Monday, 6 August 2018

History of Saragarhi battle in hindi ( सारागढ़ी की लड़ाई का इतिहास)

History of Saragarhi battle in hindi ( सारागढ़ी की लड़ाई का इतिहास) :  दोस्तों अगर आपसे दुनिया में किसी ऐसी लड़ाई के बारे में पूछा जाए जिसमें मुट्ठी भर सैनिको ने हजारों की तादाद में दुश्मन सेना को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया हो
 तो आप में से बहुत लोग ग्रीक स्पार्टनस और परशियन की लड़ाई के बारे में बताएंगे। उसके पीछे का कारण यह है कि उस पर 300 मूवी बन चुकी है।

History of Saragarhi battle in hindi ( सारागढ़ी की लड़ाई का इतिहास)

       सिर्फ 300 ग्रीक स्पार्टन्स ने हजारों की गिनती में परशियन सैना का मुकाबला किया और अपने देश का सर झुकने नहीं दिया ,अगर मैं कहूं कि इससे भी भयानक लड़ाई हमारे सिख सैनिकों ने लड़ी है ।

तो आपको हमारे सिख रेजिमेंट सेना पर गर्व महसूस होगा ।हम में से बहुत लोग इस महान गाथा के बारे में नहीं जानते क्योंकि हम को किताबों में इसके बारे में नहीं पढ़ाया जाता। आज मैं आपको 21 उन महान शूरवीरो के बारे में बताऊंगा जिन्होंने अपने देश के लिए अपना बलिदान दे दिया।


History of Saragarhi battle in hindi ( सारागढ़ी की लड़ाई का इतिहास)

यह बात है 1897 की जब भारत अंग्रेजों का गुलाम था लेकिन उस वक्त भारतीय सेना में 36 वी सिख रेजीमेंट की ड्यूटी सारागढ़ी के किला में थी। जो कि उस वक्त भारत में होता था और आज सारागढ़ी गांव पाकिस्तान में चला गया है।
उस वक्त अफगान पश्तून सेना इस किले को जीतना चाहती थी क्योंकि यह कला राजनीतिक दृष्टिकोण से बहुत महत्वपूर्ण था
क्योंकि यह किला दो और किलो के बीच में कम्युनिकेशन का काम करता था।
 भूगोलिक रूप से यह किला गुलिस्तान और लोखर्ट के बिल्कुल बीच में स्थित था जिससे तीनों किलो की सेना आपस में संपर्क कर पाती थी।
सितंबर 1897 को सारागढ़ी और उसके पास लगते कुछ इलाकों में कुछ लोगों ने अंग्रेजो के खिलाफ  विद्रोह कर दिया जिस के चलते स्थानीय आफरीदी और अफगानों के साथ मिल गए।

Battle of Saragarhi 

12 सितंबर 1897 की सुबह को अफगानों ने सारागढ़ी पर हमला कर दिया। सारागढ़ी के किले को 10000 अफगान सैनिकों ने चारों तरफ से घेर लिया। किले को चारों तरफ से घिरा देख वहां की सिग्नल इंचार्ज गुरमुख सिंह ने गुलिस्तान किले में मौजूद अंग्रेजी अफसर कर्नल होफटन को मदद के लिए संदेश भेजा।

लेकिन कर्नल की तरफ से यह संदेश मिला के इतनी जल्दी सारागढ़ी में इतनी सेना नहीं भेजी जा सकती कर्नल ने 36वी सिख रेजिमेंट के जवानों को किला छोड़ कर किसी सुरक्षित जगह पर जाने के लिए कहा।
  लेकिन किला चारों तरफ से घिरा होने के बावजूद कर्नल ने उन्हें आत्म समर्पण करने को कहा।

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लेकिन उन 21 सिख सैनिकों ने दुश्मन के साहमने घुटने टेकने की बजाय हज़ारों की गिनती में मजूद दुश्मन सेना से लड़ने का हिम्मत भर फैसला लिया।
सब से पहले नायक लाल सिंह और भगवान सिंह ने किले से बाहर निकल कर अचानक ही दुश्मनो पर ताबड़तोड़ गोलियां चला दी और आगे बढ़ते हुए वीरगति पा गए।
उस के बाद सैनिक कमांडर ईश्वर सिंह ने बाकी बचे सिख सेनको के साथ मिल कर " बोले सोह निहाल" के जयकारे लगा कर दुश्मन पर गोलियां चलना शुरू कर दिया। 

इस को देख कर अफगान सेना को लगा कि किले के अन्दर बड़ी तादाद में सेना है। जिस लिए उनोह ने किले के दरवाजे को तोड़ने की कोशिस की मगर असफल रहे। 

History of Saragarhi battle in hindi ( सारागढ़ी की लड़ाई का इतिहास)

बाद में उनोह में किले की एक दीवार को गिरा दिया और किले में घुस गए । सिर्फ 19 सिख सैनिको सुबह से ले कर देर रात तक लड़ते रहे और सभी के सभी सैनिक शहीद हो गए।

सुबह होते ही भारतीय ब्रटिश सेना ने अपनी सेना को सारागढ़ी में उतार दिया और किला वापस जीत लिया।

इस लड़ाई में अफगान सेना किला जीतने में असफल रही जब यह खबर यूरोप पहुंची तो किसी ने भी इस पर यकीन नहीं किया।

 लेकिन जब कर्नल होफटन ने यह पूरी कहानी संसद में सुनाई तो सभी ने इन 21 सिख सेनको को सलाम किया। 

Some Fact About Battle of Saragarhi 


  • सारागढ़ी की इस लड़ाई को UNESCO ने दुनिया की 5 सब से बड़ी लड़ाइयों में शामिल किया है।


  • इन 21 सैनिको को मरण उपरन्त इंडियन आर्डर ऑफ मैरिट से नवाजा गया है। जो के वीर चक्कर के बराबर है।


  • आज भारतीय सेना की सिख रेजिमेंट हर साल 12 सितम्बर को 'सारागढ़ी दिवस' मनाती है।


  • ब्रिटिश अमेरिका और यूरोप के कई देशों में स्कूल में सारागढ़ी की लड़ाई के बारे में पढ़ाया जाता है।


  • सारागढ़ी की लड़ाई पर आधारित एक बॉलीवुड मूवी "सारागढ़ी" भी बन चुकी है।

तो दोस्तों यह तो थी हमारे आर्मी के 21 सिख सैनिकों की बहादुरी की कहानी आज भी इनके जैसे हजारों सैनिक सीमा पर अपना बलिदान दे रहे हैं। हम सबको हमारी सेना का सम्मान करना चाहिए क्योंकि इनकी कुर्बानियां की बदौलत ही आज हम अपने घर में अपने परिवार के साथ एक सुखी जिंदगी जी रहे हैं।

तो दोस्तों आपको हमारा आर्टिकल History of Saragarhi battle in hindi ( सारागढ़ी की लड़ाई का इतिहास) कैसा लगा हमें कमेंट करके जरूर बताएं और आगे से हमारे आर्टिकल की जानकारी लेने के लिए हमारा Facebook पेज लाइक करें अपना कीमती समय देने के लिए आपका धन्यवाद।

Friday, 3 August 2018

History of Qila Mubarak Fort Bathinda - किला मुबारक का इतिहास

History of Qila Mubarak Fort Bathinda - किला मुबारक का इतिहास:   बठिंडा का किला मुबारक भारत का सब से पुराना किला है। इस मे समय समय पर कई राजा महाराजा आए। सिखों के दसवें गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह भी इस किले में आए थे।
 
यह किला भारत पर होने वाले बड़े आक्रमणों का गवाह भी रहा है।
दिल्ली भारत की राजधानी होने के कारण उत्तर पश्चिम से हमलावर बठिंडा के रास्ते भारत पर हमला करते थे ।जिस से बचने के लिए उस समय के राजाओं ने इसका निर्माण करवाया।
History of Qila Mubarak Fort Bathinda - किला मुबारक का इतिहास


इसके लिए को रजिया सुल्तान किले के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि महारानी रजिया सुल्तान को इस किले में बंदी बनाकर रखा गया था।

आजकल पुरातत्व विभाग के सहयोग से इस किले का दोबारा निर्माण का काम चल रहा है। जिसके कारण इसके कई  हिस्सो को सैलानियो के लिए बंद कर दिया गया है।
किला मुबारक को लेकर इतिहासकारों के अलग-अलग मतभेद है

History Of Qilla Mubarak :



कहा जाता है कि किला मुबारक का निर्माण 90 ईस्वी से लेकर 110 ईस्वी के बीच कुषाण वंश के समय किया गया था।
राजा दाब ने उस समय के उत्तर पश्चिम के राजा कनिष्क के साथ मिलकर इस किले का निर्माण करवाया।

