Wednesday, 14 November 2018

Acharya Chankaya Biography | Books | History | Kuttlaya | Chankaya Neeti | Hindi

Acharya Chankaya Biography | Books | History | Kuttlaya | Chankaya Neeti | Hindi : भारत में बहुत से ऐसे महान लोगों ने जन्म लिया जिन्होंने अपने ज्ञान के बलबूते परअपना नाम इतिहास के पन्नों में दर्ज करवा दिया और ऐसे ही समझदार लोगों की लिस्ट में एक नाम सामने आता है आचार्य चाणक्य का ।

जो कि एक टीचर, फिलॉस्फर, राजनेता और एक रॉयल एडवाइजर थे और इन्हें पूरी दुनिया की सबसे महान पॉलीटिशियन के तौर पर जानती है । चाहे बीता हुआ पुराना समय हो या फिर आज का सफल व्यक्ति बनने के लिए हर कोई चाणक्य द्वारा बताए गए  असूलों पर ही चलना चाहता हैं ।

Acharya Chankaya  Biography | Books | History | Kuttlaya | Chankaya Neeti | Hindi
Acharya Chankaya  Biography | Books | History | Kuttlaya | Chankaya Neeti | Hindi

आज हम महान जानी चाणक्य की पूरी लाइफ स्टोरी को जानते हैं कि किस तरह से अपने अपमान का बदला लेने के लिए उन्होंने नंद वंश को खत्म कर मौर्य शासन की नींव रखी ।

चाणकय का जन्म और बचपन
( Birth and Childhood of Chankaya )


कहानी की शुरुआत होती है आज से करीब 371 ईसा पूर्व पहले । जब चाणक्य नाम के एक गांव में चाणक्य का जन्म हुआ और यह गांव बेसिकली उस समय गोल्ल रीजन के अंतर्गत आता था ।

चाणक्य को लोग कौटिल्य और विषनगुप्त के नाम से भी जानते थे । चाणक्य के दिमाग को देखते हुए उनके पिता ने उन्हें तक्षशिला के एक स्कूल में पढ़ाई करने के लिए भेज दिया और वहां पर चाणक्य अर्थशास्त्र और वेदों के बारे में अच्छी जानकारी हो गई ।


Acharya Chankaya Biography | Books | History | Kuttlaya | Chankaya Neeti | Hindi


वहीं चाणक्य को पढ़ाने का मौका भी मिला । चाणक्य के समय में एक जगह हुआ करता था पाटलिपुत्र जिसे की आज हम पटना के नाम से जानते हैं और उस समय पाटलिपुत्र एक बहुत ही शक्तिशाली राज्य मगध की राजधानी था ।

चाणकय को बेइज्जत करना 


मगद पर उस समय नंद वंश का साम्राज्य था और वहां के राजा धनानंद के ने एक बहुत बड़ा सा यज्ञ करवाया । उस समय चाणक्य भी वहीं पर मौजूद थे और फिर चाणक्य ब्रह्मभोज के समय ब्राह्मण के गद्दी पर जा बैठे ।

जब राजा धनानंद वहां आए तो उन्होंने चाणकय के पहनावे को देख कर भरी सभा में उनका मजाक बनाया और आचार्य चाणक्य को ब्रह्मभोज के बीच में ही गद्दी से उठा दिया ।

इसी वजह से क्रोधित होकर आचार्य चाणक्य ने अपनी चोटी खोल दी और राजा धनानंद को कहा कि वह नंद वंश का सफाया कर ही चोटी बांधगे ।

चाणकय ने अपनी बेज्जती का बदला कैसे लिया ?


यहां से ही आचार्य चाणक्य का मकसद हो गया कि वह नंद वंश का सफाया कर अपने द्वारा किसी चुने गए आदमी को मगध का राजा बनाएगा । इसके बाद आचार्य चाणक्य जंगल में चले गए और वहां जाकर उन्होंने सोने के सिक्के बनाए ।

Acharya Chankaya  Biography | Books | History | Kuttlaya | Chankaya Neeti | Hindi

जो के किसी खास मकसद के लिए बनाए गए थे । उन्होंने करीब 800 मिलीयन सिक्के बनाकर जंगल में ही कहीं दफन कर दिए और किसी ऐसे आदमी की खोज में निकल गए जो नंद वंश के राजा धनानंद की जगह ले सके ।

चंद्रगुप्त मौर्या से दोस्ती 


इसी दौरान आचार्य चाणक्य ने एक बच्चे को दूसरे बच्चों के साथ बहादुरी से लड़ते हुए देखा ।उसे देखने के बाद ही अचार्य चाणक्य जी समझ गए थे की यह लड़का नंद वंश का सफाया कर सकता है और क्या उसके बारे में पता लगाया तो पता चला कि यह लड़का मौर्य साम्राज्य का वंश चंद्रगुप्त मौर्य है । जिसके पिता की हत्या राज्य के लालच में कर दी गई थी और उन्हें राज सिंहासन से निकाल दिया गया था ।

इसी दौरान आचार्य चाणक्य की दोस्ती नंद वंश के राजा धनानंद के बेटे से हो गई वह बी गद्दी के बिल्कुल काबिल था लेकिन अचार्य चाणक्य को चंद्रगुप्त मौर्य और धनानंद के बेटे में से किसी एक को चुनना था और इसीलिए उन्होंने दोनों की परीक्षा लेने का फैसला किया ।

चंद्रगुप्त मौर्या की परीक्षा


आचार्य चाणक्य ने दोनों को एक एक धागा दिया और उनको अपने गले में डालने के लिए कहा । जिसके बाद अचार्य चाणकय ने धनानंद के बेटे को चंद्रगुप्त के गले से वह धागा निकालने के लिए कहा ।

लेकिन शर्त यह थी की जब चंद्रगुप्त मौर्य सो रहे हो उस वक़्त यह धागा निकलना था और उसे पता व नही चलना चाहिए था । लेकिन धनानन्द के पुत्र जब भी धागा निकालने जाते तो चंद्रगुप्त को पता चल जाता इसलिए वह असफल रहा ।

