़ी देश और वह के अमीर शेख वी इन की मदद करते थे

 , isis अपने हरेक लड़ाके को महीने का 500 डोलर तनखाह  वी देता था और विदेशी लड़को के लिए यह 800 डालर थी ।
दोस्तों हम आप को बता दे के इस लड़ाई में अमेरिका अबतक 3 बिलियन डोलर खर्च कर चूका है , हर रोज अमेरिका 9 मिलियन डोलर खर्च कर रहा है । 

यह क्या चाहते है : दोस्तों यहाँ इराक में काफी इलाका शिया मुसलमानों का है मगर वह सरकार सुन्नी चला रहे है। वह राष्तेर्पति बसर अल असद की सर्कार है जिस को अमेरिका मदद करता है जिस से वह के लोग खुश नहीं है इसी तरेह सीरिया में लोगो के धरम के उल्ट सर्कार है जिस से उस में हर चीज़ को लेकर काफी मत्त्भेद है जिस से यह उन की आज़ादी की लड़ाई बन गई है ।

तो आपको हमारा आर्टिकल कैसा लगा हमे कमेंट करके जरुर बताए धन्यवाद!