1000 ईस्वी में बाल आनंद के पुत्र भाटी राव ने इस किले पर हमला कर इसको जीत लिया। भाटी राव को ही बठिंडा का संस्थापक भी माना जाता है।


1189 मैं महमूद गजनबी ने इस किले पर हमला किया लेकिन इसके 13 महीने बाद ही पृथ्वीराज चौहान ने महमूद गजनबी से इसे जीत लिया 1 साल तक पृथ्वीराज चौहान का इस किले पर कब जा रहा।

1706 मैं सिख धर्म के संस्थापक श्री गुरु गोविंद सिंह जी इस किले में आए ।

1754 में पटियाला के लोकप्रिय राजा अल्लाह सिंह ने इस किले पर हमला कर इसे जीत लिया।

1835 महाराजा कर्मा सिंह में इस किले में गुरदुवारा का निर्माण कराया।

कहा जाता है कि उत्तर पश्चिम से होने वाले हम लोगों से बचने के लिए बठिंडा सुनाम और कैथल में किलो का निर्माण कराया गया था।
एक बार बाबर इस किले में आया जो अपने साथ कुछ तोपें भी लेकर आया था। जिस में से 4 तोपें आज भी यहां मजूद हैं। यह तोपें सोने, चांदी , लोहा और पीतल की बनी हैं।

History of Razia Sultan :


किले का सबसे दिलचस्प इतिहास रजिया सुल्ताना के साथ जुड़ा है। कुतुबुद्दीन ऐबक की जगह पर रजिया सुल्तान 1230 में दिल्ली की गद्दी पर बैठी थी। भारत के इतिहास में रजिया सुल्तान पहली ऐसी महिला है जिसने दिल्ली सल्तनत पर राज किया है।


बठिंडा के राजा अल्तुबनी ने रजिया सुल्तान के खिलाफ विद्रोह कर दिया इस विद्रोह को दबाने के लिए रजिया ने बठिंडा पर हमला किया। जिसमें उसे बंदी बना लिया क्या और उसका गुलाम प्रेमी याकूब मारा गया और रजिया को किले में बंदी बना दिया गया।

14 अक्टूबर 1240 को रजिया की मौत हो गई। रजिया की मौत को लेकर इतिहासकारों में मतभेद है कुछ इतिहासकारों का कहना है कि रजिया ने किले की दीवार से कूदकर जान दे दी थी।


कुछ इतिहासकारों का कहना है कि बठिंडा का राजा रजिया का बचपन का दोस्त था। रजिया के अपने गुलाम के साथ प्रेम संबंध को देखकर ही उसने विद्रोह किया था लेकिन रजिया के गुलाम प्रेमी की मौत के बाद रजिया ने बठिंडा के राजा के साथ विवाह कर लिया और उन दोनों को कैथल के पास लुटेरो के गिरोह ने मार दिया था।

1253 में बठिंडा का किला रजिया के भाई सुल्तान मसीरुदीन मुहमद शेरखान ने अपने कब्ज़े में ले लिया था। उस ने किले की पुनर निर्माण का काम भी चलाया।

दोस्तो हमे उम्मीद है के हमारे द्वारा दी गई जानकारी आपको अच्छी लगी होगी जय जानकारी हमने इंटरनेट से हासिल की है । अगर आप को Qila Mubarak के बारे में और जानकारी है जिसको हमने आर्टिकल में नहीं शेयर किया तो कृपया हमें कमेंट करके जरूर बताएं और आप ने अभी तक किला मुबारक विजिट किया है या नहीं हमें कमेंट में यह भी बताएं अपना कीमती समय देने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद।

Friday, 27 July 2018

Hanging punishment rules-फांसी देने के नियम

हमारे देश मे फांसी देने की सज़ा अभी बरकरार है। बहुत सारे देशो में इस पर रोक लगा दी गई है। जब कोई अपराधी बहुत ज्यादा घिनोना अपराध करता है तो हमारे कानून के हिसाब से उस को फांसी की सज़ा सुनाई जा सकती है। 

Hanging punishment rules-फांसी देने के नियम
hanging punishmet rules


इस कि उदहारण हाल ही में हुआ निर्भया कांड है। 16 दिसम्बर 2012 की रात को बस में लड़की के साथ बलात्कार होता है। 29 दिसम्बर को उस लड़की की मौत हो जाती है। डॉक्टरों की रिपोर्ट में आता है के उस मासूम के साथ बलात्कार के साथ अनमनुखी विवहार वी किया गया । जिस के बाद उस की मौत हुई।
उस के बाद अदालत ने 4 दोषियो को फांसी की सज़ा सुना दी  जिस में मुख्य दोषी राम सिंह ने जेल में ही आत्म हत्या कर ली।
फांसी की सज़ा बहुत की कम केसों में दी जाती है। ज्यादातर केसों में फांसी की सज़ा को उम्रकैद में  बदल दिया जाता है।
फांसी की सज़ा देते समय जेल प्रशासन के कुछ नियम होते हैं तो चलिए हम जानते हैं के वोह नियम क्या है।

फांसी देने के नियम

  •  अपराधी को फांसी सूरज उदेह होने से पहले क्यों दी जाती है ?

जिस अपराधी को फांसी की सज़ा होती है वोह आत्मिक रूप से उस दिन ही मर जाता है जिस दिन फांसी की सज़ा का ऐलान होता है। 

     हमारे कानून के हिसाब से अपराधी को ज्यादा इंतज़ार कराना ठीक नही समझा जाता । इस लिए उस तरीक की सुबह ही फांसी दी जाती है।

दूसरा कारण है के फांसी के बाद उस अपराधी के परिवार वालों को शव का अतन्म संस्कार करने का समय मिल जाता है।

तीसरा कारण यह है के फांसी देने की सज़ा को सुबह इस लिए निपटा दिया जाता है त जो जेल प्रशासन के दूसरे कामों में कोई बदलाव न हो।

  •  जज पेन की निब क्यों तोड़ता है?

फांसी की सज़ा सुनाना जज के लिए भी बहुत कठिन होता है । आगे से ऐसा जुर्म न हो जज इस लिए पेन की निब को तोड़ देता है।

दूसरा बड़ा कारण यह है के भारत के कानून के मुताबिक अगर एक वार जज ने फांसी की सज़ा सुना दी ,
 तो उस के बाद जज के पास भी यह अधिकार नही है कि वो सज़ा को बदल सके जा उस पर दुबारा सुनवाई कर सके। इस लिए जज Death लिखने के बाद पेन की निब तोड़ देता है।

  • फांसी देने से पहले जल्लाद अपराधी के कान में क्या कहता है?

किसी भी जल्लाद के लिए किसी की जीवन लीला समाप्त करना आसान नही होता । जल्लाद फांसी देने से पहले अपराधी से अपने इस काम के लिए माफी मांगता है।
 " हिन्दू को नमस्ते मुस्लिम को सलाम , हमे माफ करना भाई हम तो हैं हुक्म के गुलाम " यह शब्द कह कर जल्लाद अपराधी को फांसी दे देता है।

  • अपराधी को कितना समय फांसी के फंदे पर लटकाया जाता है?

जब अपराधी को फांसी दी जाती है तो एक डॉक्टरों की टीम से वक़्त वहाँ मजूद रहती है।
 अमूमन अपराधी को 10 मिंट तक फंदे पर लटकाया जाता है।
 उस के बाद उत्तर लिए जाता है , मगर उस से पहले डॉक्टरों की टीम Check करती है। जब डॉक्टर अपराधी को मरा घोषित कर देते हैं तो अपराधी को फंदे से उतार लिया जाता है।

  • फांसी से पहले अपराधी आखरी इच्छा में क्या मांग सकता है ?