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फिर अचार्य चाणक्य ने चंद्रगुप्त मौर्य को वही धागा धनानंद के बेटे गले से निकालने के लिए कहा । जब धनानंद के बेटे सो रहे थे तो चंद्रगुप्त ली उसका गला काट दिया और वह धागा आचार्य चाणक्य को सौंप दिया जिससे अचार्य चाणक्य को मगध का नया राजा मिल चुका था ।

जिसके बाद आचार्य चाणक्य ने वोह सिक्के निकाल कर एक बड़ी फ़ौज तयार की जिसके बलबूते पर चंद्रगुप्त मौर्य और अचार्य चाणक्य ने नंद वंश के राजा धनानंद को हराकर अपना साम्राज्य कायम किया और उस साम्राज्य में आचार्य चाणक्य प्रधानमंत्री के रूप में रहे ।

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इस तरह से अचार्य चाणक्य ने अपने आप को एक सफल और समझदार राजनेता होने का परिणाम दिया । जब तक चाणकय जिंदा रहे उनोह एक अच्छे राजनेता की तरह शाषन किया ।

चाणकय दुवारा लिखी गई किताबे
( Books of Chankaya )


इसी दौरान चाणकय ने 2किताबें भी लिखी जिस में पहली थी ' Chankaya Neeti ' जिस में उनोह ने बताया कि एक अच्छे राजा को कैसे काम करना चाहिए जिस से उन की प्रजा उन्हें प्यार करे । दूसरी किताब थी ' Arthshashter ' जिस में उनोह ने अर्थशास्त्र से जुड़े कुछ नियम बताएँ हैं ।


Acharya Chankaya  Biography | Books | History | Kuttlaya | Chankaya Neeti | Hindi
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चाणकय की मृत्यु
( Death Of Chankaya )


चाणकय की मृत्यु को लेकर विद्वानों के अलग अलग विचार हैं । कुछ विद्वानों का कहना है कि चाणकय ने खाने और जल का त्याग कर दिया था और यह त्याग तब तक किया जब तक उनकी मृत्यु नही हो गई ।

दूसरा विचार यह भी है कि जिस स्तर पर चाणकय पहुंच चुके थे उस वक़्त उनके बहुत से दुश्मन बन चुके थे । जिस के तहत उन की मृत्यु एक षड्यंत्र के तहत हुई थी ।

तो दोस्तो यह थी महान राजनेता चाणकय की कहानी । अगर आप को इस लेख से जुड़ी और जानकारी के बारे में पता है जो इस लेख में नही दी गई तो कृपया आप हमें जरूर बताएं । अपना समय देने के लिए आप का बहुत बहुत धन्यवाद ।

Wednesday, 3 October 2018

History of Internet, Domain and Website in Hindi

History of Internet, Domain and Website in Hindi  आज के इस व्यापक और आधुनिक मायाजाल सामान Internet का मूल Cold War है । 1960 - 70 के दशक में Cold War अपने लेवल पर था और रशिया और अमेरिका दोनों देशों के सर पर परमाणु हमले की तलवार लटक रही थी । अगर परमाणु बम का हमला होता है तो इन हालत में निकलने वाले विकिरण के कारण संदेश का आदान-प्रदान ही खत्म हो जाएगा  और आप अपने ही देश के किसी सेना के डिवीजन को या नेता को कोई भी सीक्रेट संदेश नहीं भेज सकते ।

 इन सब खतरों को अमेरिका ने भी भांप लिया था इसलिए अमेरिका ने एक ऐसी कार्यप्रणाली बनाने की सोची जो अंडरग्राउंड केबल के द्वारा एक दूसरे से जोड़ती हो और कोई सन्देश आसानी से एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाया जा सके । और अमेरिका के राष्ट्रपति देश के किसी भी कोने के किसी भी बंकर में हो फिर भी उनको कांटेक्ट करके उनके डिसीजन को लागू किया जा सके ।
History of Internet, Domain and Website in Hindi
History of Internet, Domain and Website in Hindi 

History of Internet, Domain and Website in Hindi  


अमेरिका की सरकार की यह भी दरखास्त थी कि इसका कोई केंद्र ना हो । इसलिए एक ऐसी संचालित कार्यप्रणाली बनानी थी जिसे पावर ऑन करते ही देश के सारे कंप्यूटर एक दूसरे से जुड़ जाए और किसी एक कंप्यूटर के खराब होने पर पूरे नेटवर्क पर कोई असर न पड़े ।



History of Internet :
इंटरनेट का इतिहास 


आखिरकार ऐसे नेटवर्क को बनाने के लिए पेंटागन के ARPA यानी एडवांस रिसर्च प्रोजेक्ट एजेंसी को नियुक्त किया गया । ARPA और अमेरिकन सरकार ने मिलजुल कर एक ऐसे ही नेटवर्क का सर्जन किया जिसे शुरुआत में ARPNET कहा गया और अमेरिका के सभी खास कंप्यूटर्स को ARPANET से जोड़ दिया गया । साल 1990 आते-आते कोल्ड वर खत्म होने की कगार पर आ गया और उस वक्त परमाणु युद्ध होने के बाद भी हट चुके थे । इसलिए डिफेंस के लिए खोजी गई इस टेक्नोलॉजी को National Science Foundation को सौंप दिया गया और यह आधुनिक आविष्कार अब सार्वजनिक बन चुका था ।

History of Domain 
डोमेन का इतिहास 


जो 1990 आते-आते ARPNET की जगह INTERNET के नाम से जाना जाने लगा । अब तक INTERNET में कोई Website या Domain जैसी चीज नहीं थी क्योंकि 1990 तक एक कंप्यूटर को दूसरे कंप्यूटर से केबल के द्वारा जोड़ा जाता था । हमें कोई डाटा चाहिए तो डाटा किस कंप्यूटर में है उसका हमें पता होना चाहिए अगर हमें पता नहीं है के कौन सा डाटा किस कंप्यूटर में है तो हम उसे नहीं पा सकते इस तरीके से और ARPNET काम करता था ।



1984 में डॉक्टर जॉन पोस्टल Domain Registration बनाया जिसे आज हम .Com, .org, .in के नाम से जानते हैं । इसके जरिए से वेबसाइट बनाई जा सकती थी और इसके बाद वेबसाइट बनने लगी लेकिन वेबसाइट सिर्फ शहरों तक ही सीमित थी ।

History of World Wide Web (WWW)
डब्ल्यू डब्ल्यू डब्ल्यू का इतिहास 


लेकिन 1991 में Tim Berners-Lee नाम के वैज्ञानिक ने इस समस्या को हमेशा के लिए सुलझा दिया । जब उन्होंने w.w.w. यानी वर्ल्ड वाइड वेब की खोज की कुछ ही समय में डब्ल्यू डब्ल्यू डब्ल्यू इंटरनेशनल नेट बन गया और सारे डोमिन इसी नाम से रजिस्टर्ड होने लगे।
History of Internet, Domain and Website in Hindi
Tim Berners-Lee

History of Wi Fi 
वाई फाई का इतिहास 


1991 के बाद इंटरनेट पर कोई भी चीज छुपी नहीं रही । इंटरनेट की कामयाबी की तरफ 1995 में इंटरनेट स्पीड 28.8 kbps थी और उस समय इंटरनेट यूज करने वालों की तादात लगभग एक करोड़ साठ लाख थी । एक अनुमान के मुताबिक उस समय दुनिया के 0.2% लोग इंटरनेट इस्तेमाल कर रहे थे लेकिन 22 साल बाद आज 2017 में इंटरनेट के एवरेज स्पीड 5.6 mbps है और दुनिया में तकरीबन 307 करोड लोग इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं ।

एक अनुमान के मुताबिक दुनिया के 40% लोग इंटरनेट से आपस में जुड़े हुए हैं और इन्हीं 22 सालों में इंटरनेट की स्पीड में 195% बढ़ोतरी हुई है ।

History of Internet, Domain and Website in Hindi 

1999 में Dr. John O'Sullivan ने 18 साल की उम्र में ही वायलेंस फर्टिलिटी नेटवर्क बनाया जिसे आज हम WiFi से जानते हैं । वॉइस ऑफलाइन नेटवर्क कनेक्शन में मोबाइल और कांटेक्ट में बदलकर इंटरनेट को बिना वॉइस शेयर करना संभव कर दिया । यह तो बस एक नेटवर्क की शुरुआत थी इंटरनेट की वजह से दुनिया में कहीं अविष्कारों ने जन्म लिया और कई खोजें की गई ।



Who is Owner of Internet 
इंटरनेट का असली मालिक कौन है


सच बात कहूं तो इसका कोई मालिक नहीं है इसे उपयोग करने वाले सब उसके मालिक है क्योंकि इंटरनेट का आविष्कार अमेरिका के पब्लिक सेक्टर में हुआ है । जिसमें अमेरिकन डिफेंस और रिसर्च यूनिवर्सिटी के पैसे लगे थे । अगर इसका आविष्कार कैसे प्राइवेट सेक्टर में किया होता तो कंपनियां अपने नाम की पेटर्न बनवाकर नफाखोरी शुरु कर देती । लेकिन पूंजीवादी देश की सरकार या सरकार के दुवारा चलने वाली यूनिवर्सिटी को बिजनेस में कोई दिलचस्पी नहीं होती । आगे भी FM Radio और TV की खोज सरकार के पैसों द्वारा की गई मगर बाद में इन खोजों को प्राइवेट व्रतों के लिए ट्रांसफर कर दिया गया ।

History of ISP ( Internet Service Provider )


परिणाम स्वरूप विश्व में कई सारे छोटे-छोटे इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर यानी आईएसपी शुरू हो गए जिन्होंने अपने लोकल नेटवर्क को वैश्विक इंटरनेट के साथ जोड़ दिया और इस तरह इंटरनेट की जाल पूरी दुनिया में फैल गई यह वही प्राइवेट सर्विस प्रोवाइडर है जो हमसे डाटा के लिए कुछ पैसे लेते हैं ।

Interesting Fact About Internet
इंटरनेट से जुड़े रोचक तथ 


पूरे विश्व के इंटरनेट का मायाजाल कितना बड़ा है इसका जवाब यह है कि हम कल्पना भी ना कर सके उतना बड़ा फिर भी अगर इसे आंकड़ों के द्वारा समझ ना हो तो आप यह जान लो के समुंदर के तल में कुल 8 लाख किलोमीटर लंबे fiver Optical Cable विशे हुए हैं और जमीन में लाखों किलोमीटर विशे केवल अलग ।

जिनमें से हर क्षण डाटा का वाहन होता है जिससे दुनिया के लोग अपने पर्सनल कंप्यूटर से या पर्सनल मोबाइल से इंटरनेट के साथ जुड़े हुए रहते हैं । गूगल के अनुसार उसके डेटाबेस में एक हजार अरब से भी ज्यादा वेबपेज है और हर रोज उनकी संख्या बढ़ रही है। विश्व में आज प्रति मिनिट 500000 से भी ज्यादा वेबपेज बन रहे हैं ।
आज दुनिया के बड़े-बड़े बिज़नस और फाइनेंशियल सिस्टम इंटरनेट पर निर्भर हैं एक अनुमान के मुताबिक अगर दुनिया में इंटरनेट से 1 घंटे के लिए बंद हो जाए तो दुनिया की आर्थिक व्यवस्था को 1 Tarbillion का नुकसान होगा और दुनिया तकरीबन 6 दिन पीछे हो जाएगी ।

दोस्तों आप को हमारा लेख History of Internet, Domain and Website in Hindi  कैसा लगा हमे कमेंट करके जरूर बताएं। 

Tuesday, 2 October 2018

Baba Harbhajan singh Real Story and History in Hindi - बाबा हरभजन सिंह

Baba Harbhajan singh Real Story and History in Hindi  बाबा हरभजन सिंह क्या कभी कोई सैनिक मृत्यु के पश्चात भी अपनी ड्यूटी कर सकता है ?

क्या किसी मृत सैनिक की आत्मा अपना कर्तव्य निभाते हुए देश की सीमा पर रक्षा कर सकती है ?