हमारे कानून के हिसाब से अपराधी को फांसी देने से पहले उस की आखरी इच्छा पूछी जाती है। 
अक्सर दोषी अपनी आखरी इच्छा में परिवार वालो से मिलने की इच्छा प्रगट करते हैं।
 मगर फिर भी अगर कोई अपराधी कोई और इच्छा रखता है तो उसकी इच्छा पूरी करने से पहले जेल प्रशासन अपने मेनू में देखता है। जेल प्रशासन वही इच्छा पूरी कर सकता है जो उस के मेनू में है।

दोस्तो हमे उम्मीद है आपको हमारे दुवारा दी गई जानकारी अछि लगी होगा। कमेंट करके आप हमारा मनोबल बढ़ा सकते हैं। आगे ऐसे ही आर्टिकल पढ़ने के लिए हमारा फेसबुक पेज जरूर लाइक करे।

Sunday, 15 July 2018

What is Netflix and its history in hindi

What is Netflix and its history in hindi

दोस्तो आपने इंटरनेट और बड़े शहरों में जगह जगह पर नेट फ्लेक्स के बैनर लगे देखे होंगे TV पर भी Netflix की ऐड हर वक़्त आती है। आखिर क्या है यह Netflix और हम कैसे ऐसे इस्तेमाल कर सकते हैं। आज हम आप को Netflix और Youtube में क्या फरक है हम यह भी बताएंगे।
What is Netflix and its history in hindi
netflix


History of Netflix:

Netflix ने अपनी सर्विस 1997 में शुरू की थी। उस वक़्त यह कम्पनी DVD कराए पर देने का काम करती थी। उस कुछ समय बाद 2007 में Netflix ने अपनी एक सर्विस और शुरू की जिस का नाम था Service on dimand
 इस मे आप अपनी पसंद की फ़िल्म जा सीरियल इन को फ़ोन कर टेलीकास्ट करा सकते थे। 2015 में इस ने अपनी पकड़ और ज्यादा मजबूत करने के लिए इंटरनेट पर अपनी सर्विस शुरू की। जिस में यह लोग किसी मूवी जा सीरियल को खरीद कर अपने प्लेटफॉर्म पर दिखाते हैं।

What is Netflix orignal :

 जैसा कि हमने बताया के नेटफ्लिक्स  प्रोडक्शन कंपनी से कोई मूवीज टीवी सीरियल खरीद कर अपने प्लेटफार्म पर दिखाता है इसके साथ ही नेटफ्लिक्स  अपना खुद का कंटेंट तैयार कर अपने प्लेटफार्म पर दिखाता है उसे Netflix Orignal कहा जाता है।

जैसे के Stranger Things , Master of None यह content नेटफ्लिक्स का अपना खुद तयार किया हुआ है। इसे हम नेटफ्लिक्स ओरिजनल कहेंगे ।


Netflix in India :

 पहले नेटफ्लिक्स भारत के लिए लॉन्च नहीं किया था लेकिन भारत में जियो के आने के बाद जैसे नेट की स्पीड बड़ी और इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले लोगों की संख्या बढ़ी तो नेटफ्लिक्स ने इसे भारत मे भी लांच कर दिया। इसके लिए हाल ही में Netflix के सीईओ ने मुकेश अंबानी का धन्यवाद भी किया था। 

हाल ही में नेटफ्लिक्स  ने भारत के लिए अपनी खुद की टीवी सीरीज Sacred games बी तैयार की है जिसमें सैफ अली खान सुरवीन चावला और नवाजुद्दीन सिद्दीकी जैसे बड़े सितारे काम कर रहे हैं।

Netflix Subscription :

 जय के पेड़ प्लेटफॉर्म है जहां पर आपको हर महीने सब्सक्रिप्शन देना पड़ता है हालांकि पहले 1 महीने के लिए यह सबके लिए फ्री है मगर उसके बाद नेटफ्लिक्स के तीन अलग अलग पैक हैं जिसमें बेसिक ₹500 और स्टैंडर्ड के लिए आपको ₹650 और आखिर में प्रीमियम पैक के लिए ₹850 देने होंगे।

 बेसिक और स्टैंडर्ड पैक में आपको अल्ट्रा HD नहीं मिलेगा इसके साथ बेसिक में आप एक ही जगह पर मूवी या सीरियल का आनंद ले पाएंगे मतलब के आप जा तो अपने मोबाइल में देख सकते हो या TV या लैपटॉप में। इसके साथ स्टैंडर्ड में आप दो जगह पर एक साथ वीडियोस का नजारा ले सकते हो ।इसके साथ ही प्रीमियम पैक में आप चार जगह पर बैठकर एक ही सब्सक्रिप्शन पैक पर नेटफ्लिक्स के कंटेंट को देख सकते हो।

Difference between youtube and Netflix :


Youtube  एक पब्लिक प्लेटफॉर्म है  इस पर कोई वि अपना वीडियो बना कर अपलोड कर सकता है मगर Netflix  पर ऐसा नहीं होता नेटफ्लिक्स पर हर कोई वीडियो अपलोड नहीं कर सकता , इस पर हम वही देख सकते हैं जो नेटफ्लिक्स वाले हम को दिखाना चाहते है। 

दोस्तों आप को इन में से कौन सा वीडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म अच्छा लगता है हमे कमेंट कर जरूर बताए 

Saturday, 14 July 2018

Why Apple i Phones are so expensive or coustly in india (hindi)

Why Apple i Phones are so expensive or costly in India (Hindi) 

दोस्तो हालहि में apple ने अपना फ़ोन I Phone X लांच किया था। जिस की कीमती भारतीय बाजार के हिसाब से लगभग 90 हज़ार के करीब थी। इस से पहले आने वाले i phones की कीमत भी दूसरे फ़ोन्स के हिसाब से बहुत ज्यादा थी। तो इन को देखते हुए आप सभ के मन मे भी यह ख्याल आया होगा के आखिर apple के फ़ोन्स में ऐसा क्या होता है जिस से इन की कीमत इतनी ज्यादा हो जाती है।
आज हम आप को इन सवालों के जवाब देने वाले हैं।
why i phone apple so expensive or coustly
i phone 7

दोस्तो आप जान कर हैरान हो जाएंगे के i Phones का लोगो मे इतना ज्यादा क्रेज़  है के चीन में एक शख्श ने आई फ़ोन टेन खरीदने के लिए अपनी किडनी वेच दी । इस से पहले एक खबर अमेरिका से आई थी के अमेरिका में एक शख़्स ने आई फ़ोन 6 लेने के लिए अपना घर वेच दिया था।


तो यह तो हो गई apple के क्रेज़ की बात अब हम आप को बताते हैं के एप्पल के प्रोडक्ट इतने महँगे क्यों होते हैं। असल मे इस के पीछे कोई एक कारण नही है , कई ऐसे कारण हैं जिन के चलते इन प्रोडक्ट की कीमत काफी ज्यादा हो जाती है।

Research and Development :

इस कंपनी के समान का इतना महँगा होने के पीछे सब से बड़ा कारण Research and development है। apple हमेशा ही टेक्नोलॉजी की दुनिया मे कुछ नया करने की वजह से जानी जाती है। अगर हम इन के फ़ोन्स में देखे तो सब से पहले Fingerprint sensor , उस के बाद Dual lens cemara और अब Face id sensor इन सब की खोज सब से पहले एप्पल ने ही कि थी। इस के बाद दूसरी कंपनिया ने एप्पल को कॉपी किया।

इस लिए एप्पल अपना बहुत ज्यादा पैसा research के ऊपर खर्च करता है। जब एप्पल ने Dual lens केमरा तयार किया था तो 800 इंजीनियर की टीम इस पर काम कर रही थी।



Processor :

इस कंपनी के प्रोडक्ट का सबसे महंगा होने का दूसरा बड़ा कारण इसका प्रोसेसर है एप्पल अपने iPhone और टैबलेट में अपना खुद का प्रोसेसर देता है वहीं दूसरी तरफ Samsung और Nokia जैसी बड़ी कंपनियां किसी थर्ड पार्टी जैसे Snapdrogan  जा  Helio का प्रोसेसर  इस्तेमाल करती है । जिन के मुकाबले एप्पल का apple A बहुत ज्यादा Powerful होता है।

Retina Display :

Apple के फोन में कंपनी के द्वारा रेटिना डिस्प्ले दिया जाता है ।रेटिना डिस्प्ले एक बहुत ही हाई क्वालिटी का डिस्प्ले है जिसमें दूसरे डिस्प्ले के मुकाबले ज्यादा चमक होती है और इसमें सूरज की रोशनी में भी आसानी से देखा जा सकता है। असल में रेटिना डिस्प्ले में बहुत छोटे-छोटे पिक्सेल होते हैं जिससे इसमें देखना आसान होता है।


Customer satisfaction :

किसी भी कम्पनी के कामज़ाब होने के लिए यह बहुत जरूरी है के उस के Customer उस कम्पनी से संतुष्ट हो। एप्पल भी इसी स्ट्रैटजी पर काम करता है। जब भी किसी ग्राहक को कोई प्रॉब्लम आती है तो कम्पनी उस को जल्द से जल्द solve करती है और ग्राहक को अच्छा response देती है। इस के लिए कम्पनी को ज्यादा Employees की जरूरत रहती है।
जिससे कंपनी को अपने प्रोडक्ट ज्यादा कीमत पर वेचने पड़ते हैं।

Why i phone so costly in India:

भारत में Apple के प्रोडक्ट इसलिए ज्यादा महंगे होते हैं क्योंकि भारत में Custom duty, Central govt tex इसके अलावा State Govt tex लगते हैं। दूसरा भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले काफी कमजोर है जिसके चलते आई फोन की कीमत भारत में बहुत ज्यादा होती है।

                History of Nokia


हमें उम्मीद है दोस्तों आपको हमारा यह आर्टिकल अच्छा लगा होगा आप एप्पल का कौन सा प्रोडक्ट इस्तेमाल करती हैं हमें कमेंट करके जरूर बताएं अपना कीमती समय देने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।

Wednesday, 11 July 2018

How Internet work in hindi (इंटरनेट क्या है इस का मालिक कौन है)

How Internet work in hindi (इंटरनेट क्या है इस का मालिक कौन है)

दोस्तों आज के जमाने में हम 2 घंटे तक बिना कुछ खाए पिए तो रह सकते हैं मगर 2 घंटे इंटरनेट के बिना रहना बहुत मुश्किल है ।क्या आपने कभी सोचा है कि जो इंटरनेट आप रोजाना इस्तेमाल करते हैं वह काम कैसे करता है और इंटरनेट का मालिक कौन है ?
how internet work in hindi
Setup internet

आप में से बहुत लोग यह सोचते होंगे कि इंटरनेट सेटेलाइट के द्वारा काम करता होगा जा केबल के द्वारा काम करता होगा ।तो दोस्तों आज हम आपके इन सारे सवालों के जवाब देंगे और आपको बताएंगे के जो पैसा आप इंटरनेट इस्तेमाल करने के बदले Airtel, Idea जा Jio को देते हैं असल में वह पैसा किस के पास जाता है और कैसे यह पूरा नेटवर्क काम करता है।

How Internet work in hindi (इंटरनेट क्या है इस का मालिक कौन है)

पूरा इंटरनेट असल में तीन भागों में बटा हुआ है जिनके द्वारा हम इंटरनेट इस्तेमाल कर पाते हैं। आपको आसान तरीके से समझाने के लिए हम YouTube का उदाहरण लेते हैं जैसे कि आप अपने घर पर बैठे YouTube पर कोई वीडियो देख रहे हैं वह वीडियो आपको YouTube के सरवर से दिखाई जा रही है । तो दोस्तों जैसे कि आपको पता है कि YouTube का सर्वर अमेरिका में है और जिस कंपनी का इंटरनेट आप इस्तेमाल करते हैं जैसे कि Airtel, Vodafone जा Idea इन सब की पहुंच अमेरिका तक नहीं है ।मगर फिर भी आप वह वीडियो अमेरिका के सरवर से देख रहे हैं इसमें होता यह है के हमारी लोकल कंपनीज हमारा डाटा दूसरी बड़ी कंपनियों को दे देती हैं जो हमारे डेटा को चैन्नई जा मुम्बई तक पहुंचाती है और इंटरनेशनल प्रोवाइडर उस डेटा को आगे अमेरिका तक ले कर जाते हैं। जिनकी द्वारा हम पूरी दुनिया में कहीं भी कुछ भी देख सकते हैं।

Tier 1 : 


जैसे कि हमने बताया की इंटरनेट हमारे तक तीन भागों में से होकर आता है ।उनमें से टीयर वन में वह बड़ी कंपनी होती हैं जो अपने पैसे खर्च कर पूरी दुनिया मैं केवल के माध्यम से एक सरवर को दूसरे सरवर से जोड़ती है ।जैसे कि भारत में टाटा कम्युनिकेशन और रिलायंस जिओ हैं ।जिन ने समुंदर में अपनी खुद की केबल विशआई हुई है।  एक बार केबल बिछाने के बाद इंटरनेट बिल्कुल फ्री होता है बस खर्च उन केबल की रिपेयर का होता है जैसे समंदर में कोई केबल किसी शार्क ने काट दी तो यह लोग उसके साथ बैकअप के लिए कुछ और केवल बिछा कर रखते हैं।  जिससे वह कटी हुई केवल का डेटा ट्रांसफर करते हैं ।

यह जो केवल समंदर में बिछाई जाती है इसको Fiver optical cable  या   submarine केवल कहते हैं इस को बचाने के लिए काफी खर्च आता है। एक बार केबल बिछाने के बाद यह बड़ी कंपनियां उन केवल के माध्यम से जो ट्रैफिक जाता है उनका pr/gb के हिसाब से यह कंपनियां खर्च वसूलती है ।नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक कर आप पूरी दुनिया में बिछाई गई फाइबर ऑप्टिकल केबल को देख सकते हैं

Submarine Cable Map


Tier 2 :

 दूसरे नंबर पर वह बड़ी नेशनल कंपनी आ जाती है जो अपनी केवल पूरे देश में बिछा देती है। जिनके माध्यम से बड़े-बड़े शहरों को एक दूसरे से जोड़ा जाता है और उन सबको आखिर में उस पॉइंट पर जोड़ दिया जाता है जहां पर टीयर वन कंपनी में लिंक दिया था ।जैसे कि हमारे भारत में इंटरनेट का 95% ट्रैफिक मुंबई से होकर जाता है इसके अलावा भारत मे भी ऐसे कई सरवर है जिन तक पहुंचने के लिए टीयर वन की जरूरत नहीं पड़ती उन सबके लिए निक्सी नाम की एक कंपनी ने पूरे भारत के सर्वर को जुड़ा हुआ है।

how work internet
cable map

Read this Why jio so cheap ( Jio itna sasta kyu hai )


                 history of samsung in hindi

Tier 3:

  यह वो लोकल कंपनियां होती है जो Tier 2 से लिंक लेकर हमारे लोकल शहर में हमें इंटरनेट मुहैया करवाती है इनमें से जैसे conect, a t t, Countery link  जैसी कंपनियां जो इंटरनेट को हमारे PC या लैपटॉप तक पहुंचाती है ।ऐसे जब हम इंटरनेट पर कोई चीज़ देखते हैं तो हमारा लोकल इंटरनेट प्रोवाइडर हमारा डाटा नेशनल इंटरनेट प्रोवाइडर को भेज देता है और नेशनल इंटरनेट प्रोवाइडर उस डाटा को ऑप्टिकल केबल के के माध्यम से उस सरवर तक भेज देता है।

Owner of internet :

इंटरनेट का मालिक कोई नहीं है सबसे पहले Tier 1 कंपनियां इंटरनेट की खपत के हिसाब से टियर-2 टू से पैसे वसूलते हैं । जितने GB डाटा जिस कंपनी की केबल से गुजरा होता है वह पर जी बी के हिसाब से अपना खर्च वसूलती है ।उसके बाद टियर 2 कंपनियां भी इसी तरह टियर 3 से पैसे वसूलती है और आगे टियर 3 जो हमारे घर तक इंटरनेट पहुंचाता है वोह हम से पैसे वसूलता है । इस तरह यह पैसा 3 भागो में बांटा जाता है।


हमें उम्मीद है दोस्तों कि आपको समझ में आ गया होगा कि इंटरनेट काम कैसे करता है और इसका मालिक कौन है। आपको हमारा आर्टिकल कैसा लगा हमें कमेंट करके जरूर बताएं अपना कीमती समय देने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।

Tuesday, 10 July 2018

Sanjay dutt biography in hindi संजय दत्त का जीवन पिरचय

Sanjay dutt biography

दोस्तों आज हम जिस शख्स के बारे में बात करने जा रहे हैं उसको वक़्त और हालातों ने रियल हीरो से रियल विलेन बना दिया। दोस्तो मैं बात करने जा रहा हूं बॉलीवुड के जाने-माने अभिनेता संजय दत्त के बारे में।  संजय दत्त ने अब तक बॉलीवुड की कुल 190 फिल्मों में काम किया है जिसमें उन्होंने पुलिस गैंगस्टर और अलग-अलग रोल निभाए है और इसी एक्टिंग के कारण संजय दत्त लोगों में हरमन प्यारे हो गए ।
sanjay dutt biography in hindi
Sanjay dutt


                 Biography of Padman Anurachlam murnatham

मगर इसके साथ साथ वह विवादों मैं भी रहे है । जिन में से 1993 के मुम्बई हमलो में उन का नाम आना । जिस लिए अब उनकी लाइफ पर आधारित एक बॉलीवुड मूवी संजू वी चुकी है जिसमें रणबीर कपूर ने संजय दत्त का रोल निभाया है तो चलिए दोस्तों संजय दत्त की जीवन की कहानी को हम शुरू से जानते हैं।