आप सबको यह सवाल अजीब लग रहा है आप सब कहते होंगे कि भला ऐसे कैसे हो सकता है । लेकिन सिक्कम में रहने वाले लोगों और वहां पर तैनात सैनिकों से अगर आप सवाल पूछेंगे तो वह कहेंगे जी हां ऐसा पिछले 45 सालों से लगातार हो रहा है । उन सब का मानना है कि पंजाब रेजीमेंट के जवान हरभजन सिंह की आत्मा पिछले 45 सालों से लगातार देश की सीमा पर रक्षा कर रही है । 

सैनिकों का कहना है कि आत्मा चीन की तरफ से होने वाले किसी भी हमले के बारे में उन्हें बता देती है और यदि भारतीय सैनिकों को चीन के सैनिकों का कोई भी मूवमेंट पसंद नहीं आता है तो उसके बारे में और चीन के सैनिकों को भी पहले ही बता देते हैं ताकि बात ज्यादा नहीं बिगड़े और मिलजुलकर बातचीत से उसका हल निकल जाए ।
Baba Harbhajan singh Real Story and History in Hindi - बाबा हरभजन सिंह

आप चाहे इस पर यकीन करें या ना करें पर खुद चीनी सैनिक भी इस पर विश्वास करते हैं इसलिए भारत और चीन के बीच होने वाली हर फ्लैग मीटिंग में हरभजन सिंह के नाम की या खाली कुर्सी लगाई जाती है ताकि वह मीटिंग अटेंड कर सके ।

Baba Harbhajan singh Real Story and History in Hindi - बाबा हरभजन सिंह 

हरभजन सिंह का जन्म 30 अगस्त 1946 को जिला गुजरावाला में जो कि वर्तमान पाकिस्तान में हुआ । हरभजन सिंह पंजाब रेजीमेंट के जवान थे जो कि 1966 में आर्मी में भर्ती हुए थे पर मात्र 2 साल की नौकरी करके 1968 में सिक्किम में एक दुर्घटना में मारे गए । एक दिन वह खच्चर पर बैठकर नदी पार कर रहे थे तो खच्चर सहित नदी में बह गए और काफी आगे निकल गए ।



  2 दिन की तलाशी के बाद जब उनका शव नहीं मिला तो वह एक साथ के सपने में आकर अपने शव की जगह बताई और सुबह वही से शव बरामद कर अंतिम संस्कार किया ।

हरभजन सिंह के इस चमत्कार के बाद साथी सैनिकों की उन में आस्था बड़ गई । उन्होंने उनके बंकर को एक मंदिर का रूप दे दिया । जब बाद में उनके चमत्कार बढ़ने लगे और विशाल जनसमूह की आस्था का केंद्र हो गए । तो उनके लिए एक मंदिर का निर्माण किया गया जो है बाबा हरभजन सिंह मंदिर । 

Baba Harbhajan singh Real Story and History in Hindi - बाबा हरभजन सिंह 

यह मंदिर 13000 फुट की ऊँचाई पर है । बंकर वाला मंदिर इस मंदिर से 1000 फिट ज्यादा ऊंचाई पर स्थित है । मंदिर के अंदर बाबा हरभजन सिंह की एक फोटो और उनका सामान रखा है । बाबा हरभजन सिंह अपनी मृत्यु के बाद से ही लगातार ड्यूटी दे रहे हैं इनके लिए बकायदा तन्खाह भी दी जाती है । उनकी भारतीय सेना में बकायदा एक रैंक है जिस को नियमानुसार उनका प्रमोशन भी किया जाता है ।

यहां तक कि उन्हें कुछ साल पहले तक 2 महीने की छुट्टी पर गांव भी भेजा जाता था । इसके लिए ट्रेन में सीट रिजर्व की जाती थी । 3 सैनिकों के साथ उनका सारा सामान उनके गांव भेजा जाता था तथा 2 महीने पूरे होने पर वापस सिक्कम लाया जाता था ।

जब हरभजन सिंह छुटी पर होते थे तो सारा बॉर्डर हाई अलर्ट पर रहता था । क्योंकि उस वक्त सैनिकों को बाबा की मदद नहीं मिल पाती थी लेकिन बाबा का सिक्किम से जाना और वापस आना एक धार्मिक आयोजन का रूप लेता जा रहा था । 

Baba Harbhajan singh Real Story and History in Hindi - बाबा हरभजन सिंह 

जिसमें की बड़ी संख्या में जनता इकट्ठी होने लगी कुछ लोग इस आयोजन को अंधविश्वास को बढ़ावा देने वाला मानते थे । इसलिए उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया । क्योंकि सेना में किसी भी प्रकार का अंधविश्वास की मनाही है लिहाजा सेना ने बाबा हरभजन को छुट्टी पर भेजना बंद कर दिया । अब बाबा साल के 12 महीने ड्यूटी देते हैं ।

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मंदिर में बाबा का एक कमरा भी है जिस में प्रतिदिन सफाई करके बिस्तर लगाया जाता है बाबा की सेना की वर्दी और जूते रखे जाते हैं । कहते हैं कि रोज उनके कमरे की सफाई करने पर उनके जूतों में कीचड़ और चादर में सरवटे पाई जाती है । बाबा हरभजन सिंह का मंदिर सेनिको और लोगों की आस्था का केंद्र है ।
Baba Harbhajan singh Real Story and History in Hindi - बाबा हरभजन सिंह



इस इलाके में आने वाला हर नया सैनिक सबसे पहले बाबा की धूप लगाने आता है । इस मंदिर को लेकर यहां के लोगों में एक अजीब सी मान्यता यह भी है इस मंदिर में पानी से भर कर पानी की बोतलें रखी जाती हैं कहा जाता है कि उस पानी में चमत्कारिक औषधीय गुण आ जाते हैं । 

इस पानी को पीने से लोगों के रोग मिट जाते हैं । इसलिए इस मंदिर के नाम पर बोतलों का अंबार लगा रहता है । यह पानी 21 दिन के अंदर प्रयोग में लाया जाता है और इस दौरान मांसाहार व शराब करना निषेध होता है ।

दोस्तो यह थी बाबा हरभजन सिंह की रहस्यमयी कहानी । आप को हमारा लेख कैसा लगा हमे कमेंट करके जरूर बताएं ।

Saturday, 29 September 2018

Conman Natwarlaal Biography | History | Real Story in Hindi - ठग नटवरलाल की जीवनी

Conman Natwarlaal Biography | History | Real Story in Hindi - ठग नटवरलाल की जीवनी :  मिथिलेश कुमार श्रीवास्तव एक ऐसा नाम है जिस नाम को सुनकर आपको शायद कोई चेहरा याद नहीं आ रहा होगा लेकिन वहीं अगर नटवरलाल नाम लिया जाए तो आप लगभग मुहावरा बन चुके इस नाम को कभी भूल ही नहीं पाए होंगे । 
Conman Natwarlaal Biography | History | Real Story in Hindi - ठग नटवरलाल की जीवनी

अपनी संगीन और चालाकी भरी ठगी से एक समय काफी मशहूर नटवरलाल को ढूंढने के लिए भारत की पुलिस ने एड़ी से चोटी तक की ताकत लगा दी थी । लेकिन यह ठग जितनी रहस्यमई तरीके से हिरासत में लिया जाता था उतने ही नाटकीय तरीके से फरार भी हो जाया करता और जो सबसे ज्यादा हैरान कर देने वाली बात तो यह है कि यह भारत का एकमात्र ऐसा ठग था जिस ने ठगी के लिए न तो कभी किसी हथ्यार का इस्तेमाल किया और ना ही किसी से पैसे छीने ।




नटवरलाल सिर्फ और सिर्फ अपनी बातों के तीर चलाता और सामने वाला इंसान खुद फंस जाता । तो चलिए दोस्तो आज हम जानते हैं नटवरलाल की कहानी ।

History of Natwarlaal 


तो इस कहानी की शुरुआत होती है 1912 में जब बिहार के एक छोटे से गांव मंगरा में नटवरलाल का जन्म हुआ । बताया जाता है कि नटवरलाल का बचपन से ही पढ़ाई में ज्यादा मन नहीं लगता था लेकिन खेल में वह सब से आगे थे । अपने स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद उस ने  वकालत में डिग्री हासिल की और वकील बन गया ।

 वकालत की पढ़ाई का इस्तेमाल उस ने ठगी के काम के लिए किया और वह अपनी चालसाजी और ठगी को अंजाम देने के लिए नोबेल की कहानियों से आइडिय लिया करता था ।  हर बार नटवरलाल अपने अनोखे अंदाज और अलग-अलग नाम और पहचान के साथ ठगी करता और यही वजह थी के लोग उसे पकड़ने में नाकाम रहते ।

बताया जाता है कि उसके शिकार में ज्यादातर तो मिडल क्लास के सरकारी कर्मचारी होते थे । जा छोटे शहर के पैसे वाले व्यापारी जिनसे नटवरलाल ताजमहल वेचने तक का सौदा कर लेता था और यह तो छोटे शहर के व्यापारियों से तीन बार ताजमहल बेचने में भी सफल हो गया था ।


Conman Natwarlaal Biography | History | Real Story in Hindi - ठग नटवरलाल की जीवनी


 इसके अलावा उसने राष्ट्रपति भवन और संसद भवन को भी नीलाम कर दिया था । कहतें हैं कि नटवरलाल ने अपने जीवन काल में  52 से ज्यादा नामों का इस्तेमाल करके अरबों खरबों रुपए की ठगी को अंजाम दिया । 

यहां तक कि अपनी गजब की कमेंसिंग पावर और खुद पर अटूट विश्वास की वजह उस ने सरकार को यह दावा किया था कि अगर सरकार उसे आगिआ दे तो वो भारत का सारा विदेशी कर्ज़ उतार सकता है ।

आपको यह जानकर हैरानी होगी कि नटवरलाल ने खुद का एक स्कूल सिर्फ इसलिए खोला था ताकि वह बच्चों के घर का फाइनेंसियल कंडीशन जान सके और फिर आमिर घरों से लाखों रुपए ठग कर फरार हो गया था ।

इसके अलावा नटवरलाल शॉर्ट सिगनेचर करने में भी बहुत ही माहिर था वह अपने टैलेंट की वजह से देश के नामी व्यापारियों को अपना निशाना बनाते जिस में  टाटा, बिरला, धीरूभाई अंबानी को भी अपना निशाना बना चुका था और उसने बहुत सारे लोगो को जाली चेक और ड्राफ्ट दे कर लाखों की ठग्गी कर गया था ।
Conman Natwarlaal Biography | History | Real Story in Hindi - ठग नटवरलाल की जीवनी
नटवरलाल दुवारा दिया गया एक चेक 



नटवरलाल100 से भी ज्यादा मामलों में दोषी पाया गया था । जिसकी वजह से 8 राज्यों की पुलिस उसे पूरी शिद्दत के साथ ढूंढ रही थी । नटवरलाल को उसके ठगी के लिए 113 साल की सजा सुनाई गई लेकिन उस ने सिर्फ 20 साल ही जेल की हवा खाई ।

Conman Natwarlaal Biography | History | Real Story in Hindi - ठग नटवरलाल की जीवनी

वह 9 बार गिरफ्तार किया गया था लेकिन कैसे भी करके हर बार नए नए तरीके से वह फरार हो जाता और उसके फरार हो जाने की वजह से कई सारे सिपाही और थानेदार भी निलंबित किए गए थे । आखिरी वार वह 1996 में ग्रिफ्तार किया गया था । उस वक़्त उस की उम्र 84 साल थी लेकिन इस उम्र में भी वोह पुलिस की गरिफ्त से भागने में सफल रहा ।

नटवरलाल ने अपने किसी भी काम को लेकर कभी शर्मिंदगी महसूस नही की । वह कहता था कि वो लोगो से कभी हथ्यार दखा कर पैसे नही लेता । उस का कहना था कि " मैं लूट कर गरीबों को देता हूं और मैंने कभी भी किसी हथियार का इस्तेमाल भी नहीं किया है ।

Conman Natwarlaal Biography | History | Real Story in Hindi - ठग नटवरलाल की जीवनी


 लोगों से बहाने बनाकर पैसे मांगे और लोग हाथ जोड़कर पैसे देते गए" और ऐसे अपराधों को अंजाम देने के बावजूद नटवरलाल के फैन्स की कमी नहीं थी ।
Conman Natwarlaal Biography | History | Real Story in Hindi - ठग नटवरलाल की जीवनी
नटवरलाल हिरासत के वक़्त 