Birth and Mother Father :

संजय दत्त का जन्म 29 जुलाई 1959 को मुंबई में हुआ। संजय दत्त के माता पिता बॉलीवुड के जाने-माने सितारे हैं। उनके पिता का नाम सुनील दत्त और माता का नाम नरगिस है। संजय दत्त ने अपनी स्कूली शिक्षा दा लॉरेंस स्कूल से की और उसके बाद वह आगे की पढ़ाई के लिए एलफिंस्टन कॉलेज गए।

sanjay dutt films :

क्योंकि संजय दत्त को एक्टिंग विरासत मैं ही मिली थी इसलिए उन्होंने सबसे पहले अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत 1972 में रेशमा और शेरा नाम की मूवी में बाल कलाकार के रूप में की।
मगर संजय दत्त को फिल्म में लीड रोल करने के लिए बहुत ज्यादा मेहनत करनी पड़ी और उनकी यह मेहनत 1981 में उनकी पहली फिल्म Rocky मैं दिखाई दी और यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर हिट रही।

इसके अगले ही साथ संजय दत्त की माता नरगिस की मृत्यु हो। गई जिससे संजय दत्त को बहुत भारी सदमा लगा इस दुख से उबरने के लिए संजय दत्त ने ड्रग्स का सहारा लेना शुरू कर दिया जिसके चलते संजय दत्त को पहली बार ड्रग्स रखने के जुर्म में जेल भी जाना पड़ा।


Persnol life :

संजय दत्त की पहली शादी रिचा से हुई लेकिन ब्रेन ट्यूमर के कारण 1996 में उनका देहांत हो गया ।उसके बाद संजय दत्त ने रिया पिलाई से शादी की लेकिन कुछ समय बाद दोनों का तलाक हो गया। 2008 में संजय दत्त ने मान्यता से शादी कर ली जिससे उनको दो जुड़वा बच्चे हुए जिसमें से ladaki  का नाम इकरा और लड़के का नाम शहरान है।


Case and Carrier :

संजय दत्त का कैरियर बहुत ही उतार चढ़ाव भरा रहा जिस के लिए उन्हें जेल के काफी चक्कर काटने पड़े। असल मे 1993 में मुम्बई में कुल 12जगहों पर  आतन्कवादी हमले हुए। जिन में 257 लोग मारे गए और 700 के करीब लोग जख्मी हुए ।

 संजय दत्त का नाम इस हमलो के साथ जुड़ा और कहा गया के जो हथ्यार आतंकवादियो के पास थे वो हथ्यार संयज दत्त के पास से आये थे। जिस के लिए संयज दत्त को लोगो का काफी गुस्सा भी झेलना पड़ा और इसी के कारण उन को 4 साल की सजा भी हुई।  मगर 1995 में उन्ह बेल मिल गई फिर 1997 से उनोह ने फिल्मों में दुबारा काम करना शुरू किया और कई हिट फिल्में की।

इसी के चलते 2006 में संजय दत्त को आतंकवादियों का साथ देने के जुर्म में निर्दोष पाया गया ।जिसमें वह बरी हो गए लेकिन अवैध हथियार रखने के लिए 2013 मैं उन्हें 5 साल की सजा हुई क्योंकि संजय दत्त कुछ समय पहले ही जेल में बता चुके थे जिसके लिए उन्होंने जेल में सिर्फ 42 महीने गुजारने थे ।संजय दत्त की जेल में अच्छा बर्ताव करने और नियमों का पालन करने के कारण उनकी सजा में से 102 दिन और कम कर दिए गए जिसके चलते 25 फरवरी 2016 को संजय दत्त को रिहा कर दिया गया।

Sanjay dutt biopic Sanju:

जैसा के हुम् ने पहले बताया के संयज दत्त की जिंदगी पर आधारित फिल्म संजू बन चुकी है जिस में संजय दत्त का रोल रणबीर कपूर ने बहुत ही अच्छे तरीके से निभाया है और लोगो ने भी रणबीर कपूर के इस रोल को काफी पसंद किया है। यह फ़िल्म हिट हो चुकी है।

दोस्तो संजय दत्त भले ही अपने जुर्म के कारण दोषी रहे हो मगर आज वो अपनी सज़ा काट चुके हैं। संयज दत्त का कहना है के अगर कोई वयक्ति अपने जुर्मों की सज़ा काट ले फिर वो दोषी नही रहता। दोस्तो आप को संयज दत्त की कौन सी फ़िल्म पसंद है हमे कमेंट करके जरूर बताए। आप का कीमती समय देने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।

Monday, 9 July 2018

Alfred Nobel Biography in Hindi अल्फ्रेड नोबेल की जीवनी

Alfred Nobel Biography in Hindi अल्फ्रेड नोबेल की जीवनी

दोस्तों आज मैं जिस सक्श की बात करने जा रहा हु शायद आप में से बहुत लोग उस के बारे में जानते वी होंगे . आज मैं बात करने जा रहा हु Alfred Nobal के बारे में ।
alfred nobal biography in hindi
Alfred nobal


आप को पता ही होगा के नोबल पुरस्कार दुनिया में सब से बड़ा पुरस्कार है , यह पुरस्कार दुनिया भर में शांति और परगति के क्षेत्र में काम करने वाले लोगो को दिया जाता  है , लेकिन आप को यह जानकार बहुत हैरानी होगी के शांति के लिए दिया जाने वाला यह पुरस्कार Dynamite की खोज करने वाले विज्ञानक अल्फ्रेड नोबल की याद में दिया जाता है , जिन के लोग अपने इस  अविष्कार की वजेह से बहुत नफरत करते थे और अल्फ्रेड नोबल को मौत का सुदागर नाम से पुकारते थे , आपको इस की पूरी कहानी हम शुरू से बताते हैं ।

Alfred Nobel Biography in Hindi अल्फ्रेड नोबेल की जीवनी


अल्फ्रेड नोबल का जनम 21 oct 1833 को स्वीडन में हुआ , अल्फ्रेड नोबल के पिता पहाड़ो से पत्थर तोड़ कर पुल बनाने का काम करते थे , मगर स्वीडन में काम की कमी होने के कारण अल्फ्रेड का परीवार रूस के सेंटपेतेर्ब्र्ग में आ गया , यहाँ आ कर अल्फ्रेड का परिवार रूस की सर्कार के लिए बंदूक में पाए जाने वरूद बनाया करते थे ।

फक्टेरी खोलने के कुछ समय बाद क्रीमिया का युद्ध शुरू हो गया जिस में बरूद मांग तेज़ी से बढ़ गई और अल्फ्रेड के पिता का कारोबार तेज़ी से चल पढ़ा , और उन के पास बहुत सारे पैसे बी हो गए , जिस से अल्फ्रेड के पिता ने अल्फ्रेड की पढाई के लिए घर में अच्छे टीचर रख लिए जिस से अल्फ्रेड को chimistery में अपनी अछि पकड़ बना ली , उस के अल्फ्रेड अमेरिका अपनी अगली पढाई के लिए चले गे ।

अपनी पढाई पूरी करने के बाद अल्फ्रेड पेरिस आ गे यहाँ पर वोह अस्कानियो से मिले जिनो ने तीन साल पहले ही Nitroglycerin की खोज की थी , यह एक पैसा विस्फोटक था जो वरूद से कही जायदा शक्तिशाली हुआ करता था , मगर उस में एक कमी थी क्यों की वोह एक जगह से दूसरी जगह पर नहीं लेकर जा सकते थे क्यों कु वोह कही वी फट सकता था , उसी के बीच क्रीमिया का युद्ध वी ख़तम हो चूका था इस लिए अल्फ्रेड का परिवार वापस स्वीडन आ गया , साथ ही अल्फ्रेड Nitroglycerin का एक सेम्पल लेकर अपने घर आ गे , अल्फ्रेड इस में शोध करना चाहते थे जिस से इस से विस्फोट न हो ।

अल्फ्रेड अपने भाई के साथ मिल कर इस पे रिसर्च करने लगे मगर इसी वीच 3 sep 1864 उनकी लैब में एक व्लास्ट हो गया जिस से अल्फ्रेड के भाई की मौत हो गई , जिस के बाद अल्फ्रेड के पिता ने यह काम छोड़ दिया , और स्वीडन की सरकार ने वी रिसर्च लैब शहर में खोलने पर रोक लगा दी , यह अल्फ्रेड और उस के परिवार के लिए बहुत कठिन समय था , मगर अल्फ्रेड ने कुछ समय बाद शहर के बहार एक और लैब बनवाया , और कुछ सालो के बाद ही अल्फ्रेड ने NItroglycerin में सिलिका मिला कर उस का एक पेस्ट बना लिया , जिस को कही वी लेकर जा सकते थे , और इस को कोई वी आकार दिया जा सकता था , इस खोज का नाम उनोह ने Dynamite नाम से किया ।