यहां तक कि बिहार में उसके गांव के लोगों की मांग थी के नटवरलाल नाम का एक समार्ग बनना चाहिए ।  लोगों का मानना था कि भला आदमी था वह गरीबो की मदद करता था । नटवरलाल की मृत्यु को लेकर अभी भी असमंजस है।
  नटवरलाल के भाई गंगा प्रसाद श्रीवास्तव का कहना है कि 1996 में उन्होंने नटवरलाल का अंतिम संस्कार कर दिया था लेकिन उनके वकील बताते हैं कि 25 जुलाई 2009 को उनकी मृत्यु हुई और इसीलिए उन्होंने 2009 में ही कोर्ट में अनुरोध किया कि नटवरलाल के खिलाफ लगे  सभी अपराधों को खत्म कर देना चाहिए ।

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Wednesday, 19 September 2018

Lakha Sidhana history, biography in hindi (लक्खा सिधाना )

Lakha Sidhana history, biography in hindi (लक्खा सिधाना ) एक साधारण किसान का बेटा जिसका सपना आर्मी में भर्ती होने का था अपने घर की  कुल  10 किल्ले  जमीन होने के कारण  लक्खा  घर  से एक  मध्यवर्गीय परिवार से  तलूक रखता था । लक्खा के घरवाले यह चाहते थे थे कि उनका बेटा बड़ा होकर किसी नौकरी पर लग जाए लेकिन लखा ने कोई और ही रास्ता चुन लिया । आज हम बात करने जा रहे हैं किसी टाइम जुर्म के बेताज बादशाह रह चुके लखविंदर सिंह सरां उर्फ लखा सिधाना की । एक झूठी शोहरत और दुनिया में अपना नाम बनाने के लिए लखविंदर सिंह कब इस जुर्म की दुनिया में प्रवेश कर गया और लखविंदर सिंह से गैंगस्टर लखा सिधाना बन गया इसका खुद लक्खा को भी नहीं पता । 
Lakha Sidhana history, biography in hindi (लक्खा सिधाना )

Lakha Sidhana history, biography in hindi (लक्खा सिधाना )


साल 2004 में पहली बार किसी छोटी सी झड़प को लेकर जेल जाने वाला लक्खा जुर्म की दुनिया में इस कदर घुस गया के 2004 से लेकर 2016 तक कोई भी साल ऐसा नहीं रहा जब लक्खा सिधाना जेल में ना गया हो । लक्खा के ऊपर करीब 50 से ज्यादा मुकदमे चले हैं । जिसमें कत्ल , डकैती, इरादा कत्ल जैसे संगीन आरोप रहे हैं। आज आलम यह है कि गैंगस्टर लखा सिधाना जुर्म की दुनिया से निकलकर एक अच्छा इंसान बनना चाहता है अगर आज लक्खा सिधाना की बात करें तो वह समाज सेवी के रूप में जाना जाता है कैसे एक गैंगस्टर समाज सेवी बना आज हम इस कहानी को शुरू से जानेंगे ।

History Of Lakha Sidhana


लक्खा सिधाना का जन्म 16 जनवरी 19 85 को पंजाब के बठिंडा शहर के कस्बा रामपुरा फूल में पढ़ने वाले गांव सिधाना में हुआ । लक्खा सिधाना बचपन में ही पढ़ाई में बहुत होशियार थे उन्होंने अपनी स्कूल की की पढ़ाई अपने गांव से की जिसके बाद वह रामपुरा फूल में मालवा कॉलेज में अपनी ग्रेजुएशन के लिए चले गए । मालवा कॉलेज से पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने DAV कॉलेज बठिंडा एडमिशन ले लिया और अपनी डबल M.A. पूरी की ।

जुर्म की दुनिया मे कदम


लक्खा सिधाना जब कॉलेज में पढ़ता था तो उसे भी यह लगने लगा कि उसका भी पूरे एरिया में नाम हो  उसे भी लोग जाने । इसी वजह से लक्खा जुर्म की दुनिया में आ गया साल 2004 में किसी झड़प को लेकर लेकर पहली बार जेल गया जिसके बाद यह सिलसिला आगे चलता रहा । झड़प के बाद कत्ल,  इरादा कत्ल , डकैती,  मारपीट जैसे कई संगीन आरोप के चलते लक्खा लगभग हर साल एक बार जेल में गया ।

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लक्खा ने अपनी एक इंटरव्यू में बताया कि उससे कुछ लोकल नेता यह सब काम करवाते थे । किसी को मारना पीटना पोलिंग बूथों पर कब्जा करना और किसी केस में उनसे गवाही दबाकर किसी दूसरे आदमी को उन के झूठे केस में फंसा देना ऐसे काम लक्खा सिधाना और उनके दोस्तों से करवाए जाते थे । लक्खा के कहने के मुताबिक 2008 में उन्होंने कई पोलिंग बूथों पर कब्जे किए,  साल 2006 में लक्खा के ऊपर कत्ल का इल्जाम लगेऔर इसी तरह के कई और संगीन आरोपों के चलते लक्खा लगभग 30 से 40 बार जेल गया ।

जुर्म की दुनिया से वापस आना


वोह कहते हैं ना कि जिंदगी की कीमत उसे ही पता चलती है जिसने मौत को करीब से देखा हो । ऐसा ही कुछ हुआ लक्खा सिधाना के साथ लखा के ऊपर दो बार  हमला हुआ पहली बार लक्खा के दो गोरिया सिर पर लगी लेकिन वह बच गया । दूसरी बार लक्खा की 5 गोलियां पेट में लगी लेकिन किस्मत अच्छी होने की वजह से लक्खा इस बार भी बच गया । लेकिन इस बार यह गोलियां लक्खा को उसकी जिंदगी की कीमत का एहसास करा गई ।



दूसरा लक्खा के कहने के मुताबिक कि वह जब भी जेल जाता था तो जेल में वह कुछ किताबें पढ़ा करता था जिसमें कुछ मार्क्सवाद की किताबें, लेनिन ,भगत सिंह की जीवनी और ऐसे ही कुछ और देश भक्तों की जिंदगी के बारे में उसने कई साल पड़ा । जिससे उसके मन में में अपने देश के लिए कुछ अच्छा काम करने की प्रेरणा जागी जिसके बाद लक्खा ने जुर्म की दुनिया से बाहर आकर कुछ अच्छा काम करने का सोचा ।