उन के दुवारा बनाया गिया Dynamite की मांग पूरी दुनिया में होने लगी और उनोह ने अपनी इस कम्पनी को 20 से जयादा देशो में खोल दिया , मगर समय के साथ इस का परियोग युद्ध में वी होने लगा , इस की वजेह से बहुत से लोगो की जान चली गई जिस का पूरा आरोप अल्फ्रेड नोबल पर लगा , अब लोग उन् से नफरत करने लगे थे , और लोग अल्फ्रेड नोबल को मौत का सुदागर बुलाते थे ।



इस के बाद अल्फ्रेड नोबल बहुत दुखी हुए , अपनी मेहनत से पूरी दुनिया में नाम करने के बाद वेह बदनाम हो कर नहीं मरना चाहते थे , इस लिए उनोह ने लोगो की हेल्प करनी शुरू कर दी और मरने के बाद अपनी सारी सम्पति उन लोगो को पुरस्कार देने के लिए दान कर दी जो दुनिया मे शांति और परगति के लिए काम करेंगे ।

10 dec 1896 को अल्फ्रेड नोबल की मौत हो गई , लेकिन हर साल उन के दुवारा दान की गई सम्पति से इस विशव का सब से बड़ा पुरस्कार नोबल पुरस्कार दिया जाता है , आज लोग उन को एक महान विज्ञानक और समाज सेवक के नाम से याद किया करते हैं।

दोस्तों अगर आप को हमारा आर्टिकल Alfred Nobel Biography in Hindi अल्फ्रेड नोबेल की जीवनी अच्छा लगा तो कमेंट जरुर करे और आगे ऐसे आर्टिकल की जानकारी पाने के लिए हमारे फेसबुक पेज को लाइक करे , धनावाद ।

Thursday, 5 July 2018

Jio phone 2 launched price and specifications ( मिलेगा 501 रुपये में जाने आफर)

Jio phone 2


दोस्तों आज मुंबई में अपने इवेंट में मुकेश अंबानी ने जियो फोन का अगला वर्जन लॉन्च कर दिया है जो कि एक के साथ
QWERTY कीपैड के साथ आता है दोस्तों इस फोन की कीमत वैसे तो जियो दोबारा 2999 रखी गई है मगर इस पर एक बहुत ही आकर्षक ऑफर है जिस ऑफर में यह फोन आपको 501 रूपय में मिल सकता है तो चलिए दोस्तों सबसे पहले हम इस फोन की स्पेसिफिकेशन जान लेते हैं।
jio phone 2 hindi


specifications:

इस फोन में आपको 2.4 इंच की डिस्प्ले और इसके साथ 0.3  मेगापिक्सल फ्रंट कैमरा और 2 मेगापिक्सल रियल कैमरा देखने को मिलेगा जियो फोन 2 का स्क्रीन रेजोल्यूशन 240 * 320 है। इसके साथ ही आपको इसमें 4GB की स्टोरेज और 512 एमबी की रैम मिलती है। इसकी स्टोरेज को आप SD कार्ड लगाकर बढ़ा सकते हैं साथ में ही इसमें आपको 2000 MH की बैटरी मिलती है। इस के साथ साथ आप को NFC और GPS का सपोर्ट भी मिल जाता है।

इस फोन में आपको 15 अगस्त के बाद Facebook WhatsApp और YouTube जैसे कई एप्लीकेशन मिल जाएंगे जियो ने आप अपने इस अपग्रेड वर्जन में Google की कई एप्लीकेशन पर काम किया जो जियो फोन 1देखने को नहीं मिली|

अगर आप जियो फोन 1 से जियो फोन 2में अपग्रेड होना चाहते हैं तो आप 21 जुलाई से इसके लिए अप्लाई कर सकते हैं और यह दो-तीन हफ्ते के प्रोसेस के बाद आप 15 अगस्त से जियो फोन 2 का मजा ले पाएंगे।

offer:


जहां पर जियो ने एक ऑफर रखा है जिसके तहत आप जियो फोन टू को सिर्फ 501 रूपय में खरीद सकते हैं उसके लिए आप के पास जियो का पुराना फोन होना जरूरी है आप पुराना फोन दे कर और साथ में 501 रुपए दे कर जियो का नया फोन खरीद सकते हैं|

यह फोन उन लोगों के लिए है जो लोग बेसिक फोन से स्मार्टफोन की तरफ जा रहे हैं यहां पर जियो ने कहां है कि देश में 35 मिलियन लोग जियो फोन यूज कर रहे हैं जो के एक बहुत बड़ा नंबर है और उन लोगों के लिए जियो फोन 2 एक बहुत अच्छी ऑप्शन है।
तो दोस्तों आप जियो फोन के बारे में क्या सोचते हैं क्या आप को लगता है कि जियो इतनी कीमत मैं अच्छे फीचर दे रहा है अपनी राय हमें कमेंट करके बताएं

Wednesday, 4 July 2018

What is Anonymous hackers group and history in hindi |

 Anonymous hackers

दोस्तो आज के समय मे इन्टरनेट हम सब के शरीर का अंग बन चुका है। दुनिया के सभी देशों की इकॉनमी भी इंटरनेट  पर ही टिकी हुई है। बड़े बड़े देश पैसो का लेन देन भी इंटरनेट के जरिए ही करते हैं। मगर कुछ लोग इतने तेज़ दिमाग के होते हैं के वोह इस सिस्टम को ही तहस नहस कर देते हैं। जिन में ज्यादातर गेरकनूनी तरीके से काम करते हैं।
anonymous hacker group hindi

असल में हैकर कर दो तरह के होते हैं Black hat hackers और दूसरे White hat hackers ।
जो गैरकानूनी तरीके से किसी का डाटा हैक करते हैं या किसी के बैंक अकाउंट को हैक करते हैं उसको हम सरल भाषा में ब्लैक हैट हैकर्स कह कर बुलाते हैं और दूसरे जो कानून के दायरे में रहकर सरकार जा देश के हित में काम करते है उनको हम व्हाइट हैट हैकर कहते हैं ।
लेकिन जिसके बारे में आज हम बात करने जा रहे हैं वह अपना काम गैरकानूनी तरीके से करता है लेकिन वह काम दुनिया के लोगों के हित में होता है जी हां दोस्तो मैं बात करने जा रहा हूं Anonymous hackers group के बारे में तो चलिए दोस्तों हम आपको बताते हैं की जय ग्रुप कब शुरू हुआ और कैसे सुर्खियों में आया और कैसे आज यह आम लोगों की मदद करता है।

" We are anonymous , we are legion , we do not forgive , we don not forget , expect us "
यह वोह लाइन्स हैं जो यह ग्रुप हमेशा कहता है इस का मतलब है " हुम् गुमनाम हैं हम हैकर्स आर्मी हैं , हुम् गलत काम करने वालो को माफ नही करते , न ही हम से यह उम्मीद रखे । "

What is Anonymous : 

इसका अर्थ होता है गुमनाम अगर आप इंटरनेट पर कोई काम करते हैं तो एक IP एड्रेस के माध्यम से आपका पता चल जाता है अगर आप किसी तरीके से अपने आप छुपाकर इंटरनेट पर कोई काम करते हैं तो आप इंटरनेट के एनोनिमस हैं।।

Anonymous hackers group history : 

इस ग्रुप में कितने लोग काम करते हैं और यह ग्रुप कहां से ऑपरेट किया जाता है इसके बारे में अब तक कुछ पता नहीं चल पाया है लेकिन कहा जाता है कि 2003 में यह ग्रुप एक वेबसाइट से बना असल में 2003 में कुछ लोगों ने 4chain.net नाम की एक वेबसाइट बनाई जिस पर आप किसी भी देश या मंत्री जो आपके दिल में जो भी बात है आप लोगों के सामने रख सकते हैं और आपकी डिटेल गुप्त रहती थी । इस साइट पर किसी मुद्दे को लेकर दो लोगों में विवाद हो गया और वह एक दूसरे को गाली गलौज करने लगे इसी समय एक शख्स ने दूसरे की सभी पर्सनल डिटेल्स हैक कर वेबसाइट पर पब्लिश कर दी  और साथ ही एक मैसेज छोड़ा जिस में लिखा थ " We are Anonymous "जहां से इस ग्रुप की शुरुआत हुई।