लक्खा के कहने के मुताबिक एक बार कचहरी में  किसी झगड़े के चलते लक्खा से एक व्यक्ति का कत्ल हो गया जिसके बाद लक्खा को कुछ साल जेल भी जाना पड़ा। लेकिन लक्खा के कहने के मुताबिक यह काम उसकी जिंदगी का सबसे बुरा काम था जिसका उसे आज भी पछतावा है । लक्खा कहता है के मुताबिक जिस व्यक्ति का उस ने कत्ल कीया था उसके मरने के बाद जो हालत उसके परिवार की हुई उसे देखकर लक्खा को अपने आप से नफरत होने लगी। जिसके बाद लक्खा ने ऐसे कामों को छोड़कर एक अच्छा इंसान बनने की सोची ।

लक्खा सिधाना के कुल 44 साथी इन्ही गैंगवॉर में मारे गए । जिस में से कुछ को पुलिस ने  इनकाउंटर में मार दिया और कुछ को दूसरे गैंग ने अपनी रंजिस के चलते मार दिया । लक्खा को भी 2 वार मारने को कोशिश की गई लेकिन वोह बच गया ।

राजनीति में आना


बठिंडा के ही कुछ राजनेताओं से बहस के बाद लक्खा ने उनको हराने के लिए राजनीति में आने का फैसला लिया लेकिन एक गैंगस्टर को कोई भी पार्टी टिकट देने के लिए तैयार नही थी । जिस के लिए लक्खा ने 17 सितम्बर 2012 को रामपुर फूल में एक बहुत बड़ी रैली की । रैली में इकठ को देख कर PPP पंजाब पीपल पार्टी ने लक्खा को MLA की टिकट दी । लक्खा इस चुनाव में जीत नही स्का । लक्खा को इस चुनाव में 10000 से ऊपर वोट हासिल हुई ।


Lakha Sidhana history, biography in hindi (लक्खा सिधाना )




आज लक्खा सिधाना अपने आप को एक समाज सेवी के रूप में देखता है । हालहि में उनोह ने पंजाबी गानो में गैंगस्टर और नशा को प्रमोट करने के विरोध में काफी चर्चा में रहा । इस के इलावा पंजाब में नेशनल हाईवे पर पंजाबी भाषा को सब से ऊपर लिखने के लिए वहाँ पर लगे सिग्न बोर्डो पर काली स्याही पोछ दी थी । जिस के लिए लक्खा को जेल बी जाना पड़ा था । इस के इलावा वह गांव गांव में जा कर नशे के विरोध में भाषण देते हैं ।

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Monday, 17 September 2018

Real Story and History Thugs of Hindostan in hindi

Real Story and History Thugs of Hindostan in hindi : ठग एक ऐसा शब्द है जिसे इतिहास के पन्नों में लिखा तो गया लेकिन इसे सिर्फ और सिर्फ इतिहास बना कर भुलाया नहीं जा सका बल्कि समय-समय पर इस की बहुत सारी चर्चाएं भी होती रही और इन मे से ही एक चर्चित कहानी पर व्यस्त है आमिर खान की आने वाली फिल्म ठग्स ऑफ हिंदुस्तान । यह फिल्म असल मे  1839 में Philip Meadows Taylor के द्वारा लिखी गई  नवल Confession of a Thug पर आधारित है
Real Story and History Thugs of Hindostan in hindi


। जहां भारत और ब्रिटेन के कलचर की स्टोरी को बताया गया है और दोस्तों यह नॉवल पब्लिश होने के बाद से इतनी ज्यादा पॉपुलर हुई के इससे 19वीं शताब्दी क्या बेस्ट सेलिंग बुक का टाइटल दिया गया और रानी विक्टोरिया भी इस बुक की रीडर बनी ।

ठग कौन थे और क्या करते थे ? 


दरअसल ठग शब्द एक समय पर प्रोफेशनल चोरों और हत्यारों के लिए यूज किया जाता था जो कि पूरे भारत में कई सालों तक एक जगह से दूसरे जगह घूम घूम कर चोरी करते थे और खास करके वह अंग्रेजों और व्यापारियों को अपना निशाना बनाते थे और कहा जाता है कि जब अंग्रेजों से हमारे देश के राजा महाराजा भी हार मान चुके थे । तो इन्ही ठगों ने अंग्रेजों के नाक में दम कर रखा था । इन का मर्डर करने का तरीका भी बहुत ही अजीब था ।


Real Story and History Thugs of Hindostan in hindi


मर्डर करने के लिए यह एक रुमाल का इस्तेमाल करते थे जिसके दोनों सिरों पर एक एक सिक्का बन्ध रहता था और इसी रुमाल से वह  मुसाफिरों को मौत की नींद सुला देता थे ।
पहले तो यह ठग मुसाफिरों का विश्वास जीतते थे और फिर उसे यह पता लगा लेते थे कि उनके पास कितना पैसा और कितना कीमती सामान है और सही समय का इंतजार करते थे । जिस के बाद से वोह उन की हत्या करके उनका सारा पैसा और सामान लूट लिया करते थे और फिर लूट और हत्या के बाद इन लाशों को दफना दिया जाता था और इस तरह से कोई भी सुराग जमीन के अंदर ही दफन हो जाता औरअंग्रेजी हुकूमतों को यह भी नहीं पता चल पाता था कि आखिरकार उनके व्यापारी गायब कहां हो गए ।

ठगों से कैसे छुटकारा पाया गया ?


इन खतरनाक ठगों से बचने के लिए एक वार तो ईस्ट इंडिया कम्पनी ने यह फरमान जारी कर दिया था कि कोई भी व्यपारी एकेला किसी सफर पर नही निकलेगा।
अगर कोई जाएगा भी तो सिर्फ गरूपों में ।
इस के बावजूद भी ठगों ने हार नहीं मानी और अब तो यह पूरे ग्रुप को ही गायब कर दिया करते थे
जब अंग्रेजों ने अपने सभी हथकंडे अपना लिए तो ठगों का पता लगाने के लिए अंग्रेजो ने Wiliam Henery Sleeman को भारत बुलाया । जो के अपनी बहादरी और चालाकी के लिए जाने जाते थे । साथ ही वह  हिंदी उर्दू और अलग-अलग कई तरह की भाषाओं की नॉलेज भी रखता था । जिसकी वजह से कोई भी अपराधी उन  से बचके नहीं निकल पाता था । विलियम को अपने शुरुआती जांच में ही यह पता चला कि लोगों के गायब होने के पीछे ठगों का पूरा गिरोह काम कर रहा है ।


बहराम ठगों का नेता : 


दोस्तों अभी तक जो ठगी होती आ रही थी उन सब ठगों का मेन लीडर ठग बहराम । जिसे कि उस टाइम के लोग Kings of thugs के नाम से भी जानते थे । बहराम ठग उस समय नार्थ इंडिया की औंध स्टेट में एक्टिव रहता था। उसके बारे में बताया जाता है कि उसने अकेले ही 1000 से ऊपर मर्डर किए थे और इसीलिए आज भी बहराम को दुनिया की सीरियल किलर में से एक माना जाता है।



Thug behram

लेकिन वोह कहते हैं कि बुराई का अंत तो बुरा ही होता है भले ही यह ठग खास करके अंग्रेजों को अपना शिकार बनाते थे जिन्होंने हमारे भारत पर कई सालों तक राज किया और हमें गुलाम बनाकर रखा लेकिन एक सही सोच रखने वालों के लिए यह हमेशा ही गलत था ।


Real Story and History Thugs of Hindostan in hindi


आखिर में विलियम अपने सिपाहियो के साथ मिल कर ठग बहराम को पकड़ लिया और 1845 को ठग बहराम को बीच सड़क पर फांसी पर लटका दिया गया। उस की मौत के बाद यह गिरोह थोड़े ही समय मे खत्म हो गया। कहा जाता है कि अमीर खान की आने वाली फिल्म Thugs Of Hindosatan इसी कहानी पर आधारित है । आप को हमारा लेख कैसा लगा हमे कमेंट करके जरूर बताएं ।

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Thursday, 13 September 2018

3 Most Scary Places in india (भारत की 3 सब से डरावनी जगह)

3 Most Scary Places in india (भारत की 3 सब से डरावनी जगह)  मैं आज आपको इस लेख में भारत की तीन ऐसी रहस्यमई जगहों के बारे में बताऊंगा जिन की कहानियां काफी डरावनी और दिल दहला देने वाली है । दोस्तो वैसे तो धरती रहस और रहस्यमय चीज़ों से भरी पड़ी है । जिस के बारे में अबतक विज्ञानक भी नही जान पाए हैं ।

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भानगढ़ का किला : 

अजबगढ़ अलवर राजस्थान भानगढ़ का किला हमारे देश की सबसे डरावनी जगहों में से एक है । कहा जाता है कि यहां एक जादूगर जिसको काले जादू का गूढ़ ज्ञान था इस गांव की राजकुमारी से प्यार कर बैठा । राजकुमारी के कई बार मना करने के बावजूद जादूगर माना नहीं और उसने राजकुमारी को धमकी दी कि अगर तुम मेरी ना हुई तो मैं इस जगह को शर्फित कर दूंगा । राजकुमारी ने चालाकी से एक बार जादूगर को मरवा दिया पर मरने से पहले यह जादूगर इस जगह को शर्फित कर गिया था । इसके बाद से ही इस किले के द्वार सूर्यास्त होने से पहले ही बंद हो जाते हैं और किसी को अंदर आने की अनुमति नहीं होती । यहां कई ऐसे कई नोजवान सामने आए जी हिम्मत करके शाम को अंदर गए तो सही अभी लौटे नहीं ।

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कुलधारा गांव : 

 राजस्थान में एक कुलधारा गांव है और यहां 200 सालों से कोई नहीं रहता इस गांव को किसी और ने नहीं बल्कि इस गांव के लोगों ने शर्फित किया था । जो यहां पिछले 60 सालों से रह रहे थे । यह कहानी है 1825 कि यहां के राजा को इस गांव की एक लड़की से प्यार हो गया था । उसने उस लड़की से शादी करनी चाही और उसके गांव वाले नहीं माने । उस राजा ने गांव को धमकी दी कि अगर यह लड़की मेरी नहीं हुई तो मैं सब को सजा दूंगा और किसी को भी शांति से नहीं रहने दूंगा । उस गांव संबंधित आसपास के 83 गांव के लोगों ने इस जगह को छोड़ने का फैसला किया और उसी रात कई लाख लोग वहां से चले गए । कोई नहीं जानता कि लाखों लोग उस रात कहां गए और कैसे गए बल्कि ना ही किसी और इंसान ने उन्हें वहां से जाते हुए देखा । सारा गांव रातों रात खाली हो गया और अब 200 सालों के बाद यह इलाका दूर-दूर तक सुनसान है ।

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निधिवन वृंदावन :

इस को हम चमत्कार कह सकते हैं निधिवन में एक मंदिर है जिसको चारो ओर दूर दूर तक एक जैसे पेड़ो ने घेरा हुआ है । इस जगह पर सूर्यास्त के बाद कोई नहीं जा सकता शाम की आरती के बाद माना जाता है कि हर रोज कृष्ण भगवान आते हैं और रासलीला मनाते हैं । इस समय पर इस इलाके में कोई पशु-पक्षी भी नहीं होता सुबह के समय कई बंदर होते हैं शाम तक सब खाली हो जाता है । कहा जाता है अगर कोई इंसान इस जगह पर सूर्यास्त के बाद जाए तो वह इंसान अंधा बहरा और गूंगा हो जाता है । ऐसा इसलिए ताकि वह कृष्ण की रासलीला के बारे में किसी और को ना बता सके ।

3 Most Scary Places in india (भारत की 3 सब से डरावनी जगह)


दोस्तो यह सब एक रहस्यमयी स्थान हैं । हम ने जो भी आपको लेख में बताया इस के कोई पुख्ता सबूत तो नही हैं लेकिन वहां रहने वाले लोगो ने इन सब के पीछे यही कारण बताया है।