यह ग्रुप सुर्खियों में 2012 में आया असल में इंटरनेट पर एक वेबसाइट है जिसका नाम है wikileaks यह वेबसाइट दुनिया के बड़े-बड़े भ्रष्टाचारियों के खिलाफ काम करती है और यूजर्स के ही पैसों यह साइट चलती है एक बार सरकार ने यूजर के द्वारा दिए जाने वाले फंड पर रोक लगाने के लिए बैंक को आदेश दिया उसी समय Anonymous group ने बैक के गेटवे को हैक कर इस फाउंड को रुकने नहीं दिया जिसके बाद यह ग्रुप सुर्खियों में आ गया ।
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इसके अलावा इस ग्रुप में एक बार डोनाल्ड ट्रंप की वेबसाइट को भी हैक कर लिया था क्योंकि डोनाल्ड ट्रंप ने मुसलमानों के खिलाफ कुछ गलत बोल दिया थ। जहां तक के इस ग्रुप में ISIS की कई वेबसाइट को हैक कर उनके लिंक को तोड़ दिया ।

इस ग्रुप की लोकप्रियता को देखते हुए Times ने इसे 100 प्रभावशाली लोगों की सूची में शामिल किया था।
हालहि में इस ग्रुप ने दावा किया था के Relince Jio लोगो का कालिंग डेटा को आगे वेचता है। मगर इस के अभी तक पुख्ता सबूत नही मिले हैं।

Friday, 29 June 2018

Mintu gurusaria biography in hindi( डाकुआँ दा मुंडा ) मिन्टू गुरुसरिया की जीवनी

 Mintu gurusaria biography in hindi( डाकुआँ दा मुंडा )

दोस्तों आज हम जिस हीरो की बात करने जा रहे हैं। उसने अपनी जिंदगी में वह करके दिखाया है,
 जो हर किसी के बस में नहीं होता कहने को तो वह एक साधारण से घर का लड़का था लेकिन आज वह दूसरे लोगों के लिए एक प्रेरणा दायक इंसान बन चुका है ।
जी हां दोस्तों मैं बात करने जा रहा हूं पंजाबी जर्नलिस्ट मिंटू गुरु सरिया के बारे में
जिन्होंने अपनी जिंदगी में बहुत से बुरे काम बुरे समय और बुरे लोगों के साथ बताने के बावजूद आज दूसरे लोगों के लिए प्रेरणादायक बन चुके हैं।
mintu gurusaria


आपने बहुत से सेलिब्रिटी की जिंदगी पर बनी कई फिल्में देखी होगी लेकिन मिंटू गुरु सरिया ना तो बहुत बडा फिल्मी सितारों या बड़ा खिलाड़ी या वैज्ञानिक नहीं है
लेकिन फिर भी उसकी जिंदगी पर एक पंजाबी मूवी बनकर तैयार हो चुकी है दोस्तों कोई भी फिल्म उस शख्स की जिंदगी पर ही बनाई जाती है ।
जिसने अपनी जिंदगी में कुछ बड़ा किया हो उसी तरह मिंटू गुरु सरिया ने भी जैसे अपनी जिंदगी में उतार चढ़ाव देखें और आखिर में Khalnayak से एक नायक बनकर उभरे आज हम उस हीरो की जिंदगी को शुरू से जाने गे।

जन्म और बचपन : मिंटू गुरु सरिया का पूरा नाम बृजेंद्र सिंह मिंटू है उसका परिवार पाकिस्तान से आकर पंजाब में बसा था
 पाकिस्तान में उनका गांव राजा जंग था मिंटू गुरु सरिया का जन्म 26 जुलाई 1979 को पंजाब के फाजिल्का के गुरुसर गांव में हुआ ।
जो कि राजस्थान के बॉर्डर पर लगता है बॉर्डर पर बसने के कारण ही यहां पर नशा ज्यादा मात्रा में मिलता है ।
मिंटू के पिता का नाम बलदेव सिंह और माता का नाम जसवीर कौर है। मिन्टू के दादा और पििता नशा तस्करी का काम करते थे। जिन के लिए उन को डाकू कह कर बुलाया जााता ।

बचपन में मिंटू पढ़ाई में बहुत होशियार था जिसके चलते उसने अपनी पढ़ाई गांव के स्कूल में ही पूरी की और उसके बाद आगे की पढ़ाई के लिए अबोहर दाखिला लिया।
अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई के लिए मिंटू ने मलोट दाखिला ले लिया
लेकिन यहां पर बुरे लोगों की संगत के चलते उसे नशेे की लत लग गई मिंटू ने अपनी एक इंटरव्यू में बताया कि एक समय ऐसा था जब वह 1 दिन नशे कि 100 गोली खा लेेेता था।

उस वक़्त मिन्टू ने अपनी ज़िंदगी से भड़क कर गलत रास्ते पर चल पड़े थे । नशे के लिए किसी को मारना लूट पाट करना ऐसे काम उन के लिए आसान थे।

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कोई भी उन को नशे का लालच दे कर ले जाता था और अपना काम करा लेता था।
इसी दोष में उन के पिता को भी एक वार जेल हो गई और उन की जेल में ही मौत हो गई।

लेकिन इसी के साथ साथ मिन्टू के दिल मे अच्छा इंसान बनने की चाहत भी बरकरार थी।

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अपनी जिंदगी के कई साल ऐसे ही बर्बाद करने के बाद एक वार उन का एक्सीडेंट हो गया
और डॉक्टर ने उसे कई महीने आराम करने के लिए कहा । मिन्टू अपना समय गुजरने के लिए कुछ किताबें पड़ता रहता जिन का उस की ज़िंदगी पर बहुत गहरा असर पड़ा। 
बड़े बड़े शूरवीरो की कहानिया पड़ कर उन के मन मे यह ख्याल आया के में ऐसे नही मरना मुझे कुछ करना है।
जिस के चलते उस ने पत्रकारी क्षेत्र में आने का फैसला किया। और आज मिन्टू पंजाब के जाने माने पत्रकार हैं । 

Mintu gurusaria faimly :


 मिन्टू ने अपनी दोस्त मनदीप कौर के साथ शादी कर ली और उन का एक बेटा भी है।
मिन्टू ने अपनी ऑटोबायोग्राफी में बताया के उन को अपनी ज़िंदगी मे अच्छा बनाने के लिए उन की पत्नी का बहुत सहजोग मिला है।

Books : 

मिन्टू की सब से ज्यादा मशहूर किताब उन की अपनी ज़िंदगी पर आधारित "डाकुआँ द मुंडा " है।
जिन में उनोह ने अपनी ज़िन्दगी की कहानी लिखी है। इन के इलावा एक और किताब ज़िन्दगी के आशिक़ भी लिखी है। 

दोस्तो यह थी एक आम लड़के की कहानी के कैसे उस ने अपने जज्बे से उस नरक भारी ज़िन्दगी से निकल कर दूसरे लोगो के सहमने एक मिसाल पेश की है। आज मिन्टू पंजाब में नशे के खिलाफ एक मुहिम चला रहे हैं। इस के इलावा उन की जीवनी को पढ़ कर बहुत से लोग प्रेरित हुए हैं। हम इस महान इंसान को सलाम करते हैं।

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Monday, 11 June 2018

Yuvraj singh biography in hindi युवराज सिंह का जीवन परिचय

Yuvraj Singh biography in Hindi युवराज सिंह का जीवन परिचय  


  नमस्कार दोस्तों आज हम बात करने जा रहे हैं एक ऐसे क्रिकेट खिलाड़ी की जिन्होंने भारत का नाम पूरी दुनिया में रोशन किया है ।आज हम बात करने जा रहे हैं एक ऐसे प्रेरणादायक शख्स के बारे में जिन्होंने कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी को भी मात दे दी और अपना क्रिकेट कैरियर दोबारा शुरू किया ।जी हां दोस्तों मैं बात करने जा रहा हूं भारतीय क्रिकेट टीम के सिक्सर किंग युवराज सिंह के बारे में ।6.1 फीट का और 78 किलो वजनी  यह खिलाड़ी  जब क्रीज पर आता है  तो  दुनिया के बड़े-बड़े बॉलर  के पसीने छूट जाते हैं ।युवराज सिंह आज भारतीय क्रिकेट टीम के बहुत ही जाने माने खिलाड़ी हैं पूरी दुनिया में युवराज सिंह के लाखों फैन हैं तो चलिए दोस्तों इस महान खिलाड़ी की जीवनी को हम शुरू से जानते हैं।

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जन्म और बचपन  : 

युवराज सिंह का जन्म 12 दिसंबर 1981 को चंडीगढ़ में हुआ। युवराज सिंह के पिता का नाम जोगराज सिंह है जो के पूर्व क्रिकेटर रह चुके हैं ।इसके अलावा युवराज सिंह के पिता पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री के जाने माने अभिनेता है। यवराज सिंह की माता का नाम शबनम सिंह है। इसके अलावा युवराज सिंह के भाई का नाम जोरावर सिंह है। छोटी ही उम्र में युवराज सिंह के माता-पिता का तलाक हो गया था जिसके चलते युवराज सिंह को अपनी माता के पास रहना पड़ा। 

युवराज सिंह ने अपनी पढ़ाई  DAV स्कूल  चंडीगढ़ से  हासिल की । युवराज सिंह को बचपन में टेनस और रोलर स्केटिंग करना बहुत अच्छा लगता था मात्र 11 साल की उम्र में युवराज सिंह ने रोलर स्केटिंग में 14 अवार्ड जीत लिए थे। मगर युवराज सिंह के पिता योगराज सिंह अपने बेटे को एक क्रिकेटर बनाना चाहते थे जिसके चलते उन्होंने नाराज होकर एक दिन युवराज सिंह के जीते हुए सभी मेडल और ट्रॉफी बाहर फेंक दिए और पिता के दबाव के चलते युवराज सिंह ने रोलर स्केटिंग छोड़ कर अपना ध्यान क्रिकेट की तरफ लगाया ।बचपन में युवराज सिंह के कोच नवजोत सिंह सिद्धू थे लेकिन उससे युवराज सिंह के खेल में ज्यादा निखार नहीं आया ।जिसके चलते जोगराज सिंह सिंह ने खुद युवराज को ट्रेनिंग देना शुरू किया।

नवजोत सिंह सिद्धू ने एक इंटरव्यू में बताया कि जब युवराज के पिता युवराज को स्टेडियम में ट्रेनिंग देते थे तो आधे स्टेडियम की लाइट्स बंद कर दी जाती थी और टेनिस बॉल को गीला किया जाता था जिससे वह और तेज निकलती थी और युवराज सिंह को अंधेरे में उस गेंद को जज करना पड़ता था । जिससे युवराज सिंह की बैठक में चमत्कारी निखार आया ।

Cricket Career :

युवराज सिंह ने  अपने क्रिकेट कैरियर की शुरुआत 1996 की जब उन्हें अंडर-19 पंजाब के लिए चुना गया आगे चलकर युवराज सिंह को भारतीय अंडर-19 के लिए चुन लिया गया। युवराज सिंह ने अपने पहले ही टूर्नामेंट में बहुत अच्छा प्रदर्शन किया। यह टूर्नामेंट ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ था जहां पर उनका सर्वाधिक स्कोर 84 रन था जो कि 82 गेंदों में बनाए थे ।

इसी टूर्नामेंट में युवराज सिंह को मैन ऑफ द टूर्नामेंट  से भी नवाजा गया ।अगर हम टेस्ट मैच की बात करें तो युवराज सिंह ने 2002 में इंग्लैंड के खिलाफ अपने सबसे ज्यादा रन 324 बनाएं। 2003 में बांग्लादेश के खिलाफ युवराज सिंह ने अपना पहला शतक जमाया 2005 से 2006 के बीच युवराज सिंह को 3 बार मैन ऑफ द सीरीज भी चुना गया।

अगर हम T20 की बात करें तो  युवराज सिंह को 2007 में पहली बार भारतीय T20 क्रिकेट टीम मैं शामिल किया गया जब राहुल द्रविड़ ने भारतीय कप्तानी से इस्तीफा दिया तो महेंद्र सिंह धोनी को कप्तान बनाया गया और युवराज सिंह को एक हिटर के रूप में टीम शामिल किया गया ।

2007 में वर्ल्ड कप से पहले भारत में इंग्लैंड के खिलाफ एक सीरीज खेली जिसमें युवराज सिंह को गेंदबाजी करते समय इंग्लैंड के एक खिलाड़ी मसकीयस ने 5 गेंदों में 5 छक्के जड़े । जिस का बदला युवराज सिंह ने 19 सितंबर 2007 T20 वर्ल्ड कप मैं एक मैच के दौरान इंग्लैंड के गेंदबाज स्ट्रीट ब्रॉड को छह गेंदों में छह छक्के जड़कर लिया।

IPL Career : 

अगर हम युवराज सिंह की IPL कैरियर की बात करें तो वह उनके लिए इतना अच्छा नहीं रहा ।अपने IPL कैरियर में युवराज सिंह अपने फैंस की उम्मीदों पर खरे नहीं उतर पाए हैं ।2011 में अपना इलाज कराने के बाद युवराज सिंह 2012 में भारत आए। 

सबसे पहले युवराज सिंह को किंग्स इलेवन पंजाब  में  बतौर कप्तान  खिलाया गया  लेकिन युवराज सिंह का प्रदर्शन इतना अच्छा नहीं रहा । उससे अगले साल पुणे वॉरियर्स ने 14 करोड़ में युवराज सिंह  को खरीदा। उससे अगले ही साल कॉन्ट्रोवर्सी के चलते यह टीम आईपीएल से बाहर हो गई ।2014 में युवराज सिंह को रॉयल चैलेंज बैंगलोर ने 14 करोड़ में खरीदा 2015 में युवराज सिंह को दिल्ली ने 16 करोड़ मैं खरीदा। 2016 में हैदराबाद ने युवराज सिंह को 7 करोड़ में खरीदा  युवराज सिंह का IPL कैरियर इतना अच्छा नहीं रहा।

Records : 


युवराज सिंह ने बहुत से रिकॉर्ड अपने नाम किए हैं जिनमें सबसे पहले छह गेंदों पर छह छक्के लगाने का रिकॉर्ड युवराज सिंह के नाम है T20 के इतिहास में ऐसा करने वाले युवराज सिंह पहले खिलाड़ी हैं। इसके अलावा युवराज सिंह पहले ऐसे ऑलराउंडर हैं जिन्होंने वर्ल्ड कप में 300 से अधिक कराना और 15 विकेट लिए हो । 2011 वर्ल्ड कप में सबसे लंबा छक्का मारने का रिकॉर्ड भी  युवराज सिंह के नाम है जो कि 120 मीटर लंबा था।


Faimly : 

युवराज सिंह के पिता का नाम योगराज सिंह और उनकी माता का नाम शबनम सिंह है इसके अलावा युवराज सिंह के भाई का नाम जोरावर सिंह है 2015 में युवराज सिंह ने अपनी फ्रेंड हेजल कीच के साथ इंगेजमेंट कराई और 30 नवंबर 2016 को दोनों ने शादी कर ली ।

Interesting Fact about yuvraj singh life:

युवराज सिंह को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट टीम में सबसे पहला चेक 21 लाख का मिला था जो के उन्होंने अपनी माता को दिया था।


युवराज सिंह ने 2 पंजाबी मूवी मैं भी काम किया है जिनमें से "पुत सरदारा दे "और "मेहंदी शगना "दी हैं।
युवराज सिंह को उनके फैन युवी कह कर बुलाते हैं।

युवराज सिंह ने एक बॉलीवुड मूवी "Jumbo" मैं काम किया है जो कि एक एमिनेशन मूवी है जिसमें युवराज सिंह ने अपनी आवाज रिकॉर्ड कराई है।

2011 में युवराज सिंह ने कैंसर का इलाज कराने के बाद YouWeCan नाम की एक संस्था चलाई है जो कैंसर के मरीजों की सहायता करती है।


युवराज सिंह ने अपनी जिंदगी पर आधारित एक ऑटो बायोग्राफी भी लिखी है जिसका नाम "टेस्ट ऑफ माय लाइफ" है।

युवराज सिंह का लकी नंबर 12 हैं इसलिए वह 12 नंबर की जर्सी पहनते हैं।

इसके अलावा 2011 में युवराज सिंह की जिंदगी में एक बहुत बड़ा बदलाव आया जब उन्हें पता चला कि उनके लंग में कैंसर है लेकिन अच्छी बात यह थी यह अभी पहली स्टेज पर ही था। इसलिए युवराज सिंह अमेरिका गए वहां उन्होंने बीसटन मैं कीमोथैरेपी कराई जिसकी 1 साल बाद मैं बिल्कुल ठीक हो गए।

तो दोस्तों यह तो थी युवराज सिंह की जिंदगी की कहानी हमें उम्मीद है यह आपको हमारे द्वारा दी गई जानकारी अच्छी लगती होगी। अपना कीमती समय देने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद और आपको हमारा आर्टिकल कैसा लगा हमें कमेंट करके जरूर बताएं।